Author: AVS POST Bureau

  • राशिफल 02 अक्टूबर: जानिए शनिवार के दिन क्या रहेगी आपके ग्रहों की दशा, बता रहे है कालज्ञ ज्योतिर्विद पं. संजय शर्मा जी।

    राशिफल 02 अक्टूबर: जानिए शनिवार के दिन क्या रहेगी आपके ग्रहों की दशा, बता रहे है कालज्ञ ज्योतिर्विद पं. संजय शर्मा जी।

    राशिफल: शनिवार दिनांक 02 अक्टूबर2021.

    ज्योर्तिविद कालज्ञ पं. संजय शर्मा
    9893129882 , 9424828545 (Paytm , PhonePe, GPay)
    ज्योतिष लेखक, ज्योतिष एवं वास्तु परामर्ष , रत्न विशेषज्ञ , प्रेरक (मोटीवेटर)
    कलर थेरेपिस्ट एवं औरा रीडर

    11, न्यू एम.आई.जी. मुखर्जी नगर
    एम.आर. 8, टेलीफोन ऑफिस के सामने
    देवास म.प्र. 455001

    (Aura Reading by Aura Scanning Device)

    विशेष टिप – हनुमान जी को तेल का दीया लगावें , सामाजिक दूरी बनाये रखिये , जहां यात्रा या देशाटन लिखा है उसे घर में घूमकर पूरा कीजिये , जहां धर्म स्थल लिखा है उसे घर का धर्म स्थल मानिये , जहां किसी से मिलने की बात लिखी है उनसे फोन पर मिलिये , मास्क को नाक व मुह पर लगाईये , हाथों को समय समय पर धोते रहिये या हेंड सेनिटायजर का उपयोग कीजिये ।

    मेष . विनम्र रहने से सामाजिक सम्मान में वृद्धि के अवसर सुलभ रहेंगे। जनकल्याण करते रहिये जनहित के मामलों में सफलता मिलेगी। माता को चरण र्स्पश अवश्य करें क्योकि माता का आशिर्वाद चमत्कार की तरह काम करेगा ।

    वृषभ . अनायास ही आपकी हिम्मत एवं पराक्रम में वृद्धि होगी जो आपके काम को आसान कर देगी ।अधिनस्तों का सहयोग उत्तम होगा आप भी उनका ध्यान रखिये ।छोटे भाई-बहनों का सहयोग उत्तम होगा आप भी उनके सहयोग में तत्पर रहिये ।

    मिथुन . वाणी की मधुरता से काम बना लेना अत्यंत आसान है एवं आप ऐसा कर लेंगे ।रूका हुआ धन वापस मिल सकता है अपनी मीठी वाणी के प्रयोग से । शेयर मार्केट में इनवेस्ट करने का मन बनेगा पर निवेश सोच समझ कर ही करें।

    कर्क . लोग आपके जीवन जीने की कला का अनुसरण करेंगे आप भी अभिभूत होंगे।धन की प्राप्ति के अवसर सुगम होगें जो कम प्रयास से प्राप्त होगे। लोग आपकी बुद्धिमता को देखकर आपके सामने नतमस्तक होगें ।

    सिंह . आलस्य बढ़ने की संभावना है जो कि हानि होने के योग बताता है अतः आलस्य न बढने दें।नींद अच्छी आयेगी और फिर अगली सुबह भी प्रसन्नतादायक होगी । किसी कारण से अस्पताल जाने की संभावना है किसी को देखने भी जा सकते है अस्पताल।

    कन्या . बड़ा भाई या भाई समान व्यक्ति भी मदद कर सकता है जो धन प्राप्ति सहायक रहेगा ।प्रयास कीजिये आपको ढेर सारा धन मिलने के योग है । करोबारी यात्रा के योग है जो लाभकारी होगी ।

    तुला . राजनीति से जुड़े लोगो के लिये समय उत्तम है प्रयास में क्षीणता न आने दीजिये ।नई नौकरी मिलने के योग है प्रयास में कमी न आने दीजिये। उच्चाधिकारी एवं प्रतिष्ठित जनो से मेलजोल संपर्क उत्तम रहेगा कोई बड़ा काम बन सकता है ।

    वृश्चिक . किसी धर्म गुरू से मुलाकात होने की सांभावना है आपकी धर्म संबंधी ज्ञान का समाधान हो सकता है।पूजा पाठ में मन लगेगा एवं शांति मिलेगी देव दर्शन के भी प्रबल योग है । अपनी श्रद्धानुसार किसी धार्मिक स्थान के प्रवास पर जाने योग है।

    धनु . गुप्त विद्याओं में रूचि बढ़ने की संभावना प्रबल है कोई साहित्य पढने को मिल सकता है । असावधानी से दुघर्टना व चोट आदि लगने का भय रहेगा।योजना बनाते समय सभी आवश्यक सामग्री की सूचि बनावे लंबी यात्रा की योजना बनेगी।

    मकर . मन शांत एवं प्रसन्न रहेगा, ध्यान लगाने से सकारात्मकता का संचार होगा ।रोमांटिक मूड में रहेगें एवं घूमने फिरने जा सकते है जीवन आनंद लीजिये।दैनिक रोजगार के क्षैत्र में सफलता मिलेगी नौकरी भी मिल सकती है ।

    कुंभ . अपनों की चिंता से मन दुःखी रहेगा उनसे बात कीजिये। विरोधियों की खुरापातें बढ़ सकती है चौकन्ना रहने की आवश्यकता है ।शत्रु पक्ष को नीचे देखना पड़ सकता है अहं की भावना से बचिये।

    मीन . शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी जो मन को चिंता मुक्त कर देगा। आपके हृदय में बसा कलाकार बहार आने की प्रयास करेगा कला से जुडे लोगों का लाभ ।धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित हो सकते है जो उर्जा में वृद्धि करेगा ।

