Author: AVS POST Bureau

  • सामाजिक सरोकारों से प्रेरित जाति जनगणना की मांग, राजनीतिक नहीं: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

    सामाजिक सरोकारों से प्रेरित जाति जनगणना की मांग, राजनीतिक नहीं: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

    हाल ही में संसद में केंद्र के एक बयान से जाति जनगणना की नई मांग शुरू हो गई है कि केवल एससी और एसटी की आबादी का पता लगाने की कवायद विचाराधीन है।

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि जाति आधारित जनगणना के लिए उनकी मजबूत पिच राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से प्रेरित है। यहां अपने साप्ताहिक जनसंपर्क कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात करते हुए कुमार, जो जनता दल (यूनाइटेड) के वास्तविक नेता हैं, ने यह भी खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलने का समय मांगने वाला उनका पत्र पिछले सप्ताह भेजा गया था और एक उसी के जवाब का इंतजार था।

    मुझे पता चला है कि मेरा पत्र 4 अगस्त को प्रधान मंत्री कार्यालय पहुंचा था। मैं प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा हूं, कुमार ने कहा। उन्होंने इस सुझाव पर सहमति व्यक्त की थी कि उन्हें राज्य के सभी दलों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मोदी से मिलना चाहिए।

    यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह एक सामाजिक मुद्दा है। एक कारण है कि मांग (जाति जनगणना के लिए) कई राज्यों में गूंज रही है। एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए हम सहमत होने का कारण यह है कि बिहार में इस मुद्दे पर एकमत है। उन्होंने कहा कि इस आशय के प्रस्ताव विधायिका में सर्वसम्मति से दो बार पारित किए जा चुके हैं। हाल ही में संसद में केंद्र के एक बयान से जाति जनगणना की नई मांग शुरू हो गई है कि केवल एससी और एसटी की आबादी का पता लगाने की कवायद विचाराधीन है।

    इससे बिहार की राजनीति में एक मंथन हुआ है, जहां कुमार और उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद सहित अधिकांश प्रमुख राजनीतिक नेता संख्यात्मक रूप से शक्तिशाली ओबीसी से संबंधित हैं। प्रसाद की राजद, अनुमानित रूप से, कुमार के रूप में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की गणना करने के पक्ष में है। भाजपा, जिसने पूर्व में राज्य स्तर पर इस मांग का समर्थन किया था, अब अपने शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपनाए गए एक अलग रुख को देखते हुए समान प्रतीत होती है। कुमार ने फिर भी जोर देकर कहा, हमें केंद्र के सामने यह बताना चाहिए कि हम इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं और क्या महसूस करते हैं। यह केंद्र को तय करना है कि वह हमारी दलील को स्वीकार करे या नहीं। पिछली बार 1931 में एक जाति जनगणना हुई थी। एक नई कवायद से वंचित वर्गों को अधिक प्रभावी तरीके से सुशासन के फल लाने में मदद मिलेगी।

    यह देखते हुए कि मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुसार ओबीसी के लिए आरक्षण का कार्यान्वयन इसके निहितार्थों में गहरा रहा है, कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं के लिए कोटा के माध्यम से लैंगिक असमानता को कम करने के प्रयासों के साथ इसका पालन करने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि कोई विकल्प नहीं बचा है, तो उनकी सरकार जातियों का एक राज्य-विशिष्ट सर्वेक्षण करने पर विचार कर सकती है, हालांकि जनगणना, जिसकी शर्तें केवल केंद्र द्वारा तय की जा सकती हैं, सबसे बेहतर विकल्प होगा।

  • वोट सभी को चाहिए लेकिन जनता के सवालों का जवाब कोई नहीं देना चाहता!

    वोट सभी को चाहिए लेकिन जनता के सवालों का जवाब कोई नहीं देना चाहता!

    आज के दौर में देश के वर्तमान हालात पर जरुर चर्चा होनी चाहिए। महंगाई, बेरोजगारी, कोरोना से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा किए जाने की जरुरत है। न्यूज चैनल, अखबार और पत्रिकाओं के माध्यम से जनता को सजग और आगाह भी करने की जिम्मेदारी हमीं लोगों पर है। केंद्र और राज्य सरकारें जनता के प्रति जिम्मेदारी कितनी निभानें कामयाब हुई हैं और शपथ लेने वाले उच्च पदों पर असीन जैसे- प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों समेत सभी जन प्रतिनिधि ने जनहित में क्या कार्य किए इस पर पब्लिक बहस होनी चाहिए।

    इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस सिलेंडर और खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से जनता को कितना परेशानी हो रही है। इस पर भी बहस होनी चाहिए। इनके दाम क्यों बढ़े और जनता से इससे राहत क्यों नहीं मिल रही है इसका जवाब केंद्र और राज्य सरकारों को देना चाहिए। जो जनता हर चीज खरीदने पर सरकारों को टैक्स दे रही है उसका उपयोग कितना सार्थक तरीके से किया जा रहा है यह सभी जो जानने का हक है।

    अब बात करते हैं नेताओं और उनके द्वारा किए गए वादों पर। महंगाई, भ्रष्टाचार और लोकलुभावने वादे कर सत्ता में आने वाले नेताओं को यह बताना चाहिए कि पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने के पीछे की वजह क्या है। जब वह विपक्ष में थे तो सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने उतरते थे अब क्यों वह बोल नहीं रहे हैं। मैं ऐसे कई नेताओं को जानता हूं जिनकी पार्टी सत्ता में आ गई है और वे मंत्री या संगठन में बड़े पद हैं लेकिन मौन हैं। क्या यह जनता के साथ धोखा नही है। उदाहरण के लिए अगर किसी विधायक या सांसद को बोला जाए कि उन्हें सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। सरकार बनने के बाद मंत्री तो दूर उन्हें उनके हक से भी वंचित किया जाए तो कैसा लगेगा। अब बात करते हैं विपक्ष की। जब वे सरकार में थे तो महंगाई पर कुछ नहीं बोलते थे अब वे सड़कों पर हैं। उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए पहले वे चुप क्यों थे और अब उन्हें जनता की फिक्र क्यों हैं। कहीं वह राजनीतिक रोटी तो नहीं सेंक रहे या फिर जले पर नमक तो नहीं छिड़क रहे। वोट तो दिए अब भुगतो..।

