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  • Char Dham Yatra : आध्यात्मिकता और प्रकृति का अनूठा संगम

    Char Dham Yatra : आध्यात्मिकता और प्रकृति का अनूठा संगम

    Char Dham Yatra : भारत की पवित्र भूमि पर बसी चार धाम यात्रा एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा है, जो हर श्रद्धालु के दिल में विशेष स्थान रखती है। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि प्रकृति की गोद में बसे हिमालय के मनोरम दृश्यों का भी अनुभव कराती है। चार धाम – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, और बद्रीनाथ – उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित हैं और हर साल लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं। इस ब्लॉग में हम चार धाम यात्रा की विशेषताओं, महत्व, और यात्रा के अनुभवों को साझा करेंगे।

    Char Dham Yatra
    Char Dham Yatra

    Char Dham Yatra का महत्व

    Char Dham Yatra हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस यात्रा को करने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। ये चार तीर्थ स्थल भगवान विष्णु (बद्रीनाथ), भगवान शिव (केदारनाथ), और माँ गंगा (गंगोत्री) व यमुना (यमुनोत्री) को समर्पित हैं। प्रत्येक धाम की अपनी विशेषता और पौराणिक कथाएँ हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं।

    • यमुनोत्री : यह माँ यमुना का पवित्र मंदिर है, जो यमुना नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है। यहाँ का गर्म पानी का झरना (सूर्य कुंड) और मंदिर की शांति यात्रियों को आकर्षित करती है।
    • गंगोत्री : माँ गंगा का मंदिर, जो गंगा नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित है। यहाँ की शांत वादियाँ और गंगा का पवित्र जल श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति प्रदान करते हैं।
    • केदारनाथ : भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, केदारनाथ मंदिर 3,583 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण अविस्मरणीय है।
    • बद्रीनाथ : भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे बसा है। यहाँ की शांति और पवित्रता हर यात्री को मंत्रमुग्ध कर देती है।
    Char Dham Yatra
    Char Dham Yatra

    यात्रा की तैयारी और मार्ग

    Char Dham Yatra आमतौर पर मई से अक्टूबर के बीच होती है, क्योंकि इस दौरान मौसम अनुकूल रहता है। यात्रा शुरू करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

    1. स्वास्थ्य जाँच: उच्च ऊँचाई पर स्थित होने के कारण, यात्रियों को अपने स्वास्थ्य की जाँच करवानी चाहिए। विशेष रूप से हृदय और श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
    2. उचित कपड़े और सामान: ठंडे मौसम के लिए गर्म कपड़े, बारिश से बचने के लिए रेनकोट, और आरामदायक जूते अनिवार्य हैं।
    3. यात्रा की बुकिंग: सरकारी पंजीकरण अनिवार्य है। आप ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। साथ ही, विश्वसनीय ट्रैवल एजेंसी से पैकेज बुक करना सुविधाजनक हो सकता है।
    4. पर्यावरण का ध्यान: हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को बनाए रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करें और कूड़ा न फैलाएँ।

    सामान्य यात्रा मार्ग

    Char Dham Yatra आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। सामान्य मार्ग इस प्रकार है:

    • हरिद्वार/ऋषिकेश → यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ
    • यात्रा सड़क मार्ग, ट्रेकिंग, और कुछ स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेवाओं के माध्यम से पूरी की जा सकती है।
    सामान्य यात्रा मार्ग
    सामान्य यात्रा मार्ग

    प्रत्येक धाम का अनूठा अनुभव

    यमुनोत्री: माँ यमुना की कृपा

    यमुनोत्री यात्रा की शुरुआत होती है। यहाँ तक पहुँचने के लिए 6 किमी की ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जो जानकी चट्टी से शुरू होती है। रास्ते में हरे-भरे जंगल, झरने, और यमुना नदी का साथ मन को सुकून देता है। मंदिर में पूजा करने के बाद सूर्य कुंड में चावल और आलू पकाने की परंपरा विशेष है।

    गंगोत्री: पवित्र गंगा का उद्गम

    गंगोत्री का रास्ता बेहद खूबसूरत है। यहाँ माँ गंगा का मंदिर और पास में भगीरथ शिला, जहाँ राजा भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए तप किया था, देखने योग्य हैं। गंगोत्री में गंगा के दर्शन और स्नान का अनुभव अवर्णनीय है।

    केदारनाथ: शिव की शरण में

    केदारनाथ की यात्रा सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण है। गौरीकुंड से 16 किमी की पैदल यात्रा या हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बसा यह मंदिर शिव भक्ति का प्रतीक है। सूर्यास्त के समय मंदिर का दृश्य और भजन-कीर्तन का माहौल आत्मा को छू लेता है।

    बद्रीनाथ: विष्णु की शांति

    यात्रा का अंत बद्रीनाथ में होता है। यहाँ का मंदिर अपनी भव्यता और शांति के लिए प्रसिद्ध है। पास में तप्त कुंड में स्नान करने का अनुभव तरोताजा कर देता है। बद्रीनाथ के आसपास माणा गाँव और वसुधारा झरना भी देखने योग्य हैं।

