Category: हेल्थ

  • Women Special: ब्रा की सही साइज क्या होना चाहिए, आपके लिए कौन सी ब्रा है परफेक्ट जानिए सबकुछ!

    Women Special: ब्रा की सही साइज क्या होना चाहिए, आपके लिए कौन सी ब्रा है परफेक्ट जानिए सबकुछ!

    महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़: आपके शरीर के लिए उचित समर्थन

    Women Special:महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़ चुनना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सही साइज़ की ब्रा पहनने से आपके शरीर को उचित समर्थन मिलता है, जिससे आपको दिनभर की गतिविधियों में अधिक आराम मिलता है। एक सही साइज़ की ब्रा चुनने के लिए आपको ध्यान देने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

    • ब्रा के बैंड साइज़ का मापन: ब्रा के बैंड का सही साइज़ चुनने के लिए आपको अपने रीब्स के नीचे स्थित अंतिम बोन के चारों ओर चार उंगलियों के बीच की लंबाई को मापना होगा।
    • कप साइज़ का मापन: अपने सीने की चौड़ाई का मापन करके आप अपने ब्रा के सही कप साइज़ को चुन सकती हैं।
    • अपने आकार के अनुसार सही ब्रा चुनें: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए सही साइज़ की ब्रा चुनते समय अपने आकार को महत्वपूर्ण रूप से ध्यान में रखना चाहिए।

    Women Special:ब्रा की गुणवत्ता: आराम और दिखावट के साथ समृद्ध

    ब्रा की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रा न केवल आराम देती है, बल्कि वह आपके शरीर के लिए भी अच्छी होती है। ब्रा की गुणवत्ता को चुनते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

    • फैब्रिक का गुणवत्ता: ब्रा की गुणवत्ता में फैब्रिक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आपको अपने लिए सही फैब्रिक का चयन करना चाहिए, जो आपको आराम और स्वेता से बचाए रखे।
    • सिलाई की गुणवत्ता: ब्रा की सही सिलाई और मजबूती भी उसकी गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण होती है।
    • ब्रा की पुनर्नवीनीकरण क्षमता: ब्रा की गुणवत्ता के लिए उत्पादन की गुणवत्ता और उसकी पुनर्नवीनीकरण क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

    Women Special:ब्रा की गुणवत्ता और साइज़ की देखभाल: देखभाल और रख रखाव

    एक अच्छी ब्रा की गुणवत्ता और साइज़ की देखभाल करने के लिए आप निम्नलिखित सुझावों का पालन कर सकती हैं:

    • ब्रा को हल्के धूप में सुखाएं: अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रा को हल्के धूप में सुखाने से उसके फैब्रिक की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है।
    • हल्के धुलाई के लिए नरम डिटर्जेंट का उपयोग करें: ब्रा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको उसे हल्के डिटर्जेंट से धोना चाहिए।
    • ब्रा को हमेशा हैंगर पर रखें: ब्रा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको उसे हमेशा हैंगर पर रखना चाहिए।

    महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़ और गुणवत्ता का ध्यान रखना उनके स्वास्थ्य और सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, सही साइज़ और गुणवत्ता वाली ब्रा चुनने के लिए व्यापारिक ब्रांडों की अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रांड चुनना उपयुक्त हो सकता है।

  • Painkillers Side Effects:अब बिना पर्चे के केमिस्ट नहीं बेच सकेंगे दवा, दिल्ली सरकार का मेडिकल स्टोर्स को आदेश

    Painkillers Side Effects:अब बिना पर्चे के केमिस्ट नहीं बेच सकेंगे दवा, दिल्ली सरकार का मेडिकल स्टोर्स को आदेश

    डिपार्टमेंट ऑफ ड्रग कंट्रोल ने केमिस्ट को पेनकिलर्स दवाओं का रिकॉर्ड रखने की भी सलाह दी है. अगर कोई इस नियम को नहीं मानेगा तो उसपर कार्रवाई की जाएगी

    Painkillers Side Effects:आजकल की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में, लोग अक्सर अपने आप को दर्द से जूझते हुए पाते हैं। माइग्रेन, सिरदर्द, पेट दर्द, या किसी और कारण से होने वाले दर्द को कम करने के लिए अक्सर लोग बिना किसी डॉक्टर की सलाह के ही पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि दवा की बेतरतीब खपत और गलत इस्तेमाल होता है, जो अक्सर नुकसानदायक होता है।

    Painkillers Side Effects: इस समस्या को समझते हुए, दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब से, दिल्ली में केमिस्ट्स को निर्देश दिया गया है कि वे डॉक्टर की पर्ची के बिना किसी भी पेनकिलर्स की बिक्री न करें। यह निर्णय दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए है और लोगों को सही सलाह की ओर प्रोत्साहित करने के लिए है।

    Painkillers Side Effects: इस निर्णय के पीछे की कहानी कुछ इस तरह है। दिल्ली में अनेक लोग दर्द से पीड़ित होते हैं, लेकिन बहुत से लोग अपने डॉक्टर के पास जाने का समय नहीं निकाल पाते। इसलिए वे केमिस्ट्स के पास जाकर बिना किसी परेशानी के पेनकिलर्स लेते हैं। लेकिन ऐसा करने से जो नुकसान होता है, वह कितना बड़ा हो सकता है, यह किसी को नहीं पता होता।