    अब बात करते हैं कोरोना के टीकाकरण की। अस्पतालों, सार्वजनिक जगहों और मीडिया संस्थानों को दिए गए विज्ञापन में मुफ्त टीकाकरण का जोरशोर से प्रचार किया जा रहा है। बहुत से लोगों की शिकायत है कि उन्हें टीके के लिए स्लाट नही मिल रहा है। अस्पताल जाने पर बोला जाता है कि टीका खत्म है। जब थोड़ा बहुत टीका आ जाता है तो भीड़ इतनी लगती है कि पूछो मत। क्या पोलिया अभियान की तरह कोरोना का टीका भी घर-घर नही लगाया जा सकता। इससे भीड़ से बचाव के साथ ही कोरोना के खतरे को भी कम किया जा सकता है। मेरे कई जानने वालों ने मुझे फोन कर कहा कि टीका लगवा दीजिए। जब हमनें किसी जानने वाले को फोन किया तो पता चलता है एक-दो दिन रुक जाओ अभी टीका खत्म है। लोगों की शिकायत है जितना विज्ञापन पर पैसे खर्च किए जा रहे हैं उतना वैक्सीन पर हो तो लोगों को परेशान न होना पड़े। वैक्सीन वास्तव में उपलब्ध है या नहीं खैर यह तो जांच का विषय है।

    अरोग्य सेतु एप से लोगों को कितना फायदा हुआ यह भी सरकार को बताना चाहिए। अगर यह ऐप कोरोना से बचाव के लिए बनाया गया था तो इतनी भीषण तबाही कैसे हुई। अगर कारगर साबित नहीं हुआ तो क्यों। ताकि कमी को दूर कर भविष्य के लिए तैयारी की जा सके। अक्सर सरकारें चुनाव नजदीक होने पर मेडिकल हॉस्पिटल व प्राथमिक अस्पतालों की घोषणाएं करती रही हैं। सत्ता में आने पर उसका कितना बनवाए और कितना लाभ मिला यह भी जनता को बताना चाहिए। राज्यों में जिसकी भी सरकारें हैं अक्सर मौत के आंकड़े छिपाने का आरोप लगते हैं। इसकी भी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए। संसद में पिछले दिनों कहा गया ऑक्सीजन से कोई मौत नही हुई। जहां तक मुझे पता है जनता चाहे वह किसी भी पार्टी को वोट देती हो यह स्वीकार करने को तैयार नहीं। फिर क्यों जले पर नमक छिड़का जा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शायद ही कोई बचा होगा जो बीच के किसी को न खोया हो। इलाज के अभाव और ऑक्सीजन की कमी से मौत के लिए सभी जिम्मेदार सरकारों को जनता से माफी मांगनी चाहिए। अगर कोई काम ठीक से हो सका तो जनता को उसकी वजह बताकर यह विश्वास दिलाना चाहिए आगे से ऐसा नही होगा।

    अब बात करते हैं सरकार की योजनाओं का लाभ जनता को मिल रहा है या नहीं। आजकल बारिश का मौसम है। जगह-जगह जलभराव की शिकायतें मिल रही हैं। जिस भी क्षेत्र या शहर को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया है वहां भी जलजमाव की शिकायतें है। उच्च पदों पर आसीन लोगों को यह बताना चाहिए कि स्मार्ट सिटी बनाने के दौरान जो वादे किए गए थे वह कहां गए। जब जनता टैक्स दे रही है तो वह समस्याएं क्यों झेले। आखिर टैक्स के पैसे कहां इस्तेमाल हो रहे हैं। रोड खराब, सरकारी अस्पताल और सरकारी स्कूलों की बदतर हालत क्यों है। जब नेता सरकारी आवास, बिजली पानी और तमाम सुविधाएं ले रहे हैं तो सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को क्यों नहीं पढ़ाते। बीमार होने पर सरकारी अस्पतालों में इलाज क्यों नहीं कराते। कुछ जाने-माने सरकारी अस्पतालों को छोड़ दें तो शेष सरकारी अस्पतालों में नेता और उनके परिजन क्यों नहीं जाते। इसका कारण भी जनता को बताना चाहिए या फिर कोई भी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने से इनकार कर देना चाहिए। जनता के टैक्स से करोड़पति नेताओं को कोई भी सुविधा नही मिलनी चाहिए। क्योंकि वह उस योग्य हैं अपने खर्च का वहन स्वंय कर सकते हैं। ऐसा मेरा मत है। पांच साल तक सांसद, विधायक रहने के बाद मिलनी वाली सुविधाएं और पेंशन भी बंद होनी चाहिए। देश के लिए सर्वोच्य बलिदान देने वाला महान है या नेता। सेना में कार्यरत सभी को सब मुफ्त मिलनी चाहिए और सम्मान भी।

    देश में बेरोजगारी दर कितनी बढ़ी इस भी चर्चा होनी चाहिए। महंगाई से परेशान जनता के लिए सरकार क्या कर रही है। यह सभी के समक्ष रखनी चाहिए। सरकारी संस्थानों को प्राइवेट के हाथों में सौंपने के पीछे की वजह भी जनता को बतानी चाहिए। क्या सरकार से ज्यादा योग्य प्राइवेट संस्थान हैं।

    अब बात करते हैं विपक्ष की भूमिका पर। जासूसी कांड को लेकर विपक्ष संसद नही चलने दे रही। अच्छा होता वह पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई को लेकर सदन में सरकार को घेरती और कीमतें कम करने के लिए सरकार पर दबाव बनाती। इससे जनता की सहानभूति भी मिलती और सहयोग भी। जासूसी किसकी हुई और किसकी नहीं हुई इससे विपक्ष शायद इसलिए परेशान है कि क्योंकि वह उससे जुड़ा मुद्दा है। तो क्या जनता के वोट से सांसद बने लोग अपने हित की बात ही सदन में रखेंगे। अगर ऐसा है तो वह शपथ क्यों लेते हैं। जब केद्र सरकार कह रही है जासूसी नहीं हुई तो उसे विपक्ष की मांगे मानने में क्या दिक्कत है। अगर कोई जासूसी नहीं हुई तो केंद्र सरकार को भी जांच करवाकर जनता को बताना चाहिए कौन सच्चा है और कौन झूठा।

    इस खबर के लेखक टीवी पत्रकार मंगल यादव जी हैं जो समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय खुल कर रखते है। 

  • यूपी में ‘चुनावी फिल्म’ चालू है, दावों की ‘बरसात’ के बीच जनता के हाथ कुछ नहीं लगने वाला!