    Char Dham Yatra
    Char Dham Yatra

    यात्रा के कुछ अनुभव और सुझाव

    • आध्यात्मिक अनुभव: Char Dham Yatra केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आत्म-खोज का अवसर है। यहाँ का शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य मन को शांति देता है।
    • स्थानीय संस्कृति: यात्रा के दौरान स्थानीय गढ़वाली संस्कृति, भोजन, और आतिथ्य का अनुभव अवश्य लें। यहाँ के लोग बेहद सरल और मेहमाननवाज होते हैं।
    • फोटोग्राफी और प्रकृति: हिमालय की सुंदरता को कैमरे में कैद करना न भूलें, लेकिन मंदिरों के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं होती।
    • सावधानियाँ: ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण साँस लेने में तकलीफ हो सकती है। धीरे-धीरे चलें और हाइड्रेटेड रहें।

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    Char Dham Yatra एक ऐसी यात्रा है, जो आपको न केवल आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करती है, बल्कि प्रकृति के साथ एक गहरा रिश्ता भी जोड़ती है। यह यात्रा हर भारतीय के लिए एक बार जरूर करने योग्य है। यदि आप इस यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पहले से तैयारी करें, स्थानीय नियमों का पालन करें, और इस पवित्र यात्रा का आनंद लें।

  • Ashadha Amavasya 2025 : पितृ शांति और लक्ष्मी कृपा के लिए करें ये 7 विशेष कार्य, पितरों की शांति से लेकर भाग्य बदलने तक का विशेष अवसर

    Ashadha Amavasya 2025 : पितृ शांति और लक्ष्मी कृपा के लिए करें ये 7 विशेष कार्य, पितरों की शांति से लेकर भाग्य बदलने तक का विशेष अवसर

    Ashadha Amavasya 2025 : हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है, और आषाढ़ अमावस्या इन सभी में एक अत्यंत पवित्र और पूज्य तिथि मानी जाती है।। वर्ष 2025 में यह दिन 25 जून, बुधवार को मनाया जाएगा। यह दिन पितरों को श्रद्धांजलि देने, उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति लाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है।

    Ashadha Amavasya 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

    • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 24 जून 2025, सुबह 6:59 बजे
    • अमावस्या तिथि समाप्त: 25 जून 2025, शाम 4:00 बजे
    • पर्व मनाने की तिथि: 25 जून (उदयातिथि के अनुसार)
    • सूर्योदय: 5:25 AM | सूर्यास्त: 7:23 PM
    Ashadha Amavasya 2025
    Ashadha Amavasya 2025

    शुभ मुहूर्त:

    • ब्रह्म मुहूर्त: 4:05 AM – 4:45 AM
    • विजय मुहूर्त: 2:43 PM – 3:39 PM
    • गोधूलि मुहूर्त: 7:21 PM – 7:42 PM
    • सर्वार्थ सिद्धि योग: 5:25 AM – 10:40 AM

    विशेष योग:

    • वृद्धि योग
    • गुरु आदित्य योग
      (ये योग तर्पण व दान-पुण्य को अत्यंत फलदायी बनाते हैं।)

    आषाढ़ अमावस्या का महत्व

    इस दिन को पितरों की आत्मा की शांति के लिए सबसे पावन दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं और तर्पण, पिंडदान व पूजा से प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। साथ ही यह दिन पितृ दोष, कालसर्प दोष, और अन्य ज्योतिषीय दोषों के निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

    यह दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने, धन-समृद्धि प्राप्त करने और मानसिक शांति के लिए भी शुभ माना जाता है।

    Ashadha Amavasya 2025
    Ashadha Amavasya 2025

     इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय

    पवित्र स्नान:

    • सूर्योदय से पूर्व नदी, तालाब या गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
    • स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें, जिसमें काले तिल मिलाए हों।

    पितृ तर्पण और पिंडदान:

    • काले तिल, जौ, और जल से तर्पण करें।
    • किसी विद्वान ब्राह्मण की सहायता से पिंडदान करना शुभ होता है।

    दान-पुण्य:

    वस्त्र, तिल, घी, अन्न और काले कपड़े का दान करें।

    जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

    पीपल पूजा:

    पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएं, सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 परिक्रमा करें।

    पितरों का स्मरण करें, मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

    मंत्र जाप और पूजा:

    • भगवान विष्णु, शिव, और हनुमान जी की पूजा करें।
    • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करें।
    • शनिदेव को प्रसन्न करने हेतु “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
    • मां लक्ष्मी के लिए “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करें।
    Ashadha Amavasya 2025
    Ashadha Amavasya 2025

    घर की स्वच्छता और दीपदान:

    • मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
    • घर में साफ-सफाई रखें और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

    इस दिन क्या न करें?

