Category: लाइफस्टाइल

  • सावन के महीने में ऐसे करें भगवान भोले की भक्ति, हर मुराद होगी पूरी, जिसने किया उस पर कृपा बरस रही है!

    सावन के महीने में ऐसे करें भगवान भोले की भक्ति, हर मुराद होगी पूरी, जिसने किया उस पर कृपा बरस रही है!

    भगवान शिव, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदि नामों से भी जाना जाता है। शिव भक्तों का मानना है कि शिव मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है, जीवन में सफलता मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    शिव मंत्रों के प्रकार और उनके लाभ:

    शिव मंत्रों को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:

    • पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय
      • यह सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली शिव मंत्रों में से एक है।
      • इसका जाप करने से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
    • द्वादशाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्युमृत्युन्न मुच्यमाम।
      • यह मंत्र मृत्यु से मुक्ति और दीर्घायु प्रदान करने वाला माना जाता है।
    • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्युमृत्युन्न मुच्यमाम।
      • यह मंत्र मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है और जीवन को लंबा और स्वस्थ बनाता है।
    • शिव तांडव स्तोत्र: यह स्तोत्र भगवान शिव के तांडव रूप का वर्णन करता है। इसका पाठ करने से शक्ति और उत्साह मिलता है।

    शिव मंत्रों के लाभ:

    • मन की शांति: शिव मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है।
    • रोगों से मुक्ति: शिव मंत्रों का नियमित जाप करने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।
    • सफलता: शिव मंत्रों का जाप करने से जीवन में सफलता मिलती है।
    • मोक्ष: शिव मंत्रों का नियमित जाप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
    • आत्मविश्वास: शिव मंत्रों का जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है।

    शिव मंत्रों का जाप कैसे करें:

    • शांत वातावरण: शांत और शांत वातावरण में बैठकर मंत्रों का जाप करें।
    • शुद्ध मन: शुद्ध मन से मंत्रों का जाप करें।
    • एकाग्रता: मंत्रों के जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें।
    • नियमितता: नियमित रूप से मंत्रों का जाप करें।
    • विश्वास: मंत्रों की शक्ति पर विश्वास रखें।

    शिव भक्ति के अन्य तरीके:

    • शिवलिंग की पूजा: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, बेलपत्र चढ़ाएं और धूप दीप जलाएं।
    • शिव मंदिर में जाएं: सावन के महीने में शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करें।
    • शिव भजन गाएं: भगवान शिव के भजन गाकर आप उनके करीब महसूस कर सकते हैं।
    • शिव पुराण का पाठ करें: शिव पुराण का पाठ करने से धार्मिक ज्ञान प्राप्त होता है और मन को शांति मिलती है।

    शिव मंत्रों का जाप एक शक्तिशाली साधन है जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। नियमित रूप से मंत्रों का जाप करने से आप शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

    कुछ अन्य शिव मंत्र जो आप जाप कर सकते हैं:

    • ॐ नमः शिवाय कार्तिकेय
    • ॐ नमः शिवाय गणेशाय
    • ॐ नमः शिवाय पार्वती
    • ॐ नमः शिवाय शंकर

  • Pregnancy Health : गर्भवती महिलाओं के लिए राहत, अब प्रथम चरण से ही मिलेगा मधुमेह से बचाव

    Pregnancy Health : गर्भवती महिलाओं के लिए राहत, अब प्रथम चरण से ही मिलेगा मधुमेह से बचाव

    Pregnancy Health: गर्भावस्था के दौरान मधुमेह (gestational diabetes) एक आम समस्या है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकती है। अब, एक अच्छी खबर यह है कि वैज्ञानिकों ने मधुमेह से बचाव के लिए एक नया तरीका विकसित किया है, जो गर्भावस्था के पहले चरण से ही शुरू होता है।

    यह नया तरीका एक विशेष प्रकार के आहार और व्यायाम कार्यक्रम पर आधारित है, जिसे “गर्भवती महिलाओं के लिए मधुमेह रोकथाम कार्यक्रम” (Gestational Diabetes Prevention Program – GDM-PP) कहा जाता है। इस कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से शुरू करके, स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

    कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:

    • स्वस्थ भोजन: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दुबली प्रोटीन से भरपूर आहार का सेवन।
    • नियमित व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम, जैसे तेज चलना, तैरना या गर्भवती महिलाओं के लिए योग।
    • वजन नियंत्रण: यदि आवश्यक हो तो वजन कम करना या स्वस्थ वजन बनाए रखना।

