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  • PoK protests : PoK से बलूचिस्तान तक, मुनीर आर्मी पर मानवाधिकार उल्लंघन और दमन के गंभीर आरोप

    PoK protests : PoK से बलूचिस्तान तक, मुनीर आर्मी पर मानवाधिकार उल्लंघन और दमन के गंभीर आरोप

    PoK protests, बलूचिस्तान और वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों को लेकर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों पर बल प्रयोग, नागरिकों की मौत, जबरन गायब किए जाने और सैन्य दमन जैसी घटनाओं ने इन क्षेत्रों में असंतोष बढ़ाया है। आलोचकों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्याओं का समाधान संभव नहीं है और स्थायी शांति के लिए राजनीतिक संवाद, पारदर्शिता तथा नागरिक अधिकारों का सम्मान आवश्यक है।

    PoK से बलूचिस्तान तक बढ़ता सैन्य दमन

    PoK protests पाकिस्तानी सेना एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK, बलूचिस्तान और वजीरिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में चलाए जा रहे सैन्य अभियानों को लेकर मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में सुरक्षा के नाम पर की जा रही कार्रवाई को कई लोग दमन, हिंसा और नागरिक अधिकारों के हनन के रूप में देख रहे हैं।

    ताजा घटनाक्रम में PoK में हुए विरोध प्रदर्शनों पर कथित तौर पर की गई क्रूर कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी और बल प्रयोग में 26 लोगों की मौत हुई, जिनमें 7 गर्भवती महिलाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। इस घटना ने न केवल स्थानीय आबादी में आक्रोश बढ़ाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की सैन्य नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    PoK में विरोध और सेना की सख्ती

    PoK protests लंबे समय से राजनीतिक असंतोष और आर्थिक उपेक्षा का सामना कर रहा है। स्थानीय लोग बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, महंगाई और प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर बार-बार आवाज उठाते रहे हैं। लेकिन जब-जब विरोध तेज हुआ है, तब-तब सेना और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई की शिकायतें सामने आई हैं।

    PoK protests
    PoK protests

    PoK protests हालिया विरोध प्रदर्शनों में नागरिकों ने अपने अधिकारों और जीवन स्थितियों में सुधार की मांग की थी। इसके जवाब में जिस तरह की कार्रवाई की गई, उसने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया है। कई स्थानीय संगठनों का कहना है कि सेना ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के बजाय उसे कुचलने की रणनीति अपनाई।

    बलूचिस्तान में दशकों से जारी संघर्ष

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यह लंबे समय से असंतोष, संसाधनों पर नियंत्रण की लड़ाई और जबरन गायब किए जाने जैसे मुद्दों के कारण चर्चा में रहता है। यहां के लोगों का आरोप है कि राज्य संस्थाएं विकास के नाम पर सैन्यकरण को बढ़ावा देती हैं, जबकि स्थानीय आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक हिस्सेदारी से वंचित रखा जाता है।

    बलूच कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समूहों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य अभियानों के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता है, गांवों में भय का वातावरण बनाया जाता है और विरोध की हर आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है। यही कारण है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता है।

    जबरन गायब किए जाने के आरोप

    बलूचिस्तान में सबसे गंभीर आरोपों में से एक है लोगों को जबरन गायब किया जाना। कई परिवार वर्षों से अपने परिजनों की तलाश में हैं। इन मामलों में सेना और खुफिया एजेंसियों पर संदेह जताया जाता रहा है, हालांकि आधिकारिक स्तर पर इन आरोपों को अक्सर नकार दिया जाता है।

    स्थानीय समुदायों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों ने समाज में गहरा अविश्वास पैदा किया है। युवा पीढ़ी में आक्रोश बढ़ रहा है और अलगाव की भावना भी मजबूत होती जा रही है।

    वजीरिस्तान में सुरक्षा अभियान और नागरिकों की परेशानी

    वजीरिस्तान, जो अफगान सीमा से सटा हुआ इलाका है, लंबे समय से सैन्य अभियानों का केंद्र रहा है। आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर यहां बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कार्रवाइयों का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ा है।

    घर उजड़ने, विस्थापन, स्कूलों के बंद होने और आजीविका के साधनों के नष्ट होने जैसी समस्याएं यहां आम रही हैं। कई परिवार आज भी अपने मूल स्थानों पर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुरक्षा अभियान के दौरान नागरिकों की जान-माल की हानि को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

    PoK protests
    PoK protests

    PoK protests : मानवाधिकार संगठनों की चिंता

    PoK protests : अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार पाकिस्तान से अपील की है कि वह इन क्षेत्रों में बल प्रयोग की नीति पर पुनर्विचार करे। उनका कहना है कि किसी भी राज्य की सुरक्षा नीति का आधार नागरिकों की सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार होने चाहिए, न कि भय और दमन।

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब राज्य संवाद की जगह सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करता है, तो असंतोष और गहरा हो जाता है। इससे न केवल स्थानीय स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ती हैं।

    पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर असर

    इन घटनाओं का असर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ रहा है। सेना की भूमिका पहले से ही वहां एक बड़ा मुद्दा रही है, और अब PoK, बलूचिस्तान तथा वजीरिस्तान में सामने आ रही घटनाएं इस बहस को और तेज कर रही हैं। नागरिकों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि सेना विकास और सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार और सेना ने इन क्षेत्रों की समस्याओं को राजनीतिक संवाद, पारदर्शिता और अधिकारों के सम्मान के जरिए हल नहीं किया, तो असंतोष और गहराएगा।

    PoK protests, बलूचिस्तान और वजीरिस्तान में सामने आ रहे हालात पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विरोध प्रदर्शनों पर कथित क्रूर कार्रवाई, नागरिकों की मौत, जबरन गायब किए जाने के आरोप और लंबे समय से जारी दमन ने यह साफ कर दिया है कि केवल सैन्य शक्ति से स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता।