    • तामसिक भोजन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।
    • क्रोध, विवाद और नकारात्मक सोच से बचें।
    • नए कार्य या यात्रा की शुरुआत से परहेज करें।
    • बाल और नाखून काटना इस दिन अशुभ माना गया है।

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    Ashadha Amavasya 2025 हमारे पितरों को याद करने, उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने और आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का एक दिव्य अवसर है। इस दिन यदि श्रद्धा और विधिपूर्वक स्नान, तर्पण, दान और मंत्र जाप किया जाए तो न केवल पितृ कृपा प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं।

    इस अमावस्या पर अपनाएं ये सरल उपाय और पाएं शांति, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा।
    ध्यान दें: किसी भी धार्मिक कार्य से पहले योग्य ब्राह्मण या पंडित से सलाह अवश्य लें।

  • कुंभ मेला (Kumbh Mela): दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन

    कुंभ मेला (Kumbh Mela): दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन

    कुंभ मेला(Kumbh Mela) दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जो हिंदू लीजेंडरी कथाओं, स्पिरिचुअलिटी और परंपरा में गहराई से जड़ें जमाए हुए है। यह समुद्र मंथन (समुद्र मंथन) की उस दिव्य घटना की स्मृति में मनाया जाता है, जिसमें देवताओं (देव) और राक्षसों (असुर) ने अमृत, यानी अमरत्व के अमृत की खोज की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी के चार स्थानों पर गिरीं: प्रयागराज (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन और नासिक, जिनसे ये स्थान पवित्र हो गए।

    Kumbh Mela : mythological origin

    कुंभ मेले(Kumbh Mela) की कहानी हिंदू धर्मग्रंथ पुराणों से उत्पन्न होती है। जब अमृत का कलश प्राप्त हुआ, तो देवताओं और राक्षसों के बीच 12 दिव्य दिनों (पृथ्वी के 12 वर्षों के बराबर) तक इसका अधिकार पाने के लिए युद्ध हुआ। इस दौरान, अमृत इन चार स्थानों पर गिरा, जिससे ये स्थान आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बन गए।

    कुंभ मेला(Kumbh Mela) विशेष खगोलीय संयोगों के आधार पर मनाया जाता है:

    • प्रयागराज (इलाहाबाद): जब बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करता है और सूर्य मकर राशि में होता है, तब गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर कुंभ मेला आयोजित होता है।
    • हरिद्वार: जब बृहस्पति कुंभ राशि में होता है और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
    • उज्जैन: जब बृहस्पति सिंह राशि में होता है और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
    • नासिक: जब बृहस्पति सिंह राशि में और सूर्य कर्क राशि में होता है।
    Kumbh Mela in India Places
    Kumbh Mela in India Places

    कुंभ मेला(Kumbh Mela) के आयोजन स्थल

    1. प्रयागराज (इलाहाबाद)

    • स्थान: गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम (त्रिवेणी संगम) पर।
    • महत्त्व: इसे सबसे शुभ स्थल माना जाता है, इसकी आध्यात्मिक और भौगोलिक विशेषताओं के कारण।
    • कार्यक्रम: लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति पाते हैं।

    2. हरिद्वार

    • स्थान: गंगा नदी के किनारे, हिमालय की तलहटी में।
    • महत्त्व: यहां गंगा पर्वतों से निकलकर मैदानों में प्रवेश करती है, जिससे यह स्थान पवित्र बनता है।
    • कार्यक्रम: गंगा स्नान करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    3. उज्जैन

    • स्थान: मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के किनारे।
    • महत्त्व: भगवान शिव और महाकाल मंदिर (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक) से जुड़ा हुआ है।
    • कार्यक्रम: क्षिप्रा नदी में पवित्र स्नान और महाकाल मंदिर के दर्शन।

    4. नासिक

    • स्थान: महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के किनारे।
    • महत्त्व: गोदावरी को “दक्षिण की गंगा” माना जाता है और इसका संबंध रामायण से है।
    • कार्यक्रम: श्रद्धालु रामकुंड में पवित्र स्नान करते हैं और पास के मंदिरों में दर्शन करते हैं।

    कुंभ मेले(Kumbh Mela) के प्रकार

    1. पूर्ण कुंभ मेला

    • हर 12 साल में चारों स्थलों में से किसी एक पर आयोजित।
    • सभी कुंभ मेलों में सबसे बड़ा।

    2. अर्ध कुंभ मेला

    • हर 6 साल में प्रयागराज और हरिद्वार में आयोजित।

    3. महाकुंभ मेला

    • हर 144 साल में प्रयागराज में आयोजित, 12 पूर्ण कुंभ मेलों के बाद।
    • यह सबसे भव्य और दुर्लभ कुंभ मेला है।

    4. माघ मेला

    • हर साल प्रयागराज में माघ के महीने (जनवरी-फरवरी) में आयोजित।
    • इसे कुंभ का छोटा रूप माना जाता है।

    सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

    • पवित्र स्नान: कुंभ मेले का मुख्य अनुष्ठान शाही स्नान या राजकीय स्नान है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
    • आध्यात्मिक प्रवचन: विभिन्न संप्रदायों के संत और महात्मा प्रवचन देते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
    • विविधता में एकता: कुंभ मेला भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जो हर वर्ग के लोगों को आकर्षित करता है, जिसमें विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं।