    ज्योर्तिविद पं. संजय शर्मा 9424828545, 9893129882

  • जालसाजों ने लगाया डेढ़ लाख का चूना, तफ्तीश में जुटी नोएडा पुलिस

    जालसाजों ने लगाया डेढ़ लाख का चूना, तफ्तीश में जुटी नोएडा पुलिस

    नोएडा:  दिल्ली से सटे नोएडा में ऑनलाइन ठगी और फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ताजा मामला नोएडा सेक्टर 82 के पॉकेट 12 निवासी चंद्रकांत शर्मा से जुड़ा हुआ है। दरअसल चंद्रकांत शर्मा के इंडसइंड बैंक के क्रेडिट कार्ड केस जरिए करीब 1.40 लाख का फ्रॉड किया गया है जिसकी शिकायत उन्होंने नोएडा पुलिस समेत कई अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं को कर दी है। 

    चंद्रकांत शर्मा ने बताया की “जब वो 19 सितंबर को सुबह जगे तब मोबाइल में मैसेज देखा तब पता चला कि मेरे साथ रात को चीटिंग की गई है मैंने तुरंत अपने नजदीकी साइबर सेल नोएडा में जाकर शिकायत प्रार्थना पत्र दिया और शिकायत प्रार्थना पत्र की कॉपी प्राप्त की और आरबीआई ,इंडसइंड बैंक क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट, नो ब्रोकर रेंट पेमेंट और पेयू पेमेंट्स को मेल के द्वारा फ्रॉड ट्रांजिशन की कंप्लेंट की” 

    चंद्रकांत शर्मा फ्रॉड करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं साथ अपने पैसे क्रेडिट कार्ड में वापस आने का इंजतार भी कर रहे हैं। वहीं नोएडा पुलिस इस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है।

    गौतमबुद्ध नगर में वर्ष 2020 में साइबर अपराध के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। इसका खुलासा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में हुआ है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के तहत संबंधित वर्ष में 1585 मामले नोएडा में दर्ज किए गए। साइबर अपराध के मामले में प्रदेश की राजधानी लखनऊ दूसरे नंबर पर रही। 

    मार्च 2020 में लॉकडाउन के दौरान अधिकतर लोगों ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए ही खरीदारी की। इसी बीच साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए। बीते वर्ष नोएडा में साइबर अपराध से जुड़े 1585 मामले दर्ज किए गए। यह पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के तहत लखनऊ में 1465, प्रयागराज में 1102, गाजियाबाद में 896 और वाराणसी में 564 केस दर्ज किए गए। रिपोर्ट दर्शाती है कि लॉकडाउन की वजह से अन्य अपराध का ग्राफ नीचे रहा क्योंकि लोग घर से बाहर नहीं निकल सके। 

    कम्प्यूटर हैकिंग की रिपोर्ट अधिक

    नोएडा में दर्ज 1585 केस में से 803 कम्प्यूटर हैकिंग से संबंधित थे। 307 मामले आईटी एक्ट, 51 रेनसमवेयर वायरस अटैक, 25 बैंकिंग फ्रॉड, नौ साइबर ब्लैकमेलिंग के 19 डेबिट-क्रेडिट कार्ड से संबंधित दर्ज किए गए। इसके अलावा ठगों ने कई तरह के झांसे देकर पीड़ितों से उनका ओटीपी पूछकर भी ठगी

    स्टाफ की कमी से नहीं सुलझते केस 

    अधिकतर मामलों के समय से ट्रेस न होने का कारण नोएडा साइबर सेल में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की कमी को भी बताया जाता रहा है। यहां पर करीब 16 सबइंस्पेक्टर और अन्य कांस्टेबल स्तर के कर्मचारी हैं। पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से मुख्यालय को पत्र लिखकर साइबर सेल में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है। इसके तहत एक एसीपी रैंक के अधिकारी सहित 150 कर्मचारियों की मांग की गई है।

    बचाव के तरीके

    – इंटरनेट बैंकिंग और ऑनलाइन लेन-देन का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक स्थान जैसेकि साइबर कैफे, ऑफिस, पार्क, सार्वजनिक मीटिंग और किसी भीड़ वाले स्थान पर न करें।

    – इंटरनेट बैंकिंग या किसी भी जरूरी अकाउंट में लॉगिन करें तो काम खत्म कर अपने अकाउंट को लॉगआउट करना न भूलें। 

    – अपने पर्सनल कंप्यूटर के पासवर्ड को मजबूत रखिए जो आसानी से किसी को पता न चले।

    – किसी भी स्पैम ई-मेल का उत्तर न दें। अंजान ई-मेल में आए अटैचमेंट्स को कभी खोल कर न देखें या उस पर मौजूद लिंक पर क्लिक न करें।

    – आकर्षक गिफ्ट या इनाम के झांसे में आकर अपनी निजी जानकारी, बैंक अकाउंट नंबर या बैंक से संबंधित कोई भी जानकारी न दें।

  • पीएचडी पर लागू होगा कॉमन फार्मूला, नया रेगुलेशन तैयार : UGC

    पीएचडी पर लागू होगा कॉमन फार्मूला, नया रेगुलेशन तैयार : UGC

    उच्च शिक्षण संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए 01 जुलाई 2021 से पीएचडी जरूरी है। ऐसे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अब पीएचडी की गुणवत्ता बढ़ाने के मकसद से इसके एडमिशन और डिग्री अवार्ड करने के नियमों को सख्त करने जा रहा है। ये नियम यूनिफाइड होंगे। पूरे देश में पीएचडी की एक समान पद्धति लागू होगी, जो तैयार हो चुकी है। नए रेगुलेशन में पीएचडी एडमिशन के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की काॅमन प्रवेश परीक्षा कराने की भी योजना है।

    आयोग की ओर से यूजीसी- (एमफिल/ पीएचडी डिग्री प्रदान करने हेतु न्यूनतम मानदंड और प्रक्रिया) रेगुलेशन को रिवाइज किया जा रहा है। कई महीनों की लंबी प्रक्रिया और उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की कमेटी ने इस नए रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार किया है। बताया जा रहा है कि जनवरी महीने में ही इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इसके जरिए देश भर के विश्वविद्यालयों में पीएचडी एडमिशन के लिए एक जैसे नियम होंगे।