    इस समस्या को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार ने केमिस्ट्स को अब सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची के साथ ही पेनकिलर्स की बिक्री करें। इससे न केवल लोगों की सेहत में संवेदनशीलता बढ़ेगी, बल्कि यह उन्हें सही सलाह के लिए डॉक्टर के पास जाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।

    इस निर्णय से न केवल दिल्ली में दवाओं के सही उपयोग की चर्चा होगी, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण कदम है सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में। आओ, हम सभी इस नए निर्देश का स्वागत करें और अपनी सेहत की देखभाल में सावधानी बरतें। यह हमारे लिए ही नहीं, बल्कि हमारे परिवार और समाज के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

  • Dental Tips: गर्मी के मौसम में दांतों की समस्याओं से कैसे पाएं निजात, जानिए नोएडा के जाने माने डेंटिस्ट डॉ ए. एस. मलिक के टिप्स

    Dental Tips: गर्मी के मौसम में दांतों की समस्याओं से कैसे पाएं निजात, जानिए नोएडा के जाने माने डेंटिस्ट डॉ ए. एस. मलिक के टिप्स

    Dental Tips: दांतों की उचित देखभाल हर मौसम में जरूरी है लेकिन गर्मियों में कई ऐसे कारण होते हैं, जिससे दांतों में तकलीफ बढ़ जाती है. इसलिए दांतों की उचित देखभाल जरुरी हो जाता है। गर्मी के मौसम के साथ आती हैं बेहद खास छुट्टियाँ और मौज-मस्ती का समय, लेकिन इसके साथ ही बच्चों और वयस्कों को दांतों की सेहत पर भी सावधानी बरतनी चाहिए। गर्मी के मौसम में दांतों की समस्याओं से कैसे पाएं निजात बता रहे हैं नोएडा के जाने माने डेंटिस्ट डॉ ए. एस. मलिक।

    दांतों के लिए गर्मी का खतरा

    गर्मी के मौसम में लू के अलावा कई और बीमारियों का खतरा बनता है। चिकनपॉक्स, खसरा, सनबर्न और अन्य गर्मियों की बीमारियों के साथ-साथ, गर्मियों के दौरान विभिन्न कष्टप्रद दंत समस्याएं भी होती हैं।

    कारण

    1. निर्जलीकरण: गर्मियों में शरीर का तापमान बढ़ने के कारण डिहाइड्रेशन हो जाता है, जिससे दांतों की सेल्यूलर स्वस्थ्यता प्रभावित होती है।
    2. शीतल पेय में मौजूद एसिड: शीतल पेयों में शर्करा और अम्लीय घटक होते हैं जो दांतों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
    3. गर्मी: अधिक तापमान में दांतों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो दांतों के दर्द का कारण बनता है।
    4. दांतों में सूक्ष्म चोटों का खतरा: गर्मी के मौसम में दांतों पर होने वाली चोटें ज्यादा बदतर होती हैं।

    सावधानियाँ और सुझाव

    1. नियमित तौर पर पानी पीने से नमी की कमी नहीं होगी और दांतों की सेल्यूलर स्वस्थ्यता बनी रहेगी।
    2. गर्मी के मौसम में शर्करा और अम्लीय पेयों की बजाय प्राकृतिक पेयों का सेवन करें।
    3. दिन में बार-बार मुंह को धोने से दांतों की सफाई बनी रहेगी।

      इन बातों का भी रखें ध्यान

      हर 6 महीने में डेंटिस के पास ज़ाकर दांतों को चेक करवाएं। अगर आपके दांत ज़्यादा सेंसिटिव है तो सेंसिटिव स्पेशल टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। साथ ही एक्स्ट्रा सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करें, इससे आपके दांत सुरक्षित और मजबूत रहेंगे। ब्रश को दातों पर ज़्यादा ज़ोर से न रगड़ें।

  • इनोवेशन डिजाइन एंड एंटरप्रेन्योरशिप के पांच दिवस बूट कैंप कार्यक्रम का फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन ने किया उद्घाटन

    इनोवेशन डिजाइन एंड एंटरप्रेन्योरशिप के पांच दिवस बूट कैंप कार्यक्रम का फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन ने किया उद्घाटन

