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  • India विरोधी गतिविधियों पर Canada Government की चुप्पी: कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमले और भारत विरोधी पोस्टर

    India विरोधी गतिविधियों पर Canada Government की चुप्पी: कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमले और भारत विरोधी पोस्टर

    India-Canada

    India: हल्के समय में कनाडा में बढ़ती भारत के विरोधी गतिविधियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बड़ा दी है खासकर हिंदू मंदिरों पर हमले और भारत विरोधी पोस्ट के मामले में Canada government की चुप्पी ने भारत समुदाय में घुसा और सुरक्षा की भावना पैदा की है यह न केवल देशो के रिश्ते में दरार पैदा कर रही है, बल्कि कनाडा में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहा है। 

    हिंदू मंदिरों पर हमले और भारत विरोधी पोस्टरबाजी

    कनाडा में हाल के महीने में कई हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है मंदिरों की दीवारों पर भारत विरोधी पोस्टर लगाए जा रहे हैं जो खाली स्थान समर्थक नारे लिखे जा रहे हैं इन पोस्ट में भारतीय सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातें कहीं जा रही हैं जो पोस्ट में भारतीय अधिकारों की हत्या की धमकियां तक दी गई हैं। 

    India-Canada

    इन घटनाओं ने कनाडा में भारतीय समुदाय को हिला कर रख दिया है या न केवल धार्मिक आस्था का अपमान है बल्कि कनाडा की बहुलता और सांस्कृतिक विविधता के सिद्धांतों के खिलाफ है धार्मिक स्थलों पर हमले और हिंसा का इस्तेमाल आतंक फैलाना यह बताना कि खालिस्तानी समर्थक ताकत कनाडा में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश लगातार कर रही है। 

    Canada सरकार की छुट्टी

    इस पूरे मामले में कनाडा सरकार और खासकर प्रधानमंत्री जस्टिन टुडे की छुट्टी काफी चिंता का विषय है जबकि भारत सरकार ने इस घटना पर चिंता जताई है, कनाडा ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला कहकर टाल दिया है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के नाम पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है, और किसी भी देश के खिलाफ हिंसक प्रचार करना जायज है।

    टुडे सरकार का यह रुख भारतीय समुदाय के लिए निराशाजनक है जो भारत सरकार के बार-बार कनाडा से खालिस्तान गतिविधियों को रोक लगाने की मांग कर रही है लेकिन अब तक इस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रही है कनाडा की छुट्टी को कुछ लोग खालिस्तानी समर्थक समूह को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने के लिए देख रहे हैं जो दोनों देशों के संबंधों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    Indians को कनाडा छोड़ने की धमकियां 

    कनाडा में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों के खुलेआम भारतीयों को कनाडा छोड़ने की धमकियां दी है सोशल मीडिया और पोस्ट के माध्यम से यह प्रचार किया जा रहा है, कि भारतीय कनाडा में सुरक्षित नहीं है, यह स्थिति और भी गंभीर होते जा रही है जब कनाडा सरकार इस पर कोई सख्त कदम उठाने में भी विफल है।

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  • India-Canada विवाद : India और कनाडा कूटनीतिक संकट 

    India-Canada विवाद : India और कनाडा कूटनीतिक संकट 

    India-Canada

    India और कनाडा के बीच हाल के दिनों में कूटनीतिक संकट काफी बढ़ गया है जो दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण बन रहा है, यह विवाद तब शुरू हुआ जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टुडे ने भारतीय एजेंसियों पर कनाडा में रहने वाले खालिस्तान अलगवाड़ी नेता हरदीप सिंह गुर्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया टुडे का यह बयान भारतीय सरकार के लिए जॉब करने वाला था क्योंकि भारत इस आप को पूरी तरह से खारिज करता है भारत में कनाडा पर खालिस्तान अलग वीडियो को शरण देने और उनके खिलाफ कदम उठाने का भी आरोप लगाया है।