    पीएचडी के लिए प्रवेश परीक्षा जरूरी-

    पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए अब प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू दोनो जरूरी होंगे। केंद्रीय विश्वविद्यालय अपनी परीक्षा खुद ले सकेंगे। राज्य सरकारें भी अपने प्रदेश के विश्वविद्यालयों के लिए पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। ये केंडिडेट को तय करना है कि वह किस प्रवेश परीक्षा के जरिए पीएचडी में एडमिशन लेना चाहता है।

    नेट वाले यहां भी मुश्किल में-

    सबसे बड़ा सवाल ये है कि फिर नेट और एमफिल वालों का क्या होगा। बताया जा रहा है कि इस रेगुलेशन में नेट वालों को भी पीएचडी एडमिशन में छूट नहीं मिलेगी। बहुत से विषयों में नेट परीक्षा नहीं कराई जाती, जिसके कारण पीएचडी में एक समान पद्धति लागू नहीं हो पा रही है। इस रेगुलेशन के बाद नेट पासआउट केंडिडेट को भी पीएचडी एडमिशन प्रवेश परीक्षा देनी होगी।

    मौजूदा नियम-

    यूजीसी ने 5 मई 2016 को एमफिल-पीएचडी रेगुलेशन 2016 लागू किया था। इसमें पीएचडी कोर्स का समय न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 6 साल है। इसके सेक्शन-5 में प्रावधान है कि नेट-सेट जैसी परीक्षाएं पास कर चुके उम्मीदवारों को पीएचडी में एडमिशन देने के लिए विश्वविद्यालय अलग नियम बना सकते हैं। मतलब, इस नियम के तहत तमाम विश्वविद्यालय नेट-सेट पास केंडिडेट को सीधे इंटरव्यू के लिए आमंत्रित करते हैं। इन्हें एंट्रेंस देने की जरूरत नहीं है।

    प्रस्तावित हुआ था ये संशोधन-

    यूजीसी ने 2 जून 2017 को इस रेगुलेशन में पहला संशोधन प्रस्तावित किया। इसमें यूजीसी ऑटोनॉमी रेगुलेशन-2017 के तहत विश्वविद्यालयों के वर्गीकरण को आधार बनाया गया, जिसमें विश्वविद्यालयों को उनकी नैक रैंकिंग के आधार पर केटेगरी-1, केटेगरी-2 और केटेगरी-3 में बांटने का प्रावधान है। इस संशोधन में केटेगरी-3 में आने वाले विश्वविद्यालय और उनके काॅलेजों में पीएचडी एडमिशन के लिए सिर्फ नेट-सेट व ऐसी अन्य परीक्षा पास कर चुके केंडिडेट को ही पीएडी में एडमिशन देने का नियम बनाया था। लेकिन, ये संशोधन लागू नहीं हुआ।

    ऐसी होगी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा-

    प्रवेश परीक्षा में अनुसंधान योग्यता के साथ पांच से छह सेक्शन होंगे जो विषय योग्यता से अलग होंगे। पासिंग मार्क्स 50 फीसदी हो सकते हैं। साथ ही प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के लिए अभी 70 और 30 फीसदी अंकों का अनुपात रखा गया है। नए रेगुलेशन में इसे 50-50 किया जा सकता है।

    एक जुलाई 2021 से पीएचडी जरूरी

    यूजीसी (विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य शैक्षिक कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु न्यूनतम अर्हता तथा उच्चतर शिक्षा में मानकों के रखरखाव हेतु अन्य उपाय संबंधी विनियम, 2018 के सेक्शन 3.9.0 के मुताबिक विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर (चयन ग्रेड/ शैक्षणिक स्तर 12) के पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी डिग्री जरूरी होगी। सेक्शन 3.10.0 के मुताबिक 01 जुलाई 2021 से विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के लिए पीएचडी डिग्री अनिवार्य होगी।

  • मेघालय का सिलग्राक, एम.पी. की रिदम व कोलकत्ता की डॉ. सौरवी बने “मिस्टर, मिस एंड मिसेज प्राइड ऑफ भारत 2021”

    मेघालय का सिलग्राक, एम.पी. की रिदम व कोलकत्ता की डॉ. सौरवी बने “मिस्टर, मिस एंड मिसेज प्राइड ऑफ भारत 2021”

    जयपुर/कोलकत्ता/शिलॉन्ग/मध्य प्रदेश। “मिस्टर, मिस एंड मिसेस प्राइड ऑफ भारत” के सीजन 1 की क्राउनिंग सेरेमनी का गत सोमवार को आयोजन हुआ।

    शो की डायरेक्टर मिताली सोनी ने बताया कि यह शो प्राइड ऑफ भारत का एक इनिशिएटिव है एवं कोरोना के कारण इस वर्ष यह शो पूरी तरह से वर्चुअल रूप में ही आयोजित किया गया।

    Dr. Souravi Haldar Winner
    Dr. Souravi Haldar Winner

    इस शो की एक सबसे खास बात यह रही कि शो के ऑडिशन राउंड में प्रतिभागियों को पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने सम्बन्धी टास्क दिए गए।

    शो के फिनाले से पहले सभी फाइनलिस्ट को ग्रूमिंग एक्सपर्ट्स द्वारा दो दिन की ग्रूमिंग सेशन भी दिए गए, जिसके बाद फिनाले में जनरल क्विज, रैम्पवॉक, लाइव क्वेश्चन – आंसर एवं टैलेंट राउंड को क्लियर करते हुए शो के विनर्स का चयन हुआ।

    Miss. Rhythm Jain Winner
    Miss. Rhythm Jain Winner

    प्राइड ऑफ भारत के फाउंडर महावीर कुमार सोनी ने बताया कि मिस कैटेगरी से एम.पी. की रिदम जैन, मिसेस कैटेगरी से कोलकत्ता की डॉ. सौरवी हालदार व मिस्टर कैटेगरी से मेघालय का सिलग्राक मारक विनर्स रहे। इनके अलावा मिस केटेगरी से याचिका जैन, सुप्रिया पसलकर व अशनूर कौर ने 1st रनर अप, 2nd रनर अप व 3rd रनर अप, मिसेस केटेगरी से नेहा बंद्योपाध्याय व पूजा रामचंदानी ने 1st रनर अप व 2nd रनर अप का एवं मिस्टर कैटेगरी से रोहित कुमार व सात्यकि बनर्जी ने 1st व 2nd रनर अप का खिताब अपने नाम किया।

