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    Gen-z की नब्ज टटोलने में जुटा संघ, 2027 से पहले प्रांत स्तर पर संवाद की रणनीति

    सोशल मीडिया के दौर में Gen-z यानी नई पीढ़ी के सवाल, अपेक्षाएं और असहमति अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गई हैं। बदलते सामाजिक माहौल, तेज डिजिटल संवाद और नई पीढ़ी की अलग सोच को देखते हुए संघ अब यह समझना चाहता है कि युवाओं को किन मुद्दों पर संगठन से दूरी महसूस होती है और किन बातों पर वे असहमति जताते हैं।

    इसी दिशा में संघ ने 2027 से पहले एक व्यापक रणनीति बनाने की तैयारी शुरू की है। इसका मकसद केवल युवाओं तक पहुंच बनाना नहीं, बल्कि उनकी भाषा, उनकी प्राथमिकताओं और उनके सवालों को गंभीरता से समझना भी है।

    प्रांत स्तर पर होगा संवाद

    संघ की योजना के तहत यह संवाद केवल केंद्रीय स्तर पर सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रांत स्तर पर भी आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं की सोच, सामाजिक अनुभव और स्थानीय मुद्दों को समझना है। माना जा रहा है कि हर प्रांत में युवाओं की चिंताएं और अपेक्षाएं अलग हो सकती हैं, इसलिए एक समान संदेश की बजाय क्षेत्रीय संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।

    संघ का मानना है कि आज की पीढ़ी केवल परंपरागत विचारों से नहीं, बल्कि तर्क, पारदर्शिता और त्वरित प्रतिक्रिया से प्रभावित होती है। ऐसे में संगठन को अपने संवाद के तरीके में भी बदलाव करना होगा।

    किन मुद्दों पर असहमति जानना चाहता है संघ

    आरएसएस यह जानना चाहता है कि जेन जी को किन विषयों पर सबसे अधिक असहमति है। इनमें सामाजिक समरसता, रोजगार, शिक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, सांस्कृतिक पहचान और संगठनात्मक शैली जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

    नई पीढ़ी की सोच पहले की तुलना में अधिक सवाल पूछने वाली और कम औपचारिक मानी जाती है। ऐसे में संघ के सामने चुनौती यह है कि वह इन सवालों को केवल वैचारिक विरोध के रूप में न देखे, बल्कि उन्हें संवाद का अवसर माने।

    Gen-z की नब्ज टटोलने में जुटा संघ, 2027 से पहले प्रांत स्तर पर संवाद की रणनीति
    Gen-z की नब्ज टटोलने में जुटा संघ, 2027 से पहले प्रांत स्तर पर संवाद की रणनीति

    डिजिटल युग में बदल गया है संवाद का स्वरूप

    सोशल मीडिया ने युवाओं के विचार व्यक्त करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। अब कोई भी मुद्दा कुछ ही मिनटों में व्यापक बहस का विषय बन सकता है। इसी कारण संघ भी यह समझ रहा है कि केवल पारंपरिक बैठकों और भाषणों से नई पीढ़ी तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

    जेन जी त्वरित, स्पष्ट और तथ्य आधारित संवाद चाहती है। वह केवल संदेश नहीं, बल्कि उसके पीछे की सोच, तर्क और व्यवहारिकता भी देखती है। इसलिए संघ की यह पहल डिजिटल युग की इसी बदलती मांग के अनुरूप मानी जा रही है।

    2027 से पहले क्यों अहम है यह रणनीति

    राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से 2027 का समय संघ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले संगठन अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने और नई पीढ़ी के साथ बेहतर संबंध बनाने की दिशा में काम करना चाहता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जेन जी के साथ संवाद को समय रहते मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में संगठनात्मक प्रभाव और सामाजिक स्वीकार्यता पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि संघ अब पहले से अधिक सक्रिय और सुनियोजित तरीके से युवाओं तक पहुंचने की तैयारी कर रहा है।

    Gen-z : युवाओं की भाषा में बात करने की जरूरत

    Gen-z : प्रांत स्तर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी बात युवाओं की भाषा में कैसे रखे। नई पीढ़ी औपचारिकता से अधिक सहजता, सवालों से अधिक जवाब और नारों से अधिक समाधान चाहती है।

    RSS का 'मिशन युवा' Gen-z को समझेगा संघ
    RSS का ‘मिशन युवा’ Gen-z को समझेगा संघ