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    PoK protests : इन क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए, राजनीतिक संवाद को प्राथमिकता दी जाए और पाकिस्तानी सेना मानवाधिकार उल्लंघन जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। तभी भरोसा बहाल हो सकता है और क्षेत्र में वास्तविक सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

     

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  • Meenakshi Natarajan Nomination cancelled : कांग्रेस ने लगाया ‘सीट चोरी’ का आरोप, चुनाव आयोग के बाहर धरना

    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled : कांग्रेस ने लगाया ‘सीट चोरी’ का आरोप, चुनाव आयोग के बाहर धरना

    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled होने पर कांग्रेस का तीखा विरोध

    मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार Meenakshi Natarajan Nomination cancelled होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला और “सीट चोरी” करार दिया है। दिल्ली में इस मुद्दे ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए।

    कांग्रेस का आरोप है कि नामांकन रद्द करने का निर्णय न केवल पार्टी के साथ अन्याय है, बल्कि इससे चुनावी निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक उम्मीदवार के नामांकन का नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है।

    चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस का धरना

    Meenakshi Natarajan Nomination रद्द होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट और भूपेश बघेल चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए। नेताओं ने इस दौरान आयोग से मामले की समीक्षा करने और निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।

    धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन तकनीकी या प्रक्रियात्मक आधार पर रद्द किया जाता है, तो उसके पीछे स्पष्ट और ठोस कारण होने चाहिए। पार्टी का कहना है कि इस तरह के फैसलों में पारदर्शिता और समानता का पालन अनिवार्य है, ताकि किसी भी राजनीतिक दल को अनुचित नुकसान न हो।

    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled
    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled

    कांग्रेस ने क्यों कहा ‘सीट चोरी’?

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को “सीट चोरी” बताते हुए दावा किया कि यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से प्रभावित निर्णय है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार के नामांकन को रद्द करना सीधे तौर पर चुनावी संतुलन को प्रभावित करता है।

    कांग्रेस के अनुसार, यदि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की जल्दबाजी या असमानता बरती गई है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाएगी।

    मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सियासी तनाव

    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक हलचल तेज थी, लेकिन Meenakshi Natarajan Nomination cancelled होने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। कांग्रेस इसे अपने खिलाफ एक बड़ा झटका मान रही है, जबकि विपक्षी खेमे में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    राज्यसभा चुनावों में उम्मीदवारों की वैधता और नामांकन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में किसी भी स्तर पर हुई गड़बड़ी या विवाद का सीधा असर चुनावी रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ता है। कांग्रेस का कहना है कि इस फैसले से पार्टी की तैयारी को नुकसान पहुंचा है और कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी है।

    कांग्रेस नेताओं की मांग: फैसले की समीक्षा हो

    धरने पर बैठे नेताओं ने चुनाव आयोग से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। कांग्रेस का कहना है कि आयोग को सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए, ताकि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो।

    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled
    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled

    पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका बेहद अहम होती है और उसकी निष्पक्षता पर जनता का भरोसा बना रहना चाहिए। यदि किसी निर्णय को लेकर संदेह पैदा होता है, तो उसे दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है।

    राजनीतिक संदेश और आगे की रणनीति

    Meenakshi Natarajan Nomination रद्द होने के बाद कांग्रेस ने जिस तरह से आक्रामक रुख अपनाया है, उससे साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को जल्द शांत नहीं होने देगी। दिल्ली में धरना देकर कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह चुनावी प्रक्रिया में किसी भी कथित अनियमितता को गंभीरता से ले रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों का असर केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हो सकता है। कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में इस विवाद को और बड़ा बना सकते हैं।

    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled : क्यों अहम है यह विवाद?

    Meenakshi Natarajan Nomination cancelled होने का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे राज्यसभा चुनाव की वैधता, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़ता है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बता रही है, जबकि अब सबकी नजर इस पर है कि आयोग या संबंधित प्राधिकरण इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं।

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    फिलहाल, कांग्रेस का विरोध जारी है और दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर पार्टी का धरना राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस मामले पर और बयानबाजी तथा सियासी टकराव देखने को मिल सकता है।

     

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  • Asad Encounter Ghaziabad : सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद योगी सरकार का सख्त एक्शन, दानिश और बिलाल भी ढेर

    Asad Encounter Ghaziabad : सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद योगी सरकार का सख्त एक्शन, दानिश और बिलाल भी ढेर

    Asad Encounter Ghaziabad : उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति एक बार फिर चर्चा में है। असद एनकाउंटर गाजियाबाद के बाद अब दानिश और बिलाल नाम के दो और आरोपियों को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया है। खोदा क्षेत्र में हुए सूर्या चौहान हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी।

    सूर्या चौहान हत्याकांड क्या था?

    गाजियाबाद के खोदा इलाके में सूर्या चौहान की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना की बर्बरता इतनी ज्यादा थी कि इसे “बकरे की तरह काटना” तक बताया जा रहा है। इस जघन्य अपराध की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया और अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसी के चलते असद एनकाउंटर गाजियाबाद की खबर सामने आई।

    Asad Encounter Ghaziabad
    Asad Encounter Ghaziabad

    Asad Encounter Ghaziabad के बाद लगातार कार्रवाई

    • बिलाल एनकाउंटर (बरेली) बिलाल पर भी सूर्या चौहान हत्याकांड से जुड़े होने का शक था। पुलिस की विशेष टीम ने जब वह अपराध करने की कोशिश कर रहा था, तब उसे एनकाउंटर में मार गिराया गया।
    • दानिश एनकाउंटर (मऊ) मऊ जिले में दानिश नाम के आरोपी को भी पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। ये दोनों घटनाएं असद एनकाउंटर गाजियाबाद के कुछ दिनों बाद हुई हैं, जो साफ तौर पर दिखाता है कि सरकार अपराधियों को बख्शने वाली नहीं है।