    शो में जूरी के रूप में सुपरमॉडल एन्ड एक्ट्रेस शुभि अग्रवाल, सुपरमॉडल एन्ड एक्ट्रेस दीप्ति कौशिक व युथ आइकॉन ऑफ राजस्थान व एक्टर ऋषी मिगलानी, एक्टर संजय सरदाना एवं सेलेब्रिटी फैशन डिज़ाइनर प्रज्ञा टिबरेवाल रहे।

    Mr. Silgrak Marak winner
    Mr. Silgrak Marak winner

    उल्लेखनीय है कि इस शो में फेमस बॉलीवुड एन्ड टीवी ऐक्ट्रेस एन्ड दीप्रा फैशन स्टूडियो की फाउंडर डायरेक्टर दीप्ति सैनी ने ग्रूमिंग डायरेक्टर की भूमिका निभाई, मिस इंडिया यूनिवर्स डॉ. शिखा तिवारी ने मेंटर के रूप में भूमिका निभाई। सपोर्टिंग पार्टनर के रूप में सृष्टि द वीमेनस् क्लब, दीप्रा फैशन स्टूडियो, गोपयम, प्रेशा क्रिएशन रहे। शो की क्राउनिंग सेरेमनी में गेस्ट ऑफ ओनर के रूप में मिसेज क्वीन ऑफ इंडिया डॉ. परीन सोमानी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    साथ ही देश की कई बड़ी बड़ी शख्सियतों ने हिस्सा लिया, जिनमें फेमस एक्टर व डायरेक्टर रविन्द्र अरोरा, हिंदुस्तान चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पैट्रन डॉ. उत्तम जैन, कमलेश सोनी, योगाचार्य डॉ. रेखा सोनी, फिक्की के चेयरमैन नरेंद्र कुमार जैन, अंकिता जैन, मधु सोनी, भावना शर्मा, बसन्त जैन, नीलम जैन, समाज रत्न अवार्डी लक्की चंदवानी, अनिल अरोरा, संजीव चौधरी आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर शो डायरेक्टर

    मिताली सोनी ने जल्द ही ऑफलाइन रूप में होने जा रहे शो के दूसरे सीजन के आयोजन की भी घोषणा की।
    शो में इशिता भट्ट द्वारा सशक्त एंकरिंग की गई।

  • नोएडा के पॉकेट 12 को सुंदर बनाने की मुहिम, सोसाइटी निवासियों को मिल रहा स्थानीय नेताओं का साथ

    नोएडा के पॉकेट 12 को सुंदर बनाने की मुहिम, सोसाइटी निवासियों को मिल रहा स्थानीय नेताओं का साथ

    नोएडा। नोएडा को स्वच्छ और सुंदर बनाने को लेकर जमकर काम किया जा रहा है इस काम में नोएडा अथॉरिटी के साथ-साथ RWA के लोग भी लगे हुए हैं। सेक्टर -82  के पॉकेट 12 सोसायटी में बीते हफ्ते आरडब्ल्यूए ने लोगों के साथ मिलकर सफाई अभियान चलाया। सोसायटी के लोगों ने पार्क का कचरा बाहर निकाला और पार्क को साफ-सुथरा रखने की शपथ ली। आरडब्ल्यूए का कहना है कि निगम की ओर से पार्कों में रेगुलर साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। इससे सोसायटी के पार्क और अन्य जगहों पर गंदगी जमा हो जाती है। इसलिए हर माह स्थानीय लोगों की मदद से सोसायटी को साफ-सुथरा रखने के लिए अभियान चलाया जाता है। आरडब्ल्यूए ने स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को सफाई के लिए अवेयर भी किया। 

    नोएडा सेक्टर 82 के पॉकेट 12 के साफ सफाई के कार्य में सोसाइटी के निवासी के साथ साथ कुछ समाजसेवी और स्थानीय नेताओं ने भी सहयोग देना शुरू कर दिया है। काफी दिनों से अधूरे पड़े मलवा और नाली की सफाई के काम में  समाजवादी पार्टी के नेता सुनील चौधरी भी सहयोग कर रहे है। समाजवादी पार्टी के नेता राजीव श्रीवास्तव ने बताया की सोसाइटी को स्वच्छ बनाने के लिए उनकी तरफ से पूरी कोशिश की जा रही है। इस काम में  नोएडा अथॉरिटी के प्रोजेक्ट इंजीनियर  आर के शर्मा जी हेल्थ डिपार्टमेंट का सहयोग भी मिल रहा है। वहीं सोसाइटी निवासी जसवीर चौहान और मनोज तिवारी सोसाइटी को साफ रखने में सहयोग कर रहे हैं।

    वहीं पॉकेट सोसायटी के एडवाइजर केमटी के उपाध्यक्ष सी के शर्मा के मुताबिक सोसायटी के लोगों ने साफ-सफाई की कमान खुद संभाली है यहीं नहीं, सोशल मीडिया aपर भी इसका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया, ताकि अन्य सोसायटी के लोग भी प्रेरित होकर साफ-सफाई पर ध्यान दें। सीके शर्मा ने बताया की सोसायटी में रहने वाले लोगों के लिए नोएडा अथॉरिटी की तरफ से बड़े पार्क में जिम की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है।

    नोएडा को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए प्राधिकरण (Noida Authority) ने स्वच्छता रैंकिंग अवार्ड्स, 2021-22 कार्यक्रम फिर से शुरू किया है। आगामी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विजेताओं के नामों की घोषणा की जाएगी। 15 सितंबर तक शहर के सभी एसोसिएशन, आरडब्ल्यूए, स्कूल, समेत अन्य कैटेगरी में इसमें इसमें रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। 16 – 30 सितंबर के बीच प्राधिकरण के अफसर मौके पर जाकर स्वच्छता का जायजा लेंगे। उसके बाद रैंकिंग तय की जाएगी और की घोषणा की जाएगी। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ऋतु महेश्वरी शहर की सफाई को लेकर लगातार सक्रिय हैं। नए-नए अभियान के जरिए स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ा रही है।