    सदियों से, कुंभ मेला(Kumbh Mela) एक आध्यात्मिक आयोजन से बढ़कर विश्वास, संस्कृति और भक्ति का भव्य प्रदर्शन बन गया है। इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है।

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  • Navrati 2024: बाजारों में दिखी रौनक, खरीदारी और पूजा सामग्री की बंपर बिक्री

    Navrati 2024: बाजारों में दिखी रौनक, खरीदारी और पूजा सामग्री की बंपर बिक्री

    Navrati 2024:नवरात्रि के आते ही बाजारों में चारों ओर रौनक दिखाई देने लगती है। इस साल 2025 की नवरात्रि में भी यही नजारा है। दुकानों को सजाने का सिलसिला शुरू हो चुका है और रंग-बिरंगे फूलों, लाइट्स, और पोस्टर्स से बाजारों को बेहद आकर्षक बनाया गया है। देवी दुर्गा की मूर्तियों की बिक्री में इज़ाफा हुआ है, जिन्हें भक्त अपने घरों और पंडालों में स्थापित कर रहे हैं।

    पूजा सामग्री की दुकानों पर खासा रश देखने को मिल रहा है। फल, फूल, अक्षत, चंदन और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। व्रत के लिए विशेष खाद्य पदार्थ और मिठाइयाँ भी धड़ल्ले से बिक रही हैं। खासतौर पर फलाहारी मिठाइयों और नमकीन की मांग बढ़ी हुई है।

    नवरात्रि के दौरान लोग नए वस्त्र और आभूषण खरीदने के लिए उत्सुक रहते हैं, क्योंकि यह समय न केवल धार्मिक बल्कि पारंपरिक उत्सव का भी होता है। इस साल बाजारों में नए डिजाइन के परिधान और आभूषण धूम मचा रहे हैं। खासतौर पर महिलाएँ और युवतियाँ गरबा और डांडिया के लिए पारंपरिक कपड़े खरीदने में रुचि दिखा रही हैं।

    सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारियां जोरों पर हैं। शहर के प्रमुख स्थानों पर डांडिया और गरबा नाइट्स आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा, विभिन्न रामलीला मैदानों में भी बाजारों की रौनक देखने को मिल रही है, जहां पूजा के साथ मनोरंजन का भी पूरा इंतजाम है।

    नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दौरान कन्याओं को उपहार में दी जाने वाली वस्तुओं की भी जबरदस्त बिक्री हो रही है। बाजारों में कलश, चुनरी, बिछुआ और अन्य पूजन सामग्री खरीदने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है।

    इस त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही बाजार पूरी तरह से गुलजार हैं। देर रात तक बाजारों में भीड़ बनी रहती है और लोगों के चेहरों पर नवरात्रि की खुशी साफ झलकती है। दुकानदार भी इस सीजन का इंतजार करते हैं, क्योंकि यह समय उनके लिए खासा मुनाफा लेकर आता है।

    नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है और यही कारण है कि लोग कपड़ों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक हर चीज की खरीदारी में जुटे हुए हैं। Durga Puja 2024 के इस खास मौके पर बाजारों में त्योहारी रौनक और खरीदारी का उत्साह देखते ही बनता है।

    Ananya Saxena की रिपोर्ट

  • सावन के महीने में ऐसे करें भगवान भोले की भक्ति, हर मुराद होगी पूरी, जिसने किया उस पर कृपा बरस रही है!

    सावन के महीने में ऐसे करें भगवान भोले की भक्ति, हर मुराद होगी पूरी, जिसने किया उस पर कृपा बरस रही है!

    भगवान शिव, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदि नामों से भी जाना जाता है। शिव भक्तों का मानना है कि शिव मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है, जीवन में सफलता मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    शिव मंत्रों के प्रकार और उनके लाभ:

    शिव मंत्रों को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:

    • पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय
      • यह सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली शिव मंत्रों में से एक है।
      • इसका जाप करने से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
    • द्वादशाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्युमृत्युन्न मुच्यमाम।
      • यह मंत्र मृत्यु से मुक्ति और दीर्घायु प्रदान करने वाला माना जाता है।
    • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्युमृत्युन्न मुच्यमाम।
      • यह मंत्र मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है और जीवन को लंबा और स्वस्थ बनाता है।
    • शिव तांडव स्तोत्र: यह स्तोत्र भगवान शिव के तांडव रूप का वर्णन करता है। इसका पाठ करने से शक्ति और उत्साह मिलता है।

    शिव मंत्रों के लाभ:

    • मन की शांति: शिव मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है।
    • रोगों से मुक्ति: शिव मंत्रों का नियमित जाप करने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।
    • सफलता: शिव मंत्रों का जाप करने से जीवन में सफलता मिलती है।
    • मोक्ष: शिव मंत्रों का नियमित जाप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
    • आत्मविश्वास: शिव मंत्रों का जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है।

    शिव मंत्रों का जाप कैसे करें:

    • शांत वातावरण: शांत और शांत वातावरण में बैठकर मंत्रों का जाप करें।
    • शुद्ध मन: शुद्ध मन से मंत्रों का जाप करें।
    • एकाग्रता: मंत्रों के जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें।
    • नियमितता: नियमित रूप से मंत्रों का जाप करें।
    • विश्वास: मंत्रों की शक्ति पर विश्वास रखें।

