UPSC सिविल सेवा परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है, जो भारत के सबसे होनहार लोगों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए चुनती है। लेकिन, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने इस प्रणाली में बड़े बदलावों की सिफारिश की है। टाइम्स ऑफ इंडिया में अपने लेख में उन्होंने परीक्षा की अधिकतम आयु और प्रयासों की संख्या कम करने और 40 साल से अधिक उम्र के पेशेवरों के लिए एक नया प्रवेश मार्ग शुरू करने का सुझाव दिया है। आइए, उनके विचारों और उनके महत्व को समझें।
वर्तमान व्यवस्था और उसकी कमियां
UPSC परीक्षा में 21 से 32 साल की उम्र के बीच 6 बार प्रयास करने की छूट है। यह लचीलापन देता है, लेकिन सुब्बाराव का कहना है कि इससे कई समस्याएं पैदा होती हैं। कई उम्मीदवार सालों तक तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार असफल होने से उन पर भारी मानसिक और भावनात्मक दबाव पड़ता है। वे संक कॉस्ट फॉलसी (Sunk Cost Fallacy) का शिकार हो जाते हैं, जहां वे सोचते हैं, “मैंने इतना समय और मेहनत लगा दी, अब हार मानूं तो सब बेकार हो जाएगा।” इससे कई लोग अपने सबसे अच्छे साल एक ऐसे लक्ष्य के पीछे बर्बाद कर देते हैं, जो शायद उनके लिए मुमकिन नहीं है।
आयु और प्रयासों की संख्या में कटौती
सुब्बाराव ने अधिकतम आयु को 27 साल और प्रयासों को 3 बार तक सीमित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने 1970 के दशक के अपने अनुभव का जिक्र किया, जब केवल दो प्रयास और 21-24 साल की आयु सीमा थी। उनका मानना है कि मौजूदा छह प्रयासों की व्यवस्था उन लोगों को फायदा देती है, जो परीक्षा की तकनीक में महारत हासिल कर लेते हैं, न कि वास्तविक योग्यता वाले लोगों को। कम प्रयासों से उम्मीदवार जल्दी दूसरी राह चुन सकते हैं और अपने समय की बर्बादी रोक सकते हैं।
UPSC
अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए नया रास्ता
युवा केंद्रित व्यवस्था को संतुलित करने के लिए, सुब्बाराव ने 40-42 साल की उम्र के अनुभवी लोगों के लिए हर साल एक नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव दिया। यह लेटरल एंट्री से अलग होगी और UPSC द्वारा संचालित एक स्थायी, प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया होगी। ऐसे लोग, जो पहले से अनुभव रखते हैं, प्रशासन में नई सोच और व्यावहारिक ज्ञान ला सकते हैं, जिससे सिविल सेवा अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनेगी।
UPSC : युवाओं की ताकत को बनाए रखना
मध्य-करियर प्रवेश का समर्थन करते हुए, सुब्बाराव ने युवा भर्तियों के महत्व पर भी जोर दिया। वे प्रशासन में नया जोश, उत्साह और ताजगी लाते हैं। युवा और अनुभवी लोगों का मिश्रण सिविल सेवा को और बेहतर बना सकता है।
सुब्बाराव के सुझाव UPSC प्रणाली को आधुनिक और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक कदम हैं। आयु और प्रयासों की सीमा कम करने से सही प्रतिभा का चयन हो सकता है, वहीं मध्य-करियर प्रवेश से अनुभव की विविधता आएगी। जैसा कि उन्होंने कहा, UPSC परीक्षा में पिछले कुछ दशकों में सुधार हुआ है, लेकिन अभी और बेहतर करने की जरूरत है। ये बदलाव सिविल सेवा को भारत की बदलती जरूरतों के लिए और तैयार कर सकते हैं ।
भारत में एक बार फिर COVID-19 मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, खासकर केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मामले हल्के हैं, लेकिन वैक्सीन की घटती प्रभावशीलता और नए वेरिएंट्स को लेकर चिंता बनी हुई है। मानसून के मौसम ने हालात को और भी जटिल बना दिया है, इसलिए यह समय है अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का। आइए जानें कुछ आसान तरीके, जिससे आप इस समय को स्वस्थ और शांतिपूर्वक पार कर सकते हैं।
मौजूदा COVID-19 स्थिति को समझें
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत के कई राज्यों में Covid-19 मामलों में फिर से उछाल आया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पहले की वैक्सीनेशन से मिली इम्युनिटी अब कम हो रही है। अच्छी बात यह है कि गंभीर मामले कम हैं और अस्पतालों पर ज्यादा बोझ नहीं है। फिर भी, यह स्थिति सतर्क रहने की याद दिलाती है। मानसून की बारिश, खासकर नवी मुंबई और केरल जैसे इलाकों में, सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
तो आइए जानें, कैसे आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखते हुए तंदुरुस्त रह सकते हैं।
COVID-19 Cases in India
शारीरिक स्वास्थ्य और इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं
1. पोषण से इम्युनिटी मजबूत करें
इम्युनिटी मजबूत होगी तो बीमारियों से लड़ना आसान होगा। इन चीज़ों को अपने खाने में शामिल करें:
सिट्रस फल और विटामिन C: जैसे संतरा, आंवला और नींबू – ये इम्युन सिस्टम को मजबूत करते हैं।
हल्दी और अदरक: सूजन को कम करने वाले गुणों से भरपूर। हल्दी वाला दूध या अदरक की चाय जरूर पिएं।
प्रोटीन युक्त भोजन: दाल, पनीर और अंडे – शरीर की मरम्मत और इम्युनिटी के लिए ज़रूरी हैं।
पर्याप्त पानी पिएं: मानसून की नमी में डिहाइड्रेशन हो सकता है। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। नारियल पानी भी फायदेमंद है।
त्वरित उपाय: एक आसान काढ़ा बनाएं – पानी में तुलसी, अदरक, काली मिर्च और एक चुटकी हल्दी डालकर उबालें। स्वाद के लिए शहद मिलाएं और रोज़ पिएं।
