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  • World No. 1 Batsman Virat Kohli birthday special: रिकॉर्ड्स, उपलब्धियों और जीवनशैली की यात्रा

    World No. 1 Batsman Virat Kohli birthday special: रिकॉर्ड्स, उपलब्धियों और जीवनशैली की यात्रा

    जैसा कि दुनिया भर में क्रिकेट प्रेमी 5 नवंबर को क्रिकेट के सबसे महान आधुनिक खिलाड़ियों में से एक, Virat Kohli का जन्मदिन मनाते हैं, यह उनकी उल्लेखनीय यात्रा पर विचार करने का एक बेहतरीन पल  है।Virat Kohli ने असाधारण कौशल, निरंतर दृढ़ संकल्प और अटूट जुनून वाले बल्लेबाज के रूप में क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। अपने बेजोड़ रिकॉर्ड और उपलब्धियों से लेकर अपनी अनूठी जीवनशैली तक, कोहली एक प्रेरणादायक व्यक्ति बने हुए हैं जिन्होंने एक आधुनिक क्रिकेटर होने का मतलब फिर से परिभाषित किया।

    Virat Kohli
    Virat Kohli

    Virat Kohli: प्रारंभिक जीवन और background 

    Virat Kohli का जन्म 5 नवंबर  1988 में दिल्ली, भारत में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनका सफर पश्चिमी दिल्ली की गलियों और खेल के मैदानों से शुरू हुआ, जहां उनकी प्रतिभा छोटी उम्र से ही दिखने लगी थी। कोहली के पिता प्रेम कोहली ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें पश्चिमी दिल्ली क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया। कम उम्र में ही, Virat Kohli ने कठिन चुनौतियों का धैर्य के साथ सामना करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, क्योंकि उन्होंने 2006 में अपने पिता को खोने के बावजूद क्रिकेट जारी रखा।

    Virat Kohli का स्टारडम में उदय

    Virat Kohli  के करियर में एक नाटकीय मोड़ आया जब उन्होंने 2008 अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में भारत को जीत दिलाई। उनके नेतृत्व और बल्लेबाजी ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और इसके तुरंत बाद, उन्होंने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। कोहली की निरंतरता, जोश और रनों की भूख ने उन्हें जल्द ही एक ताकत के रूप में स्थापित कर दिया।

    Virat Kohli
    Virat Kohli

    Record  तोड़ने वाली उपलब्धियां

    Virat Kohli  के रिकॉर्ड और उपलब्धियों की सूची व्यापक है, जो खेल के सभी प्रारूपों में उनके बेहतरीन खेल  को दर्शाती है। यहां उनके कुछ असाधारण मील के पत्थर हैं:

           1.सबसे तेज़ 8,000, 9,000, 10,000, 11,000 और 12,000 वनडे रन

    Virat Kohli  की वनडे प्रारूप में ढलने की क्षमता अद्भुत है। इन महत्वपूर्ण मील के पत्थर तक पहुंचने की उनकी रिकॉर्ड-ब्रेक गति उनकी निरंतरता और कौशल के बारे में बहुत कुछ बताती है।

           2. 70+ अंतर्राष्ट्रीय शतक

    70 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय शतकों (टेस्ट और वनडे में संयुक्त रूप से) के साथ, कोहली सचिन तेंदुलकर और रिकी पोंटिंग जैसे दिग्गजों में से एक हैं। उनके 50 ओवर प्रारूप के शतक सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनके प्रभुत्व का प्रमाण हैं।

           3. किसी भारतीय टेस्ट कप्तान द्वारा सर्वाधिक दोहरे शतक

    भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में, कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में सात दोहरे शतक बनाने का रिकॉर्ड बनाया – एक उपलब्धि जो सबसे लंबे प्रारूप में उनके कौशल और स्वभाव को दर्शाती है।

           4.Virat Kohli: T20 क्रिकेट में दबदबा

    Virat Kohli अपनी बहुमुखी प्रतिभा और सबसे छोटे प्रारूप में महारत का प्रदर्शन करते हुए टी20 अंतरराष्ट्रीय में 3,000 रन का आंकड़ा पार करने वाले पहले खिलाड़ी थे। कोहली की निरंतरता और लक्ष्य का पीछा करने की क्षमता ने उन्हें भारत की टी20 टीम का एक अपूरणीय हिस्सा बना दिया।

            5. ICC  पुरस्कार और मान्यताएँ

     Virat Kohli ने अपने पूरे करियर में कई आईसीसी पुरस्कार अर्जित किए हैं। उन्हें 2018 में ICC क्रिकेटर ऑफ द ईयर, टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर और वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर नामित किया गया था, जो उनके करियर के उच्च बिंदुओं में से एक था। 50 ओवर के प्रारूप में उनके योगदान के लिए वह दशक के ICC वनडे खिलाड़ी भी थे।

    Virat Kohli
    Virat Kohli

    कप्तान के रूप में Virat Kohli: नेतृत्व और विरासत

    कप्तान के रूप में कोहली के कार्यकाल ने भारतीय क्रिकेट को बदल दिया। अपने आक्रामक लेकिन अनुशासित दृष्टिकोण के लिए जाने जाने वाले, उन्होंने भारत की खेल शैली को फिर से परिभाषित किया। उन्होंने टीम को कई जीतें दिलाईं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट श्रृंखला जीत भी शामिल है। फिटनेस, प्रतिबद्धता और व्यावसायिकता पर उनके जोर ने भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया मानक स्थापित किया और एक कप्तान के रूप में उनके प्रभाव को देश के क्रिकेट इतिहास में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता है।

    Virat Kohli की जीवनशैली: क्रिकेट से परे

    Virat Kohli की जीवनशैली उनकी मैदानी उपलब्धियों की तरह ही प्रेरणादायक है। वह अपनी अनुशासित दिनचर्या, फिटनेस के प्रति समर्पण और स्टाइल के प्रति जुनून के लिए जाने जाते हैं। यहां देखें कि कैसे कोहली की जीवनशैली लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है:

    1. स्वास्थ्य एवं आहार व्यवस्था

    फिटनेस पर Virat Kohli  के फोकस ने न केवल उनके खेल को बदल दिया है बल्कि दुनिया भर के एथलीटों के लिए एक नया मानक भी स्थापित किया है। वह सख्त आहार के लिए जाने जाते हैं, जिसमें दुबले प्रोटीन, सब्जियों और साबुत अनाज पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जबकि प्रसंस्कृत भोजन से परहेज किया जाता है। उनकी फिटनेस यात्रा ने अनगिनत प्रशंसकों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

          2.फैशन और ब्रांड विज्ञापन

    अपनी स्टाइलिश पोशाक और फैशन के प्रति प्रेम के लिए जाने जाने वाले कोहली स्टाइल की दुनिया में एक प्रमुख व्यक्ति बन गए हैं। कैज़ुअल वियर से लेकर लक्ज़री ब्रांड तक, वह PUMA, MRF और Audi  सहित कई प्रमुख लेबलों से जुड़े हुए हैं। उनका ब्रांड, Wrong, भारतीय फैशन उद्योग में भी सफल रहा है।