    इस विवाद का सबसे बड़ा असर दोनों देश के कूटनीतिक संबंध पर पढ़ रहा है, भारत में कनाडा राजनयिको की संख्या घटाने का आदेश दिया है। कि कनाडा राजनयिको के वीजा प्रक्रिया पर रोक लगा दी है इसके साथ ही दोनों एक दूसरे देशों के बीच व्यापार और अन्य क्षेत्रों में भी कुछ हद तक तनाव देखने को मिल रहा है, दूसरी ओर कनाडा ने भी भारत के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाए हैं लेकिन वह भारत के साथ संवाद और सहयोग जारी रखने की बात भी कर रहे हैं।

    India-Canada

    यह विवाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चलते आ रहा है और समस्याओं का परिणाम है खासकर खालिस्तान मुद्दे को लेकर भारत के लिए यह एक संवेदनशील मामला है क्योंकि खालिस्तान आंदोलन के समर्थक देश की एकता और अखंडता के लिए कटरा माने जाते हैं वही कनाडा में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग रहते हैं जिनमें से कुछ का स्थान का समर्थन करते हैं इस स्थिति में कनाडा के लिए सी समुदाय की भावना का सम्मान करना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। 

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    India और कनाडा के बीच इस कूटनीतिक संकट का भविष्य में क्या परिणाम होगा यह कहना बहुत ही मुश्किल है लेकिन यह निश्चित है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए समाधान ढूंढने की जरूरत है इस विवाद का असर न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी इसकी गुण सुनाई दे रही है उम्मीद की जा रही है कि दोनों देश जल्द ही समस्या का हल निकालेंगे और अपने संबंधों को फिर से सम्मानित करने की दशा में कदम उठाएंगे।

  • India:भारत के उच्चायुक्त को वापस बुलाया, क्या है पूरा मामला ?

    India:भारत के उच्चायुक्त को वापस बुलाया, क्या है पूरा मामला ?

    India: हाल ही में भारत और Canada के बीच कुछ नैतिक रिश्तो में बहुत ही तनाव का मामला काफी चर्चा में रहा है भारत में कनाडा से अपने ऊंचा युक्त को वापस बुला लिया है और इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण भी है यह कदम दोनों देशों के बीच गहराते मत भेजो और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पैदा हुए चुनौतियों की ओर संकेत करता है लिए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। 

    India: मामले की शुरुआत, खालिस्तानी समर्थक गतिविधियां 

    भारत और Canada के संबंध में तनाव एक प्रमुख वजह कनाडा में खालिस्तान समर्थन गतिविधियों को बढ़ाना है, भारत में कई बार कनाडा सरकार को यह बताया है कि वहां खालिस्तान समूह सक्रिय है जो भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं यह समूह न केवल भारतीय विरोधी गतिविधियों में बल्कि वह वहां खुले आम प्रदर्शन और रैलिया भी आयोजित करते हैं।

    भारत का मन नहीं है कि Canada government इस मुद्दे पर पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है जिसे Canada में खालिस्तान अलग वादी का समर्थन कई बार सामने आया है जो भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई है। यह मामला केवल सुरक्षा का नहीं बल्कि राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता का भी है जिसे लेकर भारत पूरी तरह से गंभीर है। 

    India और Canada

    Canada की प्रतिक्रिया और India की नाराजगी 

    जब भी India ने Canada को खालिस्तान समर्थ को की गतिविधियों के बारे में सूचित किया है तब Canada government ने इस स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार के रूप में देखा है, कनाडा की सरकार का कहना है कि वहां के नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी है और वह अपने राय व्यक्त कर सकते हैं। हालांकि, की भारत का मानना है कि यह केवल अभिव्यक्ति और आजादी का मामला नहीं है बल्कि इसके पीछे गंभीर आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन है।

    इस मधुबाला कनाडा की उदासीनता ने भारत को नाराज किया है भारत देश स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन देना अस्वीकार है। 

    कूटनीति तनाव का बढ़ाना 

    ऐसा भी घटनाओं के बीच India और Canada के कूटनीति संबंधों में इतना बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। Canada में भारतीय उच्चायुक्त और भारतीय दूतावास को भी इन मुद्दों से जूझना पड़ रहा है, भारत सरकार ने इस तनावपूर्ण माहौल के बीच एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कहा, Canada से हमें उचायुक्त को वापस बुलाने का निर्णय लिया है।