    कार्यक्रम के लाभ:

    • मधुमेह का खतरा कम होता है: अध्ययनों से पता चला है कि GDM-PP कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं में मधुमेह विकसित होने का खतरा 50% तक कम हो जाता है।
    • गर्भावस्था के दौरान बेहतर स्वास्थ्य: GDM-PP कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं में उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेम्पसिया (एक गंभीर गर्भावस्था जटिलता) का खतरा भी कम होता है।
    • स्वस्थ बच्चे: GDM-PP कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं के बच्चे बड़े और स्वस्थ पैदा होते हैं, और उन्हें जन्म के समय स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम होता है।

    कार्यक्रम में कैसे शामिल हों:

    यदि आप गर्भवती हैं और मधुमेह के विकास के बारे में चिंतित हैं, तो अपने डॉक्टर से GDM-PP कार्यक्रम के बारे में बात करें। यह कार्यक्रम कई अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध है।

    निष्कर्ष:

    GDM-PP कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं के लिए मधुमेह के खतरे को कम करने और स्वस्थ गर्भावस्था और बच्चे के जन्म को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी तरीका है। यदि आप गर्भवती हैं, तो इस कार्यक्रम के बारे में अपने डॉक्टर से ज़रूर बात करें।

    यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है:

    • यह लेख केवल जानकारी के लिए है और किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
    • यदि आपको मधुमेह के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, और थकान, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
    • स्वस्थ गर्भावस्था के लिए नियमित रूप से अपने डॉक्टर से मिलते रहें और उनके निर्देशों का पालन करें।
  • 10 Top Spots for a Family Summer Getaway in Delhi: दिल्ली की गर्मी से परेशान है और घुमने की सोच रहे हैं तो आपके पास ऑप्शन की कमी नहीं है, ये हैं गर्मी में घूमने के लिए 10 बेहतरीन जगहें

    10 Top Spots for a Family Summer Getaway in Delhi: दिल्ली की गर्मी से परेशान है और घुमने की सोच रहे हैं तो आपके पास ऑप्शन की कमी नहीं है, ये हैं गर्मी में घूमने के लिए 10 बेहतरीन जगहें

    10 Top Spots for a Family Summer Getaway in Delhi:दिल्ली की गर्मी किसी को भी परेशान कर सकती है। लेकिन घबराइए नहीं, क्योंकि यहाँ अभी भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ आप अपने परिवार के साथ घूमकर मज़े ले सकते हैं।

    1. वाटर पार्क: दिल्ली में कई वाटर पार्क हैं, जहाँ आप पूल, स्लाइड्स और वेव पूल का आनंद ले सकते हैं। कुछ लोकप्रिय वाटर पार्क हैं:

    • एडवेंचर आईलैंड: यह दिल्ली का सबसे बड़ा वाटर पार्क है और यहाँ कई रोमांचकारी राइड्स हैं।
    • वाइल्ड वाटर: यह वाटर पार्क भी कई रोमांचकारी राइड्स और पूल प्रदान करता है।
    • प्लेओ: यह वाटर पार्क बच्चों के लिए एकदम सही है, यहाँ कई छोटे पूल और स्लाइड्स हैं।

    2. म्यूजियम: दिल्ली में कई म्यूजियम हैं, जहाँ आप इतिहास, कला और संस्कृति के बारे में जान सकते हैं। कुछ प्रसिद्ध म्यूजियम हैं:

    • राष्ट्रीय संग्रहालय: यह भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है और यहाँ कलाकृतियों और प्राचीन वस्तुओं का एक विशाल संग्रह है।
    • राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र: यह विज्ञान केंद्र बच्चों के लिए एकदम सही है, यहाँ कई इंटरैक्टिव प्रदर्शन और गतिविधियाँ हैं।
    • नेहरू स्मारक संग्रहालय: यह संग्रहालय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को समर्पित है।

    3. गार्डन: दिल्ली में कई खूबसूरत गार्डन हैं, जहाँ आप प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। कुछ लोकप्रिय गार्डन हैं:

    • लोधी गार्डन: यह दिल्ली का सबसे पुराना गार्डन है और यहाँ कई मुग़लकालीन मकबरे हैं।
    • मुग़ल गार्डन: यह गार्डन अपनी सुंदर फूलों की क्यारियों और फव्वारों के लिए जाना जाता है।
    • नेहरू पार्क: यह पार्क बच्चों के लिए एकदम सही है, यहाँ कई झूले और खेल के मैदान हैं।