    शिव भक्ति के अन्य तरीके:

    • शिवलिंग की पूजा: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, बेलपत्र चढ़ाएं और धूप दीप जलाएं।
    • शिव मंदिर में जाएं: सावन के महीने में शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करें।
    • शिव भजन गाएं: भगवान शिव के भजन गाकर आप उनके करीब महसूस कर सकते हैं।
    • शिव पुराण का पाठ करें: शिव पुराण का पाठ करने से धार्मिक ज्ञान प्राप्त होता है और मन को शांति मिलती है।

    शिव मंत्रों का जाप एक शक्तिशाली साधन है जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। नियमित रूप से मंत्रों का जाप करने से आप शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

    कुछ अन्य शिव मंत्र जो आप जाप कर सकते हैं:

    • ॐ नमः शिवाय कार्तिकेय
    • ॐ नमः शिवाय गणेशाय
    • ॐ नमः शिवाय पार्वती
    • ॐ नमः शिवाय शंकर

  • Noida News: सेक्टर 82 में स्थित ईडब्ल्यूएस पॉकेट 7 में श्रीराम कथा से पहले विशाल कलश यात्रा का आयोजन

    Noida News: सेक्टर 82 में स्थित ईडब्ल्यूएस पॉकेट 7 में श्रीराम कथा से पहले विशाल कलश यात्रा का आयोजन

    यात्रा में शोभा के साथ आगे आए ऊंट, बैंड बाजा, और फिर कथा व्यास महामंडलेश्वर पंचमानंद महाराज का रथ।

    शोभायात्रा में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, और हनुमान जी भक्तों और ट्रैक्टर पर सवार थे।

    श्रद्धालुओं के जय श्रीराम के उद्घोष ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    कलश यात्रा ने पूरे सेक्टर 82 और 93 को घूमते हुए पुनः कथा स्थल पहुंचाया।

    जगह फूलों से सजी थी और जलपान की व्यवस्था भी की गई थी।

    कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानन्द महाराज ने राम कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि राम कथा के श्रवण से हमारे पापों का शमन होता है।

    Noida News: सेक्टर 82 स्थित ईडब्ल्यूएस पॉकेट 7 में आयोजित श्रीराम कथा का विशाल कलश यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ हुआ। बैंड बाजे व ढोल नगाड़ों साथ 207 महिलाओं ने अपने सिर पर कलश रखकर पूरे सेक्टर में कलश यात्रा निकाली। शोभा यात्रा में आगे आगे ऊंट फिर बैंड बाजा इसके बाद कथा व्यास महामंडलेश्वर पंचमानंद महाराज का रथ उसके पीछे कलश धारण किए महिलाएं एवं भक्तजन और ट्रेक्टर पर सवार भगवान राम, सीता , लक्ष्मण, हनुमान जी शोभायात्रा को शोभायमान कर रहे थे। बैंड बाजों की थाप पर थिरकते श्रद्धालुओं के जय श्रीराम के उद्घोष ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    कलश यात्रा पूरे सेक्टर 82 एवं 93 में घूमती हुई पुनः कथा स्थल पहुंची इस दौरान जगह फूलों से कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया गया और जलपान की भी व्यवस्था की गई। कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानन्द महाराज ने राम कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि जन्म जन्मांतर के पुण्यों के अभ्युदय होने पर हमें राम कथा रूपी अमृत पान करने का शुभ अवसर प्राप्त होता है।

    श्रीराम कथा के श्रवण मात्र से हमारे मेरु समान पापों का शमन हो जाता है। राम कथा संस्कारों का बीजारोपण करती है। सती चरित्र एवं पार्वती विवाह का रोचक प्रसंग व्यास जी द्वारा सुनाया गया

    इस अवसर पर आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राघवेंद्र दुबे ने बताया कि सभी पॉकेट वासियों के सहयोग से यह श्रीराम का आयोजन हो रहा है। श्रीराम कथा नित्य 4 बजे से 8 बजे तक होगी। 6 मई को नारद मोह, श्रीराम जन्म, अहिल्या उद्धार आदि कथाओं का वर्णन किया जाएगा। सभी श्रद्धालु भक्तों से अनुरोध है कि कथामृत का रसपान कर पुण्यलाभ अवश्य अर्जित करें।
    इस अवसर पर देवमणि शुक्ला, संजय पांडे, गोरे लाल, रवि राघव, देवेंद्र गुप्ता, सुशील पाल, हरी सिंह, अंगद तोमर, रमेश दास, रमेश चंद्र शर्मा, विष्णु शर्मा, रमेश वर्मा, हंसमणि शुक्ला, राजेश गुप्ता, अनूप सिंह, जयंत शाहू, संगम प्रसाद मिश्र, राजवीर सिंह, विकास शर्मा, रमेश गुप्ता, विजय जी, प्रकाश जोशी सहित भारी संख्या में भक्त मौजूद रहे।