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    India:भारत की चिंताएं और भविष्य कि राह

    भारत के मुख्य चिंताएं कनाडा में भारतीय नागरिकों और उनके समुदाय की सुरक्षा से जुड़ी है इसके अलावा भारत कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग कर रही है, ताकि देश की सुरक्षा और अखंडता को कोई खतरा न हो।

    भारत में साफ तौर पर कहां है कि आतंकवाद के मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं करेंगे दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग के गुंजाइश अभी भी है, लेकिन इसके लिए कनाडा को भारत की चिताओं को गंभीरता से लेना बहुत ही जरूरी है।

  • Ratan Tata को अंतिम विदाई: NCPA lawnsपरसों श्रद्धांजलि समारोह

    Ratan Tata को अंतिम विदाई: NCPA lawnsपरसों श्रद्धांजलि समारोह

    Ratan Tata के निधन के बाद राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
    उद्योगपति रतन टाटा का भारतीय शेयर गुरुवार 10 अक्टूबर 2024 सुबह उनके घर से सफेद फूलों से सजे शव वाहन में दक्षिण मुंबई के एनसीपी ले जाया गया जहां इसे लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

    Ratan Tata

    Ratan Tata का बुधवार 9 अक्टूबर 2024 देर रात मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया टाटा सुमो के माननिय chairman 86 वर्ष के थे। रतन टाटा जी को उम्र संबंधित समस्याओं और रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए सोमवार 7 अक्टूबर 2024 को दक्षिण मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था टाटा की मृत्यु के बाद देशभर से श्रद्धांजलि दी गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें दूरदर्शी business leader, दयाल आत्मा और एक असाधारण इंसान बताया।

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  • PM Narendra Modi को Donald Trump ने कहा सबसे “अच्छा मित्र”

    PM Narendra Modi को Donald Trump ने कहा सबसे “अच्छा मित्र”

    Narendra Modi:डोनाल्ड ट्रंप ने की प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक अच्छा “दोस्त” और सबसे अच्छा इंसान बताया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक अच्छा दोस्त और सबसे अच्छा इंसान बताया है।

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi की तारीफ की हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने मोदी को सबसे अच्छा मित्र और महान नेता बताया ट्रंप के अनुसार मोदी के साथ उनकी दोस्ती बहुत ही खास और बहुत ही अच्छी है वह भारत के प्रति अपने समर्पण और नेतृत्व के लिए हमेशा उनकी सराहना करते रहते हैं ट्रंप ने कहा नरेंद्र मोदी एक अद्भुत इंसान है और वह मेरे बहुत ही अच्छे मित्र हैं वरना केवल भारत बल्कि दुनिया भर में एक सम्मानित नेता है और उनकी दूरदर्शिता और देशभक्ति ने भारत को एक नई दिशा दी है। 

    PM Narendra Modi

    Narendra Modi और ट्रंप का स्नेह

    मोदी और ट्रंप के बीच की दोस्ती उसे समय से मजबूत होती आई है जब ड्रम अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे उनके कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक दूसरे का साथ दिया है जिसमें व्यापार सुरक्षा और आतंकवाद जैसे बड़े-बड़े मुद्दे प्रमुख थे।

    ट्रंप ने में बयान से यह स्पष्ट होता है कि उनके और नरेंद्र मोदी के बीच की संबंध व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तरों पर बहुत ही गहरी है दोनों नेता अपने-अपने देश की प्रगति के लिए एक दूसरे का साथ हमेशा देते हैं और यह दोस्ती भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है।

    मोदी की नेतृत्व क्षमता और उनके द्वारा किए गए भारत में वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के प्रयासों को लेकर ट्रंप ने यह कहा कि भारत की कूटनीतिक स्थिति आज कितनी मजबूत हो चुकी है डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान भारत और अमेरिका के बीच के संबंधों को और भी मजबूत बन सकता है।

  • मालदीव का भारत को अल्टीमेटम, 15 मार्च से पहले भारत सरकार अपनी सेना हटा ले!