    इसीलिए प्रांत स्तर के संवाद कार्यक्रमों में केवल विचार प्रस्तुत करने के बजाय सुनने की प्रक्रिया को भी उतना ही महत्व दिया जाएगा। यह देखा जाएगा कि युवा किन कारणों से असहज हैं, किन मुद्दों पर उन्हें भरोसा नहीं है और किन क्षेत्रों में वे संगठन से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।

    संवाद से बनेगी नई रणनीति

    RSS की यह पहल संकेत देती है कि संगठन अब केवल परंपरागत ढांचे में काम करने के बजाय सामाजिक बदलावों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है। जेन जी के सवालों को समझकर संघ एक ऐसी रणनीति तैयार करना चाहता है, जो आने वाले वर्षों में अधिक प्रभावी और समकालीन हो।

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    यदि यह संवाद सफल रहता है, तो यह न केवल संघ के लिए बल्कि व्यापक सामाजिक विमर्श के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। क्योंकि नई पीढ़ी के सवालों को समझना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

     

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  • नेपाल में उथल-पुथल: प्रधानमंत्री KP Sharma Oli ने Gen Z के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दिया

    नेपाल में उथल-पुथल: प्रधानमंत्री KP Sharma Oli ने Gen Z के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दिया

    PM KP Sharma Oli : नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य अभूतपूर्व अशांति से हिल गया है, जिसका परिणाम मंगलवार, 9 सितंबर, 2025 को प्रधानमंत्री KP Sharma Oli के इस्तीफे के रूप में सामने आया। ओली के सहायक प्रकाश सिलवाल द्वारा पुष्टि किए गए इस इस्तीफे ने देश में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों की लहर को चिह्नित किया, जो मुख्य रूप से Gen Z के युवाओं द्वारा संचालित थे। एक विवादास्पद सोशल मीडिया प्रतिबंध से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन, नेपाल में शासन, भ्रष्टाचार और व्यवस्थागत असमानता के प्रति गहरी निराशा को उजागर करते हैं। आइए, इस ऐतिहासिक क्षण तक पहुंचने वाली घटनाओं और इसके नेपाल के भविष्य के लिए अर्थ पर एक विस्तृत नजर डालें।

    उत्प्रेरक: सोशल मीडिया प्रतिबंध ने भड़काई आग

    प्रदर्शनों का तात्कालिक कारण नेपाल सरकार का पिछले सप्ताह प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब और X को ब्लॉक करने का निर्णय था। सरकार ने पंजीकरण आवश्यकताओं का पालन न करने का हवाला दिया, लेकिन कई लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने और असंतोष को चुप कराने की कोशिश के रूप में देखा। नेपाल के तकनीक-प्रेमी युवाओं के लिए, जो संचार और संगठन के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर बहुत अधिक निर्भर हैं, यह कदम उनकी स्वतंत्रता पर सीधा हमला था।

    KP Sharma Oli
    KP Sharma Oli

    प्रतिबंध का तुरंत विरोध हुआ। युवा नेपाली, विशेष रूप से छात्र और  Gen Z कार्यकर्ता, सड़कों पर उतर आए और सरकार पर भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए इस नीति का उपयोग करने का आरोप लगाया। “केपी चोर, देश छोड़” (KP Sharma Oli चोर हैं, देश छोड़ दो) जैसे नारे लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने जवाबदेही और नेपाल के राजनीतिक अभिजन द्वारा दशकों से चली आ रही कथित कुप्रशासन की समाप्ति की मांग की।

    तीव्रता: प्रदर्शनों से हिंसा तक

    प्रदर्शन, जो शुरू में शांतिपूर्ण थे, जल्द ही हिंसक झड़पों में बदल गए क्योंकि अधिकारियों ने अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया और अशांति को दबाने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया। सोमवार, 8 सितंबर, 2025 तक, स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में संघीय संसद सहित प्रमुख सरकारी स्थलों पर धावा बोला और भक्तपुर के बलकोट में ओली के निजी आवास को आग के हवाले कर दिया। संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’, और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के घरों को भी तोड़फोड़ और पथराव का निशाना बनाया गया।

    इन झड़पों में कम से कम 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हुए। सोमवार शाम को सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने की कोशिश के बावजूद, प्रदर्शन कम नहीं हुए, जो पुलिस की घातक कार्रवाई और भ्रष्टाचार तथा आर्थिक कुप्रबंधन के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही शिकायतों से प्रज्वलित थे।