  • Noida: सरस्वती पूजा का धूमधाम से आयोजन, बच्चों ने डांस कर सबका मन मोह लिया

    Noida: सरस्वती पूजा का धूमधाम से आयोजन, बच्चों ने डांस कर सबका मन मोह लिया

    Noida : बुधवार को नोएडा में वसंत पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सेक्टर और सोसायटियों स्थित मंदिरों में विद्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की सामूहिक पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने पीले वस्त्र धारण किए और हवन भी किया। दिनभर लोगों ने पतंग उड़ाई और उत्सव का आनंद लिया।

    नोएडा के सेक्टर 82 के एकता कुंज पॉकेट 12 में सोसाइटी के लोगों और बच्चों ने सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाया। बच्चों ने डांस कर सबका मन मोह लिया। उन्होंने सरस्वती मां का पूजन कर पढ़ाई की और पूजा के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

    आयोजक मंडल के मुताबिक, सरस्वती पूजा के कार्यक्रम की तैयारी सोसाइटी में कई दिन पहले से शुरू कर दी गई थी। पूरे सोसाइटी परिसर को साफ-सफाई के अलावा विभिन्न तरीके से फूल मालाओं से सजाया गया था। उत्सव की भावना को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी के हर छोटे-बड़े व्यक्ति ने अपना योगदान दिया।इस अवसर पर आयोजक मंडल और सोसाइटी के निवासियों ने बताया कि सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह हमारी भारतीय संस्कृति, परंपरा और एकजुटता का एक अनूठा उत्सव बन गया है। जो हर साल इसी प्रकार मनाया जाएगा।

    गुरुवार को विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन पूरे भक्तिभाव व पूजा-अर्चना के साथ की गई। महाआरती का आयोजन किया गया और मां की प्रतिमा को लेकर गाजे-बाजे के साथ जुलूस की शक्ल में यमुना नदी तक ले जाया गया। जहां देवी की प्रतिमा को भावपूर्ण तरीके से विसर्जन किया गया।

    मौके पर श्रद्धालुओं द्वारा मां सरस्वती से विद्या व ज्ञान का वर मांगते हुए उन्हें विदा किया गया। विसर्जन जुलूस में शामिल युवकों व बड़े-बुजुर्गों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर एक दूसरे को पूजा की बधाई दी। इस दौरान बच्चों ने खूब सारे फोटो भी खींचे। पॉकेट 12 सोसायटी में रहने वाले स्कूली बच्चे साक्षी, आयुष, आर्यन, शिवांगी, स्नेहा एवं अन्य ने सरस्वती पूजा को धूमधाम से मनाया और एजॉय भी किया।

  • ₹2500 करोड़ से महाकुम्भ का महाआयोजन कराएगी योगी सरकार

    ₹2500 करोड़ से महाकुम्भ का महाआयोजन कराएगी योगी सरकार

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश के समेकित विकास का खाका खींच रही योगी सरकार ने वार्षिक वित्तीय बजट 2024-25 में महाकुम्भ के भव्यतम आयोजन की भी नींव रख दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार को पेश हुए बजट में वर्ष 2025 में प्रयागराज में होने वाले महाकुम्भ के भव्य आयोजन को ध्यान में रखकर 2500 करोड़ रुपए की धनराशि प्राविधानित की है। इसके साथ ही, प्रयागराज में कुंभ संग्रहालय की स्थापना के साथ ही नागरिक सुविधाओं में वृद्धि की तमाम परियोजनाओं के गति देने पर योगी सरकार का फोकस रहा। इसमें, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपए की धनराशि की स्वीकृति समेत अवस्थापना विकास की तमाम परियोजनाओं के लिए भी बजट आवंटन शामिल है। इसके अतिरिक्त, प्रयागराज में पर्यटक सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए भी तमाम परियोजनाओं को गति देने का मार्ग बजट आवंटन से संभव हो गया है।

    भारतीय ही नहीं, विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी हुआ इजाफा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा में योगी सरकार द्वारा पेश किए गए वार्षिक बजट 2024-25 में उल्लेखित आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्ष-2023 में जनवरी से अक्टूबर तक 37 करोड़ 90 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। इनमें भारतीय पर्यटकों की संख्या लगभग 37 करोड़ 77 लाख व विदेशी पर्यटकों की संख्या लगभग 13 लाख 43 हजार रही। इसमें वाराणसी-अयोध्या के साथ ही प्रयागराज में भी पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ। वहीं, महाकुम्भ 2025 के दृष्टिगत करोड़ों पर्यटकों के जुटने की संभावना है। यही कारण है कि महाकुम्भ की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए परियोजनाओं को गति देने के साथ ही संपूर्ण प्रयागराज मंडल में तीर्थ व पर्यटन क्षेत्रों के समेकित विकास की प्रक्रिया को 2024-25 में लक्षित करने पर फोकस किया गया है। इसके फलस्वरूप, महाकुम्भ के लिए विशाल टेंट सिटी, कुम्भ म्यूजियम समेत तमाम परियोजनाओं को पूर्ण करने की प्रक्रिया को अब योगी सरकार प्रमुख प्राथमिकता पर रखते हुए पूरा करेगी।