    15 मार्च से पहले भारत सरकार अपनी सेना हटा ले’, मालदीव का भारत को अल्टीमेटम

    मालदीव और भारत के बीच जारी तनातनी के बीच मालदीव की तरफ से बड़ा बयान आया है। मालदीव के राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु ने भारत सरकार को आने वाले 15 मार्च तक सेना को वापस बुलाने के लिए कहा है। मालदीव के ही एक अखबार ‘अधाधु’ के हवाले से ऐसी खबर आ रही है। यह खबर रविवार को प्रकाशित की गयी है।

    मालदीव राष्ट्रपति कार्यालय से पॉलिसी डायरेक्टर अब्दुल्ला नाज़िम ने पत्रकारों से कहा है की राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु ने भारत से अपनी सेना वापस बुलाने के लिए कहा है। अब्दुल्ला ने आगे बताया की मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु ने 15 मार्च के पहले भारतीय सेना हटाने को लेकर कहा है। मीटिंग का एजेंडा इसी सम्बन्ध में था और इस बारे में आगे की बातचीत चल रही है। हालांकि मालदीव के विदेश मंत्रालय से इस तरह का कोई बयान आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है। दूसरी तरफ नाज़िम ने इस बाबत आगे बताया की भारतीय सेना मालदीव में अब नहीं ठहर सकती है और ऐसा उनके लोग (देशवासी) चाहते हैं।

    अब्दुल्ला नाज़िम के अनुसार सबसे महत्पूर्ण बात यही है की भारतीय सेना अब इस देश में और नहीं ठहर सकती है और यही मालदीव सरकार की नीति है। उनके राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु ने भी ने भी अपने लोगों से इसी बाबत वादा किया हुआ था। मालदीव के अधिकारियों ने बताया है की भारतीय उच्चायुक्त मनु महावर और कुछ वरिष्ठ अधिकारी, मालदीव के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इसमें शामिल होंगे और अपने देश का पक्ष रखेंगे।

    मालदीव के साथ रिश्ते बिगड़ चुके हैं?

    मौजूदा समय में भारत और मालदीव के बीच रिश्ते बेहतर नहीं है। पिछले कुछ हफ़्तों में इन दो देशों के बीच दूरियां और बढ़ सी गयी है। इसी बीच मालदीव की तरफ से भारतीय सेना हटाने को लेकर ये बयान आना भी रिश्ते को और बिगाड़ने जैसा मालुम होता है। हालांकि बीते दिनों मालदीव के राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु की तरफ से ये बयान आया था की उनका देश छोटा है का मतलब ये नहीं की कोई उन्हें धमकाए।

    ज़ाहिर है इस तरह का बयान उन्होंने भारत को लेकर ही दिया है। आज उस बयान के बाद भारतीय सेना हटाने की मांग करना और अल्टीमेटम देना ये साफ़ करता है की मालदीव भी भारत से रिश्ते बेहतर करने के पक्ष में नहीं है।भारत और मालदीव की सरकार के अलावा अब दोनों देश के लोग भी एक दूसरे को भला-बुरा साबित करने में लगे हैं।

    दूसरी तरफ भारत के कई लोगों ने अपनी मालदीव यात्रा भी स्थगित कर दी उसके अलावा ‘Ease My Trip’ ने भी मालदीव घूमने वालों के लिए बुकिंग अस्थाई रूप से बंद कर दी है। जिसके बाद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु ने अपनी चीन की यात्रा के दौरान चीन के लोगों से मालदीव घूमने की गुज़ारिश करते दिखे।

    मालदीव और भारत का झगड़ा कैसे भड़का?

    भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लक्षद्वीप की यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किये। इस पोस्ट में उन्होंने भारत के लोगों से लक्षद्वीप घूमने के लिए प्रेरित किया था। इसी पोस्ट के बाद मालदीव की सरकार में कुछ मंत्रियों ने इस बात को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी कर दी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक जंग सी छिड़ गयी। ऐसा होते-होते सोशल मीडिया पर पोस्ट की बाढ़ आ गयी जिसमे भारत के बड़े गणमान्य लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कथन का समर्थन शुरू कर दिया। और लोगों से आइलैंड घूमने के लिए लक्षद्वीप के नाम का सुझाव दिया।

    जिसके बाद भारत के कई लोगों ने अपनी मालदीव यात्रा को स्थगित करते हुए लक्षद्वीप को अपना अगला डेस्टिनेशन बताना शुरू कर दिया। इसी के बाद से मामले और बिगड़ गए जिसको लेकर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु ने चीन के लोगों को मालदीव घूमने के लिए कहा। यहां घूमने की बात पर इसलिए भी बवाल होना स्वाभाविक था क्योंकि मालदीव की इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा पर्यटकों पर निर्भर होता है और हर साल लगभग 2.5 लाख लोग भारत से मालदीव घूमने जाते हैं।

  • सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल

    सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल

    लेखक : बालकृष्ण उपाध्याय

    सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल
    आज के समय में प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तुलना में भारत में सोशल मीडिया का प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है। आज छोटी-छोटी खबरों को बड़े रूप में और बड़ी खबरों को छोटे रूप में दिखाने का काम सोशल मीडिया के जरिए ही किया जा रहा है। अगर हम किसी सोशल ऐप का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसकी गोपनीय शर्तों (जैसे कैमरा, लोकेशन, फोटो गैलरी आदि) पर हमसे पूर्व-सहमति लेता है, तभी हम उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आपने देखा होगा कि एक बार जब आप किसी टॉपिक को सर्च कर लेते हैं तो उससे जुड़ी अन्य जानकारियां आपको अपने आप मिलने लगती हैं, यानी यह आपकी रुचियों, पसंद-नापसंद को अच्छी तरह जानती है। उसने आपकी सारी जानकारी पहले ही एकत्र कर ली है और आपकी रुचि के अनुसार उसे आपके लिए उपलब्ध रखता है। इसी तरह यदि हम राजनीति को देखें कि किस व्यक्ति का रुझान किस पार्टी की ओर जा रहा है, तो इसका अंदाजा लोगों की रुचि, पसंद से लगाया जा सकता है, नापसंद देखकर सोशल मीडिया पहले से ही लग जाता है और एक ही पार्टी के पक्ष में बार-बार पोस्ट दिखाकर देश की राजनीति में भी दखल दे रहा है. देश में किसकी सरकार बनी, विदेश में बैठे लोग सोशल मीडिया के जरिए तय कर रहे हैं कि किस नेता को उठाना है और कब छोड़ना है. विकसित और विकासशील देश कैसे कमजोर देशों पर अपना प्रभाव डालते हैं, यह श्रीलंका और पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखकर देखा जा सकता है।