    नोएडा: सैक्टर 62 जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी में 29 जनवरी से 2 फरवरी 2024 तक इनोवेशन डिजाइन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (आईडीई) पर पांच दिवस बूट कैंप कार्यक्रम शुरू किया। जिसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और शिक्षा मंत्रालय का इनोवेशन सेल (एमआईसी) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। सोमवार को एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर टी.जी सीथाराम और फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता ने संयुक्त रुप से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवर्तनक छात्रों, शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों और स्कूलों के संकाय सदस्यों को डिजाइन सोच, उत्पाद डिजाइन, एर्गोनॉमिक्स, बिजनेस मॉडलिंग और उद्यम योजना पर गहन अनुभवात्मक प्रशिक्षण प्राप्त करवाना है।
    कार्यक्रम में फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि देश में उद्यमशीलता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस आवश्यक गतिविधि का हिस्सा होने पर गर्व है। युवा इनोवेटर्स को उद्यमियों में बदलने के लिए उनके नवीन विचारों को आकार देने में समर्थन देने के केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन के दृष्टिकोण के आधार पर संकल्पित यह कार्यक्रम उन नव प्रवर्तकों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो उद्यमिता का मार्ग तलाशना चाहते हैं और नौकरी चाहने वालों की तुलना में नौकरी निर्माता बनना चाहते हैं। कार्यक्रम के जरिए प्रतिभागियों को डिजाइनिंग सोच और उसकी रणनीतियों, उत्पाद डिजाइन और इंजीनियरिंग, उत्पाद डिजाइन और विकास में एर्गोनॉमिक्स, स्थायी व्यापार मॉडल, मूल्य प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के निर्माण पर अनुभवात्मक प्रशिक्षण मिलेगा। इस बूट कैंप का एक अन्य मुख्य आकर्षण मेंटरिंग और पिचिंग राउंड होगा जहां प्रतिभागियों को संस्थान से संभावित मेंटरिंग समर्थन के लिए अपने विचारों को पेश करने का अवसर मिलेगा

  • फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता को वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के लिए आमंत्रित किया गया

    फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता को वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के लिए आमंत्रित किया गया

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (वीजीजीएस) के 10वें संस्करण से पहले गुजरात सरकार ने फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता और निदेशक डॉ रश्मि गुप्ता को आमंत्रित किया। सोमवार छह नवंबर को लखनऊ में रोड शो का आयोजन हुआ। गुजरात के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री रुशिकेश पटेल ने इस रोड शो का नेतृत्व किया।
    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के 10वें संस्करण से पहले राज्य सरकार ने उद्योग जगत के अग्रणियों से बातचीत करने और उन्हें आगामी VGGS में आमंत्रित करने के लिए कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रोड शो का आयोजन किया। नई दिल्ली में कर्टन रेजर कार्यक्रम की सफलता और मुंबई, कोलकाता, चंडीगढ़, चेन्नई, जापान, यूरोप, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और दक्षिण कोरिया में सफल रोड शो के बाद, गुजरात सरकार ने सोमवार को लखनऊ में रोड शो का आयोजन किया।

    फेलिक्स अस्पताल के संस्थापक डॉ. डीके गुप्ता और डॉ. रश्मी गुप्ता ने ग्लोबल समिट में कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की | उन्होंने बताया किस प्रकार फ़ेलिक्स अस्पताल अपने कोलेब्रेशन के साथ गुजरात की जनता तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा सकता है | डॉ. रश्मी गुप्ता ने कहा फेलिक्स अस्पताल उच्चतम स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए और घर-2 तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए लगातार प्रयाश कर रहा है । उन्होंने हेल्थ केयर को विस्तृत रूप देने, पब्लिक एवं प्राइवेट सहयोग, सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज और समाज में प्रतिष्ठित लोगों के सहयोग से सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने पर चर्चा की |

    श्री रुशिकेश पटेल और फेलिक्स हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. डीके गुप्ता के बीच चर्चा के दौरान, निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया। इन बिंदुओं में स्वास्थ्य देखभाल को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड की भूमिका , लगातार उच्च स्तर का पेशेंट सैटिस्फैक्शन, क्वालिटी हेल्थकेयर जैसे महत्त्वपूर्ण विषय शामिल थे। चर्चा में अन्य विषय पर भी ध्यान केंद्रित हुआ जैसे पीपीपी मॉडल के माध्यम से सरकार के साथ सहयोग, राज्य में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक और निजी दोनों के लिए पारस्परिक लाभ। डॉ. गुप्ता ने उन निवेशकों का खुले दिल से स्वागत करने की मंशा जताई जो उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का मकशद रखते है, जितना दृष्टिकोण दीर्घकालिक स्थिरता और उत्कृष्टता सुनिश्चित करना है । इसके अतिरिक्त, बातचीत में स्वास्थ्य विभाग में नए अवसर , मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और गुजरात में रोबस्ट हेल्थकेयर सिस्टम बनाने के लिए संस्थान, आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, सामुदायिक सहयोग , बुनियादी ढाँचा और हरित स्वास्थ्य सेवा पहल सभी चर्चा के अभिन्न अंग थे। गुजरात सरकार के प्रतिनिधिमंडल और फेलिक्स अस्पताल के बीच जुड़ाव एक सकारात्मक कदम है | गुजरात में स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच और सेवाओं को बढ़ाने की दिशा में चर्चाएँ सफल रहीं | इस आमंत्रण के अवसर पर डॉ. डीके गुप्ता और डॉ. रश्मी गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री के साथ एक भोजन भी किया। इस भोजन के दौरान महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषयों पर चर्चा की गई|