2. घर पर एक्टिव रहें
बारिश में बाहर जाना मुश्किल होता है, इसलिए घर के अंदर व्यायाम करें। योग खासतौर से इम्युनिटी बढ़ाने और तनाव कम करने में मदद करता है।
टिप: रोज़ 15 मिनट योग करें – जैसे सूर्य नमस्कार और प्राणायाम। HealthifyMe जैसे भारतीय ऐप्स से गाइडेड वर्कआउट कर सकते हैं।
3. COVID-19 सुरक्षा नियमों का पालन करें
हालांकि मामले हल्के हैं, फिर भी सतर्क रहना ज़रूरी है:
मास्क पहनें – खासकर भीड़भाड़ वाले बंद स्थानों में।
सैनिटाइज़र इस्तेमाल करें और बार-बार हाथ धोएं।
घर में वेंटिलेशन रखें – मानसून की नमी में हवा का बहाव जरूरी है।
स्थानीय स्वास्थ्य सलाह पर ध्यान दें – बूस्टर डोज़ या नई गाइडलाइंस के लिए अपडेट रहें।
COVID-19 Cases Boosting Physical Health and Immunity
मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करें
बढ़ते मामलों की अनिश्चितता मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। इससे निपटने के कुछ आसान तरीके:
1. मेडिटेशन और माइंडफुलनेस अपनाएं
ध्यान और गहरी साँस लेने से मन शांत होता है। Calm जैसे इंटरनेशनल ऐप्स या Art of Living जैसे भारतीय प्लेटफ़ॉर्म मदद कर सकते हैं।
त्वरित अभ्यास: 4-7-8 तकनीक अपनाएं – 4 सेकंड तक साँस लें, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड में छोड़ें। इसे 4 बार दोहराएं।
2. ज़्यादा खबरें ना देखें
COVID या अन्य मुद्दों (जैसे भारत-पाक तनाव) से जुड़ी लगातार खबरें देखना तनाव बढ़ा सकती हैं। भरोसेमंद स्रोतों से ही सीमित समय के लिए खबरें लें।
3. अपनों से जुड़े रहें
दोस्तों और परिवार से बातचीत मानसिक ताकत बढ़ाती है। मानसून की शामें परिवार के साथ लूडो या कहानी सुनाने के लिए बढ़िया मौका हैं।
COVID-19 Cases Prioritizing Mental Wellness
मानसून के लिए विशेष स्वास्थ्य सुझाव
खड़े पानी से बचें – मच्छरों से डेंगू जैसी बीमारियाँ बढ़ सकती हैं। घर के आसपास सफाई रखें।
पैरों को सूखा रखें – बारिश में भीगने से फंगल इंफेक्शन हो सकता है। हल्के और सूखे जूते पहनें।
स्वस्थ नाश्ता चुनें – तले हुए पकौड़े की बजाय भुना हुआ मखाना या भुट्टा चाट खाएं।
COVID-19 मामलों की यह नई लहर हमें याद दिलाती है कि स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती सतत प्रयास से मिलती है। अच्छा भोजन, नियमित व्यायाम, सुरक्षा नियमों का पालन और मानसिक शांति – यही इस समय को सफलतापूर्वक पार करने की कुंजी हैं।
सुरक्षित रहें, मजबूत रहें, और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें! आपके पसंदीदा इम्युनिटी रेसिपी या सेल्फ-केयर टिप्स नीचे कमेंट में साझा करें, और इस समय में हम सब एक-दूसरे की मदद करें।
पाकिस्तान ने कथित तौर पर भारत को एक पत्र लिखकर Indus Waters Treaty (सिंधु जल संधि) को निलंबित करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय ने नई दिल्ली को पत्र लिखकर संधि के तहत अपनी सीमा में नदियों के प्रवाह को फिर से शुरू करने की मांग की है।
Indus Waters Treaty का निलंबन
Indus Waters Treaty एक महत्वपूर्ण जल-बंटवारा समझौता है, जो छह दशकों से अधिक समय तक कायम रहा है। यह आग्रह तब आया है, जब भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक और पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद 1960 के इस समझौते को निलंबित कर दिया, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।
भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर
राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर भारत ने संधि को तब तक निलंबित कर दिया है, जब तक इस्लामाबाद “विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से” आतंकवाद के समर्थन को समाप्त नहीं करता। इस कदम को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस), रणनीतिक मामलों पर शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था, ने मंजूरी दी थी, जो नई दिल्ली द्वारा विश्व बैंक की मध्यस्थता वाले इस समझौते को पहली बार रोकने का कदम है।
पाकिस्तान के मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय को भेजे पत्र में चेतावनी दी कि संधि के निलंबन से देश में संकट पैदा होगा।
Indus Waters Treaty
प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने पहले संबोधन में सरकार के कठोर रुख को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। आतंक और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते। आतंक और व्यापार एक साथ नहीं हो सकते।”
भारत का आतंकवाद पर जवाब
हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लंबे समय से राज्य नीति के रूप में उपयोग करने की ओर इशारा किया।
संधि के तहत नदियों का बंटवारा
संधि के तहत तीन पश्चिमी नदियाँ – सिंधु, झेलम और चिनाब – पाकिस्तान को आवंटित हैं, जबकि पूर्वी नदियाँ – सतलुज, ब्यास और रावी – भारत के पास हैं। भारत ने अब तीन-स्तरीय रणनीति की घोषणा की है – अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक – ताकि सिंधु के पानी का एक भी बूंद पाकिस्तान में न जाए।
भारत की जल उपयोग नीति
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं कि भारत की सीमा से एक भी बूंद पानी बिना उपयोग के न जाए।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सरकार के रुख को दोहराते हुए कहा, “Indus Waters Treaty सद्भावना और मित्रता पर आधारित थी। पाकिस्तान ने दशकों से सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करके इन मूल्यों को रौंदा है।”