    आज हमारा देश ब्रिटिश गुलामी से मुक्त हो गया है लेकिन हम सभी सोशल मीडिया की गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया के बिना हम 1 दिन भी नहीं जी सकते। हम एक-दूसरे से व्यक्तिगत रूप से मिलते थे। शोक की घड़ी में मांगलिक सीधे कर्मों की बधाई देने और शोक व्यक्त करने के लिए जाते थे। आज के समय में बधाई हो या शोक, बधाई और संवेदना दोनों ही सोशल मीडिया पर व्यक्त की जाती हैं। पूर्व में किसी को विरोध करना पड़ता था तो वह घर से बाहर जाकर विरोध करता था। ज्ञापन आदि दिए गए लेकिन आज विरोध के नाम पर वे केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विरोध प्रदर्शन करते हैं।विरोध पोस्ट सोशल मीडिया पर हैं लेकिन इसे कितना प्रसारित किया जाएगा इसका नियंत्रण दुरार के हाथ में है। आज हम सोशल मीडिया के इतने गुलाम हो गए हैं कि घर से निकलने लायक भी नहीं हैं। हमें विरोध करने या अपनी प्रशंसा व्यक्त करने की वास्तविक शक्ति सोशल मीडिया द्वारा बहुत कमजोर कर दी गई है। सोशल मीडिया हमें गुलामी की जंजीरों में बांध रहा है। आज भारत के अधिकांश लोगों के हाथ में सोशल मीडिया का कोई न कोई माध्यम है। सोशल मीडिया के जरिए जो दिखाया जा रहा है उसे पूरी तरह सच मानकर वे बिना सोचे-समझे उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं. किस रास्ते जाना है, क्या करना है, किसके साथ जाना है, यह सब विदेश में बैठे लोग तय कर रहे हैं। हमारे देश के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है? यह देखते हुए कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कितनी पोर्नोग्राफी फैल रही है और कंपनी उन अश्लील पोस्ट पर विज्ञापन चला रही है, हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में है। आप सभी इन घटनाओं से भली-भांति परिचित हैं। लेकिन न तो कंपनियां और न ही सरकार इसकी निगरानी कर रही है। इसके विपरीत अगर कोई सोशल मीडिया पर देश की सच्चाई, देश की भलाई के बारे में बोलने की कोशिश करता है, अगर यह उन कंपनियों और सरकार के हित के खिलाफ है तो ऐसे लोगों के खाते बिना कोई कारण बताए बंद कर दिए जाते हैं। जिसका जवाब कोई नहीं देता। सोशल मीडिया पर आज आप वही पोस्ट डाल सकते हैं जिसकी चाह विदेश में बैठे व्यक्ति को होती है। अगर आप किसी पोस्ट को डिलीट करने की कोशिश करते हैं तो आपका फेसबुक पेज डिलीट हो जाता है। जिसकी शिकायत करना कोई जवाब नहीं है। किसके फॉलोअर्स बढ़ने चाहिए, किसका फेसबुक अकाउंट बंद होना चाहिए, यह सारा काम विदेश में बैठा एक शख्स कर रहा है।

     

    आज सभी विकसित और विकासशील देशों के अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं, फिर हमारे देश में हमारे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्यों नहीं हैं? हम दूसरे देशों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्यों भरोसा करते हैं? इसलिए भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर आत्मनिर्भर होना होगा तभी हम अपने देश को आत्मनिर्भर बना पाएंगे। हमें इस सोशल मीडिया की गुलामी से मुक्त होना है। क्या हम अपने देश के सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकते, क्या सरकार को हमारे देश का अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कदम नहीं उठाने चाहिए? आज हमारे देश के पैसे से विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चल रहे हैं और हमारे अपने देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल रहे हैं। अपने देश का पैसा, अपने देश की आर्थिकी, सोशल मीडिया के जरिए विदेशी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में दखल दे रहे हैं। इसलिए सतर्क रहने और इन पर नजर रखने की जरूरत है। 

  • क्रिकेट के ‘विराट’ ने दिया इस्तीफा,जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी!

    क्रिकेट के ‘विराट’ ने दिया इस्तीफा,जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी!

    क्रिकेट: भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट टीम की टेस्ट कप्तानी छोड़ दी है। विराट ने टेस्ट की कप्तानी छोड़ दी है, लेकिन उन्होने संयास नहीं लिया है।

    साउथ अफ्रीका में मिली सीरीज हार के बाद विराट कोहली ने बड़ा फैसला लिया है. शनिवार शाम को विराट कोहली ने टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ दी है.

    विराट कोहली ने ट्वीट कर खबर की पुष्टि कर दी है।

    विराट कोहली ने ट्विटर पर एक संदेश जारी कर इसका ऐलान किया. विराट कोहली ने अपने संदेश में लिखा कि पिछले सात साल से लगातार कड़ी मेहनत और हर रोज टीम को सही दिशा में पहुंचाने की कोशिश रही. मैंने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया और कोई भी कसर नहीं छोड़ी. लेकिन हर सफर का एक अंत होता है, मेरे लिए टेस्ट की कप्तानी को खत्म करने का यही सही वक्त है.