    4. शॉपिंग: दिल्ली खरीदारी के शौकीनों के लिए स्वर्ग है। आप यहाँ कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स और बहुत कुछ खरीद सकते हैं। कुछ लोकप्रिय बाज़ार हैं:

    • चांदनी चौक: यह दिल्ली का सबसे पुराना और सबसे व्यस्त बाज़ार है।
    • खान मार्केट: यह बाज़ार डिजाइनर कपड़ों और ब्रांडेड सामानों के लिए जाना जाता है।
    • दिल्ली हाट: यह हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को खरीदने के लिए एक शानदार जगह है।

    5. ऐतिहासिक स्थल: दिल्ली कई ऐतिहासिक स्थलों का घर है, जो आपको भारत के समृद्ध इतिहास के बारे में बताएंगे। कुछ प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल हैं:

    • लाल किला: यह मुग़ल साम्राज्य की राजधानी था और यह दिल्ली का एक प्रतीक है।
    • कुतुब मीनार: यह दुनिया की सबसे ऊँची ईंट की मीनार है और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है।
    • हुमायूँ का मकबरा: यह मुग़ल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है।
  • भूल जाओ बाजार में मिलने वाले कॉस्मेटिक्स, अपनाओ घरेलू नुस्खे रिश्तेदार कहेंगे वाह क्या बात है! आप ऐसे निखार सकते हो अपना चेहरा

    भूल जाओ बाजार में मिलने वाले कॉस्मेटिक्स, अपनाओ घरेलू नुस्खे रिश्तेदार कहेंगे वाह क्या बात है! आप ऐसे निखार सकते हो अपना चेहरा

    घरेलू नुस्खे: चेहरे की देखभाल घरेलू तरीकों से करने के लिए अधिकांश लोग तैयार होते हैं। बाजार में उपलब्ध चेहरे की साफ-सफाई उत्पादों के स्थान पर, घरेलू नुस्खों का उपयोग करना अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। यहां हम कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे लाए हैं जो आपके चेहरे को निखार सकते हैं।

    1. नींबू का रस:
    नींबू का रस चेहरे के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन C की भरपूर मात्रा होती है, जो त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखती है। नींबू का रस निर्माण करें और इसे अपने चेहरे पर लगाकर 15-20 मिनट रखें। फिर ठंडे पानी से धो लें।

    2. दही और शहद का मास्क:
    दही और शहद का मास्क त्वचा के लिए अत्यंत पोषणपूर्ण होता है। दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखते हैं, जबकि शहद में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

    3. हल्दी और चावल का फेस पैक:
    हल्दी और चावल का फेस पैक त्वचा के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। चावल पीसकर पाउडर बनाएं और उसमें हल्दी मिलाएं। इस मिश्रण को पानी के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह लगाएं और सूखने तक रखें। फिर ठंडे पानी से धो लें।

    4. गुलाबजल का इस्तेमाल:
    गुलाबजल का इस्तेमाल त्वचा को ताजगी और चमक देता है। इसे कपड़े में भिगोकर अपने चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट रखें।

    5. पानी की पर्याप्त मात्रा:
    पानी की पर्याप्त मात्रा में पीना और त्वचा को अच्छे से साफ रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह त्वचा को मोइस्चराइज करता है और स्वस्थ रखता है।

     

  • Women Special: ब्रा की सही साइज क्या होना चाहिए, आपके लिए कौन सी ब्रा है परफेक्ट जानिए सबकुछ!

    Women Special: ब्रा की सही साइज क्या होना चाहिए, आपके लिए कौन सी ब्रा है परफेक्ट जानिए सबकुछ!

    महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़: आपके शरीर के लिए उचित समर्थन

    Women Special:महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़ चुनना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सही साइज़ की ब्रा पहनने से आपके शरीर को उचित समर्थन मिलता है, जिससे आपको दिनभर की गतिविधियों में अधिक आराम मिलता है। एक सही साइज़ की ब्रा चुनने के लिए आपको ध्यान देने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

    • ब्रा के बैंड साइज़ का मापन: ब्रा के बैंड का सही साइज़ चुनने के लिए आपको अपने रीब्स के नीचे स्थित अंतिम बोन के चारों ओर चार उंगलियों के बीच की लंबाई को मापना होगा।
    • कप साइज़ का मापन: अपने सीने की चौड़ाई का मापन करके आप अपने ब्रा के सही कप साइज़ को चुन सकती हैं।
    • अपने आकार के अनुसार सही ब्रा चुनें: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए सही साइज़ की ब्रा चुनते समय अपने आकार को महत्वपूर्ण रूप से ध्यान में रखना चाहिए।

    Women Special:ब्रा की गुणवत्ता: आराम और दिखावट के साथ समृद्ध

    ब्रा की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रा न केवल आराम देती है, बल्कि वह आपके शरीर के लिए भी अच्छी होती है। ब्रा की गुणवत्ता को चुनते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

    • फैब्रिक का गुणवत्ता: ब्रा की गुणवत्ता में फैब्रिक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आपको अपने लिए सही फैब्रिक का चयन करना चाहिए, जो आपको आराम और स्वेता से बचाए रखे।
    • सिलाई की गुणवत्ता: ब्रा की सही सिलाई और मजबूती भी उसकी गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण होती है।
    • ब्रा की पुनर्नवीनीकरण क्षमता: ब्रा की गुणवत्ता के लिए उत्पादन की गुणवत्ता और उसकी पुनर्नवीनीकरण क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

    Women Special:ब्रा की गुणवत्ता और साइज़ की देखभाल: देखभाल और रख रखाव

    एक अच्छी ब्रा की गुणवत्ता और साइज़ की देखभाल करने के लिए आप निम्नलिखित सुझावों का पालन कर सकती हैं:

    • ब्रा को हल्के धूप में सुखाएं: अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रा को हल्के धूप में सुखाने से उसके फैब्रिक की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है।
    • हल्के धुलाई के लिए नरम डिटर्जेंट का उपयोग करें: ब्रा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको उसे हल्के डिटर्जेंट से धोना चाहिए।
    • ब्रा को हमेशा हैंगर पर रखें: ब्रा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको उसे हमेशा हैंगर पर रखना चाहिए।

    महिलाओं के लिए ब्रा का सही साइज़ और गुणवत्ता का ध्यान रखना उनके स्वास्थ्य और सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, सही साइज़ और गुणवत्ता वाली ब्रा चुनने के लिए व्यापारिक ब्रांडों की अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रांड चुनना उपयुक्त हो सकता है।

  • Diwali 2023: दिवाली पर्व का महत्व, विधि विधान और कब मनाई जाएगी, जानिए पूरी डिटेल

    Diwali 2023: दिवाली पर्व का महत्व, विधि विधान और कब मनाई जाएगी, जानिए पूरी डिटेल

    Diwali 2023: दिवाली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। दिवाली को दीपावली, दीपोत्सव, या धनतेरस के नाम से भी जाना जाता है। यह साल भर का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। दिवाली आने से पहले ही लोग अपने घरों की साफ सफाई, साज सजावट और खरीदारी में जुट जाते हैं। दिवाली के लिए देशभर में अलग ही उत्साह और उल्लास देखने को मिलता है।

    दिवाली का महत्व

    दिवाली को प्रकाश का पर्व माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को रंग-बिरंगे रोशनी से सजाते हैं और दीपक जलाते हैं। दिवाली का पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और नए सामान खरीदते हैं। दिवाली को धन-धान्य, सुख-समृद्धि और खुशियों का प्रतीक माना जाता है।

    दिवाली की पूजा विधि

    दिवाली के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान कर लें। फिर घर की साफ-सफाई करें और दीपक जलाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा में रोली, चंदन, अक्षत, फूल, माला, घी का दीपक, मिठाई और दक्षिणा अर्पित करें। पूजा के बाद आरती करें।

    दिवाली की पूजा सामग्री

    • रोली
    • चंदन
    • अक्षत
    • फूल
    • माला
    • घी का दीपक
    • मिठाई
    • दक्षिणा

    दिवाली की तारीख 2023

    2023 में दिवाली 12 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन शाम को 5:38 बजे से लेकर 7:35 बजे तक लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।

    दिवाली के दिन कुछ महत्वपूर्ण बातें

    • दिवाली के दिन अपने घर के दरवाजे और खिड़कियों पर रोली और चंदन से स्वास्तिक बनाएं।
    • दिवाली के दिन नए कपड़े पहनें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
    • दिवाली के दिन जरूरतमंदों को दान करें।

    दिवाली एक ऐसा त्योहार है जो लोगों को एक साथ लाता है और खुशियां बांटने का अवसर देता है। यह त्योहार हमें अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है।

  • Rabies symptoms and treatment:कुत्ते के काटने से फैल सकता है रेबीज़ , जानिए कितनी खतरनाक है ये बीमारी ?