    गुजरात के माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, उच्च और तकनीकी शिक्षा, कानून, न्याय, विधायी और संसदीय मामलों के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने आरएसपीएल ग्रुप, वी गार्ड, सनसोर्स एनर्जी और ल्यूमिनस पॉवर टेक्नोलॉजीस जैसे संगठनों के प्रमुखों के साथ बैठकें की। उनके संबोधन के बाद वाइब्रेंट गुजरात 2024 को लेकर प्रमोशनल फिल्म की स्क्रीनिंग भी हुई। फिर गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल विभाग की प्रमुख सचिव आईएएस ममता वर्मा की ओर से गुजरात में मौजूद व्यावसायिक अवसरों पर एक प्रजेंटेशन दी गई। कार्यक्रम के दौरान एक्सपीरियंस शेयरिंग सेशन भी हुआ। इसके बाद गुजरात सरकार के माननीय मंत्री ऋषिकेश पटेल सभी को संबोधित किया। रोड शो के बाद मंत्री रुशिकेश पटेल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस रोड शो का उद्देश्य गुजरात को वाइब्रेंट गुजरात 2024 के माध्यम से ‘गेटवे टू द फ्यूचर’ के रूप में स्थापित करना है। इससे दुनिया भर के कारोबार और कंपनियों को गुजरात के अलग-अलग सेक्टर से जुड़ने और उन्हें एक्सप्लोर करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, यह रोड शो गुजरात के फ्यूचर-रेडी मेगा प्रोजेक्ट जैसे गिफ्ट सिटी, धोलेरा एसआईआर और मंडल बेचारजी एसआईआर के लिए निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा।

  • World Heart Day 2023: विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य पर फेलिक्स अस्पताल ने आयोजित किया वॉकथाॅन

    World Heart Day 2023: विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य पर फेलिक्स अस्पताल ने आयोजित किया वॉकथाॅन

    World Heart Day 2023: सेक्टर 137 फेलिक्स अस्पताल की ओर से शुक्रवार को विश्व हृदय दिवस पर वॉकथाॅन का आयोजन हुआ। जिसमें सोसाइटी में रहने वाले लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर दिल को स्वस्थ रहने के प्रति जागरूकता का संकल्प लिया । सुबह 6 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में भाग लेने वालों को अस्पताल के तरफ से टीशर्ट के साथ-साथ नाश्ता भी वितरित किया गया। फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डी.के गुप्ता ने लोगों को जागरूकता का संदेश दिया कि तनाव, नशा, और खराब जीवन शैली से लोगों को दिल की बीमारी हो रही है। अब हार्ट अटैक ने आयु सीमा का बैरियर भी तोड़ दिया है। 30 से 40 वर्ष के लोगों में हार्ट अटैक की शिकायत बढ़ गई है। जिस में व्यायाम करते, नाचते-गाते, चलते हुए अचानक मौत होने के कई मामले इन दिनों तेज़ी से सामने आ रहे हैं। खड़े-खड़े व्यक्ति मौत के मुँह में समा रहा है। लोगों के दिल कमज़ोर हो रहे हैं। दिल पर दबाव अधिक होते ही सांस फूलने लगती है। थोड़ा भी उत्साह वह झेल नहीं पा रहे। खड़े-खड़े हृदयगति रुक जा रही है। खासतौर से युवाओं में ऐसे मामले बढ़े हैं।

    हृदय को स्वस्थ रखने की महत्ता के प्रति समाज को जागरूक रखने के लिए ही हर वर्ष 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस का आयोजन किया जाता है। बीते 2 साल में हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं। मरीजों की मृत्यु तक हो रही है। ज़रूरी है कि युवा जिम जाने से पहले अपने हृदय का चेकअप अवश्य करा लें। हार्ट अटैक की बीमारी पहले 50 से 70 वर्ष की अविधि में होती थी। लेकिन कोविड-19 के बाद से ट्रेंड बदला है। अब 100 मरीजों में से आधे मरीज 30 से 50 वर्ष की आयु वाले पहुंच रहे हैं। जांच में किसी का हृदय बीमार होता है, किसी के हृदय की मांसपेशियों में दिक्कत होती है, किसी के ब्लॉकेज हैं। शेष मरीज 50 वर्ष की आयु के ऊपर वाले आते हैं।

    कोविड के बाद से अधिकांश मरीजों के एचएस-सीआरपी में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। यह भी हार्ट अटैक का बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है। हार्ट अटैक के पीछे – स्मोकिंग, व्यस्त जीवन शैली के कारण अनियमित आहार, जंक फूड खाना, या अधिक मसालेदार भोजन दिल के दौरे का प्रमुख कारण हैं । हृदय संबंधी परेशानियां होने पर मरीजों को शुरुआत में ही संकेत मिलने लगते हैं। जिन्हें लंबे समय तक वह नजरंदाज करते हैं। बीपी का घटना-बढ़ना, सांस फूलना, छाती में दर्द, पल्स का कम ज्यादा होना, चक्कर आने जैसे लक्षणों को लोग गंभीरता से नहीं लेते। हृदय कमजोर होता जाता है। पंपिंग भी कम होने लगती है। किसी तीव्र गतिविधि के दौरान हृदय पर जोर पड़ता है और एकाएक व्यक्ति की मौत हो जाती है।