    जानकारी के लिए बता दें कि, भारतीय टीम साउथ अफ्रीका में टेस्ट सीरीज खेलने गई थी। यह सीरीज भारत ने 2-1 गंवा दी थी। अभी भारत को साउथ अफ्रीका से वनडे सीरीज खेलनी है। लेकिन उससे पहले विराट कोहली ने बड़ा फैसला लिया है।
    विराट कोहली वनडे-टेस्ट और टी-20 फार्मेंट में खेलते हुए नजर आएंगे। विराट कोहली के फैंस के लिए चौंकाने वाली खबर हैं।
    विराट के ट्वीट के बाद बीसीसीआई ने भी ट्वीट किया है। बीसीसीआई ने विराट को धन्यवाद करते हुए कहा आपने टीम को उंचाई तक पहुंचाया।

    बीसीसीआई का विराट को ट्वीट

  • टूटा अब-तक का रिकॉर्ड, एक दिन में 1.50 लाख नए केस, PM मोदी ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

    टूटा अब-तक का रिकॉर्ड, एक दिन में 1.50 लाख नए केस, PM मोदी ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

    नई दिल्ली: देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच PM मोदी ने रविवार शाम 4:30 बजे इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। मीटिंग में प्रधानमंत्री कुछ बड़े फैसले भी ले सकते हैं। देश में पॉजिटिविटी रेट 10 से ऊपर निकल चुका है। ऐसे में मीटिंग के दौरान लॉकडाउन जैसे सख्त कदम उठाने की अनुशंसा भी की जा सकती है।

    देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर में संक्रमण का आंकड़ा पहली बार डेढ़ लाख के आंकड़े को पार कर गया है। 24 घंटे में संक्रमण के 1 लाख 59 हजार 424 केस सामने आए हैं और 327 लोगों की मौत हुई है। आज 40,000 से ज्यादा लोग रिकवर हुए हैं।

    वहीं, राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र (41,434), दिल्ली (20,181) और बंगाल (18,802) में सबसे ज्यादा संक्रमित मिले हैं। टॉप 10 राज्यों में ही 1.26 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित।

  • Union Budget 2022: बजट में आम आदमी के लिए क्या हो सकता है खास?

    Union Budget 2022: बजट में आम आदमी के लिए क्या हो सकता है खास?

    नई दिल्ली: आने वाली 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना चौथा बजट पेश करेंगी। बजट की तैयारी जारी हैं। बजट 2022 पेश होने में अब सिर्फ 22 दिन रह गए हैं, बजट को लेकर चारों तरफ यही चर्चा शुरू हो चुकी है।

    2021-22 के बजट में मोदी सरकार ने विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए आम आदमी के जीवन को सरल बनाने के लिए कई योजनाएं और नीतियां शुरू की थीं। आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना से लेकर वाहन स्क्रैपिंग नीति तक आम आदमी के लिए कई घोषणाएं की गईं थीं।

    उम्मीद की जा रही है कि आने वाले बजट के साथ ही वित्त मंत्री आर्थिक सुधार को गति देने के लिए घोषणाएं कर सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीतारमण देश में उद्यमिता (entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए भी निर्णय ले सकती हैं।

    पिछले बजट में, सरकार ने कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया था, जिसका अर्थ है कि करदाताओं के लिए कोई महत्वपूर्ण राहत की घोषणा नहीं की गई थी।

    सीतारमण उम्मीद ये की जा रही हैं आने वाला बजट पिछले बजट के मुताबिक आप आदमी के लिए कुछ अलग हो सकता है। पिछले बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की गई थी। नए नियम के अनुसार, 75 वर्ष से अधिक उम्र के करदाता और पेंशन और जमा से आय वाले करदाता आयकर रिटर्न से छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    2022-23 के बजट में मोदी सरकार देश की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए नई घोषणाएं भी कर सकती है। इसके अलावा सरकार आम आदमी की सुविधा के लिए नए राजमार्ग, रेलवे, हवाई मार्ग और जलमार्ग जैसे बुनियादी ढांचे से संबंधित घोषणाएं कर सकती हैं।