     

  • ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने मुंबई में वड़ा पाव आजमाया। इंटरनेट प्रतिक्रिया

    ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने मुंबई में वड़ा पाव आजमाया। इंटरनेट प्रतिक्रिया

    भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त, एलेक्स एलिस, फिर से चर्चा में हैं और इस बार प्रसिद्ध महाराष्ट्रीयन व्यंजन वड़ा पाव को आजमाने के लिए।

    क्या आपको याद है कि कैसे भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने दक्षिण भारतीय स्वादिष्ट डोसा का स्वाद चखा था? अगस्त में उनका हाथों से डोसा खाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वह इसके हर हिस्से को पसंद करते थे और उनकी प्रतिक्रिया ने नेटिज़न्स का दिल जीत लिया। हालाँकि, इस बार, हाथ में वड़ा पाव लिए उनकी एक तस्वीर ऑनलाइन वायरल हो गई है और हम सुरक्षित रूप से कह सकते हैं कि उन्हें भी यह बहुत पसंद था।

    एलिस, जो इस समय महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री और शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रही हैं, को गेटवे ऑफ इंडिया के बाहर हाथ में वड़ा पाव लिए खड़े देखा गया। महाराष्ट्र का एक शाकाहारी फास्ट फूड वड़ा पाव एक डीप फ्राइड आलू की पकौड़ी है जिसे पाव के बीच भरकर चटनी और हरी मिर्च के साथ खाया जाता है।

    उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया, “मुंबई-लाई भारी में वड़ा पाव खाने का हमेशा समय होता है।” उन्होंने ‘लाई भारी’ का इस्तेमाल किया, जो एक देशी महाराष्ट्रीयन वाक्यांश है जिसका अर्थ है ‘इतना महान’।

    यहां पोस्ट देखें:

    उन्होंने अपनी मुंबई यात्रा की शुरुआत गणेश चतुर्थी से पहले एक गणेश कार्यशाला में जाकर की।

    ट्विटर पर अपलोड होने के बाद, उनकी तस्वीर 20,000 से अधिक लाइक्स के साथ वायरल हो गई। नेटिज़न्स ने भारत को पूरी तरह से तलाशने के लिए राजनयिक की भावना को पसंद किया और सिफारिशों के साथ टिप्पणियों की बाढ़ आ गई।

    एक यूजर ने कहा, “खुशी है कि आपको यह पसंद आया। मुंबई में खाने की अद्भुत वैरायटी है।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “बॉन भूख।”

    एलेक्स एलिस ने भारत के प्रति अपने पूर्ण प्रेम के कारण सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता हासिल की है। मुंबई में डब्बावालों से मिलने से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद पूरे वीडियो के लिए हिंदी बोलने तक, कमिश्नर के पोस्ट ने नेटिज़न्स को खुश कर दिया है।

    वड़ा पाव, कोई भी?

  • टी20 विश्व कप के लिए भारत के मेंटर के रूप में एमएस धोनी की नियुक्ति एक अच्छा निर्णय है: कपिल देव

    टी20 विश्व कप के लिए भारत के मेंटर के रूप में एमएस धोनी की नियुक्ति एक अच्छा निर्णय है: कपिल देव

    भारत के महान क्रिकेटर कपिल देव ने शुक्रवार को एम एस धोनी की 17 अक्टूबर से 14 नवंबर तक ओमान और यूएई में खेले जाने वाले टी 20 विश्व कप के लिए भारतीय राष्ट्रीय टीम के मेंटर के रूप में नियुक्ति का स्वागत किया।

    भारत के दिग्गज कपिल देव ने एमएस धोनी को टी 20 विश्व कप के लिए भारतीय राष्ट्रीय टीम का मेंटर नियुक्त करने के बीसीसीआई के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह एक विशेष मामला लगता है क्योंकि वह सेवानिवृत्ति के एक साल बाद ही सेटअप में वापस आए हैं।

    बीसीसीआई ने बुधवार को टी20 विश्व कप के लिए टीम का चयन करते समय धोनी की भूमिका पर एक आश्चर्यजनक घोषणा की। जय शाह ने कहा कि एमएस धोनी ने प्रस्ताव के साथ पूर्व कप्तान से संपर्क करने पर भारतीय टीम में योगदान देने के लिए गहरी दिलचस्पी दिखाई। बीसीसीआई सचिव ने कहा कि उन्हें खुशी है कि धोनी विराट कोहली और यूएई में उनकी टीम के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य के लिए एक संरक्षक के रूप में बोर्ड में आने के लिए सहमत हुए।

    कपिल देव का मानना ​​है कि एक रिटायर्ड क्रिकेटर को राष्ट्रीय टीम में वापस आने के लिए कम से कम तीन से चार साल का अंतर होना चाहिए।

    “यह एक अच्छा निर्णय है। मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि एक बार एक क्रिकेटर के संन्यास लेने के बाद उसे तीन-चार साल बाद ही सेटअप में वापस आना चाहिए, लेकिन यह विश्व कप के साथ एक विशेष मामला लगता है। रवि (शास्त्री) ) भी COVID के साथ डाउन है इसलिए यह एक विशेष मामला लगता है,” कपिल ने कहा।

    चेन्नई सुपर किंग्स के साथ अपने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2021 के कार्यकाल के पूरा होने के बाद एमएस धोनी के टीम में शामिल होने की उम्मीद है। धोनी पिछले महीने दुबई पहुंचे और 19 सितंबर से टूर्नामेंट को फिर से शुरू करने के लिए अपने कुछ सीएसके साथियों के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं।

    भारत ने टी20 विश्व कप के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की और 3 स्टैंड-बाय खिलाड़ियों को नामित किया। जबकि ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने टीम में वापसी की, लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल, ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन उल्लेखनीय चूक में शामिल थे।