ऑपरेशन सिंदूर और भारत की शर्तें
यह कड़ा जवाब ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया है, जो पहलगाम हमले के बाद शुरू किया गया एक त्वरित सैन्य अभियान था, जिसके परिणामस्वरूप एक संक्षिप्त युद्धविराम समझौता हुआ। लेकिन नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है: इस्लामाबाद के साथ अब बातचीत केवल एक एजेंडे तक सीमित होगी – आतंकवाद को समाप्त करना और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की वापसी सुनिश्चित करना।
Indus Waters Treaty
संधि के तहत जल बंटवारा
1960 की संधि के अनुसार, भारत को भारत में स्थित सिंधु नदी प्रणाली के कुल पानी का लगभग 30 प्रतिशत मिला, जबकि पाकिस्तान को शेष 70 प्रतिशत मिला।
Indus Waters Treaty के निलंबन के साथ, नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख कदम उठाकर रुकी हुई जलविद्युत परियोजनाओं को पूरा करने की उम्मीद है।
उच्च स्तरीय बैठक की योजना
इस सप्ताह गृह मंत्री अमित शाह, जल संसाधन मंत्री पाटिल, ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना है। संधि के निलंबन के बाद अमित शाह, पाटिल और मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच दो बैठकें पहले ही हो चुकी हैं।
नोएडा: ‘One Country One Election’ की अवधारणा लोकतंत्र को अधिक व्यावहारिक और लागत-प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बशर्ते इसे व्यापक विचार-विमर्श और सहमति के साथ लागू किया जाए। यह बात रविवार को नोएडा के सेक्टर-91 स्थित पंचशील बालक इंटर कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विषयक प्रबुद्ध समागम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री और ‘एक देश, एक चुनाव’ के राष्ट्रीय संयोजक श्री सुनील बंसल ने कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. डी.के. गुप्ता (अध्यक्ष, फेलिक्स हॉस्पिटल, नोएडा) ने की, जबकि पूर्व बार एसोसिएशन गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष कालू राम चौधरी ने संयोजक की भूमिका निभाई।
बार-बार के चुनाव विकास में बाधक
सुनील बंसल ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश के विकास और जनकल्याण योजनाओं में अवरोध उत्पन्न करते हैं। पिछले 30 वर्षों में ऐसा कोई वर्ष नहीं रहा जब किसी राज्य में चुनाव न हुआ हो। ये अनियोजित चुनाव देश की प्रगति में रुकावट का काम करते हैं। ‘One Country One Election’ अपनाकर इन बाधाओं को दूर किया जा सकता है। इससे राजनीतिक एजेंडा विकास के मुद्दों पर केंद्रित होगा और पांच साल में One Country One Election होने से नेताओं की जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि यह अवधारणा नई नहीं है; 1952 से 1967 तक चार चुनाव इसी प्रक्रिया के तहत हुए थे।
सरकार द्वारा इस विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने 62 राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे, जिनमें से 47 दलों ने जवाब दिया। इनमें 32 दलों ने One Country One Election का समर्थन किया, जबकि 15 ने विरोध किया। बंसल ने बताया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में 1.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, जो देश के वित्तीय संसाधनों पर भारी बोझ है। यदि 2024 में एक साथ चुनाव हुए होते, तो यह जीडीपी में 1.5% की वृद्धि ला सकता था, जो 4.5 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।
इसके अलावा, One Country One Election से पर्यावरण को भी लाभ होगा, क्योंकि बार-बार के चुनावों में प्रचार सामग्री, पोस्टर और बैनर से वायु व ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। साथ ही, बार-बार मतदान से आम जनता का समय और ऊर्जा बर्बाद होती है, क्योंकि उन्हें अपने काम से बार-बार छुट्टी लेनी पड़ती है। एक साथ चुनाव से यह समस्या कम होगी।
One Country One Election : Sunil Bansal
One Country One Election से लागत और समय की बचत
बंसल ने बताया कि ‘One Country One Election’ कोई नई अवधारणा नहीं है। 1951-52 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। वर्तमान में भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग समय पर समाप्त होता है, जिसके कारण हर साल कहीं न कहीं चुनाव होते हैं। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के अनुसार, पिछले दशक में हर साल औसतन 5-7 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। लोकसभा चुनाव हर पांच साल में होते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव अक्सर समय से पहले—जैसे विधानसभा भंग होने या राष्ट्रपति शासन के कारण—हो जाते हैं।
भारत में 99 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। ‘एक देश, एक चुनाव’ से इस खर्च में 30-35% की कमी आ सकती है। प्रत्येक राज्य के विधानसभा चुनाव में औसतन 5,000-10,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। One Country One Election से सरकार, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के खर्च में 30-40% की कमी आ सकती है, जिससे हर पांच साल में 20-25 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके अलावा, एक साथ चुनाव से रियल जीडीपी वृद्धि में 1.5% की बढ़ोतरी हो सकती है, जो 2023-24 में 4.5 लाख करोड़ रुपये के बराबर थी। यह राशि भारत के स्वास्थ्य पर कुल सार्वजनिक खर्च का आधा और शिक्षा पर खर्च का एक तिहाई है।