    फैशन और ब्रांड विज्ञापन
    Virat Kohli फैशन और ब्रांड विज्ञापन

          3.परोपकार और Social  प्रभाव

    Virat Kohli  का एक दयालु पक्ष है, जैसा कि उनके परोपकारी कार्यों में देखा जा सकता है। उन्होंने और उनकी पत्नी, अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने, विराट कोहली फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका ध्यान वंचित बच्चों के समर्थन और उभरते एथलीटों को सहायता प्रदान करने पर केंद्रित था। कोहली कई धर्मार्थ कार्यों में भी सक्रिय रूप से योगदान देते हैं और समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर बोलते हैं।

          4.Anushka Sharma के साथ निजी जीवन

    Virat Kohli और अनुष्का शर्मा के रिश्ते ने दुनिया भर के प्रशंसकों के दिलों पर कब्जा कर लिया है। “Virushka” के नाम से मशहूर इस जोड़े की सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति है, जहां वे अपने पारिवारिक जीवन की झलकियाँ साझा करते हैं। उनके रिश्ते को अक्सर आपसी समर्थन के एक मॉडल के रूप में देखा जाता है, जो उनके दोनों हाई-प्रोफाइल करियर को संतुलित करता है।

    Virushka
    Virushka

    Virat Kohli की यात्रा से मुख्य सबक

    1. अनुशासन और समर्पण: एक एथलीट के रूप में Virat Kohli  का परिवर्तन अनुशासन और समर्पण की शक्ति का प्रमाण है।
    2. अनुकूलनशीलता और निरंतरता: विभिन्न प्रारूपों में ढलने और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता महत्वाकांक्षी क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा है।
    3. Passion and Aggression: Virat Kohli  का जुनून उनके आक्रामक दृष्टिकोण में स्पष्ट है, लेकिन वह इसे अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के बजाय अपने प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए उपयोग करते हैं।
    4. Work-Life-Balance: अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद, कोहली अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन के बीच संतुलन बनाने में कामयाब रहे हैं, जो संतुलित जीवन चाहने वालों के लिए एक उदाहरण है।

    A Legacy in the Making (निर्माण में एक विरासत)

    जैसा कि हम Virat Kohli  का जन्मदिन मनाते हैं, यह स्पष्ट है कि क्रिकेट और उससे आगे की उनकी विरासत पीढ़ियों तक कायम रहेगी। उनके record, achievement और जीवनशैली उन्हें एक ऐसा Icon बनाती है जो लाखों लोगों को प्रेरित करता रहता है। मैदान पर अपने दृढ़ संकल्प से लेकर मैदान के बाहर अपनी अनुशासित जीवनशैली तक, कोहली एक सच्चे दिग्गज के गुणों का उदाहरण हैं।

    Virat Kohli’s Retirement from Test Cricket

    विराट कोहली ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, जिसने उनके 14 साल के टेस्ट करियर को समाप्त कर दिया। 36 वर्षीय कोहली ने इंस्टाग्राम के माध्यम से अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, “टेस्ट क्रिकेट में नीली जर्सी पहनने के 14 साल हो गए… इस प्रारूप से विदाई लेना आसान नहीं है, लेकिन यह सही लगता है।”

    उनका संन्यास रोहित शर्मा के टेस्ट से संन्यास के कुछ दिन बाद और इंग्लैंड के खिलाफ भारत की पांच टेस्ट मैचों की सीरीज (20 जून 2025 से शुरू) से पहले आया। कोहली ने एक महीने पहले बीसीसीआई को अपने फैसले की जानकारी दी थी, हालांकि बोर्ड ने इंग्लैंड दौरे के लिए उनकी अनुभव की जरूरत बताते हुए पुनर्विचार के लिए कहा था। उनका आखिरी टेस्ट 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ था, जहां उन्होंने नौ पारियों में 23.75 की औसत से रन बनाए। अब कोहली का ध्यान वनडे क्रिकेट पर हो सकता है, खासकर 2027 विश्व कप के लिए, साथ ही वे आईपीएल में खेलना जारी रखेंगे।

    विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट रिकॉर्ड

    • मैच खेले: 123
    • रन: 9,230
    • बैटिंग औसत: 46.85
    • शतक: 30
    • अर्धशतक: 31
    • दोहरे शतक: 7 (भारत के लिए सर्वाधिक)
    • सर्वोच्च स्कोर: 254* (दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, पुणे, 2019)

    कप्तानी: 68 टेस्ट में भारत का नेतृत्व किया, 40 जीत (भारतीय कप्तान के रूप में सर्वाधिक), 17 हार, 11 ड्रॉ; जीत का प्रतिशत 58.82%। वैश्विक स्तर पर चौथे सबसे सफल टेस्ट कप्तान, ग्रेम स्मिथ (53 जीत), रिकी पॉन्टिंग (48), और स्टीव वॉ के बाद।

    Virat Kohli
    Virat Kohli

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    Virat Kohli ने आधुनिक क्रिकेट को नई परिभाषा दी है, लेकिन उनका प्रभाव खेल से कहीं आगे तक फैला हुआ है। उनकी यात्रा हमें दिखाती है कि महानता केवल प्रतिभा के बारे में नहीं है, बल्कि कड़ी मेहनत, लचीलेपन और उत्कृष्टता की कभी न खत्म होने वाली खोज के बारे में है। यहां कई वर्षों तक कोहली को रिकॉर्ड तोड़ते और दुनिया भर के प्रशंसकों को प्रेरित करते हुए देखा जाएगा।

  • छठ पूजा(Chhath Pooja) 2024: जानिए इस पावन पर्व का महत्व, विधि, और कैसे करें विधिपूर्वक पूजा

    छठ पूजा(Chhath Pooja) 2024: जानिए इस पावन पर्व का महत्व, विधि, और कैसे करें विधिपूर्वक पूजा

    छठ पूजा(Chhath Pooja) 7 नवंबर, 2024 को मनाया जायेगा । 

     छठ पूजा(Chhath Pooja) एक हिंदू त्योहार है जो सूर्य देव (सूर्य) और छठी मैया (देवी उषा) को समर्पित है। मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला यह उत्तरी भारत में सबसे अधिक पूजनीय और प्रतीक्षित त्योहारों में से एक है। 2024 में छठ पूजा उसी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी और लोग इस शुभ अवसर के लिए उत्सुकता से तैयारी कर रहे हैं। यह लेख आपको छठ पूजा के दौरान सूर्य देव का सम्मान करने के महत्व, अनुष्ठानों, तिथियों और उत्सव के तरीकों के बारे में मार्गदर्शन करेगा।

    छठ पूजा(Chhath Pooja)
    छठ पूजा(Chhath Pooja)

    छठ पूजा(Chhath Pooja) क्या है?