    यूपी में ‘चुनावी फिल्म’ चालू है, दावों की ‘बरसात’ के बीच जनता के हाथ कुछ नहीं लगने वाला!

    उत्तर प्रदेश में 2022 का रण सज चुका है और रणबांकुरे सत्ता फतह करने के लिए अपने-अपने गुणा गणित में लग गए हैं। सत्ता की बारीकी समझने वाले राजनेता कोरोना काल में जनता के दिल में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कहीं ब्राह्राण सम्मेलन किया जा रहा है तो कहीं दलितों और अन्य पिछड़े वर्ग की जातियों पर डोरे जा रहे हैं। जाति-धर्म की राजनीति करने से ऊपर उठकर कार्य करने का दावा करने वाले राजनीतिक दल और नेता फिर से अब इसी में डुबकी लगाने को तैयार हैं। बहाना है अमुक जाति के लोग पिछड़े हैं, फलां जाति-धर्म के लोगों को सत्ता में अभी तक भागीदारी नहीं मिली है। इसे दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है। सत्ता का स्वाद चखने वाले और स्वाद की मजा ले चुके लोग बड़ी ही चतुराई से कोई न कोई ऐसा मुद्दा जरुर छेड़ दे रहे हैं ताकि जनता का ध्यान उसकी दयनीय दशा से भटकाया जा सके।

    प्रदेश में सत्ता पर काबिज भाजपा और मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभा रही समाजवादी पार्टी की तरफ से प्रदेश भर में रोजाना कोई न कोई राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि चुनाव पूर्व माहौल बनाया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां अपने किए गए कार्यों का बखान विज्ञापनों द्वारा कर रहे हैं वहीं, पार्टी के बड़े नेता राजनीतिक दौरा कर रहे हैं। अभी हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी और गृह मंत्री अमित शाह ने मिर्जापुर में विकास कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास किया। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी आगे भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अन्य जिलों का दौरा कर और विकास कार्यों का उद्घाटन करते रहेंगे। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अन्य बड़े नेता भी अब लगभग हर महीने उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। ताकि पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया जा सके।

    वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी चुनाव से पहले पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं। प्रदेश भर में साइकिल रैली के अलावा अन्य राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा सरकार की नाकामियों को जनता को बता रहे हैं। इनमें कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सरकार का कुप्रबंधन, इलाज और ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में हुई मौतें, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ रहे दाम और महंगाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं जो जनता को सीधे तौर पर हिट कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी सरकार के दौरान किए गए विकास कार्यों और योगी सरकार के कार्यों की तुलना कर जनता को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे ही अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता के घावों पर मरहम लगा सकते हैं। अखिलेश यादव का आरोप है कि सीएम योगी सपा सरकार के कार्यों का क्रेडिट योजनाओं का नाम बदलकर ले रही है यहां तक कि उद्घाटन किए गए विकास कार्यों का अपना बता कर फिर से उद्धाटन या तो किए गए या फिर किए जा रहे हैं।

    अब बात करते हैं ब्राह्राण वोट बैंक की। जिस पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी(सपा), कांग्रेस और सतारुढ़ भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की नजर है। हाल-फिलहाल में इस वोट बैंक जोरो से चर्चा है। कथित तौर पर ब्राह्राण मौजूदा भाजपा सरकार से नाराज हैं। इसका फायदा उठाने के लिए बसपा, सपा और कांग्रेस पुरजोर तरीके से कोशिश कर रहे हैं। पहले कांग्रेस की ब्राह्राण वोट बैंक पर मजबूत पकड़ थी जोकि समय के साथ अन्य दलों के साथ बंट गई। ब्राह्राण वोट बैंक के सहारे प्रदेश में सरकार बना चुकीं मायावती दोबारा से उसी फार्मूले पर काम करना शुरू कर चुकी हैं। इसकी जिम्मेदारी उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को सौंपी हैं। सतीश चंद्र मिश्रा प्रदेश के जिलों में ब्राह्राण सम्मेलन कर रहे हैं जिसे बाद में ‘प्रबुद्ध वर्ग विचार संगोष्ठी’ का नाम दिया गया। इन सम्मेलनों में ‘जय भीम-जय भारत’ के अलावा ‘जय श्रीराम’ और ‘जय परशुराम’ के नारे भी लगते हैं। दलित और ब्राह्राण गठजोड़ के जरिए मायावती लंबे समय से सत्ता का सूखा खत्म करना चाह रही हैं।

    सतीश चंद्र मिश्र ब्राह्मण समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए अक्सर कहते हैं कि 13 फीसद ब्राह्मण अगर 23 फीसद वाले दलित समाज के साथ मिलकर बसपा का साथ दें तो मायावती को फिर से मुख्यमंत्री बनने से कोई रोक नही सकता।

    सपा भी ब्राह्राणों पर डाल रही डोरे

    सपा मुखिया अखिलेश यादव भी ब्राह्राणों को रिझाने के लिए पार्टी के ब्राह्राण चेहरों को मिशन पर लगा दिया है। सपा यह बताने में नही चूक रही है कि उनकी सरकार के दौरान ब्राह्राण नेताओं को मंत्री बनाकर किस तरह से सम्मान दिया गया था। बताया जा रहा है कि सपा नेता भगवान परशुराम की 108 फीट मूर्ति बनवा रहे हैं। जिसे लखनऊ में स्थापित किया जाएगा। इसकी पुष्टि सपा नेता और पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा भी कर चुके हैं। इसके अलावा महान क्रांतिकारी रहे मंगल पांडे की भी प्रतिमा प्रत्यके जिलों में लगाए जाने की बात सपा नेता करते रहे हैं।