एक साथ चुनाव से सकल निश्चित पूंजी निर्माण (निवेश) का अनुपात 0.5% बढ़ सकता है, और महंगाई दर में 1.1% तक की कमी आ सकती है। बंसल ने बताया कि अमेरिका, फ्रांस, स्वीडन और कनाडा जैसे देशों में एक साथ चुनाव होते हैं। भारत में एक मतदान केंद्र पर औसतन 5 कर्मियों की आवश्यकता होती है। 10.5 लाख मतदान केंद्रों के लिए करीब 55 लाख कर्मी और 20-25 लाख सुरक्षाकर्मी चाहिए। इसके लिए 20 लाख से अधिक ईवीएम सेट (बैलेट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट) की जरूरत होगी।
One Country One Election : Sunil Bansal
प्रशासनिक और विकास कार्यों में सुधार
सुनील बंसल ने कहा कि हर चुनाव में लाखों सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया जाता है, जिससे उनके नियमित कार्य प्रभावित होते हैं। One Country One Election से यह समस्या एक बार में हल होगी। बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास कार्य रुकते हैं। एक साथ चुनाव से सरकार को पांच साल का स्पष्ट समय मिलेगा, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी और जनता को जल्द लाभ मिलेगा। लगातार चुनावों से राजनीतिक दल हमेशा चुनावी मोड में रहते हैं। एक साथ चुनाव से सरकार और विपक्ष दोनों को देश की समस्याओं पर गंभीरता से काम करने का अवसर मिलेगा।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, पूर्व परिवहन मंत्री व विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया, नोएडा विधायक व भाजपा उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज सिंह, दादरी विधायक तेजपाल नागर, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कैप्टन विकास गुप्ता, पूर्व विधायक व मंत्री नवाब सिंह नागर, हरीश चंद भाटी, श्रीमती विमला बॉथम, भाजपा महानगर अध्यक्ष महेश चौहान, और जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा उपस्थित थे।
सहभागी संस्थाएं
कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व पूर्व अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता, फोनरवा, डीडीआरडब्ल्यूए, नोएडा कर्मचारी संघ, भारतीय चिकित्सा संघ, फिक्की, एसोचैम, लोकमंच, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, आकांक्षा, पंजाबी क्लब, व्यापार मंडल दिल्ली-एनसीआर, अग्रवाल मित्र मंडल, युगा व्यापार मंडल, श्री रामलीला मित्र मंडल, दैनिक जागरण, जीएनआईओटी समूह, संभावी महामुद्रा समाज समिति, शाहू समाज, माहेश्वरी समाज, माथुर समाज, राजस्थान कल्याण परिषद, चौसैनी समाज, वर्मा समाज, सूरी समाज, नोएडा वैश्य केंद्र, केसरवानी समाज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रोमिथेस स्कूल, इंफोसिस, श्री राम ग्लोबल स्कूल, आर.डी. पब्लिक स्कूल, आनंदिता हेल्थकेयर, और विभिन्न रोटरी क्लब्स (दादरी, दिल्ली अचीवर्स, दिल्ली रिवरसाइड, नोएडा सेंट्रल, नोएडा सिटी, नोएडा एलीगेंस, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) के प्रतिनिधि शामिल थे।
Feel The Change Foundation:नोएडा, 1 मई 2025, मजदूर दिवस के दिन जहां देशभर में श्रमिकों के अधिकारों की चर्चा हो रही थी, वहीं नोएडा के सेक्टर-110 में स्थित श्रमिक कुंज में कुछ अलग ही नजारा था। भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से ही दर्जनों मज़दूर अपनी बारी का इंतज़ार करते नजर आए। मौका था ई-श्रम कार्ड पंजीकरण कैंप का — जिसे फील द चेंज फाउंडेशन और उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।
Feel The Change Foundation On Labour day
डॉ. विकास राज तिवारी – जिनका सपना है बदलाव की ठोस ज़मीन तैयार करना
कार्यक्रम की कमान संभाले थे ‘फील द चेंज फाउंडेशन’ के अध्यक्ष डॉ. विकास राज तिवारी, जो बीते 10 वर्षों से समाज के सबसे ज़रूरतमंद तबकों के लिए चुपचाप लेकिन प्रभावशाली कार्य कर रहे हैं। उनकी बातें सीधी दिल में उतर जाती हैं –
“हम नारे नहीं लगाते, हम ज़मीनी बदलाव लाने में यकीन रखते हैं। हमारा हर कैंप, हर रजिस्ट्रेशन, किसी एक श्रमिक के भविष्य को सुरक्षित करता है।”
उनके नेतृत्व में संस्था ने अब तक दर्जनों कैंप आयोजित किए हैं, जिनका सीधा लाभ श्रमिकों को मिला है – न सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली, बल्कि योजनाओं से जुड़ने का रास्ता भी आसान हुआ।
93 श्रमिकों का हुआ नि:शुल्क पंजीकरण, प्रधानमंत्री योजनाओं से होगा जुड़ाव
कैंप में 93 असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ने ई-श्रम पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाया। यह पंजीकरण बिल्कुल नि:शुल्क था, ताकि कोई आर्थिक बाधा किसी के अधिकार के बीच न आ सके। ई-श्रम कार्ड के माध्यम से अब ये श्रमिक केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
श्रम विभाग के अफसर भी हुए शामिल, सरकारी साझेदारी को बताया महत्वपूर्ण
कैंप में लेबर इंस्पेक्टर श्री राजकुमार और गौतमबुद्ध नगर के जिला श्रम आयुक्त कार्यालय की टीम मौजूद रही। श्री राजकुमार ने कहा,
“ऐसी संस्थाएं शासन और जनता के बीच की कड़ी बनती हैं। फील द चेंज फाउंडेशन के साथ हम आगे भी जनहित में कार्य करते रहेंगे।”
सरकारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कैंप में भाग लेने वालों के आत्मविश्वास को और बढ़ाया।
जेपी मंडल – एक सच्चे मज़दूर हितैषी की भूमिका में
इस मौके पर भाजपा मंडल महामंत्री और ‘फील द चेंज फाउंडेशन’ के सचिव जेपी मंडल ने भी उपस्थित होकर श्रमिकों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा:
“मैं पिछले 20 वर्षों से मज़दूरों की लड़ाई लड़ रहा हूं। आज जब इतने लोगों को योजनाओं से जोड़ते देखता हूं, तो लगता है संघर्ष का फल मिल रहा है।”
उनका वीडियो इंटरव्यू भी कैंप में चर्चा का विषय बना रहा, जहां उन्होंने फाउंडेशन के कार्यों और सरकार के समर्थन की प्रशंसा की।
Feel The Change Foundation On Labour day
नेताओं ने की तारीफ, लोगों ने जताया आभार
कैंप में पहुंचे भाजपा मंडल अध्यक्ष गौतम शर्मा ने कहा,
“फील द चेंज फाउंडेशन ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाजसेवी संस्थाएं और सरकार मिलकर काम करें, तो हर मज़दूर को उसका हक मिल सकता है।”
श्रमिकों के चेहरे पर संतोष, राहत और उम्मीद का भाव साफ झलक रहा था। कई ने कहा कि पहली बार उन्हें किसी सरकारी योजना से जुड़ने का इतना आसान और सम्मानजनक मौका मिला।
Pakistan airspace closure – भारत ने पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होकर 23 मई 2025 तक प्रभावी रहेगा। यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है, जिसकी शुरुआत हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद हुई।
हवाई क्षेत्र प्रतिबंध की घोषणा
Pakistan airspace closure : भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने एक NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी पाकिस्तान-पंजीकृत विमान, चाहे वह कमर्शियल हो, लीज़ पर हो, संचालित वाहक हो या सैन्य विमान, को भारतीय हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय पाकिस्तान द्वारा पिछले सप्ताह भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने के जवाब में लिया गया है, जिससे 800 से अधिक साप्ताहिक उड़ानों पर असर पड़ा। भारत का यह कदम प्रतिशोधात्मक माना जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और आर्थिक तनाव को और गहरा करता है।
Pakistan airspace closure
पाकिस्तानी एयरलाइनों पर असर
इस प्रतिबंध का सबसे अधिक असर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) और अन्य पाकिस्तानी एयरलाइनों पर पड़ेगा, जो कुआलालंपुर, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई गंतव्यों के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र पर निर्भर रहती हैं। अब इन एयरलाइनों को चीन या श्रीलंका के ऊपर से घूमकर जाना पड़ेगा, जिससे ईंधन लागत बढ़ेगी, उड़ान का समय लंबा होगा और किरायों में वृद्धि की आशंका है। पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही पाकिस्तानी एविएशन इंडस्ट्री के लिए यह एक और झटका है।
Pakistan airspace closure
पहलगाम हमले से उत्पन्न स्थिति
यह हवाई क्षेत्र प्रतिबंध 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लगाया गया है, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले की ज़िम्मेदारी द रेज़िस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का मोहरा माना जाता है। भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान “भरोसेमंद और अपरिवर्तनीय कदम” नहीं उठाता, तब तक ऐसे कड़े कदम जारी रहेंगे। भारत ने इंडस जल संधि को निलंबित करने और अटारी सीमा चौकी को बंद करने जैसे कई और जवाबी कदम भी उठाए हैं।
Pakistan airspace closure
भारतीय एयरलाइनों के लिए चुनौतियाँ
पाकिस्तान द्वारा पहले से लगाए गए हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों का असर भारतीय एयरलाइनों पर भी पड़ा है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइनों को अब अरब सागर के ऊपर से उड़ानें मोड़नी पड़ रही हैं, जिससे ईंधन लागत और यात्रा समय दोनों बढ़े हैं। अमेरिका जाने वाली कुछ लंबी दूरी की उड़ानों को अब यूरोप में तकनीकी स्टॉप लेना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को असुविधा हो रही है और किरायों में वृद्धि की संभावना है। सरकार इन परेशानियों को कम करने के लिए एयरलाइनों के साथ मिलकर काम कर रही है, लेकिन स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है।
यह हवाई क्षेत्र प्रतिबंध व्यापक कूटनीतिक तनाव का हिस्सा है। दोनों देशों ने अपने राजनयिक मिशनों को कम कर दिया है और पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार को भी निलंबित कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नज़र बनाए हुए है, क्योंकि दोनों परमाणु संपन्न देश हाई अलर्ट पर हैं। इन सिलसिलेवार जवाबी कार्रवाइयों से आर्थिक नुकसान और क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका और भी बढ़ गई है।
मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी के बारे में अनुमान है कि उन्होंने Canada federal elections में जीत हासिल की है – ट्रंप विरोधी भावना की लहर पर सवार होकर अगली सरकार बनाने जा रही है।यह एक चौंकाने वाला राजनीतिक बदलाव है, क्योंकि कुछ महीने पहले तक इस पार्टी को खत्म हो चुकी माना जा रहा था। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि लगभग एक दशक से सत्ता में रही यह पार्टी बहुमत हासिल कर पाएगी या नहीं, क्योंकि चुनाव परिणाम अभी भी आ रहे हैं। यहां इस चुनाव के चार मुख्य निष्कर्ष दिए गए हैं, जिसमें कंज़र्वेटिव विपक्ष ने बड़ी बढ़त तो बनाई, लेकिन फिर भी हार गए।