     त्योहार के महत्व को समझना छठ पूजा अद्वितीय है क्योंकि यह एकमात्र हिंदू त्योहार है जहां भक्त डूबते और उगते सूर्य की पूजा करते हैं, और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। चार दिनों तक चलने वाला यह त्योहार सूर्य देव को उनकी ऊर्जा और आशीर्वाद के लिए मनाता है, जो पृथ्वी पर जीवन को सक्षम बनाता है। लोगों का मानना ​​है कि छठ पूजा के दौरान सूर्य की पूजा करने से उनके परिवार में स्वास्थ्य, धन और समृद्धि आती है।

    छठ पूजा(Chhath Pooja)
    छठ पूजा(Chhath Pooja)

    छठ पूजा(Chhath Pooja) 2024 के लिए महत्वपूर्ण तिथियां

    छठ पूजा चार दिवसीय त्योहार है, जिसमें प्रत्येक दिन एक विशिष्ट अनुष्ठान और भक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यहां 2024 में छठ पूजा की तारीखें हैं:

    नहाय खाय: 5 नवंबर 2024

    लोहंडा और खरना: 6 नवंबर 2024

    संध्या अर्घ्य (शाम का अर्घ्य): 7 नवंबर, 2024

    उषा अर्घ्य (सुबह की पेशकश): 8 नवंबर, 2024

    प्रत्येक दिन का अपना महत्व, अनुष्ठान और तैयारी होती है। आइए प्रत्येक दिन के बारे में विस्तार से जानें।

     

    दिन 1: नहाय खाय (5 नवंबर, 2024)

    छठ पूजा(Chhath Pooja) का पहला दिन “नहाय खाय” से शुरू होता है, जिसका अनुवाद “स्नान और भोजन” होता है। भक्त किसी पवित्र नदी या झील में स्नान करके खुद को शुद्ध करते हैं। वे शुद्ध वातावरण तैयार करने के लिए अपने घरों को अच्छी तरह साफ करते हैं। इसके बाद परिवार शाकाहारी भोजन खाता है, जो आम तौर पर कांस्य या मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है।

    नहाय खाय
    नहाय खाय

    दिन 2: लोहंडा और खरना (6 नवंबर, 2024)

    दूसरे दिन, भक्त एक दिन का उपवास रखते हैं, जो सूर्यास्त के बाद “खरना” नामक विशेष भोजन के साथ समाप्त होता है। इस भोजन में खीर (मीठा चावल का हलवा), चपाती और फल शामिल हैं। खरना पवित्रता का प्रतीक है और केवल व्रत करने वाले ही इसका सेवन करते हैं, क्योंकि इसे एक पवित्र प्रसाद के रूप में देखा जाता है।

    लोहंडा और खरना
    लोहंडा और खरना

    दिन 3: संध्या अर्घ्य (7 नवंबर, 2024)

    तीसरा दिन, जिसे संध्या अर्घ्य के रूप में जाना जाता है, वह है जब भक्त सूर्यास्त के समय डूबते सूर्य को अपना पहला अर्घ्य देने के लिए नदी या तालाब के किनारे इकट्ठा होते हैं। वे प्रसाद के रूप में बांस की टोकरी में फल, मिठाइयाँ और ठेकुआ (एक पारंपरिक मीठा नाश्ता) ले जाते हैं। पानी में खड़े होकर, इन प्रसादों को पकड़कर प्रार्थना करते हुए भक्तों का दृश्य आध्यात्मिक और मंत्रमुग्ध करने वाला दोनों है।

    संध्या अर्घ्य
    संध्या अर्घ्य

    दिन 4: उषा अर्घ्य (8 नवंबर, 2024)

    अंतिम दिन, उषा अर्घ्य में सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। भक्त इस अनुष्ठान को शुद्ध हृदय से करते हैं, परिवार के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। प्रसाद चढ़ाने के बाद, भक्त आशीर्वाद और कृतज्ञता के साथ छठ पूजा के अंत को चिह्नित करते हुए अपना उपवास तोड़ते हैं।

    उषा अर्घ्य
    उषा अर्घ्य

     

    छठ पूजा(Chhath Pooja) के प्रमुख अनुष्ठान

    उपवास: छठ पूजा अपने सख्त उपवास के लिए जानी जाती है, जिसमें 36 घंटे का उपवास भी शामिल है, जहां भक्त पानी पीने से भी परहेज करते हैं।

    प्रसाद (अर्घ्य): अर्घ्य मुख्य अनुष्ठान है जहां भक्त सूर्य को प्रसाद चढ़ाते हैं। प्रसाद में फल, गन्ना और घर में बनी मिठाई, जिसे ठेकुआ कहा जाता है, शामिल होती है।

    पानी में खड़े रहना: भक्त प्रसाद चढ़ाते समय नदियों या तालाबों में खड़े होते हैं, जो विनम्रता और पवित्रता का प्रतीक है।

    छठ पूजा भक्त प्रसाद
    छठ पूजा भक्त प्रसाद चढ़ाते समय

     

    छठ पूजा(Chhath Pooja) अनुष्ठानों का पारंपरिक महत्व

    छठ पूजा(Chhath Pooja) का प्रत्येक अनुष्ठान एक अद्वितीय स्थान रखता है। उपवास, प्रार्थना और प्रसाद प्रकृति, विशेष रूप से सूर्य, जो सभी जीवन को बनाए रखता है, के प्रति गहरी श्रद्धा का कार्य है। यह त्योहार मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक अनुशासन के महत्व को भी बढ़ावा देता है। छठ पूजा के दौरान तैयार किया जाने वाला भोजन सरल और शुद्ध होता है, जो प्राकृतिक जड़ों और सादगी की ओर लौटने का प्रतीक है।

    छठ पूजा(Chhath Pooja) 2024 सुरक्षित रूप से कैसे मनाएं

    पर्यावरण का सम्मान करें: प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग करने से बचें; इसके बजाय, बांस की टोकरियाँ जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें।

    स्वच्छता बनाए रखें: अपने आस-पास की सफाई सुनिश्चित करें, विशेषकर नदी या तालाब जहां अर्घ्य दिया जाता है।

    सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें: बड़ी सभाएँ छठ पूजा का एक हिस्सा हैं, इसलिए सतर्क रहें और स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति सचेत रहें।

    छठ पूजा(Chhath Pooja) 2024
    छठ पूजा(Chhath Pooja) 2024

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    छठ पूजा(Chhath Pooja) – भक्ति और कृतज्ञता का त्योहार

    छठ पूजा(Chhath Pooja) प्रकृति से जुड़ने, सूर्य की सराहना करने और प्रियजनों की भलाई के लिए प्रार्थना करने का समय है। इस त्योहार को भक्ति और सम्मान के साथ मनाने से भक्तों के जीवन में आध्यात्मिकता की एक सुंदर परत जुड़ जाती है। जैसे-जैसे छठ पूजा 2024 नजदीक आ रही है, अपने आप को इस सदियों पुरानी परंपरा में डूबने और समृद्ध भविष्य के लिए सूर्य देव के आशीर्वाद को अपनाने के लिए तैयार हो जाइए।

  • छोटी दिवाली(Choti Diwali) कैसे मनाया? जाने रोशनी और सकारात्मक का पर्व

    छोटी दिवाली(Choti Diwali) कैसे मनाया? जाने रोशनी और सकारात्मक का पर्व

    छोटी दिवाली(Choti Diwali) , जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहा जाता है, दिवाली के पांच दिवसीय का दूसरा दिन है। 

    इसे खासतौर पर बुरी शक्तियों से  मुक्ति और सकरात्मक के  प्रतिक में मनाया  जाता है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री कृष्ण के अनुसार नरकासुर का वध कर 16000 कन्याओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था, इसीलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है।

    Choti Diwali
    Choti Diwali

    छोटी दिवाली(Choti Diwali) कैसे मनाई जाती है? 