    Rabies symptoms and treatment:कुत्ते के काटने से फैल सकता है रेबीज़ , जानिए कितनी खतरनाक है ये बीमारी ?

    Rabies symptoms and treatment:भारत रेबीज़ बहुत से मामले देखने को मिलते है एवं विश्व में रेबीज़ से होने वाली कुल मौतों में 36% मौतें भारत में होती है |
    रेबीज़ से प्रत्येक वर्ष 18000-20000 मृत्यु हो जाती है। भारत में रिपोर्ट किये गए रेबीज़ के लगभग 30-60% मामले एवं मौतों में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं, क्योंकि बच्चों में काटने के निशान को अक्सर पहचाना नहीं जाता एवं रिपोर्ट नहीं किया जाता है।
    भारत में मानव रेबीज़ के लगभग 97% मामलों के लिये कुत्ते ज़िम्मेदार हैं, इसके बाद बिल्लियाँ (2%), गीदड़, नेवले एवं अन्य (1%) हैं। यह रोग पूरे देश में स्थानिक है।

    रेबीज क्या है ?
    रेबीज एक बीमारी है जो कि रेबीज नामक विषाणु से होते हैं यह मुख्य रूप से पशुओं की बीमारी है लेकिन संक्रमित पशुओं द्वारा मनुष्यों में भी हो जाती यह विषाणु संक्रमित पशुओं के लार में रहता है उअर जब कोई पशु मनुष्य को काट लेता है यह विषाणु मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है।यह भी बहुत मुमकिन होता है कि संक्रमित लार से किसी की आँख, मुहँ या खुले घाव से संक्रमण होता है।इस बीमारी के लक्षण मनुष्यों में कई महीनों से लेकर कई वर्षों तक में दिखाई देते हैं।लेकिन साधारणतः मनुष्यों में ये लक्षण 1 से 3 महीनों में दिखाई देते हैं।

    रेबीज कैसे फैलता है ?
    रेबीज से संक्रमित जानवर के काटने से रेबीज का संक्रमण फैलता है. ज्यादातर मामलों में मनुष्यों में यह बीमारी कुत्ते के काटने या खरोंचने से भी होती है (90 प्रतिशत से ज्यादा).

    रेबीज बीमारी के मुख्य लक्षण क्या होते हैं?
    रेबीज बीमारी के लक्षण संक्रमित पशुओं के काटने के बाद या कुछ दिनों में लक्षण प्रकट होने लगते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में रोग के लक्षण प्रकट होने में कई दिनों से लेकर कई वर्षों तक लग जाते हैं।रेबीज बीमारी का एक खास लक्षण यह है कि जहाँ पर पशु काटते हैं उस जगह की मासपेशियों में सनसनाहट की भावना पैदा हो जाती है।विषाणु के रोगों के शरीर में पहुँचने के बाद विषाणु नसों द्वारा मष्तिक में पहुँच जाते हैं और निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे-

    दर्द होना
    थकावट महसूस करना।
    सिरदर्द होना।
    बुखार आना।
    मांसपेशियों में जकड़न होना।
    घूमना-फिरना ज्यादा हो जाता है।
    चिड़चिड़ा होना था उग्र स्वाभाव होना।
    व्याकुल होना।
    अजोबो-गरीबो विचार आना।
    कमजोरी होना तथा लकवा हों।
    लार व आंसुओं का बनना ज्यादा हो जाता है।
    तेज रौशनी, आवाज से चिड़न होने लगते हैं।
    बोलने में बड़ी तकलीफ होती है।
    अचानक आक्रमण का धावा बोलना।
    जब संक्रमण बहुत अधिक हो जाता है और नसों तक पहुँच जाता है तो निम्न लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं जैसे

    सभी चीजों/वस्तुएं आदि दो दिखाई देने लगती हैं।
    मुंह की मांसपेशियों को घुमाने में परेशानी होने लगती है।
    शरीर मध्यभाग या उदर को वक्ष:स्थल से अलग निकाली पेशी का घुमान विचित्र प्रकार का होने लगता है।
    लार ज्यादा बनने लगी है और मुंह में झाग बनने लगते हैं।