    इन प्रोजेक्ट्स पर प्रयागराज में रहेगा मुख्य फोकस

    ● महाकुम्भ, 2025 के अन्तर्गत विभिन्न कार्यो के लिए 2500 करोड़ समेत संस्कृति विभाग के लिए 100 करोड़ रूपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है।

    ● जनपद प्रयागराज में निर्माणाधीन राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    ● निषाद राज गुहा सांस्कृतिक केन्द्र, श्रृंगवेरपुर की स्थापना के लिए 14.68 करोड़ रुपए, तथा महर्षि वाल्मीकि सांस्कृतिक केन्द्र चित्रकूट की स्थापना के लिए 10.53 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    ● ‘‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना‘‘ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल को विकसित किए जाने की योजना है। इसके अंतर्गत प्रयागराज मंडल के तमाम जिलों में भी तीर्थ व पर्यटन क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

    ● प्रयागराज में कुंभ संग्रहालय की स्थापना का मार्ग भी योगी सरकार करेगी प्रशस्त।

    ● प्रयागराज समेत प्रदेश में अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट, लखनऊ, विन्ध्याचल, नैमिषारण्य, गोरखपुर, मथुरा, बटेश्वर धाम, गढ़मुक्तेश्वर, शुकतीर्थ धाम, माँ शाकुम्भरी देवी, सारनाथ व अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के विकास व सौन्दर्यीकरण कार्यों में तेजी लाने की प्रक्रिया प्रावधानित की है।

  • आज से ठीक १५ दिन बाद प्रभु श्रीराम अपने घर में विराजेंगे। “मेरे राम श्रृंखला” में आज हम बाबा रहीम दास के राम पर चर्चा करेंगे

    आज से ठीक १५ दिन बाद प्रभु श्रीराम अपने घर में विराजेंगे। “मेरे राम श्रृंखला” में आज हम बाबा रहीम दास के राम पर चर्चा करेंगे

    “रहीम के राम”
    *****
    बाबा रहीम अकबर के नवरत्नों में एक व तुलसी बाबा के समकालीन थे। वो एक अकबर के शौर्यशाली योद्धाओं व सेनापतियों में एक थे। परंतु लोक समाज में अपनी भगवदभक्ति के द्वारा सामाजिक चेतना की अलख जगाए रखते थे। ईश्वर व समसामयिक व्यंग रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं यथा:

    खीरा सिर ते काटिए मलियत नमक लगाय
    रहिमन करुए मुखन को चहियत यही सजाय

    बाबा कबीर,बाबा रैदास की भांति ही रहीमदास के राम निराकार थे। बाबा रहीम हिंदुस्‍तान के रंग में ऐसे रंगे थे कि तुलसी के राम को रहीम के राम में जानना हमें आस्‍था और चैतन्‍यता से भर देता है। बाबा रहीम तुलसीदास जी के मित्र थे और जैसे जैसे मानस पढ़ते गए वो राम और कृष्ण में समाते चले गए। प्रभु राम को माध्यम बना उन्होंने अप्रतिम दोहे लिख कर “अपने राम व उनके रामत्व” को समाज में उदगारित किया। तुलसी बाबा और रहीमन की मित्रता के किस्‍सों के बीच यह जानना भी दिलचस्‍प होगा कि रहीम के राम कैसे हैं?

    रामचरित मानस विमल, संतन जीवन प्रान
    “हिन्दू जन को वेद सम, जनमहि प्रकट पुरान*

    रहीम ने रामचरित मानस को वेद के समान बताया है तो तुलसी के इष्ट राम में भी गहरी आस्था जताई।

    गहि सरनागति राम की, भवसागर की नाव
    ‘रहिमन’ जगत-उधार को, और न कछू उपाय

    अर्थात भवसागर के पार ले जाने वाली नाव कोई है तो वह राम की शरण में जाना ही है। संसार से उद्धार पाने का दूसरा कोई उपाय नहीं है।

    जो रहीम भावी कतहुं, होति आपने हाथ
    राम न जाते हरिन संग, सीय न रावण साथ

    अर्थात होनी या भविष्‍य हम नहीं जान सकते हैं। यदि भावी अपने हाथ में होती तो राम हिरन के पीछे न जाते और सीता का हरण नहीं होता।

    राम नाम जान्यो नहीं, भई पूजा में हानि
    कहि ‘रहीम’ क्यों मानिहैं, जम के किंकर कानि

    अर्थात राम नाम की महिमा मैंने पहचानी नहीं और पूजा-पाठ करता रहा। इस तरह बात बनी नहीं बल्कि बिगड़ती ही गई। अंत समय में यमदूत मेरी एक नहीं सुनेंगें।

    राम नाम जान्यो नहीं, जान्यो सदा उपाधि
    कहि रहीम तिहिं आपुनो, जनम गंवायो वादि

    अर्थात जिन लोगों ने अपने धन, पद और उपाधि को ही जाना और राम के नाम को जाना नहीं है, उनका जन्म व्यर्थ है। वे केवल वाद-विवाद कर अपना जीवन नष्ट करते हैं।