    छोटी दिवाली(Choti Diwali) की परंपराएं हमें मानसिक और शारीरिक रूप से पवित्रता और स्वच्छता की ओर ले जाती है इसे मानने की कुछ खास विधियां है-

    1. स्नान और तेल अभ्यंग: नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान का विशेष महत्व है इस दिन तेल मालिश और स्नान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन बहुत ही शांत होता है इसे अभ्यंग स्नान भी कहते हैं। 
    2. घर के साफ सफाई और सजावट: घर को साफ करके सजाने की परंपरा है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो और रंगोली फूलों की सजावट दिए से घर को रोशन किया जाता है।
    3. दीप जलाना: छोटी दीवाली पर घर के हर कोने में दीप जलाना शुभ माना जाता है इस बुरी शक्तियों और अंधकार से बचने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। 
    4. पूजा विधि: इस दिन भगवान कृष्ण और यमराज की पूजा का विशेष महत्व घर के प्रमुख द्वार पर दीप जलाकर यमराज का ध्यान करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त करना होता है। 
    5. भोग और मिठाई: इस दिन घर में मिठाइयां जैसे लड्डू हवा और अंदर से तैयार किए जाते हैं परिवार के सदस्यों के साथ मिठाइयां बात का त्यौहार का आनंद लिया जाता है। 
    6. परिवार के साथ समय बिताना: छोटी दीवाली पर अपने परिवार के साथ मिलकर त्यौहार मनाने से रिश्ते में प्रेम और अपनापन बढ़ता है आप चाहे तो अपने मित्रों को आमंत्रित कर सकते हैं और फिर उनके साथ खुशियां बांट सकते हैं।
    Choti Diwali
    Choti Diwali

    छोटी दीवाली(Choti Diwali) पर क्या करें और क्या ना करें 

    1. क्या करें-

    सूर्योदय से पहले स्नान करें और घर की सफाई करें। 

    दिया से घर को रोशन करें। 

    जरूरतमंदों को दान और मिठाइयां बाटे।

    1. क्या ना करें-

    इस दिन नकारात्मक विचार और झगड़ों से दूर रहे हैं।

    किसी भी प्रकार का नशा ना करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान दें।

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    छोटी दीवाली(Choti Diwali) अच्छाई कविता और खुशी का प्रतीक है इसे पूरे परिवार के साथ मनाया प्रेम और सफल समर्पण का भाव जगह और अच्छाई की जीत का संदेश दिन छोटी दीपावली पर पूरी सकारात्मक के साथ बुराई पर अच्छाई का जश्न मनाएं और अपने जीवन में सुख समृद्धि लाए।

    ।।हमारी तरफ से आप सभी को छोटी दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं।।

  • सावित्रीबाई फुले!(Savitribai Phule) महिलाओं को प्रगति के मार्ग पर लाने वाली एक मजबूत सोच…

    सावित्रीबाई फुले!(Savitribai Phule) महिलाओं को प्रगति के मार्ग पर लाने वाली एक मजबूत सोच…

    –सावित्रीबाई(Savitribai Phule) का जीवन परिचय

     

    सावित्रीबाई(Savitribai Phule):-

    बात उन दिनों की है जब महिलाएं शिक्षा की ओर अपने कदम बढ़ा रहीं थी और देश आधुनिकता के दौर में डुबकी लगाने को तैयार था। 19वीं शताब्दी का, यह वह समय था जब शिक्षा और समाज दोनों ही तेजी से बदल रहे थे। उसी समय महिलाओं के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सती प्रथा, बाल-विवाह और विधवा-विवाह जैसी अनेक कुरीतियों के काले बादलों के पीछे से एक बुलंद आवाज बनकर सामने आईं, सावित्रीबाई फुले।

    सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) , भारत की वह पहली महिला शिक्षिका थी, जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से शिक्षा को भी बदला और समाज को भी। छोटे से गांव में पैदा हुई सावित्रीबाई ने अपने पति दलित चिंतक, समाज सुधारक ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर सामाजिक चेतना फैलाई और अंधविश्वास तथा रूढ़ियों की बेड़ियां को तोड़ने के लिए एक लंबा संघर्ष किया।

    3 जनवरी, 1891 में महाराष्ट्र के सतारा जिले में जन्मीं सावित्री बाई (Savitribai Phule) फुले नारीवाद की सच्ची पहचान हैं। उनके ही संघर्ष का परिणाम है जो आज महिलाएं सिर उठाकर पढ़-लिख रही हैं और अपने सपने पूरे कर रही हैं। उनका जीवन जितना महान था उतना ही कठिनाइयों से भी भरा था। उनके संघर्ष की दास्तां मेरे इन शब्दों से भी पूरी नहीं हो सकती।

    “वो एक नारी शक्ति का एहसास थीं,
    जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है”

    सावित्रीबाई(Savitribai Phule) की छोटी सी उम्र में शादी हो जाने के बाद भी भारत की पहली शिक्षिका बनीं

    जिस उम्र में हम गुड़िया और खिलौने से खेलते हैं उस छोटी सी उम्र में उनकी शादी हो गई लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका जज्बा और लगन कभी कम नहीं हुआ।

    ज्योतिबा फुले के साथ उनके विवाह के समय जहां वह एक अनपढ़ की श्रेणी में खड़ी थीं, तो वहीं उनके पति केवल तीसरी कक्षा तक पढ़े थे। जिस दौर में वह पढ़ने का सपना देख रहीं थी, उस दौर में महिला की शिक्षा पर एक कड़ा पहरा था, उन्हें पढ़ना तो दूर किताबें देखने की भी अनुमति नहीं थी। उस वक्त की एक घटना के अनुसार एक दिन सावित्री अंग्रेजी की किसी किताब के पन्ने पलट रही थीं, तभी उनके पिताजी ने देख लिया, वह दौड़कर आए और किताब हाथ से छीनकर घर से बाहर फेंक दी। उनके पिता और उस समय का समाज, शिक्षा को केवल उच्च जाति के पुरुषों का अधिकार मानते थे, दलित और महिलाओं का शिक्षा ग्रहण करना पाप समझा जाता था। बस, फिर क्या था बचपन से ही दृढ़ निश्चयी सावित्री बाई ने वह किताब वापस लाईं और प्रण किया कि वह एक न एक दिन पढ़ना जरूर सीखेंगी।

    –जीवन संघर्ष

    उन दिनों महिलाओं को निम्न दर्जे का नागरिक समझा जाता रहाथा, यही कारण है कि उनकी जिंदगी को खाना बनाने और वंश को आगे बढ़ाने तक सीमित रखा गया था, लेकिन इस पुरानी और रूढ़िवादी सोच को बदने के लिए सावित्री बाई ने पढ़ना शुरू किया और इतना ही नहीं वह भारत की प्रथम महिला शिक्षिका भी बनीं। उन्होंने 2 साल के टीचर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। प्रथम कोर्स उन्होंने एक अमेरिकी मिशनरी सिंधिया द्वारा संचालित अहमदनगर में संस्थान और दूसरा कोर्स पुणे के एक नॉर्मल स्कूल से लिया।