ट्रंप की धमकियां चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गईं
इस बात में कोई शक नहीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ की धमकियों और कनाडा की sovereignty को कमजोर करने वाली टिप्पणियों ने इस चुनाव में असाधारण भूमिका निभाई। इससे नेतृत्व और देश के आर्थिक अस्तित्व जैसे मुद्दे अचानक केंद्र में आ गए। मार्क कार्नी ने इसका पूरा फायदा उठाया, वे न सिर्फ अपने मुख्य opponent कंज़र्वेटिव नेता पियरे पोइलीवर के खिलाफ, बल्कि ट्रंप के खिलाफ भी चुनाव लड़े। कार्नी ने कहा कि कनाडा एक संकट के दौर में है और बार-बार यह चेतावनी दी कि ट्रंप “हमें तोड़ना चाहता है ताकि अमेरिका हमें अपना बना सके”। पोइलीवर ने अपने प्रचार में ट्रंप का बहुत कम ज़िक्र किया और ध्यान केंद्रित किया घरेलू मुद्दों पर – जैसे जीवनयापन की लागत, आवास संकट और अपराध। उन्होंने लिबरल्स के रिकॉर्ड की आलोचना की।
Canada federal elections 2025 : Mark Carney-led Liberals
कार्नी – जिन्होंने पुराने अमेरिका-कनाडा संबंधों को “समाप्त” घोषित किया – चुनाव के तुरंत बाद एक नए आर्थिक और सुरक्षा समझौते की बातचीत शुरू करने की योजना बना रहे हैं। कनाडाई व्यवसायी और ट्रंप के करीबी केविन ओ’लेरी ने भी माना कि यह एक सफल रणनीति थी। “अभी कनाडाई अमेरिका से बहुत नाराज़ हैं और कार्नी ने इसका फायदा उठाया,” उन्होंने बीबीसी से कहा। “वह लोगों का ध्यान अपनी गलतियों से हटा पाए… और कहा ‘वहां मत देखो, दक्षिण की ओर देखो और मैं तुम्हें बचाऊंगा’।”
एक राजनीतिक नवागंतुक की चौंकाने वाली शुरुआत
साल की शुरुआत में, कार्नी एक पूर्व केंद्रीय बैंकर थे जिनके पास कोई राजनीतिक अनुभव नहीं था। लेकिन मार्च के मध्य तक, वे प्रधानमंत्री पद की शपथ ले चुके थे – वह पहले व्यक्ति बने जिन्हें कभी चुनाव में नहीं चुना गया था। अब, पहली बार चुनाव लड़े, ओटावा क्षेत्र से संसद सदस्य बने और अपनी पार्टी को एक अप्रत्याशित जीत दिलाई। कार्नी लंबे समय से कनाडाई राजनीति में आने का संकेत दे रहे थे – और उन्होंने यह मौका तभी पकड़ा जब जनवरी में जस्टिन ट्रूडो ने अचानक इस्तीफा दे दिया।
Canada federal elections 2025
उन्होंने नए राजनीतिक माहौल का पूरा लाभ उठाया और अपने अनुभव को भुनाया, जब कनाडाई नागरिक आर्थिक भविष्य को लेकर चिंतित थे। मार्च के अंत में ट्रंप द्वारा विदेशी ऑटोमोबाइल आयातों पर वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा ने कार्नी को एक अवसर दिया – जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई, राष्ट्रपति से बात की और अमेरिकी कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की।
कंज़र्वेटिव्स की प्रगति लेकिन बहुमत से दूर
Canada federal elections : अगर चुनाव अलग होता, तो यह कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए सफल माना जा सकता था। 2011 में, कंज़र्वेटिव्स ने 39.6% वोट पाकर बहुमत पाया था। इस बार पियरे पोइलीवर इससे आगे हैं, लगभग 41% वोटों के साथ, जबकि केवल आधे पोलिंग स्टेशन की गिनती हुई है। वह वर्तमान में 149 सीटें जीतते दिख रहे हैं – मार्च में चुनाव की घोषणा के समय यह संख्या 120 थी। पोइलीवर ने ज्यादातर घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, उन मतदाताओं को लक्षित किया जो “लॉस्ट लिबरल दशक” से असंतुष्ट थे। लेकिन प्रगतिशील वोट लिबरल्स के साथ जुड़ गया, जिससे कंज़र्वेटिव्स के ये आंकड़े पर्याप्त नहीं रहे। यह कंज़र्वेटिव्स के लिए एक कड़वी हार होगी, क्योंकि कुछ महीने पहले तक उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी। अब पार्टी को तय करना होगा कि क्या वे पोइलीवर को नेता बनाए रखें – जो 2015 में लिबरल्स की लहर के बाद पार्टी के तीसरे नेता बने हैं।
Canada federal elections 2025 : election completes a stunning turnaround fueled by Trump
Canada federal elections : वामपंथी न्यू डेमोक्रेट्स का पतन
Canada federal elections : इस चुनाव में छोटी राजनीतिक पार्टियों को बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि मतदाताओं ने अपना वोट लिबरल्स या कंज़र्वेटिव्स में से एक को देना चुना – खासकर वामपंथी न्यू डेमोक्रेट्स (NDP) को नुकसान हुआ है। NDP को अभी तक केवल 5% वोट मिले हैं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 18% था। NDP नेता जगमीत सिंह – जो लगभग आठ वर्षों से पार्टी के नेता थे – ने अपनी सीट ब्रिटिश कोलंबिया में हार दी और इस्तीफे की घोषणा की।
“मैं जानता हूं कि यह रात न्यू डेमोक्रेट्स के लिए निराशाजनक है,” उन्होंने कहा, “हम केवल तभी हारते हैं जब हम लड़ना छोड़ देते हैं।” ग्रीन पार्टी का वोट शेयर भी घटकर 2% से 1% रह गया है।
एंगस रीड इंस्टीट्यूट की अध्यक्ष शाची कर्ल ने कहा कि ट्रंप की बयानबाज़ी ने लिबरल्स की ओर झुकाव बढ़ाया। “धमकियां, विलय की बातें – यह सब वामपंथी मतदाताओं के लिए बड़ा प्रेरक रहा है,” उन्होंने कहा। स्वतंत्रता समर्थक ब्लॉक क्यूबेकॉइस का वोट प्रतिशत 8% बना हुआ है, हालांकि यह अभी तय नहीं है कि इससे उन्हें कितनी सीटें मिलेंगी। यह सब डेटा केवल लगभग 30% पोलिंग स्टेशनों की रिपोर्ट पर आधारित है।