    रेबीज किन किन जानवरों से फैलता है ?
    रेबीज बीमारी कुत्तों, बंदरों और बिल्लियों  के काटने पर इंसानों में फैलती है. आमतौर पर कुत्तों के काटने पर इंसानों में यह बीमारी फैलती है |

    रेबीज का क्या इलाज है ?
    एक बार संक्रमण पकड़ में आने के बाद रेबीज का कोई इलाज नहीं है। हालांकि कुछ लोग जीवित रहने में कामयाब रहे हैं, बीमारी आमतौर पर मृत्यु में परिणत होती है। अगर आपको लगता है कि आप रेबीज के संपर्क में आ गए हैं, तो आपको बीमारी को घातक बनने से रोकने के लिए कई टीके लगवाने चाहिए।

     

    जिन लोगों के घर में पालतू जानवर या कुत्ते है, वो क्या सावधानी रखें ?
    किसी भी जानवर को पालने के लिए सबसे जरूरी होता है उसका खानपान और उसको दिया जाने वाला माहौल. ताकि आपका पालतू जानवर किसी को अपना शिकार न बनाये.

    वैक्सीनेशन:
    किसी भी जानवर को पालने के बाद पहला और सबसे जरूरी काम है वैक्सीनेशन, ताकि घर में रहने वाले किसी सदस्य या बाहर से आने वाले किसी इंसान के साथ खेलते हुए गलती से या जानबूझकर काटने से कोई गंभीर समस्या न हो, अगर आपके पालतू जानवर का वैक्सीनेशन प्रॉपर समय से होता है तो आप रैबीज जैसी बीमारी से लगभग निश्चिन्त हो सकते हैं.

    कुत्ता काट ले तो क्या करना चाहिए?
    जब भी कुत्ता काटे तो सबसे पहले उस जगह को धो लेना चाहिए. इसके लिए डिटर्जेंट साबुन जैसे कि रिन या सर्फ एक्सेल साबुन से इसे अच्छी तरह धो लें. अगर जख्म बहुत गहरा है तो इस जगह पर पहले साबुन से धोएं और उसके बाद बिटाडिन मलहम लगा लें. इससे रैबीज वायरस का असर थोड़ा कम हो जाता है. लेकिन इसे अच्छी तरह से क्लीन करना जरूरी है. इसके साथ ही कुत्ते काटने पर रेबीज का वैक्सीन, एंटीबाडीज़,एवं टेटनस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए.
    कब लगवाएं इंजेक्शन
    24 घंटे के अंदर आपको रैबीज का वैक्सीन एवं इसकी ४-५ डोज़ का पूरा कोर्स करना चाहिए. आमतौर पर कुत्ते काटने के बाद 5 इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ती है. इसके लिए पहला शॉट 24 घंटे के अंदर लगना चाहिए. इसके बाद तीसरे दिन, सांतवें दिन, 14 वें दिन और अंत में 28वें दिन में लगता है.
    48 घंटे के अंदर काटे हुए शरीर के भाग पे immunoglobulin देना चाहिए,
    समय पर इंजेक्शन न देने पर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

    कुत्ते के काटने पर क्या नहीं करना चाहिए ?

    ध्यान रखें कि कुत्ता काटने के बाद घाव पर पट्टी नहीं बांधना चाहिए. घाव पर तेल, हल्दी या किसी घरेलु चीज़ को लगाने से बचें | घाव को धोने के बाद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ताकि डॉक्टर इसकी गंभीरता के आधार पर इलाज कर सके.

    कुत्ते के काटने का प्राथमिक उपचार

    डॉक्टर कहते हैं, कुत्ते के काटने के बाद शीघ्रता से इसके लिए प्राथमिक उपचार लेना चाहिए। यदि काटे हुए जगह पर घाव नहीं है तो उस हिस्से को गर्म पानी और साबुन से धो लें। आप एहतियात के तौर पर जीवाणुरोधी लोशन भी लगा सकते हैं। यदि काटने के बाद वहां जख्म है तो उस हिस्से को धोने के बाद कोई एंटीसेप्टिक लगाएं और तुरंत रेबीज के इंजेक्शन के लिए अस्पताल जाएं।

  • Depression: Life में समस्याएं तो बहुत हैं पर निदान भी है, हारना नहीं जीतना सीखिए!

    Depression: Life में समस्याएं तो बहुत हैं पर निदान भी है, हारना नहीं जीतना सीखिए!