    प्रियंका गांधी की निगाहें यूपी पर

    कांग्रेस भी ब्राह्राणों को एकजुट करने की कोशिश में है। प्रियंका गांधी भी यूपी मिशन में जुटी हुई हैं। कांग्रेस के कई नेता कह चुके हैं कि अगर पार्टी सत्ता में आयी तो प्रियंका गांधी मुख्यमंत्री बनेंगी। हालांकि कांग्रेस आधिकारिक तौर पर सीएम पद को लेकर कोई एलान नही की है लेकिन यह बताने में भी नही चूकती कि जब पार्टी की सरकार यूपी में थी कई ब्राह्राण नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया था।

    भाजपा भी ब्राह्राणों को लुभाने में जुटी

    वहीं भाजपा भी ब्राह्राणों को लुभाने की कोशिश कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में ब्राह्राण नेताओं के साथ समाज के अन्य वर्गों के नेताओं को जगह देकर भाजपा ने बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। यूपी में पार्टी के ब्राह्राण चेहरों को भी जनता के बीच जाकर सरकार की उपलब्धियों को बताने को कहा गया है।

    ओवैसी भी यूपी में दमखम दिखाने को तैयार

    सपा, बसपा और भाजपा के बाद अगर किसी दल की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही तो वह है ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम)। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी यूपी में सक्रिय हैं। उनकी नजर मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी 13 सीटों पर चौथे नंबर पर रही थी। ओवैसी की पार्टी को चौधरी अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल के बराबर वोट मिले थे। यही वजह है ओवैसी प्रदेश के छोटे-छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। मेरठ, सहारनपुर, आजमगढ़, गाजियाबाद, जौनपुर, अंबेडकरनगर, मऊ, गाजीपुर, संतकबीरनगर, बलिया समेत ऐसे कई अन्य जिले हैं जहां की सीटों पर ओवैसी को संभावना नजर आ रही है। आमतौर पर मुस्लिम वोट बैंक समय-समय पर सपा और बसपा के साथ रहा है। हालांकि सपा के साथ मुस्लिम वोट मजबूत माना जाता है। अगर मुस्लिम वोट बैंक में बंटवारा हुआ तो सपा को नुकसान और भाजपा को फायदा मिल सकता है।

    आम आदमी पार्टी लड़ेगी यूपी विधानसभा चुनाव

    अगले साल फरवरी-मार्च में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारी आम आदमी पार्टी (आप) भी कर रही है। दिल्ली की सत्तारूढ़ अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी यूपी में विधानसभा चुनाव पहली बार लड़ेगी। हालांकि 2014 में आप यूपी में लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है लेकिन कोई सफलता हाथ नही लगी थी। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल खुद वाराणसी लोकसभा सीट से तब के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। साल 2017 में आप चुनाव नहीं लड़ी थी लेकिन भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार जरुर किया था।

    दिल्ली मॉडल की तर्ज पर आप यूपी विधानसभा चुनाव लड़ेगी। आप नेता संजय सिंह को केजरीवाल ने चुनाव जीतने के लिए मिशन पर लगाया है। संजय सिंह समय-समय पर यूपी का दौरा करते रहे हैं। पार्टी को मजबूत करने के लिए संजय सिंह पिछले कई सालों से यूपी में काम कर रहे हैं। केजरीवाल फ्री बिजली-पानी के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का संकेत दे चुके हैं। इसके अलावा सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा आप नेता करते रहे हैं। यूपी में आप का संगठन मजबूत नही है ऐसे में केजरीवाल की पार्टी भाजपा, सपा और बसपा जैसी पार्टियों को कितना टक्कर दे पाती है यह तो समय ही बताएगा।

    इस खबर के लेखक टीवी पत्रकार मंगल यादव जी हैं जो समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय खुल कर रखते है।

  • आजादी के 75 वर्षों में देश के विकास में बैंकों का योगदान और बदलाव

    आजादी के 75 वर्षों में देश के विकास में बैंकों का योगदान और बदलाव

    देश जब आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है इस सफर के विकास में देश के बैंकिंग क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कृषि, उद्योग, सड़क, बिजली, टेलिकॉम, शिक्षा, रियल एस्टेट सभी के विकास के लिय बैंकों ने भरपूर सहयोग किया है। 1947 में जहाँ 664 निजी बैंकों की लगभग 5000 शाखाएं थीं वहीँ आज 12 सरकारी बैंकों, 22 निजी क्षेत्र के बैंकों, 11 स्माल फाइनेंस बैंकों, 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और 46 विदेशी बैंकों की लगभग 1 लाख 42 हजार शाखाएं हैं।

    भारतीय रिज़र्व बैंक

    भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1935 में, RBI अधिनियम 1934 के तहत जॉन हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिशों पर की गई थी, जिसे भारतीय मुद्रा और वित्त पर रॉयल कमीशन भी कहा जाता था, जो देश का केंद्रीय बैंक है और 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकृत किया गया था। रिजर्व बैंक मुख्य रूप से सरकार के व्यावसायिक लेनदेन को सम्पादित करता है, मुद्रा जारी करता है, बैंकिंग का संचालन तथा प्रबंधन पर नियंत्रण करता है, नये बैंकों के लिय लाइसेंस देता है और बैंकों को समय समय पर जरूरत के अनुसार ऋण उपलब्ध करवाता है।

    स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया

    1806 में कोलकाता में बैंक ऑफ कोलकाता की स्थापना हुई जो बाद में बैंक ऑफ बंगाल के नाम से जाना गया। 1921 में बैंक ऑफ मुंबई और बैंक ऑफ मद्रास का बैंक ऑफ बंगाल में विलय हो गया। जो मिलकर इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया बना। 1 जुलाई 1955 को इम्पीरियल बैंक (Imperial Bank) का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) रख दिया गया था। साल 1955 में ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (सब्सिडरी एक्ट) पारित हुआ। अक्टूबर में स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद SBI का पहला सहयोगी बैंक बना। इन सहयोगी बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एण्ड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर। नरसिंहम् समिति की सिफारशों पर कार्यवाही करते हुए केन्द्र सरकार ने सबसे पहले 2008 में स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र, 2010 में स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर और 2017 में बाकी पांच एसोसिएट बैंकों स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एण्ड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया में विलय कर दिया । अपने स्थापना काल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कुल 480 ऑफिस थे जबकि आज 24000 से ज्यादा शाखाओं के साथ स्टेट बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है।