    रहिमन धोखे भाव से मुख से निकसे राम
    पावत पूरन परम गति कामादिक कौ धाम

    अर्थात यदि कभी धोखे से भी भावपूर्वक मुंह से राम का नाम लिया जाए तो कल्याण हो जाता है भले ही वह व्‍यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह, पाप आदि से ग्रस्त क्‍यों न हो।

    मुनि नारी पासान ही कपि पसु गुह मातंग
    तीनों तारे रामजू तीनों मेरे अंग

    अर्थात गौतम मुनि की पत्‍थर रूपी पत्नी अहिल्या; पशुवत वानर सेना एवं आदिवासी निशादराज का कल्‍याण प्रभु श्रीराम ने किया था. कठोरता, पशुवत व्‍यवहार तथा स्‍वभाव की निम्नता ये तीनों दुर्गुण मुझ में भी हैं।अब केवल राम ही मेरा उद्धार करेंगे।

    22 जनवरी आते आते राम में रम जाना है और बोलिए:

    जय श्रीराम! जय श्रीराम! जय श्रीराम!

    लेखक एवं विचार- सन्तोष पांडेय,अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायालय

  • हमारी राष्ट्रीयता भारतीय और धर्म सनातन है: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    हमारी राष्ट्रीयता भारतीय और धर्म सनातन है: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    जोधपुर/लखनऊ। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा कि हमारी राष्ट्रीयता भारतीय और धर्म सनातन है। उन्होंने कहा कि धर्म सिर्फ सनातन है बाकी सब उपासना विधियां हैं। सनातन हर काल और परिस्थित में बिना डिगे, बिना हटे और बिना झुके अपनी जीवंतता को बनाए रखा है इसलिए दुनिया के अंदर बहुत सारे लोग आए और चले गए। लेकिन, सनानत धर्म सम और विषम हालातों का सामना करते हुए लगातार आगे बढ़ा है। सनातन का स्वरूप विराट है, जो सबको अपने में समाहित कर लेता है। इसका मार्ग हमारे संतों और योगियों ने हमें दिखाया है।

    हमारे यहां सिद्ध योगियों की एक लंबी परंपरा : योगी
    सीएम योगी ने बुधवार को श्री श्री 1008 श्री ब्रह्मलीन आयस जी श्री योगी कैलाशनाथ जी महाराज का विशाल भण्डारा महोत्सव को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे यहां सिद्ध योगियों की एक लंबी परंपरा है, जिन्होंने विज्ञान को चुनौती दी। भौतिकता के बंधनों से ऊपर उठकर के जिन्होंने हमें जीने का एक नई राह दिखाई। हमारे योगियों और संतों ने सनातन धर्म के वास्तविक मूल्यों का हमें साक्षात दर्शन करवाया है। सीएम योगी ने कहा कि कुछ कालखंड में सनातन के समक्ष चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन जब सनातन धर्मावलंबियों के साथ एक स्वर में पूरा भारत खड़ा हो गया तो सारी समास्याएं समाप्त हो गईं।

    राम मंदिर बनने से दबी-कुचली और शोषित सभ्यता को मिला नया जीवन : योगी
    सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। 500 वर्षों के अंतराल के बाद इसी वर्ष 22 जनवरी को प्रभु राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे। हर भारतवासी प्रफुल्लित है। दुनिया के अंदर जहां कहीं भी सनातनी है, आज वह अपनी इस गौरवशाली परंपरा पर गौरवान्वित हो रहा है। यही नहीं राम मंदिर के बन जाने से दुनिया में हर दबी, कुचली और शोषित सभ्यता को एक नया जीवन मिला है। दुनिया की तमाम परंपराएं अब यह सोचने लगी हैं कि अगर 500 वर्षों के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम का मंदिर बन सकता है तो दुनिया के अंदर हर कार्य संभव हो सकता है।

    केवल सनातन है शांति-शाश्वत कल्याण का मार्ग : योगी
    सीएम योगी ने कहा कि हमें विभाजनकारी शक्तियों से दूरी बनानी पड़ेगी। एकजुट होकर के कार्य करना होगा और अंततः शांति और शाश्वत कल्याण का मार्ग केवल और केवल सनातन धर्म ही दे पाएगा। सनातन धर्म के उन मूल्यों और आदर्शों पर चलकर ही भारत समृद्धि की नए प्रतिमान स्थापित कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य हम सबके सामने रखा है। इसके लिए उन्होंने पंच प्रण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विकसित भारत, विरासत पर गर्व, एकता एवं एकजुटता और नागरिक कर्तव्य दिए हैं। इन्हीं पंच प्रण को आधार बनाकर हमें कार्य करना होगा तभी हम भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बना पाएंगे।

    कार्यक्रम में योगी गिरिवरनाथ महाराज, महंत लक्ष्मनाथ जी महाराज, महंत रामनाथ जी महाराज, महंत प्रतापपुरी जी महाराज, जोधपुर के महाराज श्रीधर सिंह, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, सांसद पीपी चौधरी समेत भारी संख्या में संत और गणमान्य लोग मौजूद थे।