    -पत्थर खाने के बाद भी हौसला नहीं छोड़ा

    सन् 1848 में महज 17 वर्ष की आयु में सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) ने पुणे में देश के पहले महिला स्कूल की स्थापना की और उसके बाद 18 स्कूल खोले। लेकिन उनका संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ कहते हैं जब वह स्कूल में पढ़ाने जाया करती थीं तो उन पर लोग पत्थर मारते थे, उन पर गंदगी फेंक देते थे, परंतु चट्टान से भी मजबूत सावित्रीबाई(Savitribai Phule) ने इस समस्या को भी हल कर लिया। वह अपने थैले में एक अतिरिक्त जोड़ी कपड़े ले जाया करती थीं और कीचड़ से गंदे कपड़ों को बदल लिया करती थीं।

    सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) एक कवयित्री भी थीं। उन्हें मराठी की आदि कवयित्री के रूप में अपने आप को साबित किया। सावित्रीबाई(Savitribai Phule) ने अपने पति के साथ मिलकर बालहत्या प्रतिबंधक गृह नामक केयर सेंटर भी खोला था। इसमें बलात्कार से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को बच्चों को जन्म देने और उनके बच्चों को पालने की सुविधा दी जाती थी। उन्होंने महिला अधिकारों से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए महिला सेवा मंडल की स्थापना की। उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ भी अभियान चलाया और विधवा पुनर्विवाह की वकालत की।

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    –जब एक महान आत्मा सद्गति को प्राप्त हुईं

    10 मार्च, 1897 को प्लेग के मरीजों की देखभाल करते हुए ये महान आत्मा सद्गति को प्राप्त हुईं और सदा के लिए पंचभूत में लीन हो गईं। आज भी भारत ही नहीं विश्व भर की महिलाओं के लिए उनका अदम साहस और हौसला एक आदर्श है और युगों तक वह सभी महिलाओं की प्रेरणा रहेंगी। हम उन्हें तहे दिल से प्रणाम करते हैं। वास्तव में सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) ने ये साबित किया है कि…

    सफलता की कहानी किसी कलम से नहीं…
    हौंसलों से लिखी जाती है…

                               Author:- Tarini

  • Son files case against mother: 20 साल के बेटे ने अपनी मां को केस में फंसाया, वजह जानकर आपका सिर चकरा जाएगा!

    Son files case against mother: 20 साल के बेटे ने अपनी मां को केस में फंसाया, वजह जानकर आपका सिर चकरा जाएगा!

    ताइवानी युवक ने मां पर बिना अनुमति के ‘अटैक ऑन टाइटन’ कॉमिक्स कलेक्शन कूड़े में फेंकने का लगाया आरोप, कोर्ट ने किया जुर्माना

    Son files case against mother: ताइवान के चियाई शहर से एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां 20 वर्षीय बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां के खिलाफ कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई। मां का गुनाह था कि उसने बेटे के ‘अटैक ऑन टाइटन’ कॉमिक्स कलेक्शन को बिना उसकी इजाजत के कूड़े में फेंक दिया। इस मामले ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर हलचल मचाई, बल्कि बेटे की सख्त नाराजगी के चलते सुलह का कोई रास्ता भी नहीं निकला।

    पुलिस को बुलाया और मां को कोर्ट में घसीटा

    रिपोर्ट के मुताबिक, 64 वर्षीय महिला ने अपने बेटे के कॉमिक्स कलेक्शन को घर में नमी और जगह की कमी के कारण कूड़े में फेंक दिया। जब बेटा घर लौटा और अपने कॉमिक्स कलेक्शन के गायब होने का पता चला, तो उसने तुरंत अपनी मां से सवाल किया। जवाब में मां ने बताया कि उसने कॉमिक्स को कूड़े में फेंक दिया है। यह सुनते ही बेटे का गुस्सा फूट पड़ा और उसने तुरंत पुलिस बुला ली।

    कोर्ट में बेटे ने रखे अपने तर्क

    मामला यहीं नहीं रुका। बेटे ने अपनी मां पर बिना अनुमति के उसकी निजी संपत्ति को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। युवक का कहना था कि ‘अटैक ऑन टाइटन’ कॉमिक्स का पूरा कलेक्शन अब दुर्लभ है, और इसके कई संस्करण अब प्रिंट में उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से इसे एक कलेक्टर की अमूल्य वस्तु माना जाता है।

    सुलह से इंकार, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

    कोर्ट में सुनवाई के दौरान युवक की मां ने कहा कि कॉमिक्स में नमी आ गई थी और वह घर में काफी जगह ले रही थी, इसलिए उसने इसे फेंकना सही समझा। महिला ने बेटे से सुलह करने की भी कोशिश की, लेकिन बेटा अपनी नाराजगी से पीछे नहीं हटा। अंततः कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए महिला पर 5,000 ताइवानी डॉलर (करीब 13,200 रुपये) का जुर्माना लगाया और कहा कि बेटे के संपत्ति अधिकारों का सम्मान न करना अनुचित था।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

    इस घटना ने ताइवान और सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। कॉमिक्स के प्रति बेटे की दीवानगी और मां-बेटे के इस कानूनी विवाद ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

  • Women Special: ब्रा की सही साइज क्या होना चाहिए, आपके लिए कौन सी ब्रा है परफेक्ट जानिए सबकुछ!

    Women Special: ब्रा की सही साइज क्या होना चाहिए, आपके लिए कौन सी ब्रा है परफेक्ट जानिए सबकुछ!

    महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़: आपके शरीर के लिए उचित समर्थन

    Women Special:महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़ चुनना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सही साइज़ की ब्रा पहनने से आपके शरीर को उचित समर्थन मिलता है, जिससे आपको दिनभर की गतिविधियों में अधिक आराम मिलता है। एक सही साइज़ की ब्रा चुनने के लिए आपको ध्यान देने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

    • ब्रा के बैंड साइज़ का मापन: ब्रा के बैंड का सही साइज़ चुनने के लिए आपको अपने रीब्स के नीचे स्थित अंतिम बोन के चारों ओर चार उंगलियों के बीच की लंबाई को मापना होगा।
    • कप साइज़ का मापन: अपने सीने की चौड़ाई का मापन करके आप अपने ब्रा के सही कप साइज़ को चुन सकती हैं।
    • अपने आकार के अनुसार सही ब्रा चुनें: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए सही साइज़ की ब्रा चुनते समय अपने आकार को महत्वपूर्ण रूप से ध्यान में रखना चाहिए।

    Women Special:ब्रा की गुणवत्ता: आराम और दिखावट के साथ समृद्ध

    ब्रा की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रा न केवल आराम देती है, बल्कि वह आपके शरीर के लिए भी अच्छी होती है। ब्रा की गुणवत्ता को चुनते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

    • फैब्रिक का गुणवत्ता: ब्रा की गुणवत्ता में फैब्रिक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आपको अपने लिए सही फैब्रिक का चयन करना चाहिए, जो आपको आराम और स्वेता से बचाए रखे।
    • सिलाई की गुणवत्ता: ब्रा की सही सिलाई और मजबूती भी उसकी गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण होती है।
    • ब्रा की पुनर्नवीनीकरण क्षमता: ब्रा की गुणवत्ता के लिए उत्पादन की गुणवत्ता और उसकी पुनर्नवीनीकरण क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