    बैंकों का राष्ट्रीयकरण

    19 जुलाई 1969 को देश के 14 प्रमुख बैंकों का पहली बार राष्ट्रीयकरण किया गया था और वर्ष 1980 में पुनः 6 बैंक राष्ट्रीयकृत हुए थे। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की शाखाओं में बढ़ोतरी हुई। शहर से उठकर बैंक गांव-देहात की तरफ चल दिए। आंकड़ों के मुताबिक़ जुलाई 1969 को देश में इन बैंकों की सिर्फ 8322 शाखाएं थीं। 2021 के आते आते यह आंकड़ा लगभग 87 हजार का हो गया। देश के विकास में इन राष्ट्रीयकृत बैंकों की अहम भूमिका रही और इन बैंकों ने कृषि, उद्योग, सड़क, बिजली, टेलिकॉम, शिक्षा, रियल एस्टेट सभी के विकास के लिये बैंकों ने भरपूर सहयोग किया है। डी.आर.आई. जेसे छोटे ऋणों से लेकर बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिय ऋण की व्यवस्था की।

    बैंकों का कंप्यूटराईज़ेशन

    वर्ष 1980 में बेंकिंग में कंप्यूटर की आवश्यकता महसूस हुई और 1988 में रिजर्व बैंक ने डा. रंगराजन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जिसने बैंकों में कंप्यूटर लगाने की सिफारिश की और 1993 में बैंकों में कंप्यूटर लगाने के लिए सहमति बनी और बैंकों में कंप्यूटर लगने शुरू हो गये और समय के साथ साथ उनमे बदलाव होता गया और आज कंप्यूटर के बिना बैंकिंग संभव ही नहीं लगती। हालाँकि कंप्यूटर से बैकिंग तो आसान और 24 घंटे उपलब्ध हो पाई लेकिन इसके कारण बैंकों में रोजगार की संभावनाएं कम हो गईं।

    को-ऑपरेटिव बैंक

    भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारिता का महत्वपूर्ण योगदान है। यही सहकारिता का विकास मुख्य रूप में कृषकों को सस्ती दर से ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुआ है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सहकारिता आन्दोलन अधिक तेजी से विभिन्न दिशाओं में फैला । सरकर द्वार नियुक्त ”अखिल भारतीय ग्राम-ऋण समिति – 1954” एवं ”बैकुण्ठलाल मेहता समिति – 1960” के सुझावों ने सहकारिता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
    पिछले कुछ सालों से भारत में बैंकों की वित्तीय हालत काफी गिर गयी है। कई घोटाले सामने आ चुके हैं जैसे पंजाब और महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक, यस बैंक और शिम्भोली सुगर मिल्स बैंक स्कैम इत्यादि।
    इन्हीं घटनाओं को देखते हुए भारत सरकार ने जून 2020 में अध्यादेश पास किया है कि अब देश के सभी सहकारी या को-ऑपरेटिव बैंकों को रिज़र्व बैंक के दायरे में लाया जाए। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ‘सहकार से समृद्धि’ (सहकारिता के माध्यम से समृद्धि) के दृष्टिकोण को साकार करने और सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा देने के लिये एक अलग ‘सहकारिता मंत्रालय’ बनाया है।
    वर्तमान में देश में 1482 शहरी को-ऑपरेटिव बैंक हैं, जबकि 58 मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक हैं। इन 1540 बैंकों में क़रीब 8.6 करोड़ जमाकर्ताओं के 4 लाख करोड़ 84 लाख रुपए जमा हैं।

    क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

    2 अक्टूबर 1975 को सरकार ने बैंकिंग सुविधाएँ गांव गांव तक पहुँचाने के लियें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना की। देश भर में आज 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक काम कर रहे हैं जिनकी 22000 शाखाएं हैं । ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में इन बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 1947 से लेकर 1955 तक 360 छोटे-मोटे बैंक डूब गए थे जिनमें लोगों का जमा करोड़ों रूपया डूब गया था। 1969 और 1980 में राष्ट्रीयकरण के बाद भी समय समय पर निजी बैंकों की हालत खराब होने पर सरकार द्वारा इन बैंकों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में मिला दिया गया इनमें प्रमुख लक्ष्मी कमर्शियल बैंक, बैंक ऑफ़ पंजाब, हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक, भारत बैंक, नेडूनगड़ी बैंक, न्यू बैंक ऑफ़ इंडिया, ग्लोबल ट्रस्ट बैंक और यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक थे। जबकि बैंक ऑफ़ राजस्थान और सांगली बैंक को आई.सी.आई.सी.आई. बैंक में मिला दिया।
    वर्ष 1991 के आर्थिक संकट के उपरान्त बैंकिंग क्षेत्र के सुधार के दृष्टि से जून 1991 में एम. नरसिंहम् की अध्यक्षता में नरसिंहम् समिति अथवा वित्तीय क्षेत्रीय सुधार समिति की स्थापना की गई, इसने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये व्यापक स्वायत्तता प्रस्तावित की। समिति ने बड़े भारतीय बैंकों के विलय के लिये भी सिफारिश की थी। इसी समिति ने नए निजी बैंकों को खोलने का सुझाव दिया जिसके आधार पर 1993 में सरकार ने इसकी अनुमति प्रदान की।