Also Read This: Vaibhav Suryavanshi : Breaking Records and Building Dreams Canada federal elections 2025 : कनाडा में भले ही मुख्य रूप से कंज़र्वेटिव और लिबरल सरकारें रही हों, लेकिन यह दो-दलीय प्रणाली नहीं है। इसकी राजनीतिक व्यवस्था में छोटी पार्टियां भी संसद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं – जैसे कि NDP और ब्लॉक क्यूबेकॉइस, जो कभी आधिकारिक विपक्ष भी रहे हैं।
Pahalgam में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने तेज और निर्णायक कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि, 1960 को निलंबित कर दिया है तथा अटारी चेक पोस्ट को इम्मीडिएट इफ़ेक्ट से बंद करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निवास पर आयोजित कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में समग्र सुरक्षा स्थिति की रिव्यु की गई और सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई सिक्योरिटी बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
पाकिस्तानी नागरिकों पर वीज़ा बैन
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि पाकिस्तान के नागरिक अब सार्क वीज़ा छूट योजना (SAARC Visa Exemption Scheme – SVES) के तहत भारत की यात्रा नहीं कर सकेंगे। पूर्व में जारी किए गए SVES वीज़ा अब अमान्य घोषित कर दिए गए हैं। भारत में पहले से SVES वीज़ा पर मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे केअंदर देश छोड़ने के आदेश दिए गए हैं।
Foreign Secretary shri vikram misri
राजनयिक स्टाफ में कटौती और निष्कासन
विदेश सचिव ने बताया कि नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर एक सप्ताह में भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। भारत ने भी इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग से इन्हीं विभागों के सलाहकारों को वापस बुलाने का फैसला लिया है। इनके साथ ही 5 सहायक कर्मचारियों को भी दोनों देशों के उच्चायोगों से हटाया जाएगा।
हाई कमीशन की संख्या में कमी
भारत और पाकिस्तान के उच्चायोगों की कर्मचारियों की संख्या को घटाकर 55 से 30 करने का निर्णय लिया गया है, जो 1 मई से लागू होगा। यह कदम भारत-पाक रिलेशन्स में तनाव को दर्शाता है और भारत की आतंकवाद के प्रति सख्त नीति को दिखते है।
Condemnation and international support of Pahalgam terror attack
Pahalgam आतंकी हमले की निंदा और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
CCS को Pahalgam में हुए आतंकी हमले और उसमें पाकिस्तानियो के हाथ होने की जानकारी दी गई। इस हमले को जम्मू-कश्मीर में हाल ही में शांतिपूर्ण चुनावों और राज्य के विकास की दिशा में हुई प्रगति के खिलाफ एक साजिश बताया गया। समिति ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
दुनिया भर की सरकारों ने इस हमले की लोचना करते हुए भारत के साथ एकता और समर्थन व्यक्त किया है। CCS ने इन प्रतिक्रियाओं की सराहना करते हुए इसे आतंकवाद के प्रति ग्लोबल “जीरो टॉलरेंस” की भावना का प्रतीक बताया।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले के पास स्थित शांतिपूर्ण बैसरण घाटी में मंगलवार को एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें लगभग 28 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से अधिकांश पर्यटक थे, और 20 से अधिक लोग घायल हुए। यह हमला लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन “द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF)” के 3 से 6 आतंकियों द्वारा अंजाम दिया गया, और इसे 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है।
Jammu and Kashmir : Pahalgam terror attack
Pahalgam terror attack : आम नागरिकों को बनाया गया निशाना
यह आतंकी हमला दोपहर लगभग 2:50 बजे हुआ, जो एक दूरस्थ और सुंदर स्थान है जहाँ केवल पैदल या टट्टू से ही पहुँचा जा सकता है, जिससे बचाव कार्य में मुश्किलें आईं। हमलावरों ने, जिनमें से कुछ के पाकिस्तानी नागरिक होने की आशंका है, आम नागरिकों को निशाना बनाया और पहचान पत्र देखकर गैर-मुसलमानों की पहचान की तथा उनसे इस्लामी आयतें पढ़वाने की मांग की। पीड़ितों में गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र के पर्यटक, दो स्थानीय निवासी, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात के दो विदेशी नागरिक, और हनीमून पर आए भारतीय नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल शामिल हैं।
Pahalgam terror attack : Indian Navy officer Lt. Vinay Narwal
TRF ने ली जिम्मेदारी, सुरक्षाबलों की व्यापक तलाश अभियान शुरू
सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित सुरक्षाबलों ने हमलावरों को पकड़ने के लिए व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इस अभियान में हेलीकॉप्टर, विशेष बल और स्निफर डॉग्स का उपयोग किया जा रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी जांच में सहयोग कर रही है। TRF ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद प्रिसीव्ड डेमोग्राफिक बदलावों को इसके पीछे की वजह बताया है।
Jammu and Kashmir : Pahalgam terror attack
पहलगाम आतंकी हमले की ग्लोबल स्तर पर निंदा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में छोड़कर हमले की निंदा की, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने पहलगाम का दौरा किया और न्याय का आश्वासन दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित विश्व नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की। कश्मीर में बंद का आयोजन किया गया और स्थानीय अखबारों ने काले फ्रंट पेज छापे। इस हमले से जम्मू-कश्मीर का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में बुकिंग रद्द हुई हैं।
Mid Day Meal Workers Federation गुजरात ,अहमदाबाद में श्री निष्कलंकी नारायण प्रेरणातीर्थ में सम्पन्न हुआ –
Mid Day Meal Workers Federation का पहले 3ईयर फेडरेशन 12-13 अप्रैल 2025 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ। उद्घाटन श्री सुरेंद्र पांडेय (अखिल भारतीय उप महामंत्री, बीएमएस) ने किया। मुख्य अतिथि श्री सी.वी. राजेश थे और अन्य प्रमुख अतिथियों में श्री वी.एम. चावड़ा, श्री जिग्नेशभाई मजूमदार और श्री गिरीशभाई पटेल शामिल थे। इस अधिवेशन में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने मिड डे मील योजना की स्थिति और रसोइयों की समस्याओं पर चर्चा की। प्रमुख मुद्दों में ₹10,000 मासिक मानदेय, छुट्टियाँ, बीमा सुरक्षा, निजीकरण का विरोध, दुर्घटना पर मुफ्त इलाज और मुआवजा, साल में दो साड़ी और एप्रन जैसे यूनिफॉर्म की माँग शामिल थी। इन सब बातों को जोड़कर एक प्रस्ताव पारित किया गया।
Mid Day Meal Workers Federation
Mid Day Meal Workers Federation : मुख्य प्रस्ताव रखे गए
1 . मीड डे मील स्कीम के रसोइए को मासिक 1०,००० मानदेय उपलब्ध करने का प्रस्ताव
2 – इस योजना का निजीकरण बंध करना और पाठशाला में ही उपलब्ध रसोइए केंद्र ,भोजन पकाने का संसाधन, और भोजन बनाने के लिए रसोइया आदि स्टाफ उपलब्ध हो वहां निजी संस्था को कॉन्ट्रैक्ट नहीं देने का प्रावधान , योजना की निजीकरण सम्पूर्ण प्रक्रिया पे रोक लगाने का प्रस्ताव
3 – इस योजना के तहत भोजन पकाने के कार्य दरमियान यदि कोई दुर्घटना घटती है तो उस रसोइए को निःशुल्क ईलाज का प्रावधान और यदि मृत्यु जैसी घटना घटती है तो उचित जिन जिन राज्यों में ऐसी अन्य दुर्घटना या आकस्मिक घटना के उपलक्ष्य में उचित तय मुआवजा के दायरे में मीड डे मील स्कीम के रसोइयों को भी रखा जाने का प्रस्ताव
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4 – केंद्र पुरस्कृत अन्य योजनाओं आशा और आंगनवाड़ी की कार्यकर्ता के लिए जो बीमा का प्रावधान है,निःशुल्क बीमा योजना भी उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव
5 – मीड डे मील स्कीम की रसोइया,आदि स्टाफ को ईपीएफ पैंशन की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव
6 – मीड डे मील स्कीम के रसोइए आदि स्टाफ को एक साल में केवल दस मास का ही मानदेय मिलता है,उसकी जगह पूरा वर्ष के बारह मास का मानदेय मिले ऐसा प्रावधान का प्रस्ताव
7 – मीड डे मील स्कीम वर्कर्स को भी एक साल में दो जोड़ी यूनिफार्म का प्रावधान का प्रस्ताव
8 – पाठशाला के बच्चो की संख्या के आधार से तय संख्या में रसोइया की नियुक्ति का प्रावधान है यदि पाठशाला में संख्या कम हुई तो ऐसे रसोइया को विमुक्त किया जाता है, इसे विमुक्त रसोइए की पुनः स्थापित करने का उचित प्रावधान करने की मांग का प्रस्ताव
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9 – मीड डे मील स्कीम के सभी वर्कर्स को आकस्मिक,एवं मेटरनिटी छुट्टियों का प्रावधान की मांग का प्रस्ताव
उपरोक्त नौ प्रस्ताव इस अधिवेशन के प्रथम दिन पारित होने के लिए रखा गया था जो सर्व सम्मति से पारित किया गया और भारत सरकार के शिक्षा विभाग को भेजने का प्रावधान किया
और शाम पांच बजे एक शोभायात्रा निकली गई जो अधिवेशन के मुख्य द्वार से शुरू की गई और तीन किलोमीटर मुख्य रोड से नगर के मुख्य मार्ग तक चली थी
दिन – 2
दिनांक 13/4/25
सुबह के सत्र में मिड डे मील रसोइयों से जुड़ी 9 मुख्य मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी राज्यों के महामंत्रियों ने प्रत्येक मांग पर अपने-अपने विचार रखे और उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। इन मांगों को लेकर एक नेशनवाइड कार्यक्रम की घोषणा भी की गई, जिसके अंतर्गत 13 मई 2025 को देशभर के सभी जिलों में कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से भारत सरकार के शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यह निर्णय फेडरेशन के मुख्य अतिथि व स्कीम वर्कर्स प्रभारी श्री सुरेंद्र पांडेजी की अनुमति से लिया गया।
Mid Day Meal Workers Federation
दूसरे सत्र में फेडरेशन की नई एग्जीक्यूटिव के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई। निर्वाचन अधिकारी श्री सुरेंद्र पांडेजी के नेतृत्व में संगठन की नीतियों के अनुसार, 3 वर्ष में एक बार होने वाले एग्जीक्यूटिव के चुनाव इस फेडरेशन में कंसेंसस से सम्पन्न हुए और नई एग्जीक्यूटिव का गठन किया गया।
Mid Day Meal Workers Federation : इसके साथ ही सभी प्रदेशों के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य होंगे।
सभी निर्विरोध चुने गए पदाधिकारियों को मुख्य मंच पे स्थान दिया गया ,और उपस्थिति सभी प्रदेश के डेलीगेट्स को परिचय भी कराया गया , उपस्थिति सभी सम्मानित महानुभावों ने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के अध्यक्ष,महामंत्री सहित सभी पदाधिकारियों को शुभकामना दी गई और अधिवेशन को पूर्ण घोषित किया गया