    Women Special:ब्रा की गुणवत्ता और साइज़ की देखभाल: देखभाल और रख रखाव

    एक अच्छी ब्रा की गुणवत्ता और साइज़ की देखभाल करने के लिए आप निम्नलिखित सुझावों का पालन कर सकती हैं:

    • ब्रा को हल्के धूप में सुखाएं: अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रा को हल्के धूप में सुखाने से उसके फैब्रिक की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है।
    • हल्के धुलाई के लिए नरम डिटर्जेंट का उपयोग करें: ब्रा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको उसे हल्के डिटर्जेंट से धोना चाहिए।
    • ब्रा को हमेशा हैंगर पर रखें: ब्रा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको उसे हमेशा हैंगर पर रखना चाहिए।

    महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़ और गुणवत्ता का ध्यान रखना उनके स्वास्थ्य और सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, सही साइज़ और गुणवत्ता वाली ब्रा चुनने के लिए व्यापारिक ब्रांडों की अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रांड चुनना उपयुक्त हो सकता है।

  • Bhojpuri Icons Real and Real Stars Award : फिल्मफेयर और फेमिना ने मनोज भावुक को किया सम्मानित

    Bhojpuri Icons Real and Real Stars Award : फिल्मफेयर और फेमिना ने मनोज भावुक को किया सम्मानित

    Bhojpuri Icons Real and Real Stars Award : लखनऊ के रमादा में 16 जुलाई को फिल्मफेयर एवं फेमिना द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘ भोजपुरी आइकॉन्स- रील एंड रीयल स्टार्स ‘ समारोह में भोजपुरी के जाने-माने लेखक, फिल्म समीक्षक और भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार मनोज भावुक को भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के इतिहास पर किये गए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

    यह एक ऐतिहासिक कार्यक्रम हैं, जब दो प्रतिष्ठित ब्रांड फिल्मफेयर और फेमिना पहली बार भोजपुरी आइकॉन का सम्मान करने और जश्न मनाने के लिए एकजुट हुए। इस अवसर पर पद्मभूषण शारदा सिन्हा को लोक संगीत के लिए, संजय मिश्रा को प्राइड ऑफ भोजपुरी मिट्टी, मनोज तिवारी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और रवि किशन को ओटीटी और सिनेमा के लिए सम्मानित किया गया।

    मनोज भावुक को भोजपुरी साहित्य व सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान फेमिना की प्रधान संपादक अंबिका मट्टू व दक्षिण के निर्देशक विक्रम वासुदेव द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

    मनोज भावुक 1998 से लिख रहे हैं भोजपुरी सिनेमा का इतिहास …

    तस्वीर जिदंगी के (भोजपुरी गजल संग्रह) व चलनी में पानी (भोजपुरी कविता-संग्रह) मनोज भावुक की चर्चित पुस्तकें हैं। मनोज भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर पिछले 25 वर्षों से लिख रहें हैं। वर्ष 2000 में ही भोजपुरी सिनेमा के प्राचीन इतिहास (1962-2000) पर किताब लिख ली थी। इनेक लेख धारावाहिक रूप में कई पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहे। कई लोगों ने सिनेमा पर किये अपने शोध व पीएचडी में मनोज भावुक के रिसर्च को ही आधार बनाया है। पेंग्विन से भोजपुरी सिनेमा पर छपी अभिजीत घोष की अंग्रेजी किताब में भी भावुक के तमाम सिनेमा-लेखों व शोध-पत्रों का जिक्र है। ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ नाम की साढ़े चार सौ पृष्ठों की यह किताब पिछले साढ़े तीन साल से भोजपुरी-मैथिली अकादमी, दिल्ली के पास प्रकाशनाधीन है। इसमें मनोज ने 1931 से लेकर 2019 तक के भोजपुरी सिनेमा के सफर पर बात की है।

    मनोज भावुक ने फिल्मों में अभिनय भी किया है, गीत भी लिखे हैं …

    सौगंध गंगा मईया के और रखवाला नामक फिल्म में मनोज भावुक ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। इसके अलावा बहुत सारे टीवी सीरियल और डॉक्यूमेंटरीज में भी काम किया है। मनोज बिहार आर्ट थियेटर, कालिदास रंगालय, पटना के टॉपर रहे हैं। मेंहदी लगा के रखना नामक एक फिल्म में मनोज का गीत खूब वाइरल हुआ – अँचरा छोड़ा के चल काहे दिहले एतना दूर ए माई ‘। मनोज ने भोजपुरी के लगभग सभी चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम किया है और विविध विषयों कार्यक्रम बनायें हैं।

    सपना हुआ साकार…

    मनोज भावुक कहते हैं कि भोजपुरी इंडस्ट्री फ़िल्म फेयर और फेमिना तक पहुँच गई। यही आपने आप में बड़ी उपलब्धि है। फिल्मफेयर एवं फेमिना द्वारा सम्मान मिलना बड़ी बात है। मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूँ।भोजपुरी साहित्य और सिनेमा, खासकर इतिहास लेखन के लिए पहली बार किसी फिल्म अवार्ड शो में मुझे सम्मानित किया गया है जबकि दो दशक से भी अधिक समय से मै इस इंडस्ट्री से जुड़ा हूँ और सभी आयोजक व स्टार्स मेरे काम को जानते हैं लेकिन यहाँ कलम की कीमत नहीं है। हालाँकि मै तो कलम के साथ कैमरा वाला भी हूँ। भोजपुरी इंडस्ट्री का शायद ही कोई बड़ा कलाकार होगा जिसका मैंने साक्षात्कार नहीं किया हो।इस सम्मान के लिए फिल्मफेयर एवं फेमिना के प्रति शुक्रगुजार हूँ और यह सम्मान भोजपुरी भाषा व भोजपुरी भाषियों को समर्पित है।

    कौन हैं मनोज भावुक ?

    मनोज भावुक यूके और अफ्रीका में इंजीनियरिंग की नौकरी को छोड़कर पूरी तरह से भोजपुरी हेतु प्रतिबद्ध एवं समर्पित हो चुके हैं। आपको भारतीय भाषा परिषद सम्मान (2006), पंडित प्रताप नारायण मिश्र सम्मान (2010), भिखारी ठाकुर सम्मान (2011), राही मासूम रज़ा सम्मान (2012), परिकल्पना लोक भूषण सम्मान, नेपाल (2013 ), अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी गौरव सम्मान, मॉरिशस (2014), गीतांजलि साहित्य एवं संस्कृति सम्मान, बर्मिंघम, यूके (2018 ), बिहारी कनेक्ट ग्लोबल सम्मान, दुबई (2019 ), कैलाश गौतम काव्यकुंभ लोकभाषा सम्मान (2022) जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

    अभिनय, संचालन एवं पटकथा लेखन आदि विधाओं में आपकी गहरी रुचि है। भोजपुरी जंक्शन नामक पत्रिका (ई-पत्रिका) का आप संपादन भी करते हैं। आप एक सुप्रसिद्ध कवि, कार्यक्रम प्रस्तोता व लोक मर्मज्ञ हैं। विश्व भोजपुरी सम्मेलन की दिल्ली और इंग्लैंड इकाई के अध्यक्ष रहे हैं। विश्व के लीजेंड्स को समर्पित अचीवर्स जंक्शन के निदेशक हैं। कई पुस्तकों के प्रणेता हैं। भोजपुरी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु विश्व के कई देशों की यात्रा की है। आप जी टीवी के लोकप्रिय रियलिटी शो सारेगामापा (भोजपुरी) के प्रोजेक्ट हैड रहे हैं। आपने कई टीवी शोज, फिल्मों और धारावाहिकों में अभिनय किया है।

    मनोज बिहार के सिवान जिले के कौसड़ गाँव के रहने वाले हैं। इनके पिताजी स्वर्गीय रामदेव सिंह हिंडाल्को रेणुकूट, उत्तर प्रदेश के प्रथम मजदूर नेता रहे हैं और बड़े पिताजी जंग बहादुर सिंह आजादी के तराने गाने के लिए जेल जाने वाले 103 वर्षीय सुप्रसिद्ध देशभक्त लोक गायक हैं।

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  • DCP Jitendra Mani Tripathi: एक जिंदादिल इंसान, ‘सिंघम’ स्टाइल वाले पुलिस ऑफिसर, नाम है जितेंद्र मणि त्रिपाठी

    DCP Jitendra Mani Tripathi: एक जिंदादिल इंसान, ‘सिंघम’ स्टाइल वाले पुलिस ऑफिसर, नाम है जितेंद्र मणि त्रिपाठी

    DCP Jitendra Mani Tripathi: अगर आपके इरादे मजबूत हो तो जिंदगी की हर जग आसानी से लड़ी जा सकती है और उसमें सफलता भी पाई जा सकती है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे पुलिस ऑफिसर की जो हर तरह की चुनौतियों का सामना बड़ी ही जिंदादिली से करते हैं और जरूरतमंद की मदद के लिए अपना हाथ हमेशा ही बढ़ाते रहते हैं। इस पुलिस ऑफिसर का नाम है जितेंद्र मणि त्रिपाठी अभी हाल में ही उनका प्रमोशन आईपीएस ऑफिसर के तौर पर हुआ है अभी वो दिल्ली मेट्रो में डीसीपी के पद पर तैनात हैं।

    आईपीएस ऑफिसर जितेंद्र मणि त्रिपाठी सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहते हैं अगर आप इनका सोशल मीडिया प्रोफाइल विजिट करें तो कभी ये आपको ‘सिंघम’ जैसे पुलिस ऑफिसर के स्टाइल में दिखेंगे तो कभी एक कवि के तौर पर। खुद को फिट एंड फाइन रखने के लिए वो एक्सरसाइज भी जमकर करते है। इस ऑफिसर की खासियत ये है कि अपने हर अंदाज से समाज और लोगों के प्रेरणा देते हैं।दिल्ली पुलिस के अधिकारी जीतेंद्र मणि त्रिपाठी की मानवीय सोच और संवेदनशीलता की कई कहानियाँ प्रचलित हैं और हर दो चार महीने में इनमें ऐसा कोई न कोई इज़ाफा हो जाता है जो उनको और लोकप्रिय बना देता है. लोगों की भले ही वो अपनी क्षमता में रहकर या कभी उससे बाहर जाकर भी छोटी सी भी मदद करते हों लेकिन वो ख़ुशी का कारण बन जाती है. उस घटना की जानकारी पाने वालों के भी चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है भले ही उनका घटना से सीधा ताल्लुक न हो.

    जितेन्द्र मणि दिल्ली मेट्रो के उपायुक्त हैं. कभी कभार वह ऐसी मदद की रोचक असली कहानी सोशल मीडिया पर शेयर भी कर देते हैं जो बहुत ही प्रेरणादायक होती हैं और किसी भी संवेदनशील इंसान को सकारात्मक और आशावादी सोच बढ़ाने में मदद कर सकती है. मेट्रो में यात्रा कर रहे एक शख्स को तो उन्होंने उसके माँ की हाथ की बनाई रोटियों का वो थैला खोज कर पहुँचाने में ही अपने अधिकारियों को लगा दिया था जो यात्रा के दौरान उस शख्स से छूट गया था. हालांकि शुरू में नहीं पता था कि उस बैग में सामान क्या है. यह मामला मीडिया में आया था उस दौरान इसकी चर्चा खूब हुई थी।

    डीसीपी जितेंद्र मणी त्रिपाठी के बारे में कहा जाता है कि वे काफी जिंदादिल इंसान हैं. पत्नी को कैंसर बीमारी से खो चुके हैं. पत्नी की याद में ‘कहीं तो हंसी होगी’ नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं. इस किताब की बिक्री से मिले पैसे का हिस्सा एम्स में कैंसर का इलाज कराने आए दूर-दराज के मरीजों पर खर्च करते हैं. जितेंद्र मणि दिल्ली पुलिस के 7वीं बटैलियन के डीसीपी भी रह चुके हैं.

  • मुख्यमंत्री मनोहर लाल का संघर्ष और समर्पण का जीवन्त दस्तावेज है तरुण झा की किताब “स्वयंसेवक से मुख्यसेवक तक”

    मुख्यमंत्री मनोहर लाल का संघर्ष और समर्पण का जीवन्त दस्तावेज है तरुण झा की किताब “स्वयंसेवक से मुख्यसेवक तक”

    नई दिल्ली:  एक ऐसा व्यक्ति जो कुछ महीने पहले तक केवल औरों को ही चुनाव लड़वाता था,औरों के चुनाव अभियान की रणनीति बनाता था,खुद कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा, लोकसभा चुनाव में पार्टी ने चुनाव अभियान समिति का जिम्मा सौंपा, वह कुछ महीने बीतते-बीतते पहली बार विधायकी का चुनाव लड़ा और पहली बार में विधायक बने और फिर सीएम बने,जो एक छोटे से गांव से निकल कर सीएम हाउस तक पहुंचे,जिसके डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाए लेकिन जिस सीएम पद का सपना देखा भी न हो वह पूरा हो जाए। एक ऐसा व्यक्ति जो हमेशा पर्दे के पीछे ही रहा,अचानक से सेंटर स्टेज पर आ गया। देखते ही देखते कैसे वह व्यक्ति कोच से कप्तान की भूमिका पा गया। कैसे सब्जी विक्रेता से सीएम,संगठन मंत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया, ये किताब एक ऐसे व्यक्ति की राजनीतिक यात्रा के बारे में बड़े रोचक तरीके से बताती है।

    मनोहर लाल, एक जाट बाहुल्य राज्य में एक गैर जाट मुख्यमंत्री के रूप में स्वयं को स्थापित कर पाए,ये हरियाणा की राजनीति में किसी आश्चर्य से कम नहीं। वैसे मीडिया का एक धड़ा मनोहर लाल जैसे दक्षिणपंथी मुख्यमंत्रियों के प्रति वैमनस्यतापूर्ण व्यवहार करता रहा है। ऐसे में यह किताब निष्पक्षता से मनोहर लाल की आलोचना भी करती है और उनकी खूबियों को भी विस्तार से बताती है। 172 पन्नों में सिमटी इस किताब में 6 अध्याय हैं। पुस्तक के पहले अध्याय में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रारंभिक जीवन से संगठन मंत्री बनने तक की कहानी है वहीं दूसरे अध्याय में मुख्यमंत्री बनने तक की इनसाइड स्टोरी और उस दौरान के लेखक के व्यक्तिगत संस्मरण हैं। तीसरे अध्याय में सरकार के कामकाज की समीक्षा है जबकि चौथे अध्याय में मुख्यमंत्री के ‘हरियाणा एक,हरियाणवी एक’ नारे की पड़ताल है। पांचवे अध्याय में हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के उदय की कहानी है। छठे और अंतिम अध्याय में खट्टर काका से जुड़े कई मनोहर किस्से हैं।

    लेखक टीवी पत्रकार होने के नाते से सीएम मनोहर लाल के संपर्क में थे। जिसके चलते उन्होंने सीएम मनोहर लाल के राजनीतिक यात्रा को साक्षी भाव से देखा है। जो इस पुस्तक को और अधिक प्रामाणिक बनाती है। यह किताब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निजी और राजनैतिक जीवन के अनकहे पहलुओं को बहुत ही रोचक अंदाज में बयान करती है, खासतौर पर मुख्यमंत्री बनने की इनसाइड स्टोरी इसकी यूएसपी रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का संघर्ष और समर्पण का जीवन्त दस्तावेज है यह किताब।

    पुस्तक – मनोहर लाल – स्वयंसेवक से मुख्यसेवक तक
    लेखक – तरुण झा
    प्रकाशक – यश पब्लिकेशंस
    मूल्य – 199 रुपए

    शशि पाण्डेय
    समीक्षक

  • सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल

    सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल

    लेखक : बालकृष्ण उपाध्याय

    सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल
    आज के समय में प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तुलना में भारत में सोशल मीडिया का प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है। आज छोटी-छोटी खबरों को बड़े रूप में और बड़ी खबरों को छोटे रूप में दिखाने का काम सोशल मीडिया के जरिए ही किया जा रहा है। अगर हम किसी सोशल ऐप का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसकी गोपनीय शर्तों (जैसे कैमरा, लोकेशन, फोटो गैलरी आदि) पर हमसे पूर्व-सहमति लेता है, तभी हम उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आपने देखा होगा कि एक बार जब आप किसी टॉपिक को सर्च कर लेते हैं तो उससे जुड़ी अन्य जानकारियां आपको अपने आप मिलने लगती हैं, यानी यह आपकी रुचियों, पसंद-नापसंद को अच्छी तरह जानती है। उसने आपकी सारी जानकारी पहले ही एकत्र कर ली है और आपकी रुचि के अनुसार उसे आपके लिए उपलब्ध रखता है। इसी तरह यदि हम राजनीति को देखें कि किस व्यक्ति का रुझान किस पार्टी की ओर जा रहा है, तो इसका अंदाजा लोगों की रुचि, पसंद से लगाया जा सकता है, नापसंद देखकर सोशल मीडिया पहले से ही लग जाता है और एक ही पार्टी के पक्ष में बार-बार पोस्ट दिखाकर देश की राजनीति में भी दखल दे रहा है. देश में किसकी सरकार बनी, विदेश में बैठे लोग सोशल मीडिया के जरिए तय कर रहे हैं कि किस नेता को उठाना है और कब छोड़ना है. विकसित और विकासशील देश कैसे कमजोर देशों पर अपना प्रभाव डालते हैं, यह श्रीलंका और पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखकर देखा जा सकता है।

    आज हमारा देश ब्रिटिश गुलामी से मुक्त हो गया है लेकिन हम सभी सोशल मीडिया की गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया के बिना हम 1 दिन भी नहीं जी सकते। हम एक-दूसरे से व्यक्तिगत रूप से मिलते थे। शोक की घड़ी में मांगलिक सीधे कर्मों की बधाई देने और शोक व्यक्त करने के लिए जाते थे। आज के समय में बधाई हो या शोक, बधाई और संवेदना दोनों ही सोशल मीडिया पर व्यक्त की जाती हैं। पूर्व में किसी को विरोध करना पड़ता था तो वह घर से बाहर जाकर विरोध करता था। ज्ञापन आदि दिए गए लेकिन आज विरोध के नाम पर वे केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विरोध प्रदर्शन करते हैं।विरोध पोस्ट सोशल मीडिया पर हैं लेकिन इसे कितना प्रसारित किया जाएगा इसका नियंत्रण दुरार के हाथ में है। आज हम सोशल मीडिया के इतने गुलाम हो गए हैं कि घर से निकलने लायक भी नहीं हैं। हमें विरोध करने या अपनी प्रशंसा व्यक्त करने की वास्तविक शक्ति सोशल मीडिया द्वारा बहुत कमजोर कर दी गई है। सोशल मीडिया हमें गुलामी की जंजीरों में बांध रहा है। आज भारत के अधिकांश लोगों के हाथ में सोशल मीडिया का कोई न कोई माध्यम है। सोशल मीडिया के जरिए जो दिखाया जा रहा है उसे पूरी तरह सच मानकर वे बिना सोचे-समझे उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं. किस रास्ते जाना है, क्या करना है, किसके साथ जाना है, यह सब विदेश में बैठे लोग तय कर रहे हैं। हमारे देश के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है? यह देखते हुए कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कितनी पोर्नोग्राफी फैल रही है और कंपनी उन अश्लील पोस्ट पर विज्ञापन चला रही है, हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में है। आप सभी इन घटनाओं से भली-भांति परिचित हैं। लेकिन न तो कंपनियां और न ही सरकार इसकी निगरानी कर रही है। इसके विपरीत अगर कोई सोशल मीडिया पर देश की सच्चाई, देश की भलाई के बारे में बोलने की कोशिश करता है, अगर यह उन कंपनियों और सरकार के हित के खिलाफ है तो ऐसे लोगों के खाते बिना कोई कारण बताए बंद कर दिए जाते हैं। जिसका जवाब कोई नहीं देता। सोशल मीडिया पर आज आप वही पोस्ट डाल सकते हैं जिसकी चाह विदेश में बैठे व्यक्ति को होती है। अगर आप किसी पोस्ट को डिलीट करने की कोशिश करते हैं तो आपका फेसबुक पेज डिलीट हो जाता है। जिसकी शिकायत करना कोई जवाब नहीं है। किसके फॉलोअर्स बढ़ने चाहिए, किसका फेसबुक अकाउंट बंद होना चाहिए, यह सारा काम विदेश में बैठा एक शख्स कर रहा है।

     

    आज सभी विकसित और विकासशील देशों के अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं, फिर हमारे देश में हमारे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्यों नहीं हैं? हम दूसरे देशों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्यों भरोसा करते हैं? इसलिए भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर आत्मनिर्भर होना होगा तभी हम अपने देश को आत्मनिर्भर बना पाएंगे। हमें इस सोशल मीडिया की गुलामी से मुक्त होना है। क्या हम अपने देश के सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकते, क्या सरकार को हमारे देश का अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कदम नहीं उठाने चाहिए? आज हमारे देश के पैसे से विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चल रहे हैं और हमारे अपने देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल रहे हैं। अपने देश का पैसा, अपने देश की आर्थिकी, सोशल मीडिया के जरिए विदेशी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में दखल दे रहे हैं। इसलिए सतर्क रहने और इन पर नजर रखने की जरूरत है।