    न्यू जनरेशन प्राइवेट बैंक

    वर्ष 1994 में नये प्राइवेट बैंकों का युग प्रारम्भ हुआ। आज देश में 8 न्यू प्राइवेट जनरेशन बैंक, 14 ओल्ड जनरेशन प्राइवेट बैंक, 11 स्माल फाइनेंस बैंक काम कर रहे हैं। लेकिन ये सभी निजी बैंक समाज के एक वर्ग विशेष की तरफ ज्यादा ध्यान देते हैं जबकि सरकारी बैंक समाज के सभी वर्गों के लिए काम कर रहे हैं। 2018 में सरकार ने इण्डिया पोस्ट पेमेंट बैंक की स्थापना की जिसका मकसद पोस्ट ऑफिस के नेटवर्क का इस्तेमाल करके बेंकिंग को गाँव गाँव तक पहुंचना था। इसके साथ साथ और कई प्राइवेट पेमेंट बैंकों की भी शुरुआत हुई।

    बैंकों का मर्जर

    वर्ष 2019 में तीन बैंकों, बैंक ऑफ़ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक का विलय तथा 1 अप्रैल 2020 से सिंडीकेट बैंक का केनरा बैंक में, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक में और इलाहाबाद बैंक, कारपोरेशन बैंक और आंध्रा बैंक को इंडियन बैंक में का विलय कर दिया गया। इसके बाद वर्तमान में सरकारी क्षेत्र के 12 बैंक रह गये हैं। इसके अगले चरण में सरकार की कुछ बैंकों को निजीकरण करने की योजना है।

    हालांकि आम जनता के लिये कार, घर या निजी ऋण तथा क्रेडिट कार्ड लेने के लिए निजी बैंकों ने शुरआत की थी लेकिन इन ऋणों को साधारण जनता तक पहुँचाने में सरकारी बैंकों का बहुत बड़ा योगदान हैं। इसी तरह वर्तमान मोदी सरकार की वितीय समावेश के लिए शुरू की गई जनधन योजना को लागू करने में भी प्रमुख रूप से इन सरकारी बैंकों का योगदान रहा है। बैंकों द्वारा 42 करोड़ से ज्यादा खाते खोले गये जिसमें आज लगभग एक लाख चालीस हजार करोड़ रूपये जमा हैं। इसी प्रकार सरकार की विभिन योजनाओं अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, सुकन्या आदि को भी जन जन तक पहुँचाने में बैंकिंग क्षेत्र का बहुत बड़ा योगदान है जिसमें सरकारी बैंकों का प्रमुख योगदान है।

    नोट : यह पोस्ट अश्वनी राणा जी द्वारा लिखी गई है अश्वनी राणा जी (वॉयस ऑफ बैंकिंग) के संस्थापक है।

  • Happy Independence Day Wishes Quotes For 15 August 2021

    Happy Independence Day Wishes Quotes For 15 August 2021

    5b858096f79c76795504405aa9ff0842
    previous arrow
    next arrow
    5b858096f79c76795504405aa9ff0842
    15-1-1
    18-1
    Happy-Independence-Day-India
    happy-independence-day-quotes-images
    images
    independence-parenting-quote-03
    sms-296
    previous arrow
    next arrow

    Happy Independence Day Wishes Quotes

    आजाद भारत, ये सुनकर हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है क्योंकि आजादी का मतलब हम भारतीयों से अच्छा शायद ही कोई और समझ पाए। कई सालों तक अंग्रेजों का गुलाम रहने के बाद भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी और इस आजादी को पाने के लिए कई वीर सपूतों ने अपनी जान की बाजी लगाई थी। आज भले ही हम आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन उस दौर को शायद ही कोई भारतीय कभी भुला पाए। हर साल 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश के प्रधानमंत्री देश के नाम संदेश देते हैं और ये तस्वीरें इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं।

    चलो फिर से वो नजारा याद कर लें
    शहीदो के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर लें
    जिसमें बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पर
    बलिदानियों के खून की वो धारा याद कर लें।

    Happy Independence Day 2021

    फांसी चढ़ गए और सीने पर गोली खाई
    हम उन शहीदों को प्रमाण करते हैं
    जो मिट गए देश पर
    हम उनको सलाम करते हैं।

    Happy Independence Day 2021

    आजादी की कभी शाम ना होने देंगे
    शहीदों की कुर्बानी बदनाम ना होने देंगे
    बची है लहू की एक बूंद भी रगों में
    तब तक भारत माता का आंचल नीलाम ना होने देंगे

    Happy Independence Day 2021

    दे सलामी इस तिरंगे को
    जिस से तेरी शान हैं
    सर हमेशा ऊँचा रखना इसका
    जब तक दिल में जान हैं।

    Happy Independence Day 2021

    कुछ नशा तिरंगे की आन का है
    कुछ नशा मातृभूमि की शान का है
    हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा
    नशा ये हिन्दुस्तान का है।

    Happy Independence Day 2021

     

     

  • अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का ग्राहक सेवा केन्द्र का उद्घाटन रविवार को होगा

    अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का ग्राहक सेवा केन्द्र का उद्घाटन रविवार को होगा

    पटना। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के दक्षिण बिहार प्रांत का ग्राहक सेवा केंद्र का उद्घाटन रविवार को 11 बजे किया जाएगा। इस अवसर पर दक्षिण बिहार प्रांत के प्रांत सचिव प्रोफेसर अरुण सिन्हा जी, पंचायत के उपाध्यक्ष CA सतीश कुमार जी समेत अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहेंगे।

    ग्राहक सेवा केंद के बारे में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रवक्ता रवि आनंद ने बताया कि कोरोना काल में जहां लोग स्वास्थ्य की समस्या के साथ जूझ रहे थे, तब कुछ मुनाफाखोरों ने ग्राहकों के अधिकारों को वंचित कर उनका शोषण किया। अस्पताल, बैंक, मोबाइल कंपनियों के अलावा दवा विक्रेताओं के साथ गल्ला, ज्वेलरी व्यापारियों को होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए यह केंद शुरू किया जा रहा है। यहाँ ग्राहकों की समस्या के समाधान के लिए हरसम्भव प्रयास के साथ श्री नागेंद्र कुमार जी से कानूनी मदद भी ले सकेंगे।

  • राशिफल 1 अगस्त: जानिए रविवार के दिन क्या रहेगी आपके ग्रहों की दशा, बता रहे है कालज्ञ ज्योतिर्विद पं. संजय शर्मा जी।

    राशिफल 1 अगस्त: जानिए रविवार के दिन क्या रहेगी आपके ग्रहों की दशा, बता रहे है कालज्ञ ज्योतिर्विद पं. संजय शर्मा जी।

    राशिफल: रविवार दिनांक 1 अगस्त 2021.

    ज्योर्तिविद कालज्ञ पं. संजय शर्मा
    9893129882 , 9424828545 (Paytm , PhonePe, GPay)
    ज्योतिष लेखक, ज्योतिष एवं वास्तु परामर्ष , रत्न विशेषज्ञ , प्रेरक (मोटीवेटर)
    कलर थेरेपिस्ट एवं औरा रीडर

    11, न्यू एम.आई.जी. मुखर्जी नगर
    एम.आर. 8, टेलीफोन ऑफिस के सामने
    देवास म.प्र. 455001

    (Aura Reading by Aura Scanning Device)

    विशेष टिप – गौ सेवा से लाभ , सामाजिक दूरी बनाये रखिये , जहां यात्रा या देशाटन लिखा है उसे घर में घूमकर पूरा कीजिये , जहां धर्म स्थल लिखा है उसे घर का धर्म स्थल मानिये , जहां किसी से मिलने की बात लिखी है उनसे फोन पर मिलिये , मास्क को नाक व मुह पर लगाईये , हाथों को समय समय पर धोते रहिये या हेंड सेनिटायजर का उपयोग कीजिये ।

    मेष . लोग आपके जीवन जीने की कला का अनुसरण करेंगे आप भी अभिभूत होंगे।धन की प्राप्ति के अवसर सुगम होगें जो कम प्रयास से प्राप्त होगे। लोग आपकी बुद्धिमता को देखकर आपके सामने नतमस्तक होगें ।

    वृषभ . आलस्य बढ़ने की संभावना है जो कि हानि होने के योग बताता है अतः आलस्य न बढने दें।नींद अच्छी आयेगी और फिर अगली सुबह भी प्रसन्नतादायक होगी । किसी कारण से अस्पताल जाने की संभावना है किसी को देखने भी जा सकते है अस्पताल।

    मिथुन . बड़ा भाई या भाई समान व्यक्ति भी मदद कर सकता है जो धन प्राप्ति सहायक रहेगा ।प्रयास कीजिये आपको ढेर सारा धन मिलने के योग है । करोबारी यात्रा के योग है जो लाभकारी होगी ।

    कर्क . राजनीति से जुड़े लोगो के लिये समय उत्तम है प्रयास में क्षीणता न आने दीजिये ।नई नौकरी मिलने के योग है प्रयास में कमी न आने दीजिये। उच्चाधिकारी एवं प्रतिष्ठित जनो से मेलजोल संपर्क उत्तम रहेगा कोई बड़ा काम बन सकता है ।

    सिंह . किसी धर्म गुरू से मुलाकात होने की सांभावना है आपकी धर्म संबंधी ज्ञान का समाधान हो सकता है।पूजा पाठ में मन लगेगा एवं शांति मिलेगी देव दर्शन के भी प्रबल योग है । अपनी श्रद्धानुसार किसी धार्मिक स्थान के प्रवास पर जाने योग है।

    कन्या . गुप्त विद्याओं में रूचि बढ़ने की संभावना प्रबल है कोई साहित्य पढने को मिल सकता है । असावधानी से दुघर्टना व चोट आदि लगने का भय रहेगा।योजना बनाते समय सभी आवश्यक सामग्री की सूचि बनावे लंबी यात्रा की योजना बनेगी।

    तुला . मन शांत एवं प्रसन्न रहेगा, ध्यान लगाने से सकारात्मकता का संचार होगा ।रोमांटिक मूड में रहेगें एवं घूमने फिरने जा सकते है जीवन आनंद लीजिये।दैनिक रोजगार के क्षैत्र में सफलता मिलेगी नौकरी भी मिल सकती है ।

    वृश्चिक . अपनों की चिंता से मन दुःखी रहेगा उनसे बात कीजिये। विरोधियों की खुरापातें बढ़ सकती है चौकन्ना रहने की आवश्यकता है ।शत्रु पक्ष को नीचे देखना पड़ सकता है अहं की भावना से बचिये।

    धनु . शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी जो मन को चिंता मुक्त कर देगा। आपके हृदय में बसा कलाकार बहार आने की प्रयास करेगा कला से जुडे लोगों का लाभ ।धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित हो सकते है जो उर्जा में वृद्धि करेगा ।

    मकर . विनम्र रहने से सामाजिक सम्मान में वृद्धि के अवसर सुलभ रहेंगे। जनकल्याण करते रहिये जनहित के मामलों में सफलता मिलेगी। माता को चरण र्स्पश अवश्य करें क्योकि माता का आशिर्वाद चमत्कार की तरह काम करेगा ।

    कुंभ . अनायास ही आपकी हिम्मत एवं पराक्रम में वृद्धि होगी जो आपके काम को आसान कर देगी ।अधिनस्तों का सहयोग उत्तम होगा आप भी उनका ध्यान रखिये ।छोटे भाई-बहनों का सहयोग उत्तम होगा आप भी उनके सहयोग में तत्पर रहिये ।

    मीन . वाणी की मधुरता से काम बना लेना अत्यंत आसान है एवं आप ऐसा कर लेंगे ।रूका हुआ धन वापस मिल सकता है अपनी मीठी वाणी के प्रयोग से । शेयर मार्केट में इनवेस्ट करने का मन बनेगा पर निवेश सोच समझ कर ही करें।

    ज्योर्तिविद पं. संजय शर्मा 9424828545, 9893129882

  • कायस्थ समाज के हितों पर कुठाराघात के खिलाफ सकारात्मक कार्यक्रम शीघ्र : राजीव रंजन प्रसाद

    कायस्थ समाज के हितों पर कुठाराघात के खिलाफ सकारात्मक कार्यक्रम शीघ्र : राजीव रंजन प्रसाद

    चित्रगुप्त के वंशजों को संगठित, एवं सशक्त करने के लिए जीकेसी प्रतिबद्ध : डा. नम्रता

    पद्मश्री डॉ मानस बिहारी वर्मा की स्मृति में कायस्थ विज्ञान सम्मान के पांच विजेताओं की घोषणा

    पटना, 30 जुलाई । आजादी की लड़ाई के अलावा हर क्षेत्र में अपना विशिष्ट योगदान देने वाले कायस्थ समुदाय की लगातार की जा रही उपेक्षा तथा उनके हितों पर किए जा रहे कुठाराघात के विरोध में देश की दो महान विभूतियों डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की धरती बिहार से शीघ्र ही सकारात्मक और रचनात्मक अभियान की शुरुआत की जाएगी । इस आशय का निर्णय आज यहां ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस की प्रदेश कार्यकारिणी की हुई बैठक में लिया गया । कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के नेतृत्व में हुई इस बैठक की अध्यक्षता डॉ नम्रता आनंद ने की ।

    कायस्थ समुदाय के हितों की रक्षा के लिए भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर कार्यरत संस्था ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) बिहार ईकाई की कार्यकारिणी की बैठक में हाल के वर्षों में राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र में और उनके हकों से वंचित किए जाने का मामला जोरदार ढंग से उठा । लगभग सभी वक्ताओं ने कहा कि अब समय चुप बैठने का नहीं है बल्कि राजनीति सामाजिक प्रशासनिक व्यापारिक तथा अन्य क्षेत्रों में अपने हक को लेकर आवाज को बुलंद करने की जरूरत है ।

    वक्ताओं ने कहा कि प्रायः सभी राजनीतिक संगठनों द्वारा भगवान चित्रगुप्त के वंशजों को दबाने की कोशिश की जा रही है और उनका वाजिब हक भी देने की बात तो दूर उसे छीन भी लिया जा रहा है ।ऐसी स्थिति में सभी कायस्थ संगठनों तथा चित्रगुप्त के वंशजों को एकजुट होकर इस रचनात्मक तथा सकारात्मक अभियान में अपना सशक्त योगदान देने की जरूरत है । बैठक में 19 दिसंबर को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने वाले विश्व कायस्थ महासम्मेलन की तैयारी, पूरे राज्य में सदस्यता अभियान पर जोर देने का संकल्प लिया गया।बैठक के दौरान विश्व कायस्थ महासम्मेलन ‘उम्‍मीदों का कारवां’ कार्यक्रम की तैयारी पर विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में प्रदेश भर में कायस्थों के सामाजिक आर्थिक, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक प्रगति के लिए राज्यव्यापी एकजुटता अभियान चलाये जाने और संगठन को जिला, शहर से लेकर पंचायत स्तर तक मजबूत कर

    राजनीति में भी अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में जीकेसी की बिहार इकाई की ओर से सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बनाये गये रोड मैप को प्रभावी ढ़ंग से क्रियान्वित किये जाने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
    इस अवसर पर जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि विश्व कायस्थ महासम्मेलन की तैयारी के लिए रोडमैप तैयार है और सभी राज्यों को विशेष रुप से तैयारी करने का निर्देश दिया गया है।जीकेसी के गठन के साथ ही धरातल पर काम करने वाले प्रतिभाशाली लोगों की टीम बनायी गयी है, जो सबका साथ और सबका विकास के साथ काम करने में कृत संकल्पित हैं।

    श्री प्रसाद ने बताया कि जीकेसी के सौजन्य से पद्मश्री डॉ मानस बिहारी वर्मा की स्मृति में 29 जुलाई को “कायस्थ विज्ञान सम्मान”का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया इस वर्ष हमने यह सम्मान समारोह प्रसिद्ध वैज्ञानिक, पद्म श्री डॉ. मानस बिहारी वर्मा को समर्पित किया है जिन्होंने तेजस लड़ाकू विमान को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । यह हमारे राष्ट्र के लिए गर्व की बात है।देश के प्रति डॉ. मानस बिहारी वर्मा का योगदान अविस्मरणीय है। उनके द्वारा विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में किये गये कार्य लोगों के लिये प्रेरणास्रोत है। डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा ने 35 वर्षों तक अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया। तेजस फाइटर जेट विमान की डिज़ाइन बनाने की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने संभाली थी।

    इस सम्मान के अंतर्गत देश भर से 11वीं और 12वीं के विज्ञान के छात्रों ने भाग लिया और विज्ञान से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गठित कमिटी मंडल ने जिन छात्रों को विजेता घोषित किया उनमें आदर्श दीपक वर्मा, दाविपायन दास, शेरेन रेनी, आर्य अनूप नायर और नैतिक महेश शामिल हैं।

    प्रदेश अध्यक्ष डा. नम्रता आनंद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता कमल किशोर ने कहा कि बिहार में सभी 38 जिलों में कमिटी गठित कर दी गयी है और वहां जिला तथा प्रखंड स्तर पर कमेटियां गठित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर जीकेसी की सभी इकाई को विस्तार करने की जरूरत है। संगठन को आगे बढ़ाने के लिए सोच और विचारधारा को ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित करने की जरूरत है। जीकेसी की स्थापना का महत्वपूर्ण उद्देश्य सम्पूर्ण कायस्थ समाज को संगठित, उन्नत एवं सशक्त करना है। कायस्थ समाज के लोगों को एक दूसरे से समन्वय स्थापित करने की जरूरत है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके। जीकेसी सदस्यता अभियान में युवाओं और महिलाओं को जोड़ने पर विशेष जोर दिया ।

    डॉ. आनंद ने बताया कि राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा औरंगाबाद के अध्यक्ष कमल किशोर के नेतृत्व में जीकेसी सदस्यता अभियान की शानदार शुरूआत हुई है।1942 की अगस्त क्रांति में पटना में विधानसभा के सामने शहीद कायस्थ कुल गौरव जगतपति कुमार के सम्मान में औरंगाबाद में 11 अगस्त को एक अनूठे कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है ।

    इस अवसर पर मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम कुमार,राष्ट्रीय सचिव रवि आनंद ,बिहार के मीडिया प्रभारी जितेंद्र कुमार सिन्हा समेत सभी 38 जिलों से आये प्रतिनिधि के अलावा मौजूद थे।