    डिप्रेशन (Depression) एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसमें व्यक्ति को अवसाद, निराशा, निष्ठुरता, खुशी की कमी, अकारण रोना, आत्महत्या विचार, नींद की कमी, निर्माणशीलता में कमी, भूलने की समस्या, अनिर्णीत खान-पान और वजन कम होने की समस्या आदि के लक्षण होते हैं। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या होती है जो व्यक्ति की दिनचर्या, सामाजिक संबंध और उनकी जीवनशैली को प्रभावित करती है।

    डिप्रेशन कई कारणों से हो सकती है, जैसे रोग, थकान, तनाव, संघर्ष, व्यक्तिगत और परिवारिक समस्याएं, दुखद घटनाएं, आत्मिकता की कमी, दवाओं का सेवन, अल्कोहल या मादक पदार्थों का सेवन, जीवनशैली में बदलाव, जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं की कमी आदि।

    इसे बचाने या कम करने के लिए निम्नलिखित कुछ सामान्य उपाय अपनाए जा सकते हैं:

    1. सही देखभाल: स्वस्थ आहार लें, नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकता है।
    2. समर्थन ढूंढें: अपने परिवार और मित्रों के साथ अपने विचार और भावनाओं को साझा करें। आपका उनसे सहयोग और समर्थन मिल सकता है।
    3. दैनिक कार्यक्रम: अपने दिन की योजना बनाएं और अपनी दिनचर्या में नियमितता लाएं। यह आपको स्थिरता और आत्मविश्वास प्रदान कर सकता है।
    4. स्वयं की देखभाल: अपने आप को मनोरंजन करें, अपने पसंदीदा गतिविधियों के साथ समय बिताएं और स्व-देखभाल के लिए समय निकालें।
    5. सक्रिय रहें: निराशावादी भावनाओं से बाहर निकलने के लिए सक्रिय रहें। योग या मेडिटेशन, शौक के लिए समय निकालें और नयी सामग्री पढ़ें या सीखें।
    6. विशेषज्ञ सलाह: यदि आपको गंभीर डिप्रेशन के लक्षण हैं और उपरोक्त उपाय काम नहीं कर रहे हैं, तो एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेने की सलाह दी जाती है। वे आपको सही उपचार योजना बनाने और आपके लिए सहायता प्रदान कर सकते हैं।
  • नोएडा ग्रेटर-नोएडा एक्सप्रेस-वे से कालिंदी कुंज तक लगा पांच किमी लंबा जाम

    नोएडा ग्रेटर-नोएडा एक्सप्रेस-वे से कालिंदी कुंज तक लगा पांच किमी लंबा जाम

     

    नोएडा। नोएडा-दिल्ली कालिंदी कुंज मार्ग गुरुवार सुबह पांच किलोमीटर लंबा जाम रहा। नोएडा से दिल्ली आने-जाने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम की समस्या नोएडा-दिल्ली कालिंदी कुंज मार्ग पर प्रवेश द्वारा के निर्माण कार्य के चलते बनी। सूचना पर पहुंची यातायात पुलिस ने किसी तरह जाम खत्म कराया।

    नोएडा प्राधिकरण की ओर से सेक्टर-95 ओखला बर्ड सेंचुरी मेट्रो स्टेशन के पास प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के चलते क्रेन को बीच सड़क खड़ी करके वेल्डिंग आदि का काम किया जाता है। इससे सड़क संकरी होती चली जाती है। व्यस्त समय में यहां से गुजरने वाले वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बृहस्पतिवार को भी निर्माण कार्य के चलते सेक्टर-125 एमिटी यूनिवर्सिटी के पास नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे से लेकर कालिंदी कुंज पुल तक सुबह साढ़े आठ बजे से साढ़े 11 बजे तक यातायात का दबाव रहा। जाम से बचने के लिए वाहन चालकों ने डीएनडी व चिल्ला मार्ग का प्रयोग किया। इससे इन मार्गों पर भी जाम की समस्या रही। जाम में कई एंबुलेंस भी फंसी। जाम के कारण लोगों दफ्तर पहुंचने में भी देरी हुई। जाम में फंसे लोगों ने ट्विटर पर अपनी नाराजगी जताई।