  • लड़के थोड़े विचलित थे: शास्त्री के COVID-19 Positive पाए जाने के बाद : राठौर

    लड़के थोड़े विचलित थे: शास्त्री के COVID-19 Positive पाए जाने के बाद : राठौर

    भारत के बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर ने रविवार को कहा कि टीम चौथे टेस्ट के चौथे दिन के लिए स्वाभाविक रूप से थोड़ी विचलित थी क्योंकि मुख्य कोच रवि शास्त्री को COVID-19 positive पाया गया था।

    बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने एहतियात के तौर पर शास्त्री, गेंदबाजी कोच भरत अरुण, फील्डिंग कोच आर श्रीधर और फिजियोथेरेपिस्ट नितिन पटेल को आइसोलेट कर दिया था।

    “बेशक, हम उन्हें बड़े पैमाने पर याद कर रहे हैं। रवि भाई (रवि शास्त्री), बी अरुण और आर श्रीदार, वे इस सेट-अप का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं और उन्होंने पिछले पांच-छह वर्षों में बहुत अच्छा किया है। और अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम में एक प्रमुख भूमिका निभाई, ”राठौर ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद कहा।

    रोहित शर्मा द्वारा यादगार शतक और चेतेश्वर पुजारा, शार्दुल ठाकुर और ऋषभ पंत द्वारा समान रूप से महत्वपूर्ण पारियों के सौजन्य से, दूसरे निबंध में 466 रन बनाने के बाद भारत एक कमांडिंग स्थिति में था।

    “लेकिन यह वही है। यही तथ्य है कि वे यहां नहीं हैं। इसलिए, यह सुबह थी, मुझे लगता है, थोड़ा विचलित करने वाला, हमारे पास एक शब्द था, हमने बात की, (और) ने फैसला किया कि हमें इसकी आवश्यकता है जो हाथ में है उस पर ध्यान दें, जो कि क्रिकेट है, ”राठौर ने कहा।

    “तो, हम इस श्रृंखला के लिए यहां हैं, यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण श्रृंखला है जिसे हम खेल रहे हैं और आज जब हम सुबह आए, तो यह हमारे लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन था, क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करना। इसलिए, मुझे लगता है कि लड़कों ने किया था। बहुत अच्छा, विचलित न होने के लिए।

    राठौर ने कहा, “एक संभावना थी कि हम कल रात हुई स्थिति से विचलित हो सकते हैं, लेकिन इसका बहुत श्रेय लड़कों को जाता है, जिस तरह से उन्होंने खुद को संभाला और जिस तरह से हम एक टीम के रूप में खेले।”

    बल्लेबाजी कोच ने यह भी खुलासा किया कि शास्त्री को शनिवार को थोड़ी परेशानी महसूस हुई जिसके बाद टेस्ट कराया गया।

    “मुझे सही समय नहीं पता था, लेकिन कल रात लगभग 8 बजे थी। कल उन्हें थोड़ी परेशानी हो रही थी, इसलिए मेडिकल टीम ने लेटरल-प्रो परीक्षण के लिए जाने का फैसला किया और यह सकारात्मक आया और वह तब हुआ जब हमने सुना है कि वह सकारात्मक है और मुझे लगता है, करीबी संपर्कों की पहचान की गई और उन्हें अलग-थलग कर दिया गया, इसलिए हम मेडिकल टीम का इंतजार करेंगे कि वे कब वापस शामिल हो सकते हैं, ”उन्होंने कहा।

  • दरभंगा एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट  का दर्जा देने की मांग, गिरीश कुमार ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

    दरभंगा एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देने की मांग, गिरीश कुमार ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

    दरभंगा व उत्तर बिहार में विभिन्न मुदों पर कार्य करने वाली संगठन नोबल कॉज फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ गिरीश कुमार ने नागरिक उड्डयन मंत्री माननीय श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व बिहार के मुख्यमंत्री माननीय श्री नीतीश कुमार से पत्र लिखकर मांग किया है कि दरभंगा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा दिया जाए और सिंगापुर व दुबई की उड़ान की अनुमति दी जाए। संस्था ने ये भी अनुरोध किया कि मलेशिया व सिंगापुर में काफी भारतीय मूल के लोग रहते हैं जिस वजह से मिथिलांचल में रह रहे कई परिवार के बच्चे पढ़ने व नौकरी करने वहां जाते हैं। इसके अलावा काफी मात्रा में मिथिलांचल के लोग दुबई में भी कार्यरत हैं।इस संदर्भ में नोबल कॉज फाउंडेशन ने दरख्वास्त की , की दरभंगा एयरपोर्ट जो ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर पर स्थित है को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का दर्जा मिलने से दक्षिणी नेपाल के लोग भी काठमांडू न जाकर दरभंगा से हवाई यात्रा करेंगे जिससे मिथिलांचल में रोजगार बढ़ेगा। इस आग्रह पत्र को माननीय मुख्यमंत्री ने तुरंत मुख्य सचिव व दरभंगा डी एम को संज्ञान लेने के लिए प्रेषित किया है। ज्ञातव्य हो कि दरभंगा एयरपोर्ट भारत सरकार के उड़ान स्कीम के तहत पूरे देश में शीर्ष पर है। सीधी हवाई सेवा से न बस इन्हें आवा जाही में सुविधा होगी , इससे विभिन्न तरीकों से नौकरी भी बढ़ेगी । मखाना के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

    संस्था के अध्यक्ष डॉ गिरीश कुमार ने मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया कि यथाशीघ्र दरभंगा एयरपोर्ट के भूमि अधिग्रहण के मामले में सुनवाई की जाए और जल्द से जल्द ये काम पूरा ही जिससे नए टर्मिनल बनाने के काम शुरू हो। हम आपको बता दें कि नोबेल कॉज फाउंडेशन के प्रयासों से अब तक लगभग 2200 विद्यार्थियों को कौशल विकाश का प्रशिक्षण दिया है , 10,000 से ज्यादा पेड़ लगाया और फुटूरिंग स्पोर्ट्स कंपनी के साथ मिलकर लगभग 5000 बच्चों को खेल कूद का प्रशिक्षण दे रहा है।नोबल कॉज फाउंडेशन , के अध्यक्ष डॉ गिरीश कुमार जो दरभंगा के निवासी हैं और उनको समाज सेवा में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भारत के राष्ट्रपति द्वारा संम्मानित किया जा चुका है।

  • मनी और हेल्थ प्लानिंग में क्यों कमजोर हैं हिन्दी पत्रकार?