    युवाओं में कठोर मांसपेशियों युक्त बॉडी बनाने का क्रेज़ बहुत तेजी से उफान मार रहा है। वह घंटों जिम में कसरत कर रहे हैं। साथ ही कीटो डाइट भी उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई है। यही दोनों चीजें उनके दिल की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। मसल्स बनाने का जुनून लेकर कड़ी कसरत करने वाले युवाओं में अचानक हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। हैवी वर्कआउट एवं वेट लिफ्टिंग से दिल की मांसपेशियों का मोटा होना खतरनाक साबित हो रहा है और शरीर पर लगातार नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। धमनियों में खून का प्रवाह रुकने से अचानक हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। जिम जाने के साथ स्टेराइड युक्त प्रोटीन का सेवन इसका मुख्य कारण है।

    ये हैं कमजोर दिल के लक्षण
    ● सांस लेने में दिक्कत
    ● जल्दी थकना
    ● सांस फूलना
    ● सीने में दर्द
    ● जलन,
    ● सिर घूमना
    ● पेट और सीने में एक साथ दर्द होना
    ● बीपी बढ़ना / घटना

    इन बातों का रखें ख़ास ध्यान———————

    -प्रतिदिन व्यायाम और योग करें
    -तनाव मुक्त रहें
    -रेशेदार भोजन करें, फास्ट फूड और तैलीय भोजन खाने से बचें
    -कोलेस्ट्रॉल, बीपी, शुगर, वेट नियंत्रित रखें
    -सिगरेट, तंबाकू और अल्कोहल का प्रयोग बिल्कुल न करें
    -हर 6 माह के अंतराल पर हार्ट से संबंधित जरूरी जांच कराते रहें ।

  • Rabies symptoms and treatment:कुत्ते के काटने से फैल सकता है रेबीज़ , जानिए कितनी खतरनाक है ये बीमारी ?

    Rabies symptoms and treatment:कुत्ते के काटने से फैल सकता है रेबीज़ , जानिए कितनी खतरनाक है ये बीमारी ?

    Rabies symptoms and treatment:भारत रेबीज़ बहुत से मामले देखने को मिलते है एवं विश्व में रेबीज़ से होने वाली कुल मौतों में 36% मौतें भारत में होती है |
    रेबीज़ से प्रत्येक वर्ष 18000-20000 मृत्यु हो जाती है। भारत में रिपोर्ट किये गए रेबीज़ के लगभग 30-60% मामले एवं मौतों में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं, क्योंकि बच्चों में काटने के निशान को अक्सर पहचाना नहीं जाता एवं रिपोर्ट नहीं किया जाता है।
    भारत में मानव रेबीज़ के लगभग 97% मामलों के लिये कुत्ते ज़िम्मेदार हैं, इसके बाद बिल्लियाँ (2%), गीदड़, नेवले एवं अन्य (1%) हैं। यह रोग पूरे देश में स्थानिक है।

    रेबीज क्या है ?
    रेबीज एक बीमारी है जो कि रेबीज नामक विषाणु से होते हैं यह मुख्य रूप से पशुओं की बीमारी है लेकिन संक्रमित पशुओं द्वारा मनुष्यों में भी हो जाती यह विषाणु संक्रमित पशुओं के लार में रहता है उअर जब कोई पशु मनुष्य को काट लेता है यह विषाणु मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है।यह भी बहुत मुमकिन होता है कि संक्रमित लार से किसी की आँख, मुहँ या खुले घाव से संक्रमण होता है।इस बीमारी के लक्षण मनुष्यों में कई महीनों से लेकर कई वर्षों तक में दिखाई देते हैं।लेकिन साधारणतः मनुष्यों में ये लक्षण 1 से 3 महीनों में दिखाई देते हैं।

    रेबीज कैसे फैलता है ?
    रेबीज से संक्रमित जानवर के काटने से रेबीज का संक्रमण फैलता है. ज्यादातर मामलों में मनुष्यों में यह बीमारी कुत्ते के काटने या खरोंचने से भी होती है (90 प्रतिशत से ज्यादा).

    रेबीज बीमारी के मुख्य लक्षण क्या होते हैं?
    रेबीज बीमारी के लक्षण संक्रमित पशुओं के काटने के बाद या कुछ दिनों में लक्षण प्रकट होने लगते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में रोग के लक्षण प्रकट होने में कई दिनों से लेकर कई वर्षों तक लग जाते हैं।रेबीज बीमारी का एक खास लक्षण यह है कि जहाँ पर पशु काटते हैं उस जगह की मासपेशियों में सनसनाहट की भावना पैदा हो जाती है।विषाणु के रोगों के शरीर में पहुँचने के बाद विषाणु नसों द्वारा मष्तिक में पहुँच जाते हैं और निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे-