    KP Sharma Oli का इस्तीफा : एक महत्वपूर्ण मोड़

    बढ़ते दबाव और जनता के विश्वास की स्पष्ट हानि का सामना करते हुए, प्रधानमंत्री KP Sharma Oli ने मंगलवार दोपहर अपने इस्तीफे की घोषणा की। एक संक्षिप्त बयान में, KP Sharma Oli ने कहा कि उनकी सरकार “जेनरेशन Z द्वारा उठाई गई मांगों के प्रति नकारात्मक नहीं थी,” लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि स्थिति असहनीय हो गई थी। इस्तीफे से पहले कई कैबिनेट मंत्रियों, जिसमें पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक शामिल थे, ने संकट के प्रबंधन, विशेष रूप से पुलिस की हिंसक कार्रवाई के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।

    KP Sharma Oli
    KP Sharma Oli

    रिपोर्ट्स के अनुसार, KP Sharma Oli अगले कुछ दिनों में दुबई जा सकते हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनका प्रस्थान एक उथल-पुथल भरे कार्यकाल का अंत करता है, जो राजनीतिक ध्रुवीकरण, आर्थिक चुनौतियों और अब, व्यापक जन अशांति से चिह्नित था।

    व्यापक परिदृश्य: नेपाल का परिवर्तन के लिए संघर्ष

    ये विरोध प्रदर्शन नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गहरी समस्याओं को दर्शाते हैं। वर्षों से, देश बार-बार नेतृत्व परिवर्तन और गठबंधन सरकारों के साथ राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, जिसने दीर्घकालिक प्रगति को कमजोर किया है। भ्रष्टाचार के आरोप लंबे समय से राजनीतिक प्रतिष्ठान, जिसमें ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) शामिल है, को परेशान करते रहे हैं, जिस पर जन कल्याण के बजाय सत्ता को प्राथमिकता देने का आरोप लगता रहा है।

    नेपाल के युवा, जो जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, सीमित आर्थिक अवसरों, बढ़ती असमानता और सरकार के साथ तालमेल की कमी से तेजी से निराश हैं। सोशल मीडिया प्रतिबंध केवल वह चिंगारी थी जिसने लंबे समय से उबल रही असंतोष को प्रज्वलित किया। एक प्रदर्शनकारी, 22 वर्षीय अंजलि थापा ने स्थानीय मीडिया को बताया, “हम एक ही पुराने वादों से तंग आ चुके हैं। भ्रष्टाचार हमारे देश को खा रहा है, और हम अब चुप नहीं रहेंगे।”

    नेपाल का भविष्य क्या है?

    KP Sharma Oli का इस्तीफा नेपाल को एक चौराहे पर छोड़ गया है। राजनीतिक दल अब नई सरकार बनाने के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन यह प्रक्रिया चुनौतियों से भरी होने की संभावना है। नेपाल का बार-बार गठबंधन और सत्ता संघर्ष का इतिहास लंबे समय तक अस्थिरता की आशंका को बढ़ाता है, खासकर ऐसे समय में जब देश आर्थिक मंदी और बढ़ते जन असंतोष का सामना कर रहा है।

    KP Sharma Oli
    KP Sharma Oli

    तत्काल में, काठमांडू घाटी में भारी सुरक्षा और कर्फ्यू बनाए रखा गया है। स्कूल और दुकानें बंद हैं, और सड़कों पर तनाव है क्योंकि देश अपने राजनीतिक भविष्य पर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहा है।  Gen Z के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन धीमे होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं, प्रदर्शनकारी व्यवस्थागत परिवर्तन के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने की कसम खा रहे हैं।

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    जवाबदेही की पुकार

    पिछले सप्ताह की घटनाओं ने नेपाल के युवाओं की परिवर्तन लाने की शक्ति को उजागर किया है, लेकिन साथ ही देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की नाजुकता को भी रेखांकित किया है। जैसे-जैसे नेपाल इस उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है, पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांगें और तेज होंगी। अगली सरकार इन मुद्दों को संबोधित कर सकती है और जनता का विश्वास बहाल कर सकती है, यह देखना बाकी है।

    फिलहाल, नेपाल अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जिसमें इसके युवाओं की आवाजें सड़कों पर गूंज रही हैं, जो एक बेहतर भविष्य की मांग कर रही हैं।