    मनी और हेल्थ प्लानिंग में क्यों कमजोर हैं हिन्दी पत्रकार?

    अधिकतर पत्रकार अपनी सेहत के प्रति भी चौकस नहीं रहते

    पत्रकारिता में बीते दो-ढ़ाई दशकों से मनी प्लानिंग और निवेश मेरा प्रिय लेखन-विषय रहा है। मैं हमेशा हैरान रहा कि पूरे देश को राह दिखाने वाले पत्रकारों में से बहुतरे को मैंने मनी प्लानिंग में बेहद कमजोर पाया। अंग्रेजी पत्रकारों की तुलना में हिन्दी पत्रकार बचत, जीवन-मेडिकल बीमा, पीपीएफ खातों और पीएफ अंशदान के बारे में लापरवाह हैं। इस पर सरकार या पत्रकार संगठन एक सर्वें करा ले तो पता लगेगा कि देश के बहुत सारे पत्रकार जिंदगी में अर्थ के महत्व को एकदम नहीं समझते। हाल ही ऑनलाइन जॉब पोर्टल मॉन्स्टर ने देश का ताजा सैलरी इन्डेक्स जारी किया है। इस इन्डेक्स के मुताबिक देश में पत्रकारों की औसत तनख़्वाह 43,849 रुपये प्रतिमाह है। (वैसे औसत का खेल गड़बड़ है। इसमें करोड़ों का पैकज पाने वाले संपादकों और कम वेतन पाने वाले स्ट्रिंगर का वेतन साथ जोड़ दिया जाता है।) इस औसत वेतन से आप खुद अंदाजा लगाइए कि पत्रकारों की माली हालत कैसे सुधरेगी? आखिर वे निवेश के लिए कहां से रकम लाएं? बीमा के लिए पैसे का बंदोबस्त कैसे करें?

    जिस देश में पत्रकारों की नियमित नौकरी की चिंता सरकार को नहीं है वहां उनकी पेंशन की चिंता कौन करे? रिटायरमेंट के बाद मेरे पिताजी को सरकार से जितनी पेंशन मिलती थी उतना वेतन दस-बीस साल का अनुभव होने पर भी पत्रकार को नहीं मिलता…पर असम सरकार ने पत्रकारों के लिए सराहनीय रिटायरमेंट पेंशन योजना लागू की है। श्रमजीवी और मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए 8,000 रुपये प्रति माह पेंशन देने का प्रावधान है। इसी तरह तमिलनाडु में इसी महीने पत्रकारों के लिए पेंशन बढ़ाने की घोषणा की गई। मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए पत्रकाराें की पेंशन आठ हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह की जा रही है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने श्रमजीवी पत्रकारों की सुध ली तो मैं भी लखनऊ पोस्टिंग के दौरान इस पेंशन योजना का लाभकारी बन गया। तब मैं राष्ट्रीय सहारा में था। पर बहुत सारे पत्रकारों को ऐसी पेंशन भी नसीब नहीं है।

    यह सच है कि महानगरों में काम करने वाले बहुतेरे पत्रकार जैसे-तैसे आर्थिक रूप से संपन्न हैं, मगर छोटे शहरों व कस्बों में काम करने वाले पत्रकारों की दशा आज इतनी दयनीय है कि उनकी कमाई से परिवार के लोगों को दो वक्त का खाना मिल जाए, वही बहुत है। हां, यह बात अलग है कि कुछ पत्रकार गलत तरीके से पैसे कमाकर आर्थिक रूप से संपन्न हो रहे है, लेकिन ज्यादातर पत्रकारों को प्रेस की स्वतंत्रता के बावजूद न केवल कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है, बल्कि उनकी जान पर भी खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

    मुझे लगता है कि मीडिया मालिक जान-बूझकर चाहते हैं कि पत्रकारों को मनी मैनेजमेंट की समझ कभी नहीं आए नहीं तो वे बेहतर पैकेज की मांग पर जोर डालेंगे। दैनिक जागरण देश का सबसे बड़ा अखबार होने का दावा करता है। जब मैंने वहां नौकरी शुरू की तो पता चला कि वहां तो बहुतेरे पत्रकार आईटी रिटर्न ही नहीं भरते हैं। कंपनी को भी इसकी फिक्र नहीं थी। यही हाल राष्ट्रीय सहारा समेत तमाम अखबारों में था। (पर लोकमत में आईटी रिटर्न के प्रति पत्रकारों में चेतना थी।) मैंने कुछ पत्रकार साथियों को समझाया कि आईटी रिटर्न भरने के आधार पर बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लिया, कार खरीदी। होम लोन भी लिया जिसकी किस्त अब भी भर रहा हूं। पर अधिकतर पत्रकार न आईटी रिटर्न भरना चाहते थे और न ही लोन लेना चाहते थे। पर मैंने उन्हें इसका महत्व बताने का अभियान जारी रखा। जब भी काम से फुर्सत मिलती तो मैं अपने जूनियर साथियों को अकेले या ग्रुप में इसका महत्व समझाता। आधे से अधिक साथियों पर इसका असर पड़ा और वे आईटी रिटर्न भरने लगे। इससे बहुतेरे पत्रकारों की आर्थिक जिंदगी में बदलाव आने लगा।

    इसका लाभ उन्हें यह मिला कि बैंक ने इनमें से कई को आईटी रिटर्न और मौजूदा वेतन के आधार पर फ्लैट खरीदने पर आसानी से होम लोन दे दिया। तब गाजियाबाद के इंदिरापुरम, वैशाली और वसुंधरा में बहुत सारे पत्रकारों ने तीन से पांच लाख रुपये में फ्लैट खरीद लिए जिसकी कीमत 14-15 साल में छह-सात गुना तक बढ़ गई।