    डीसीपी ट्रैफिक गणेश प्रसाद साहा ने बताया कि कालिंदी कुंज के पास प्रवेश द्वार का निर्माण चल रहा है। सुबह के समय क्रेन को बीच सड़क खड़ा करके वेल्डिंग करने का काम किया जा रहा था। इससे व्यस्त समय में यातायात का दबाव रहा। मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस ने निर्माण कार्य में जुटे अधिकारियों से वार्ता के बाद क्रेन को सड़क किनारे कराया और यातायात को सामान्य कराया। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से वार्ता करके निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात बाधित न हो, इसके लिए रात में काम पर जोर दिया जाए। व्यस्त समय में काम नहीं किया जाए। जिससे यहां से गुजरने वालों को परेशानी न हो। जाम से निपटने के लिए यातायात पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है।

  • अगले कुछ दिनों के लिए इस रूट पर बाधित रहेगी ट्रेनों की आवाजाही, सैकड़ों यात्रियों पर पड़ेगा असर

    अगले कुछ दिनों के लिए इस रूट पर बाधित रहेगी ट्रेनों की आवाजाही, सैकड़ों यात्रियों पर पड़ेगा असर

    नई दिल्ली। सिरसा स्टेशन पर नान इंटरलाकिंग का काम पूरा करने के लिए अगले कुछ दिनों तक ट्रेनों की आवाजाही बाधित रहेगी। दिल्ली व इसके आसपास के स्टेशनों से होकर चलने वाली ट्रेनों पर भी इसका असर पड़ेगा। इसी तरह से लखनऊ मंडल में दोहरीकरण के काम की वजह से भी कई ट्रेनों का परिचालन बाधित होगा।

    आंशिक रूप से निरस्त रहने वाली ट्रेनें
    29 मार्च तक तिलक ब्रिज-सिरसा एक्‍सप्रेस हिसार तक चलेगी। हिसार से सिरसा के बीच निरस्‍त रहेगी। वापसी दिशा में यह ट्रेन 30 मार्च तक हिसार से तिलक ब्रिज के लिए चलेगी। हिसार व सिरसा के बीच निरस्त रहेगी।
    पुरानी दिल्‍ली-बठिंडा एक्‍सप्रेस भी 29 मार्च तक हिसार तक चलेगी। इस दौरान हिसार से बठिंडा के बीच यह ट्रेन रद कर दी गई है। वापसी दिशा में 30 मार्च तक यह ट्रेन बठिंडा की जगह हिसार से पुरानी दिल्ली के लिए चलेगी।

    इन ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है
    अमृतसर से हावड़ा के बीच चलने वाली पंजाब मेल 26 मार्च से एक अप्रैल तक जंघई-फाफामऊ-ऊंचाहार-रायबरेली होकर चलेगी।
    पुरी से आनंद विहार टर्मिनल के बीच चलने वाली नीलांचल एक्सप्रेस 27 व 29 मार्च और एक अप्रैल को जंघई-फाफामऊ-प्रयागराज-कानपुर सेंट्रल होकर चलेगी।
    बाड़मेर के लिए चलेगी नई ट्रेन
    पुरानी दिल्ली से बाड़मेर के बीच नई सुपरफास्ट ट्रेन चलेगी। सप्ताह में दो दिन चलने वाली इस ट्रेन की शुरुआत 25 मार्च से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से होगी। बाड़मेर से यह 28 मार्च से चलेगी। इस ट्रेन के चलने से राजस्थान जाने वाले यात्रियों को सुविधा होगी।
    20488 नंबर की ट्रेन पुरानी दिल्ली से प्रत्‍येक शुक्रवार और मंगलवार को अपराह्न 03.40 बजे चलेगी। अगले दिन सुबह साढ़े छह बजे यह ट्रेन बाड़मेर पहुंचेगी। वापसी दिशा में 20487 नंबर की ट्रेन बाड़मेर से प्रत्‍येक सोमवार और बृहस्पतिवार को रात्रि 09.40 बजे प्रस्‍थान कर अगले दिन दोपहर 12.35 बजे पुरानी दिल्‍ली पहुंचेगी। इसमें वातानुकूलित, शयनयान तथा सामान्‍य श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे।
    रास्ते में इसका ठहराव उतरलाई, बालोतरा, समदड़ी, लूनी, जोधपुर, मेड़ता रोड, डेगाना, मकराना, फुलेरा, जयपुर, गांधीनगर जयपुर, दौसा, अलवर, रेवाड़ी, गुरुग्राम तथा दिल्‍ली छावनी स्‍टेशनों पर होगा।