    असद एनकाउंटर के बाद यूपी में कार्रवाई पर जनता का समर्थन

    Asad Encounter Ghaziabad और उसके बाद हुई इन कार्रवाइयों पर उत्तर प्रदेश में व्यापक चर्चा हो रही है। आम लोग इस कड़ी कार्रवाई का स्वागत कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर #YogiAdityanath और #UPPoliceEncounter ट्रेंड कर रहे हैं। कई लोग इसे “अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश” की दिशा में सही कदम मान रहे हैं।

    हालांकि कुछ लोग पुलिस एनकाउंटर की बढ़ती संख्या पर सवाल भी उठा रहे हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस अपराधियों, माफियाओं और गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। बुलडोजर एक्शन से लेकर एनकाउंटर तक, सरकार का संदेश साफ है — अपराध करने की कोई जगह नहीं।

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    Asad Encounter Ghaziabad ने पूरे मामले को नई दिशा दी है। सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद दानिश और बिलाल का एनकाउंटर इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार कानून व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीर है।

     

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  • Vishal Singh NCCF Chairman honored in Delhi: सियासत के ‘पावरहाउस’ और NCCF चेयरमैन विशाल सिंह दिल्ली में सम्मानित, नामचीन जर्नलिस्ट डॉ. विकास राज तिवारी ने सौंपा मोमेंटो

    Vishal Singh NCCF Chairman honored in Delhi: सियासत के ‘पावरहाउस’ और NCCF चेयरमैन विशाल सिंह दिल्ली में सम्मानित, नामचीन जर्नलिस्ट डॉ. विकास राज तिवारी ने सौंपा मोमेंटो

    Vishal Singh NCCF Chairman honored in Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में इस हफ्ते सहकारिता और डिजिटल मीडिया जगत की दो बड़ी हस्तियों के बीच एक बेहद खास और दिलचस्प मुलाकात देखने को मिली। भारत सरकार के उपक्रम NCCF और बिहार की प्रतिष्ठित संस्था BISCOMAUN के चेयरमैन विशाल सिंह को सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान देश के नामचीन डिजिटल मीडिया जर्नलिस्ट और ‘फील द चेंज फाउंडेशन’ (Feel The Change Foundation) के अध्यक्ष डॉ. विकास राज तिवारी ने अपने हाथों से एक खूबसूरत स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर दिया। विशाल सिंह को यह सम्मान उनके बेमिसाल राजनीतिक, सामाजिक और जनसेवा के कार्यों के लिए दिया गया है।
    सियासत और सहकारिता के ‘पावरहाउस’ हैं विशाल सिंह, जानिए उनका रसूख
    अगर आप विशाल सिंह के पारिवारिक और राजनीतिक रसूख को समझेंगे, तो आपको अंदाजा होगा कि वे भारतीय राजनीति के कितने बड़े ‘पावरहाउस’ हैं:
      • माता-पिता दोनों रह चुके हैं बिहार से सांसद: विशाल सिंह का नाता एक ऐसे कद्दावर राजनीतिक परिवार से है जिसकी जड़ें बिहार की जनता से बेहद गहराई से जुड़ी हैं। इनके पिता (दिवंगत अजीत सिंह) और माता (मीना सिंह) दोनों ही बिहार से सांसद रहकर देश की संसद में अपनी धाक जमा चुके हैं।
      • पूर्व केंद्रीय मंत्री बृजभूषण शरण सिंह के दामाद: विशाल सिंह का ससुराल भी भारतीय राजनीति का एक बहुत बड़ा केंद्र है। वे देश के सबसे चर्चित और कद्दावर नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री बृजभूषण शरण सिंह के दामाद हैं। उनकी शादी बृजभूषण शरण सिंह की सुपुत्री शालिनी सिंह से हुई है।
      • दादा की विरासत को दे रहे हैं नई ऊंचाई: विशाल सिंह देश के दिग्गज सहकारी नेता दिवंगत तपेश्वर बाबू के पोते हैं। अपने दादा और माता-पिता की विरासत को संभालते हुए विशाल सिंह ने बेहद कम उम्र में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सहकारिता (Cooperative Sector) के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। आज वे NCCF के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उपभोक्ताओं और किसानों के हक की बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं।

    इंटरनेशनल मंचों पर भारत का डंका बजाने वाले जर्नलिस्ट हैं डॉ. विकास राज तिवारी
    विशाल सिंह को सम्मानित करने वाले डॉ. विकास राज तिवारी भी मीडिया और सोशल सेक्टर का एक ऐसा चेहरा हैं, जिनकी साख सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है:
      • दुनिया के 5 देशों में रख चुके हैं भारत का पक्ष: डॉ. विकास राज तिवारी देश के बेहद नामचीन और प्रखर डिजिटल मीडिया जर्नलिस्ट हैं। एक बेबाक पत्रकार के रूप में उन्होंने दुनिया के 5 अलग-अलग देशों के इंटरनेशनल मंचों पर भारत का पक्ष बेहद मजबूती और गर्व के साथ रखा है।
      • बदलाव के ब्रांड एंबेसडर: पत्रकारिता के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े हैं। वे ‘फील द चेंज फाउंडेशन’ के जरिए समाज के हर तबके में एक पॉजिटिव चेंज (सकारात्मक बदलाव) लाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।

    क्या है ‘Feel Happy’ कैंपेन, जिसके तहत मिल रहा है दिग्गजों को सम्मान?
    डॉ. विकास राज तिवारी के नेतृत्व में उनकी संस्था ‘फील द चेंज फाउंडेशन’ इस समय पूरे देश में एक बेहद अनूठा और सकारात्मक अभियान चला रही है, जिसका नाम है— ‘Feel Happy’ कैंपेन।
    इस कैंपेन का सीधा फंडा है— देश के लोगों को सकारात्मक बदलाव को ‘फील’ (महसूस) कराना। इसके तहत संस्था देश भर में घूम-घूमकर जमीनी स्तर पर धाकड़ काम करने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गजों को शॉर्टलिस्ट कर सम्मानित कर रही है। इस लिस्ट में ये लोग शामिल हैं:
      • लीडर्स (राजनेता): जो जनता के विकास के लिए नीतियां बनाते हैं।
      • ब्यूरोक्रेट्स (IAS/IPS अधिकारी): जो सरकारी योजनाओं को जमीन पर कड़ाई से लागू करते हैं।
      • सोशल एक्टिविस्ट: जो बिना किसी स्वार्थ के समाज सेवा में जुटे हैं।
      • बिजनेसमैन: जो देश की इकोनॉमी को गति दे रहे हैं और युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।
      • जजेस: जो समाज में न्याय और कानून व्यवस्था का भरोसा बनाए रखते हैं।

    मुलाकात के बाद डॉ. विकास तिवारी ने क्या कहा?
    इस सम्मान समारोह के बाद AVS POST से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. विकास राज तिवारी ने कहा, “विशाल सिंह जैसे दूरदर्शी और जमीन से जुड़े युवा लीडर आज के नए भारत की असली ताकत हैं। इतना मजबूत राजनीतिक और पारिवारिक बैकग्राउंड होने के बावजूद उन्होंने सहकारिता के जरिए किसानों और आम उपभोक्ताओं की सेवा का जो रास्ता चुना है, वह वाकई तारीफ के काबिल है। हमारी संस्था उन्हें सम्मानित कर गर्व महसूस कर रही है।”
    इस खास मुलाकात के दौरान दोनों दिग्गजों के बीच देश के सहकारी संगठनों को और डिजिटल बनाने, युवाओं को मुख्यधारा की राजनीति व सामाजिक कार्यों में आगे लाने और देश के विकास की रफ्तार बढ़ाने को लेकर भी काफी देर तक बेहद सकारात्मक चर्चा हुई।

  • यूपी में फिर चली ‘स्थानांतरण एक्सप्रेस’, नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत कई प्राधिकरणों के अधिकारियों का तबादला

    यूपी में फिर चली ‘स्थानांतरण एक्सप्रेस’, नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत कई प्राधिकरणों के अधिकारियों का तबादला

    नोएडा। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस फेरबदल में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण (यीडा), यूपीसीडा, ट्रॉनिका सिटी और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीड़ा) के कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    तबादलों के इस दौर में नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई नए अधिकारियों की तैनाती की गई है, जबकि कई अधिकारियों को अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भेजा गया है।

    #Noida Authority Transfer News- नोएडा प्राधिकरण में आए ये अधिकारी

    • धर्मेंद्र कुशवाहा को यूपीसीडा से नोएडा में प्रबंधक बनाया गया है।
    • बृजेश कुमार कश्यप को यूपीसीडा से नोएडा में प्रबंधक के पद पर तैनाती मिली है।
    • प्रभात यादव को यूपीसीडा से नोएडा में प्रबंधक (सिविल) बनाया गया है।
    • नरोत्तम को ग्रेटर नोएडा से नोएडा में प्रबंधक (सिविल) के पद पर भेजा गया है।
    • सुरेंद्र सिंह को बीड़ा (झांसी) से नोएडा में प्रबंधक नियुक्त किया गया है।
    • संतोष कुमार को यूपीसीडा से नोएडा में ओएसडी (विशेष कार्याधिकारी) बनाया गया है।
    • बुद्ध विलास को ग्रेटर नोएडा से नोएडा में सहायक निदेशक (उद्यान) की जिम्मेदारी दी गई है।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में मिली नई तैनाती

    • राजीव कुमार को यूपीसीडा से ग्रेटर नोएडा में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर भेजा गया है।
    • ज्ञानेंद्र यादव को यूपीसीडा से ग्रेटर नोएडा में सहायक निदेशक (उद्यान) नियुक्त किया गया है।
    • विजय रावल को भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    Noida Authority Transfer News- नोएडा से बाहर भेजे गए अधिकारी

    • वरिष्ठ प्रबंधक सत्येंद्र गिरी को नोएडा से यमुना प्राधिकरण (यीडा) में वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) बनाया गया है।
    • कुलदीप कुमार को नोएडा से ट्रॉनिका सिटी, गाजियाबाद स्थानांतरित किया गया है।
    • सुषमा को नोएडा से बीड़ा, झांसी में प्रबंधक (सिस्टम) के पद पर भेजा गया है।
    • प्रेमचंद सेन को नोएडा से यूपीसीडा, कानपुर भेजा गया है।
    • अंकित राजपूत को भी नोएडा से यूपीसीडा, कानपुर स्थानांतरित किया गया है।

    ग्रेटर नोएडा से भी हुए तबादले

    • योगेंद्र पाल सिंह को ग्रेटर नोएडा से बीड़ा, झांसी में प्रबंधक के पद पर भेजा गया है।
    • विवेक कुमार को ग्रेटर नोएडा से यूपीसीडा में प्रबंधक के पद पर तैनात किया गया है।

    प्रदेश सरकार के इस प्रशासनिक फेरबदल को औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में कार्यकुशलता बढ़ाने और परियोजनाओं की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को देखते हुए इन तबादलों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    नोएडा से सत्यवीर सिंह की रिपोर्ट

  • वो शख्स जिसने बनवाया था दुबई का बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa), आज कितना पैसे वाला है?

    वो शख्स जिसने बनवाया था दुबई का बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa), आज कितना पैसे वाला है?

    Burj Khalifa : दुबई की चमकती आकाशरेखा में एक इमारत सबसे ऊंची खड़ी है — वो है बुर्ज खलीफा। 829.8 मीटर ऊंची यह दुनिया की सबसे ऊंची इमारत सिर्फ़ कंक्रीट और स्टील की बनी इमारत नहीं है, बल्कि महत्वाकांक्षा, इंजीनियरिंग की मिसाल और एक साहसी सपने का प्रतीक है।

    लेकिन इस इमारत को हकीकत में बदलने वाला शख्स कौन था?

    उनका नाम है मोहम्मद अली अलाब्बार (Mohamed Ali Alabbar) — ईमार प्रॉपर्टीज (Emaar Properties) के संस्थापक और चेयरमैन।

    Burj Khalifa : दुबई का गेम चेंजर

    मोहम्मद अली अलाब्बार का जन्म 8 नवंबर 1956 को हुआ था। वे 12 भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उन्होंने अमेरिका के सीएटल यूनिवर्सिटी से फाइनेंस और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएशन किया। UAE लौटकर उन्होंने सरकारी पदों पर काम किया और फिर प्राइवेट बिजनेस में कदम रखा।

    साल 1997 में उन्होंने Emaar Properties की नींव रखी। उनका मकसद था — दुबई को एक वैश्विक शहर बनाने में मदद करना। कंपनी 2000 में पब्लिक हुई और अलाब्बार की अगुवाई में Emaar ने कई ऐतिहासिक प्रोजेक्ट पूरे किए, जिनमें शामिल हैं:

    • Burj Khalifa
    • दुबई मॉल
    • दुबई मरीना
    • एमिरेट्स हिल्स

    उन्होंने बाद में Eagle Hills नाम से प्राइवेट रियल एस्टेट कंपनी भी शुरू की, Noon.com में निवेश किया और Americana Group के जरिए फास्ट फूड बिजनेस में भी हाथ आजमाया।

    Burj Khalifa
    Burj Khalifa, Dubai 

    बुर्ज खलीफा की कहानी

    2004 में इस प्रोजेक्ट की घोषणा “बुर्ज दुबई” नाम से हुई थी। 2008-09 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान प्रोजेक्ट मुश्किल में पड़ गया, लेकिन UAE सरकार (खासकर अबू धाबी) के समर्थन से निर्माण जारी रहा।

    2010 में इसे पूरा किया गया और शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के सम्मान में इसका नाम Burj Khalifa रख दिया गया।

    अलाब्बार कहते हैं कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ़ ऊंची इमारत बनाने के बारे में नहीं था। यह गर्व, महत्वाकांक्षा और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक था।

    Important : बुर्ज खलीफा Emaar Properties कंपनी की संपत्ति है (जो पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी है), किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। अलाब्बार इसके मुख्य विजनरी और बड़े शेयरधारक रहे हैं।

    मोहम्मद अली अलाब्बार की नेट वर्थ

    मई 2026 के अनुसार, मोहम्मद अली अलाब्बार की नेट वर्थ लगभग 2.9 बिलियन डॉलर (लगभग ₹24,000 से 25,000 करोड़ रुपये) बताई जा रही है।

    यह अनुमान Forbes के आधार पर है। उनकी दौलत के मुख्य स्रोत हैं:

    • Emaar Properties में हिस्सेदारी
    • Americana Restaurants (KFC, Pizza Hut आदि) में 33% हिस्सेदारी
    • Eagle Hills और Noon.com जैसे अन्य निवेश

    वे अरब दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार हैं।

    पैसा से आगे: उनकी विरासत

    अलाब्बार सिर्फ़ अरबपति नहीं हैं, बल्कि आधुनिक दुबई के निर्माताओं में से एक हैं। उन्होंने शहर को विश्व मानचित्र पर एक नई पहचान दी। हाल के वर्षों में उन्होंने भारतीय पेशेवरों की मेहनत और समर्पण की भी सराहना की है।

    उनका दर्शन बहुत सरल है — बड़े सपने देखो, उन्हें बिना रुके पूरा करो, और आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाओ।

    Burj Khalifa सिर्फ़ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत नहीं है। यह एक सबूत है कि एक व्यक्ति का साहसी सपना, सही योजना और संस्थागत समर्थन के साथ पूरा होने पर पूरा शहर और पूरा देश अपनी किस्मत बदल सकता है।

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    मोहम्मद अली अलाब्बार की कहानी हमें याद दिलाती है कि असली दौलत बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि जो विरासत आप छोड़ जाते हैं, उसी में होती है।

     

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  • 7 Year Old Ishank Singh Palk Strait : रांची के 7 साल के इशांक सिंह ने रचा इतिहास, 29 किमी समुद्र तैरकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

    7 Year Old Ishank Singh Palk Strait : रांची के 7 साल के इशांक सिंह ने रचा इतिहास, 29 किमी समुद्र तैरकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

    7 year old Ishank Singh Palk Strait स्विमिंग में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। झारखंड की राजधानी रांची के 7 वर्षीय इशांक सिंह ने श्रीलंका से भारत तक 29 km लंबे खतरनाक पाक स्ट्रेट को मात्र 9 घंटे 50 मिनट में तैरकर पार कर लिया। इस उपलब्धि के साथ इशांक दुनिया के सबसे कम उम्र के पाक स्ट्रेट तैराक बन गए हैं।

    7 Year Old Ishank Singh Palk Strait: एक अविश्वसनीय सफर

    30 अप्रैल 2026 को इशांक सिंह ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से अपनी तैराकी शुरू की और भारत के धनुषकोड़ी पहुंचकर इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को पूरा किया। पाक जलडमरूमध्य की खतरनाक लहरों, तेज धाराओं और समुद्री चुनौतियों को पार करते हुए इस नन्हें तैराक ने जो कारनामा किया है, वह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

     

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    Universal Records Forum (URF World Records) ने इशांक सिंह को “Youngest and Fastest Palk Strait Swimmer” का खिताब दिया है। उन्होंने 10 साल के बच्चे द्वारा बनाए गए पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।

    इशांक की तैयारी और संघर्ष

    रांची के धुर्वा इलाके के रहने वाले इशांक सिंह जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली के क्लास 3 के छात्र हैं। विश्व रिकॉर्ड बनाने से पहले वे रोजाना 4 से 5 घंटे धुर्वा डैम पर कड़ी मेहनत करते थे। उनके कोच और परिवार का कहना है कि इशांक में अनुशासन और लगन की कमी कभी नहीं रही।

    देशभर में छाई खुशी

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इशांक की इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा, “7 साल की उम्र में इतना बड़ा कारनामा कर दिखाना किसी चैंपियन की पहचान है। इशांक ने न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे भारत का नाम रोशन किया है।”

    भारतीय कोस्ट गार्ड और स्थानीय पुलिस ने धनुषकोड़ी पहुंचने पर इशांक का तिरंगे के साथ भव्य स्वागत किया।

    7 Year Old Ishank Singh Palk Strait
    7 Year Old Ishank Singh Palk Strait

    क्यों है यह उपलब्धि खास?

    7 year old Ishank Singh Palk Strait की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आज के समय में जब बच्चे मोबाइल और गेम्स में व्यस्त रहते हैं, इशांक सिंह जैसे बच्चे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

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    7 year old Ishank Singh Palk Strait : रांची के इस नन्हें हीरो इशांक सिंह ने न सिर्फ एक विश्व रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि लाखों बच्चों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा भी दी है।

  • Summer में कैसे करें दातों की केयर: डॉ. ए. एस. मलिक की टिप्स जान लिजिए

    Summer में कैसे करें दातों की केयर: डॉ. ए. एस. मलिक की टिप्स जान लिजिए

    Summer Teeth Care Tips: गर्मी का मौसम आते ही दांतों की देखभाल और भी जरूरी हो जाती है। इस मौसम में दांतों पर अधिक प्रभाव पड़ता है, जिससे दांतों में सेंसिटिविटी, सूखापन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। नोएडा के भंगेल क्षेत्र के प्रसिद्ध डेंटिस्ट डॉ. ए. एस. मलिक ने AVS POST के साथ एक खास बातचीत में गर्मियों में दांतों की सही देखभाल के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं। आइए जानते हैं डॉ. मलिक से उन खास सुझावों के बारे में जो आपके दांतों को इस गर्मी में स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेंगे।

    गर्मी में दांतों की समस्याएं

    गर्मी के दिनों में दांतों में सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। ठंडे पानी या आइस कूल्ड ड्रिंक्स का सेवन करने से दांतों में अचानक दर्द हो सकता है। इसके अलावा, गर्मी में मुँह का सूखापन भी एक बड़ी समस्या बन सकता है। डॉ. मलिक का कहना है, “गर्मी में जूस और ठंडी चीज़ों का सेवन दांतों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे दांतों में सेंसिटिविटी बढ़ती है और सूखापन भी महसूस होता है।”

    सेंसेटिविटी से बचने के उपाय

    अगर आपको ठंडे या गर्म खाद्य पदार्थों से दांतों में असहजता महसूस होती है, तो आपको सेंसेटिविटी टूथपेस्ट का उपयोग करना चाहिए। डॉ. मलिक कहते हैं, “सेंसेटिविटी वाले टूथपेस्ट दांतों को सुरक्षित रखते हैं और सर्दी-गर्मी से बचाने में मदद करते हैं।”

    मुँह का सूखापन और दांतों की सफाई

    गर्मी में मुँह का सूखापन दांतों के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। इससे बैक्टीरिया पनपते हैं, जो दांतों को कमजोर और खराब कर सकते हैं। डॉ. मलिक का कहना है, “इस मौसम में मुँह का सूखापन कम करने के लिए अधिक से अधिक पानी पिएं और माउथवॉश का इस्तेमाल करें।”

    आहार का ख्याल रखें

    गर्मी में मीठी चीजों का सेवन बढ़ जाता है, जो दांतों के लिए नुकसानकारी हो सकता है। डॉ. मलिक का कहना है, “गर्मियों में ताजे फल और हरी सब्जियां खाएं, जो दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।” साथ ही, जंक फूड और अधिक मीठे पेय पदार्थों से बचने की सलाह देते हैं।

    ब्रशिंग और फ्लॉसिंग

    गर्मी के मौसम में दांतों की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डॉ. मलिक का कहना है, “दिन में दो बार ब्रश करें और एक बार फ्लॉस का इस्तेमाल करें। इससे दांतों के बीच जमा हुआ खाना बाहर निकल जाता है और बैक्टीरिया पनपने से बचते हैं।” डॉ. ए. एस. मलिक का कहना है, “गर्मी के मौसम में दांतों की देखभाल पर खास ध्यान देना चाहिए। सही ब्रशिंग, सही आहार और अधिक पानी पीना दांतों के लिए फायदेमंद होता है।” साथ ही, “अगर दांतों में कोई समस्या महसूस हो, तो तुरंत डेंटिस्ट से संपर्क करें।”

  • AVS POST ग्राउंड रिपोर्ट: ‘क्लीन नोएडा, ग्रीन नोएडा’ सिर्फ नारा नहीं, जमीन पर दिख रहा असर, ग्राउंड जीरो से दिखी बदलते नोएडा की तस्वीर, Authority को लेकर लोगों को नजरिया हुआ चेंज

    AVS POST ग्राउंड रिपोर्ट: ‘क्लीन नोएडा, ग्रीन नोएडा’ सिर्फ नारा नहीं, जमीन पर दिख रहा असर, ग्राउंड जीरो से दिखी बदलते नोएडा की तस्वीर, Authority को लेकर लोगों को नजरिया हुआ चेंज

    AVS POST ग्राउंड रिपोर्ट: नोएडा की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों और एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं रही, अब शहर की हरियाली भी चर्चा में है। AVS POST टीम ने ग्राउंड जीरो पर अलग-अलग सेक्टरों और प्रमुख पार्कों का दौरा किया तो “क्लीन नोएडा, ग्रीन नोएडा” अभियान का असर कई जगह नजर आया। पार्कों की सूरत बदली दिखी, ग्रीन बेल्ट में सुधार दिखा और लोगों के बीच इसको लेकर सकारात्मक चर्चा भी सुनने को मिली।

    Noida Authority
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    सेक्टर-21A नोएडा स्टेडियम, सेक्टर-91 बायोडायवर्सिटी पार्क, वेद वन पार्क, बॉटनिकल गार्डन, सेक्टर-50, 62, 78, 100, 104, 137, 82, 93 और 150 में AVS POST टीम ने मौके पर जाकर हालात देखे। कई जगह वॉकिंग ट्रैक बेहतर हालत में मिले, पार्कों में फूलों की सजावट, ओपन जिम, बच्चों के प्ले जोन और बैठने की सुविधाएं लोगों को आकर्षित करती दिखीं।

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    सेक्टरों में क्या-क्या बदला

    सेक्टर-50 और 78 के रेजिडेंशियल पार्कों में हरियाली और मेंटेनेंस बेहतर नजर आया।
    सेक्टर-91 का बायोडायवर्सिटी पार्क लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
    सेक्टर-100 और 104 में ग्रीन बेल्ट और चौराहों पर फ्लोरल डिस्प्ले शहर की खूबसूरती बढ़ाते दिखे।
    सेक्टर-137 और 150 में बड़े ओपन ग्रीन स्पेस और पार्कों में काम दिखाई दिया।

    सुबह टहलने वाले, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक—हर वर्ग की मौजूदगी पार्कों में बढ़ी हुई दिखी। कई लोगों ने कहा कि अब पार्कों में समय बिताने का मन करता है।

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    हॉर्टिकल्चर विभाग के काम की चर्चा

    ग्राउंड विजिट के दौरान लोगों के बीच हॉर्टिकल्चर निदेशक आनंद मोहन सिंह की कार्यशैली को लेकर भी सकारात्मक चर्चा सुनने को मिली। लोगों का कहना था कि पार्कों और ग्रीन बेल्ट में काम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं लग रहा, जमीन पर असर दिखता है। पौधारोपण, मेंटेनेंस और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस महसूस होता है।

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    सीईओ नेतृत्व की भी हो रही बात

    नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश की मॉनिटरिंग और “क्लीन नोएडा, ग्रीन नोएडा” को लेकर प्रशासनिक फोकस भी चर्चा में रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई और हरियाली को लेकर अब गंभीरता दिखती है।

    लोगों की जुबानी, कैसा दिख रहा बदलाव

    राकेश शर्मा, सेक्टर-50
    “सच बताऊं तो पहले इतना ध्यान नहीं दिखता था। अब पार्क में सफाई भी है, पौधे भी अच्छे लगे हैं। मॉर्निंग वॉक में मजा आता है।”

    नीलम गुप्ता, सेक्टर-93
    “बच्चों को लेकर आते हैं तो अच्छा लगता है। पहले बस पार्क था, अब ठीक-ठाक डेवलप स्पेस जैसा लगता है।”

    विनोद त्यागी, सेक्टर-78
    “लगता है ऊपर से मॉनिटरिंग हो रही है। छोटी-छोटी चीजों पर भी ध्यान दिया गया है, यही फर्क ला रहा है।”

    सविता मिश्रा, सेक्टर-137
    “फूलों की सजावट और ग्रीन बेल्ट देखकर अच्छा लगता है। शहर में पॉजिटिव फील आता है।”

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    योगी सरकार के विजन की दिख रही झलक

    स्थानीय स्तर पर लोग यह भी कहते दिखे कि योगी सरकार के शहरी विकास और स्वच्छता फोकस का असर नोएडा में दिखता है। हरित विकास, साफ-सफाई, सार्वजनिक सुविधाओं और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जो प्राथमिकता बनी, उसका असर जमीन पर महसूस होता है।

    सांसद-विधायक भी कर रहे सराहना

    स्थानीय सांसद और विधायक स्तर पर भी इन पहलों को लेकर सकारात्मक फीडबैक की चर्चा रही। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि हरियाली, पार्क उन्नयन और स्वच्छता पर काम नोएडा को अलग पहचान दे रहा है।

    ‘ग्रीन नोएडा’ अब विजन से आगे की कहानी

    AVS POST की ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ दिखा कि यह सिर्फ पार्क सुंदर बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि शहरी जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश है। सेक्टरों में ग्रीन स्पेस बढ़े हैं, लोगों की भागीदारी बढ़ी है और शहर की तस्वीर बदली-बदली नजर आ रही है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर यही गति बनी रही तो नोएडा ग्रीन अर्बन मॉडल के रूप में और मजबूत पहचान बना सकता है।

    ग्राउंड जीरो पर महसूस हुआ कि ‘क्लीन नोएडा, ग्रीन नोएडा’ अब सिर्फ सरकारी टैगलाइन नहीं, बल्कि सेक्टरों, पार्कों और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में उतरती कहानी बन रहा है—और इस बदलाव के केंद्र में विभागीय मेहनत, प्रशासनिक नेतृत्व, सरकार का विजन और जनता की भागीदारी चारों साथ दिखते हैं।

  • Nepal News : बालेन सरकार के खिलाफ जनाक्रोश – छात्र संघ भंग करने और गृहमंत्री के ‘काले कारोबार’ पर बवाल

    Nepal News : बालेन सरकार के खिलाफ जनाक्रोश – छात्र संघ भंग करने और गृहमंत्री के ‘काले कारोबार’ पर बवाल

    Nepal News : नेपाल की राजनीति इन दिनों तेजी से बदल रही है। रैपर से काठमांडू के मेयर और अब प्रधानमंत्री बने बालेन शाह की युवा-केंद्रित सरकार ने सत्ता संभालते ही बड़े-बड़े सुधारों का ऐलान किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐतिहासिक जांच, VIP संस्कृति का अंत और शिक्षा व्यवस्था को राजनीति मुक्त करने जैसे कदमों से शुरूआत हुई। लेकिन कुछ फैसलों ने विवाद खड़ा कर दिया है। खासतौर पर स्कूलों-कॉलेजों में राजनीतिक छात्र संघों (स्टूडेंट यूनियंस) को भंग करने का फैसला और गृहमंत्री सूदन गुरुंग पर लगे वित्तीय अनियमितताओं व ‘काले कारोबार’ के आरोपों ने देशभर में जनाक्रोश भड़का दिया है।

    यह विरोध सिर्फ पुरानी पार्टियों का नहीं, बल्कि आम जनता और छात्रों के एक वर्ग का भी है, जो बालेन सरकार से साफ-सुथरी राजनीति की उम्मीद लगाए बैठा था।

    छात्र संघ भंग : शिक्षा सुधार या लोकतंत्र पर हमला?

    बालेन शाह सरकार ने अपने 100-पॉइंट गवर्नेंस एजेंडा के तहत शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार किया। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सभी राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों की गतिविधियां बंद करने का आदेश जारी किया गया। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलर्स के साथ लंबी बैठक में साफ कहा कि कैंपस ‘पवित्र स्थान’ हैं, जहां राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने पुलिस की मदद से भी यूनियन ऑफिस खाली कराने की बात कही।

    Nepal News : सरकार का तर्क

    • छात्र संघ राजनीतिक हस्तक्षेप, हड़ताल और हिंसा का कारण बनते रहे हैं।
    • पढ़ाई बाधित होती है, परीक्षाएं टलती हैं और शैक्षणिक माहौल खराब होता है।
    • नई व्यवस्था में गैर-राजनीतिक ‘स्टूडेंट काउंसिल’ बनाई जाएगी, जो सिर्फ छात्र हितों पर काम करेगी।

    विरोध 

    • छात्र नेता और विपक्षी दल इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहे हैं। उनका कहना है कि छात्र संघ युवाओं को राजनीति सिखाने का माध्यम हैं। इन्हें बंद करना युवा आवाज को दबाने की कोशिश है।
    • कई छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है – कुछ लोग कह रहे हैं कि कैंपस में शांति जरूरी है, तो कुछ इसे अत्यधिक केंद्रीकृत और अधिनायकवादी कदम मान रहे हैं।

    यह फैसला बालेन की ‘एंटी-करप्शन’ और ‘क्लीन गवर्नेंस’ इमेज के साथ टकरा रहा है।

    Nepal news : nepal public outrage Balen government student union ban corruption
    Nepal news : nepal public outrage Balen government student union ban corruption

    गृहमंत्री सूदन गुरुंग पर ‘काले कारोबार’ के आरोप

    सरकार बनने के महज कुछ हफ्तों में ही दूसरा बड़ा विवाद गृहमंत्री सूदन गुरुंग को लेकर सामने आया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग, विवादित व्यवसायियों से जुड़ी कंपनियों में शेयर खरीदने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं।

    • विपक्ष और नागरिक समाज ने उनके इस्तीफे की मांग की है।
    • कुछ रिपोर्ट्स में दीपक भट्ट जैसे विवादित बिजनेसमैन से उनके कथित संबंधों का जिक्र है।
    • यह विवाद इसलिए भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि बालेन सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी जांच शुरू की है – 2006 के बाद के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों, मंत्रियों और अधिकारियों की संपत्ति जांचने का आयोग बनाया गया है।

    जनता पूछ रही है – अगर सरकार पुराने नेताओं की संपत्ति जांच रही है, तो अपने गृहमंत्री पर लगे आरोपों की जांच क्यों नहीं हो रही? यह दोहरा मापदंड क्यों?

    बालेन सरकार की चुनौतियां और भविष्य

    बालेन शाह Gen-Z आंदोलन के चेहरे रहे हैं। 2025 में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हुए युवा प्रदर्शनों ने पुरानी सरकार गिराई थी। बालेन ने उस समय युवाओं का साथ दिया और अब खुद सत्ता में हैं। उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, संपत्ति जांच और शिक्षा सुधार जैसे कदम उठाए हैं, जो सराहनीय हैं।

    • छात्र संघ भंग करने का फैसला युवा वर्ग को अलग कर सकता है।
    • गृहमंत्री विवाद से ‘साफ-सुथरी राजनीति’ का वादा धूमिल हो रहा है।
    • पुरानी पार्टियां (जैसे UML, कांग्रेस) इस मौके का फायदा उठाकर सरकार को घेर रही हैं।

    नेपाल की जनता, खासकर युवा, अब बालेन सरकार से इंतजार कर रही है कि वह इन विवादों को कैसे सुलझाती है। क्या वह अपने फैसलों पर पुनर्विचार करेगी? क्या गृहमंत्री पर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? या सुधारों की रफ्तार बनाए रखते हुए विरोध को भी संभाल पाएगी?

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    नेपाल में बदलाव की हवा तेज है, लेकिन बदलाव कभी आसान नहीं होता। बालेन शाह की सरकार सुधार लाना चाहती है, पर तरीके और समय पर सवाल उठ रहे हैं। छात्र संघ भंग और गृहमंत्री विवाद दोनों ही मुद्दे सरकार की परीक्षा हैं। अगर बालेन इन चुनौतियों को पारदर्शिता और संवाद से हल कर पाए, तो वे वाकई ‘नई नेपाल’ की नींव रख सकते हैं। वरना, जो जनाक्रोश पुरानी सरकार के खिलाफ था, वही नई सरकार के खिलाफ भी मुड़ सकता है।

    Nepal News : नेपाल की राजनीति का यह दौर युवाओं के लिए उम्मीद और निराशा दोनों का मिश्रण है। भविष्य बताएगा कि बालेन शाह का ‘रैप’ सुधार का गीत बन पाएगा या सिर्फ विवादों का शोर।