    पर इधर दो-तीन साल से एनसीआर में हमारे कुछ पत्रकार साथी होम लेने के बाद भी बिल्डरों से फ्लैट न मिलने के कारण बहुत ही चिंतित हैं। उनकी गाढ़ी कमाई और होम लोन की किश्त बिल्डर डुबाने पर तुले हुए हैं। खेद है कि सरकार उनकी मदद भी नहीं करना चाहती। इन ईमानदार पत्रकारों का भरोसा टूट रहा है कि आम्रपाली, गार्डेनिया या सुपरटेक सरीखी रियल एस्टेट कंपनियां उन्हें इस जन्म में फ्लैट का पजेशन देंगी। ये पत्रकार बैंक की किस्त छह-सात साल से भर रहे हैं पर उन्हें फ्लैट नहीं मिल रहा। इस कारण मैं अब पत्रकारों को “रेडी टू मूव” फ्लैट लेने की सलाह देता हूं। मैं अब इस बात पर भी जोर देता हूं कि अभी चार-पांच साल तक फ्लैट खरीदने की योजना रोक दें तो इससे उनका भला होगा। एनसीआर में अधिक फ्लैट बन जाने के कारण आजकल यूं ही फ्लैट का किराया सस्ता हो गया है।

    मैं पहले भी कह चुका हूं कि हिन्दी के अधिकतर पत्रकार अपनी सेहत के प्रति भी चौकस नहीं रहते। अखबार मालिकों और टीवी कंपनियों को भी उनके हेल्थ की चिंता नहीं। निरंतर रात्रि ड्यूटी कर तमाम संस्करण निकालने से उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पर भला इसकी चिंता किसे? दस साल पहले दैनिक जागरण के नोएडा स्थित मुख्यालय में सीजीएम निशीकांत ठाकुर की पहल पर योगा सिखाने के लिए सप्ताह में शनिवार को एक गुरु आते थे। पर मैंने पाया कि कुछ पत्रकार योग-कक्षाओं में रुचि नहीं लेते थे जबकि उनके लिए यह फायदेमंद है। इससे न केवल उनकी सेहत और स्मरण शक्ति बढ़ती बल्कि रक्त की धमनियां भी स्वच्छ होतीं। धीरे-धीरे योग गुरु ने दैनिक जागरण में आना बंद कर दिया और पत्रकार भी योग करना भूल गए। पर मेरी निजी जानकारी है कि इधर 10-15 फीसदी पत्रकारों में चेतना आई है और वे और उनकी पत्नी योग कर अपनी सेहत ठीक रखने का प्रयास करते हैं। मीडिया संसंथानों में मैंने हेल्थ कैम्प का आयोजन बहुत कम देखा।

    नौकरी के दौरान कुछ पत्रकारों की असमय मौत भी मैंने देखी। लोकमत, सहारा, जागरण और अमर उजाला में नौकरी में सेवारत पत्रकारों की मौत पर एक दिन का वेतन अंशदान में देने का रिवाज है। इससे पत्रकारों के परिवार का कुछ भला हो जाता है। पर बहुतेरे पत्रकार जीवन बीमा नहीं कराते इससे उनके परिवार को बीमा की एकमुश्त रकम नहीं मिल पाती। मेरे वक्त में पाटलिपुत्र टाइम्स में पीएफ का अंशदान कभी जमा ही नहीं हुआ।हां, जागरण, लोकमत, टाइम्स, हिन्दुस्तान में पीएफ की कटौती वाले पत्रकारों को अब रिटायर होने या मौत होने पर दावेदार को पीएफ की एक मुश्त रकम और लगभग तीन हजार मासिक पेंशन मिल जाती है। कुछ मीडियां कंपनियां अपने पत्रकारों और उनके जीवनसाथी का पिछले 15-20 साल से मेडिकल बीमा भी कर रही हैं। पर यह मेडिकल बीमा 1 से 5 लाख से अधिक नहीं है। अग्रणी मीडिया कंपनियां कम से कम पांच साल नौकरी करने पर ग्रेच्युटी का भी भुगतान कर देती। पर 90 फीसदी मीडिया संस्थान ऐसा नहीं करते। अगर कोई सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं तो सरकार उन्हें आधे रेट पर रेल टिकट देने के साथ ही सीजीएचएस की मेडिकल सुविधा भी देती है। पर यह सुविधा रिपोर्टर और संपादक को ही नसीब है।

    पत्रकारों को नौकरी कब मिले और कब चली जाए, कोई नहीं जानता। मीडिया को सही मायने में स्वतंत्र कैसे बनाया जाए, देश की कार्यपालिका इस पर गंभीरता से सोचे ही नहीं उसको अमल में भी लाए। भोपाल के पत्रकार शिवराज सिंह की प्रतिभावान बेटी ने परिवार की आर्थिक तंगी से परेशान होकर खुदकुशी कर ली। वह आठवीं की छात्रा थी। उसके पत्रकार पिता को कुछ दिन पहले एक प्रमुख दैनिक अखबार की नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद से वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। स्कूल की टॉपर उनकी बेटी पिता पर बोझ नहीं बनना चाहती थी, इसलिए उसने जान दे दी। पत्रकारों के कमजोर मनी मैनेजमेंट का खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ता है। सवाल है कि इस पिता ने शुरू से ही मनी मैनेजमेंट प्लान क्यों नहीं बनाया ताकि नौकरी छूटने पर बच्चों की परवरिश मुश्किल न हो। अगर वह इस मामले में कमजोर थे तो उन्हें शादी नहीं करनी चाहिए थी। पर मेरे इस लेख का यह आशय नहीं है कि सभी पत्रकार मनी मैनेजमेंट में कमजोर होने के कारण परिवार को गहरे मुसीबत में ढकेल देते होंगे। कुछ पत्रकार अकेले घर नहीं चलाते। उनके जीवनसाथी भी नौकरी या बिजनेस कर घर को आर्थिक मजबूती देते, इससे कभी नौकरी छूट जाए या रिटायर्ड हो जाएं तो उन्हें आर्थिक तंगी से नहीं गुजरना पड़ता। पर ऐसे पत्रकारों की संख्या दस फीसदी भी नहीं है।

    लेखक: Roy Tapan Bharati