    दर्द होना
    थकावट महसूस करना।
    सिरदर्द होना।
    बुखार आना।
    मांसपेशियों में जकड़न होना।
    घूमना-फिरना ज्यादा हो जाता है।
    चिड़चिड़ा होना था उग्र स्वाभाव होना।
    व्याकुल होना।
    अजोबो-गरीबो विचार आना।
    कमजोरी होना तथा लकवा हों।
    लार व आंसुओं का बनना ज्यादा हो जाता है।
    तेज रौशनी, आवाज से चिड़न होने लगते हैं।
    बोलने में बड़ी तकलीफ होती है।
    अचानक आक्रमण का धावा बोलना।
    जब संक्रमण बहुत अधिक हो जाता है और नसों तक पहुँच जाता है तो निम्न लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं जैसे

    सभी चीजों/वस्तुएं आदि दो दिखाई देने लगती हैं।
    मुंह की मांसपेशियों को घुमाने में परेशानी होने लगती है।
    शरीर मध्यभाग या उदर को वक्ष:स्थल से अलग निकाली पेशी का घुमान विचित्र प्रकार का होने लगता है।
    लार ज्यादा बनने लगी है और मुंह में झाग बनने लगते हैं।

    रेबीज किन किन जानवरों से फैलता है ?
    रेबीज बीमारी कुत्तों, बंदरों और बिल्लियों  के काटने पर इंसानों में फैलती है. आमतौर पर कुत्तों के काटने पर इंसानों में यह बीमारी फैलती है |

    रेबीज का क्या इलाज है ?
    एक बार संक्रमण पकड़ में आने के बाद रेबीज का कोई इलाज नहीं है। हालांकि कुछ लोग जीवित रहने में कामयाब रहे हैं, बीमारी आमतौर पर मृत्यु में परिणत होती है। अगर आपको लगता है कि आप रेबीज के संपर्क में आ गए हैं, तो आपको बीमारी को घातक बनने से रोकने के लिए कई टीके लगवाने चाहिए।

     

    जिन लोगों के घर में पालतू जानवर या कुत्ते है, वो क्या सावधानी रखें ?
    किसी भी जानवर को पालने के लिए सबसे जरूरी होता है उसका खानपान और उसको दिया जाने वाला माहौल. ताकि आपका पालतू जानवर किसी को अपना शिकार न बनाये.

    वैक्सीनेशन:
    किसी भी जानवर को पालने के बाद पहला और सबसे जरूरी काम है वैक्सीनेशन, ताकि घर में रहने वाले किसी सदस्य या बाहर से आने वाले किसी इंसान के साथ खेलते हुए गलती से या जानबूझकर काटने से कोई गंभीर समस्या न हो, अगर आपके पालतू जानवर का वैक्सीनेशन प्रॉपर समय से होता है तो आप रैबीज जैसी बीमारी से लगभग निश्चिन्त हो सकते हैं.

    कुत्ता काट ले तो क्या करना चाहिए?
    जब भी कुत्ता काटे तो सबसे पहले उस जगह को धो लेना चाहिए. इसके लिए डिटर्जेंट साबुन जैसे कि रिन या सर्फ एक्सेल साबुन से इसे अच्छी तरह धो लें. अगर जख्म बहुत गहरा है तो इस जगह पर पहले साबुन से धोएं और उसके बाद बिटाडिन मलहम लगा लें. इससे रैबीज वायरस का असर थोड़ा कम हो जाता है. लेकिन इसे अच्छी तरह से क्लीन करना जरूरी है. इसके साथ ही कुत्ते काटने पर रेबीज का वैक्सीन, एंटीबाडीज़,एवं टेटनस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए.
    कब लगवाएं इंजेक्शन
    24 घंटे के अंदर आपको रैबीज का वैक्सीन एवं इसकी ४-५ डोज़ का पूरा कोर्स करना चाहिए. आमतौर पर कुत्ते काटने के बाद 5 इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ती है. इसके लिए पहला शॉट 24 घंटे के अंदर लगना चाहिए. इसके बाद तीसरे दिन, सांतवें दिन, 14 वें दिन और अंत में 28वें दिन में लगता है.
    48 घंटे के अंदर काटे हुए शरीर के भाग पे immunoglobulin देना चाहिए,
    समय पर इंजेक्शन न देने पर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

    कुत्ते के काटने पर क्या नहीं करना चाहिए ?

    ध्यान रखें कि कुत्ता काटने के बाद घाव पर पट्टी नहीं बांधना चाहिए. घाव पर तेल, हल्दी या किसी घरेलु चीज़ को लगाने से बचें | घाव को धोने के बाद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ताकि डॉक्टर इसकी गंभीरता के आधार पर इलाज कर सके.

    कुत्ते के काटने का प्राथमिक उपचार

    डॉक्टर कहते हैं, कुत्ते के काटने के बाद शीघ्रता से इसके लिए प्राथमिक उपचार लेना चाहिए। यदि काटे हुए जगह पर घाव नहीं है तो उस हिस्से को गर्म पानी और साबुन से धो लें। आप एहतियात के तौर पर जीवाणुरोधी लोशन भी लगा सकते हैं। यदि काटने के बाद वहां जख्म है तो उस हिस्से को धोने के बाद कोई एंटीसेप्टिक लगाएं और तुरंत रेबीज के इंजेक्शन के लिए अस्पताल जाएं।

  • फेलिक्स अस्पताल को मिला बेस्ट मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवार्ड

    फेलिक्स अस्पताल को मिला बेस्ट मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवार्ड

    फेलिक्स अस्पताल को ASSOCHAM ने बेस्ट मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के अवार्ड से नवाज़ा , अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डी. के. गुप्ता ने इस अवार्ड फंक्शन में Accelerating capacity and scale-up of healthcare Eco system (हेल्थकेयर इको सिस्टम की क्षमता और हेल्थकेयर को आगे बढ़ाने) पर बात की |
    आपको बता दें एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) देश का सबसे पुराना शीर्ष चैंबर है। यह 4,50,000 से अधिक सदस्यों के अपने नेटवर्क का लाभ उठाते हुए, भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है |

    फेलिक्स हॉस्पिटल, स्वास्थ्य सेवा में एक जाना माना नाम बन चुका है , भारत के एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, एसोचैम द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित दूसरे हेल्थकेयर शिखर सम्मेलन पुरस्कारों में फेलिक्स अस्पताल ने अपना नाम अंकित किया है | इसमें 100 से अधिक अस्पतालों ने भागीदारी ली और फेलिक्स अग्रणी रहा | इसकी प्रक्रिया में ASSOCHAM ने देश के विभिन्न अस्पतालों को अनेकों मापदंडों पर परखा था | जिसमें पहले अस्पतालों की स्क्रीनिंग की गयी, उनके बाद विभिन्न मापदंडों (पेशेंट रेटिंग, स्वास्थ्य सुविधाएँ, साफ़ सफाई एवं पेशेंट ही सर्वोपरि है की भावना ) के आधार पर शॉर्टलिस्ट करके अस्पतालों को रैंकिंग दी गयी |

    सर्वश्रेष्ठ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल श्रेणी में अच्छी-खासी प्रशंसा के अलावा, फेलिक्स हॉस्पिटल “फंडिंग फ्यूल-एक्सेलरेटिंग कैपेसिटी एंड स्केल अप ऑफ हेल्थकेयर इकोसिस्टम” विषय पर इवेंट के पैनल चर्चा में अपनी भागीदारी पर भी गर्व करता है। फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डी. गुप्ता ने न केवल सम्मानित ट्रॉफी प्राप्त की, बल्कि एक पैनेलिस्ट के रूप में पैनल चर्चा के दौरान मूल्यवान दृष्टिकोण भी साझा किए। डॉ. गुप्ता ने हैल्थकेयर सेक्टर फंडिंग एवं हेल्थकेयर ग्रोथ पर प्रकाश डाला |

    पुरस्कार समारोह ने स्वास्थ्य सेवा उद्योग में excellence को बढ़ावा देने और प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए एसोचैम की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। विभिन्न पुरस्कार श्रेणियों में उन संगठनों और व्यक्तियों के असाधारण प्रयासों पर प्रकाश डाला गया जो रोगी देखभाल, तकनीकी प्रगति, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और दूरदर्शी नेतृत्व में अग्रणी हैं।

    फ़ेलिक्स हॉस्पिटल इस मान्यता को पाकर सम्मानित महसूस कर रहा है और वह गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के अपने मिशन के प्रति समर्पित है जो रोगी देखभाल, सुरक्षा और नवीनीकरण में मानक स्थापित करती है।

  • अपने दांतों को कैसे रखें Fit And Fine बता रहे हैं डॉक्टर ए.एस.मलिक

    अपने दांतों को कैसे रखें Fit And Fine बता रहे हैं डॉक्टर ए.एस.मलिक

    नोएडा: दांतों को कैसे रखें Fit And Fine ओरल हेल्‍थ एक गंभीर समस्‍या है ज‍िसे आपको नजरअंदाज नहीं करना चाह‍िए इसका बुरा असर लोगों पर पड़ता है। अगर आप दांतों की सफाई अच्‍छी तरह से नहीं करते हैं तो आपको दांत में कैव‍िटी होने पर तेज दर्द की समस्‍या हो सकती है और ज्‍यादा लंबे समय तक अगर आप इसे टालेंगे तो आपको रूट कैनाल करवाना पड़ सकता है वहीं और देरी करने में दांत न‍िकालने की नौबत आ सकती है, ऐसा न हो उसके ल‍िए आपको दांतों का खास ख्‍याल रखना चाह‍िए।

    नोएडा के भंगेल में अपना डेंटल क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टर ए.एस मलिक ने दांतों को स्वस्थ रखने के कई टिप्स दिए हैं। पायरिया या पीरियोडोंटाइटिस मसूड़ों का गंभीर संक्रमण है, जो लोगों के बीच काफी सामान्य है। दुनिया में 90 प्रतिशत लोग पायरिया से जूझ रहे हैं, लेकिन समस्या ये है कि लोगों को इसके इलाज की बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। डॉक्टर ए.एस मलिक  के अनुसार, हमारे दांतों में बैक्टीरिया की कई प्रजातियां होती हैं। जब ये बैक्टीरिया धीरे-धीरे हमारे दांतों के आसपास जमना शुरू हो जाते हैं, तो जो खाना हम खाते हैं, उससे इन्हें न्यूट्रिशन मिलता है और ये हमारे दांतों के आसपास जमकर मसूड़े और जबड़े की हड्डी को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे हड्डी गलना शुरू हो जाती है, तो इस बीमारी को पायरिया कहते हैं। समय रहते इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया , तो यह बढ़कर इतना फैल जाती है कि दांत हिलना शुरू हो जाते हैं। एक बार दांत निकल गए तो , इन्हें रिप्लेस कराना न केवल टाइम कंज्यूमिंग है, बल्कि बहुत मुश्किल भी है। डॉक्टर्स के अनुसार हड्डी और दातों के डैमेज को रोकने के लिए मौखिक स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।

    पायरिया का इलाज

    • टैटार को नियमित रूप से ब्रश करने से या घर पर नहीं हटाया जा सकता, इसके लिए आपको डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।
    • आपका डॉक्टर स्केलिंग ऑर पॉलिशिंग प्रोसेस की मदद से दातों पर जमा मैल को हटा सकता है।
    • डॉक्टर आपको  ब्रश करने के सही तरीके के बारे में बताएंगे, जो ओरल हाइजीन रखने में आपकी मदद करेगा।
    • स्वस्थ मसूड़ों के लिए दिन में दो से तीन बार मुंह धोने के लिए हल्के गर्म पानी में 1 चम्मच नमक डालकर कुल्ला करें।
    • कुछ मामलों में डेंटिस्ट मसूडों को संक्रमण से बचाने के लिए एंटीबायोटिक लिख सकता है। एंटीबायोटिक एक माउथवॉश, जेल, ओरल टैबलेट या कैप्सूल के रूप में हो सकता है।
    • यदि उन जगहों पर सूजन लगातार बनी रहे, जहां ब्रश नहीं पहुंच सकता, तो डॉक्टर मसूडों के नीचे जमाव को साफ करने के लिए फ्लैप सर्जरी के लिए कह सकता है। इसमें एनेस्थिशिया की मदद से आपके मसूड़े हटा दिए जाते हैं और दांतों की जड़े एकदम साफ हो जाती हैं। इसके बाद मसूडों को फिर से सिल दिया जाता है।

    आपको बता दें कि डॉक्टर ए एस मलिक नोएडा के अच्छे डेंटिस्टों में से एक है उनको करीब 43 साल का अनुभव है। डॉक्टर मलिक का क्लिनिक  गेझा रोड भंगेल नियर टीवीएस शोरूम के पास है। वह रूट कैनाल उपचार सहित रूटीन सर्जिकल प्रक्रियाओं और पुनर्स्थापनात्मक दंत चिकित्सा में विशेषज्ञता रखते हैं। वे सर्वोत्तम और नवीनतम तकनीकों और उपकरणों का उपयोग करते हैं।

  • मकर संक्रांति पर संगम स्नान के लिए गाइडलाइन्स जारी

    मकर संक्रांति पर संगम स्नान के लिए गाइडलाइन्स जारी

    लखनऊ: कोरोना की बढ़ती रफ़्तार के बीच प्रदेश सरकार ने 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति को पहले स्नान के लिए प्रयागराज के संगम में स्नान के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कर दी है. मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की तरफ़ से मकर संक्रांति और माघ मेला स्नान को लेकर गुरुवार को दिशा निर्देश जारी कर दिए गए. नए नियम के मुताबिक मकर संक्रांति और माघ मेले में उन्हीं लोगों को एंट्री दी जाएगी जिन्होंने कोविड वैक्सीन की दोनों डोज ले ली है. साथ ही कोरोना के लक्षण वाले लोगों से अपील की गई है कि वे स्नान के लिए संगम न जाएं.


    संगम में स्नान के लिए ये होंगे नियम:-

    विभिन्न बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति, वरिष्ठ नागरिक, गर्भवती महिलायें, बच्चें तथा ऐसे व्यक्ति जिनमें कोविड के लक्षण जैसे – खाँसी , जुखाम , बुखार इत्यादि हैं , को मेला / स्नान वाली जगह पर न जाने का अनुरोध किया जाये.

    स्नान/मेले वाले स्थान पर पर्याप्त पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से लोगों को कोविड के संबंध में जागरूक किया जाये. आम जनमानस को मास्क लगाने, भीड़ एकत्रित न करने और कोविड गाइडलाइन्स के अनुपालन के लिए प्रेरित किया जाये.

    समस्त जनपदों में जहां मकर संक्रान्ति का स्नान होना है व मेला लगना है, वहां थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाये. यदि कोई व्यक्ति सर्दी, खासी, जुखाम और बुखार आदि के लक्षण से ग्रसित हो तो उन्हें मेले / स्नान में भाग न लेने के लिए अनुरोध किया जाये एवं तत्काल उनका आरटीपीसीआर / ट्रनेट / एण्टीजन टेस्ट की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाये.