माननीय CM Yogi गुरुवार को जीपीओ पार्क, लखनऊ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए।
लखनऊ, 30 जनवरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर जीपीओ स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बच्चों ने बापू की पुण्यतिथि पर स्वरांजलि दी। सीएम योगी भी बच्चों के साथ स्वरांजलि में हिस्सा लिया।
CM Yogi
बापू’ की शिक्षाएं और उनका त्यागमय जीवन विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं- CM Yogi
इसी के साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी को याद करते हुए अपने एक्स अकाउंट पर लिखा “स्वाधीनता आंदोलन के महानायक, ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन! श्रद्धेय ‘बापू’ की शिक्षाएं और उनका त्यागमय जीवन विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आइए, ‘बापू’ के दिखाए सत्य, अहिंसा व स्वदेशी के मार्ग पर चलकर हम सभी ‘नए भारत-विकसित भारत’ के निर्माण हेतु संकल्पित हों।“
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CM Yogi ने बच्चों के साथ बापू को दी स्वरांजलि
CM Yogi ने बच्चों के साथ स्वारांजलि में हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों ‘रघुपति राघव राजाराम…’, वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे…’ जैसे गीतों को मधुर स्वर में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के बाद सीएम योगी ने बच्चों के साथ फोटो भी खिंचाई। इस दौरान महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, राजेश्वर सिंह, अमरेश कुमार, विधान परिषद सदस्य लाल जी प्रसाद निर्मल आदि गणमान्य लोगों ने भी बापू को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की है
Uttar Pradesh: बहराइच हिंसा में मारे गए राम गोपाल की पत्नी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इंसाफ मांग रही हैं, उनकी मांग है कि उनके पति के हथियारों को सख्त से सख्त सजाई दी जाए और रामगोपाल की पत्नी का कहना है कि जैसे मेरे पति को मारा गया वैसे ही उन्हें भी सजा दी जाए इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया बल्कि पूरे इलाके में रोज और दुख का माहौल बना हुआ है।
Uttar Pradesh, Lucknow
रामगोपाल की हत्या बहराइच में हुई हिंसक झड़प के दौरान कर दी गई है, और इसके बाद भी उनके परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। पीड़ित का कहना है कि उनके पति निर्दोष है और उनकी हत्या उनके पूरे जीवन को तबाह कर दिया है, उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की अपील की है और यह उम्मीद जताई है, कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलेगी और उनके पति को इंसाफ मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय किया मांग अब एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है जो कि राज्य में कानून और व्यवस्था को लेकर पहले भी कई सारे सवाल उठ रहे हैं रामगोपाल की पत्नी का दर्द उनकी मांग ने कई लोगों का ध्यान इस मामले पर खींचा है अब यह देखना होगा कि सरकार इसपे क्या कदम उठाती है ?और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिलता है।
इस मामले ने यह भी दिखता है कि कैसे हिंसा की घटना आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती है, और ऐसे में न्याय की जरूरत कितना महत्वपूर्ण हो जाता है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी इस मामले पर जल्द से जल्द ध्यान देंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो पाए।
Uttar Pradesh बहराइच जिले में मूर्ति विसर्जन के दौरान बड़ा हंगामा हो गया, जो हिंसक झड़पों में बदल गया है इस घटना के दौरान गोलीबारी हुई है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो घायल हो गया और अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गये। यह घटना बहराइच के एक प्रमुख इलाके में हुए जहां मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था।
बहराइच में दुर्गा विसर्जन के दौरान हिंसा भड़क गई इसमें एक युवक की मौत के बाद बवाल मच गया, इस हिंसा में थाना और चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए पता चला कि युवक के शरीर में 13 घाव के निशान मिले।
Uttar Pradesh बहराइच
स्थानी लोगों के बीच विवाह शुरू हुआ जो देखते-देखते ही बड़ा हो गया और गोलीबारी तक पहुंच गया पुलिस के तुरंत मौके पर पहुंच कर हालात को काबू में किया और घायल व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कारण मृतक के परिवार में शोक का माहौल है जबकि घायल की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस ने मामले की जान शुरू कर दिया और हिंसा में शामिल लोगों की तलाश जारी हो गई है प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की कोई हिंसा ना हो।
Uttar Pradesh के बहराइच में बीती शाम दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान बवाल हो गया, इस घटना में एक युवक की जान चली गई जबकि कई लोग छोटी लोग हैं, घटना के बाद गुस्सा ही भी ने तोड़फोड़ और आज जानी शुरू कर दिए हालात काबू करने के लिए भारी पुलिस बल बुलाना पड़ा और लाठी चार्ज करना पड़ा।
Uttar Pradesh में आगामी उपचुनाव के लिए सियासी माहौल गर्म हो चुका है इस बार के चुनाव में बीजेपी को मिले हैं 9 सीट और जबकि वहीं आरडीएल के खाते में एक सीट आई है इन चुनाव में न केवल राज्य किसी ऐसी स्थिति पर असर पड़ेगा बल्कि आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी समीकरण तय हो सकता है।
Uttar Pradesh में 10 विधानसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव को लेकर दिल्ली में चल रही up बीजेपी की बैठक खत्म हो गई है, सूत्रों ने बताया कि इन 10 सीटों में से 9 पर बीजेपी और एक सीट पर RDL चुनाव लड़ेगी सूत्रों को कहना है कि 9 सीटों पर भाजपा अपने उम्मीदवार उतारेगी जिसमें लगभग आधा दर्जन नए चेहरे हो सकते हैं, 20 अक्टूबर तक BJP अपने उम्मीदवार का ऐलान कर सकती है।
BJP का संगठनात्मक ढांचा भी मजबूत है, जो कि उस चुनाव मैदान मैं बड़ा फायदा देता है, पार्टी नई सीटों पर चुनावी जनसभा, रोड शो और डिजिटल प्रचार के जरिए मतदाताओं से जुड़ने की योजना बनाई है, BJP की कोशिश है कि इन चुनाव को केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नरक रखते हुए राष्ट्रीय मुद्दों पर भी जोड़ दिया जाए, और जैसे कि विकास कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं लाई जाए।
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath
दूसरी ओर RDL के खाते में आए एक सीट ने पार्टी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है, जयंत चौधरी के नेतृत्व में RDL इस सीट पर जीत दर्ज करने की पूरी कोशिश करेगी, यह सीट पश्चिम में Uttar Pradesh में है,जहां RDL का पारंपरिक वोट बैंक है खास करके किसान और जाट समुदाय में RDL का कुछ मतदाताओं का समर्थन मिल सकता है लेकिन सीट जीतने के लिए उससे कड़ी मेहनत करनी होगी।
यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को सीधे प्रभावित करेगा बीजेपी और RDL दोनों के लिए एक यह यूपी चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए एक तरह से टेस्ट है, जो बीजेपी का फोकस अपनी ताकत को बरकरार रखने पर है, वही RDL अपने सियासी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश में है।
Uttar Pradesh मैं 9 सीटों पर बीजेपी और एक सीट पर आइडल के बीच मुकाबला सियासी दृष्टि से बेहद दिलचस्प होने वाला है यह उपचुनाव न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है दोनों पार्टियों के लिए यह चुनाव एक बड़ा मौका है, जहां अपनी सियासी ताकत को साबित कर सकते हैं और आगामी चुनाव के लिए अपने रणनीति को और भी बेहतर बना सकते हैं।
पूर्वांचल, अवध के कई जिलों में परंपरागत फसलों का विकल्प बना केले की खेती
Uttar Pradeshलखनऊ: कम समय की नकदी फसल और पूरे साल मांग बनी रहने के नाते उत्तर प्रदेश के किसानों को केले की खेती खूब रास आ रही है। प्रदेश के पूर्वांचल, अवध आदि क्षेत्रों के कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, महाराजगंज, अयोध्या, गोंडा, बहराइच, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, प्रतापगढ़, अमेठी, कौशाम्बी, सीतापुर और लखीमपुर जिलों में केले की खेती होती है।
Uttar Pradesh: योगी सरकार से मिलने वाली मदद से किसानों को खूब भा रही केले की खेती
Uttar Pradeshयोगी सरकार द्वारा केले की प्रति हेक्टेयर खेती पर करीब 31 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। पारदर्शी तरीके से अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रों का वितरण और सिंचाई के अपेक्षाकृत प्रभावी ड्रिप और स्प्रिंकलर और सोलर पंप पर मिलने वाले अनुदान के नाते किसानों का क्रेज केले जैसी नकदी फसलों की ओर और बढ़ा है।
Uttar Pradesh
Uttar Pradesh: दक्षिण से उत्तर भारत तक केले की यात्रा
परंपरागत रूप से केला दक्षिण भारत की फसल है। पर, कुछ दशक पूर्व महाराष्ट्र के भुसावल और इसके आसपास के कुछ इलाकों में इसकी खेती शुरू हुई तो भुसावल और केला (चित्तीदार) एक दूसरे के पर्याय बन गए। देखते-देखते भुसावल का हरी छाल केला पूरे उत्तर भारत के बाजार में छा गया। करीब दो दशक पहले बिहार के नौगछिया के केले ने भुसावल के हरी छाल को लगभग बाजार से बाहर कर दिया। बिहार से सटे कुशीनगर के किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर रहे हैं।
भारत औरUttar Pradesh उत्तर प्रदेश में केले का उत्पादन
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ से मिले आंकड़ों के अनुसार पूरे भारत में लगभग 3.5 करोड़ मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है। देश में केले की फसल का रकबा करीब 9,61,000 हेक्टेयर है।
उत्तर प्रदेश में करीब 70,000 हेक्टेयर रकबे में केले की खेती हो रही है। कुल उत्पादन 3.172 लाख मिट्रिक टन और प्रति हेक्टेयर उपज 45.73 मिट्रिक टन है।
सिर्फ आर्थिक ही नहीं, धार्मिक और पोषण के लिहाज से भी केला बेहद महत्वपूर्ण
केला आर्थिक के साथ धार्मिक और पोषण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान केले और इसके पत्ते के बिना पूरा नहीं होता। केला रोज के नाश्ते के अलावा व्रत में भी खाया जाता है। केले के कच्चे, पके फल और तने से निकलने वाले रेशे से ढेर सारे सह उत्पाद बनने लगे हैं।
Uttar Pradesh: पूरे साल की उपलब्धता केले को बाकी फलों से खास बनाता है
बाजार में मौसमी फलों की उपलब्धता सीजन के कुछ महीनों तक रहती है, लेकिन केला उन चुनिंदा फलों में से है जो लगभग पूरे वर्ष उपलब्ध रहता है। अधिकांश फलों को खाने के लिए धोने, काटने की आवश्यकता होती है लेकिन केले को बिना किसी समस्या के छील कर भी खा सकते हैं।
केले में मौजूद पोटैशियम हाई बीपी को नियंत्रित करने में मददगार
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक टी. दामोदरन के अनुसार केला पोषण के लिहाज से भी खासा महत्त्वपूर्ण है। अन्य पोषक तत्वों के अलावा इसमें भरपूर मात्रा में पोटेशियम तो होता ही है, यह कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट
और विटामिन बी-6 का भी अच्छा स्रोत है। पोटेशियम हृदय की सेहत, विशेष रूप से रक्तचाप प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। पोटेशियम युक्त आहार रक्तचाप को प्रबंधित करने और उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। यह हृदय रोग का जोखिम 27 फीसद तक कम कर सकता है।
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एक केले से मिल जाती है जरूरत की एक चौथाई विटामिन बी-6
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक प्रभात कुमार शुक्ला के अनुसार केले से प्राप्त विटामिन बी-6 आसानी से शरीर में अवशोषित हो जाता है। एक मध्यम आकार का केला दैनिक विटामिन बी-6 की जरूरतों का लगभग एक चौथाई प्रदान कर सकता है। यह विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन, कार्बोहाइड्रेट और वसा के चयापचय के लिए आवश्यक है। यह उन्हें ऊर्जा में बदलता है, यकृत और गुर्दे से अवांछित रसायनों को हटाता है, और एक स्वस्थ तंत्रिका तंत्र को बनाए रखता है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज जनपद गोरखपुर में महन्त दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित कार्यक्रम में सड़क, सम्पर्क मार्ग, बाढ़ सुरक्षा एवं शिक्षा आदि की 144.49 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 61 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शिलान्यास किया। इनमें 33.16 करोड़ रुपए लागत की कुल 40 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 111.33 करोड़ रुपए लागत की 21 परियोजनाओं का शिलान्यास कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री जी ने 5 क्षय रोगियों के परिजनों को किट, तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के 03-03 लाभार्थियों को आवास की प्रतीकात्मक चाभी सौंपी। उन्होंने गोवंश की रक्षा हेतु भूसा दान देने वाले 03 दानकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विकास एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है, इसमें आम जनमानस की सहभागिता होनी चाहिए। जनप्रतिनिधि को उसका प्रतिनिधित्व करना चाहिए। एक योग्य जनप्रतिनिधि निरन्तर प्रयास करके अपने क्षेत्र के लिये परियोजना लेकर आता है। आज इसी का परिणाम है कि गोरखपुर जनपद एवं मण्डल की प्रत्येक विधानसभा में विकास देखने को मिल रहा है। कहीं सड़क, कहीं स्कूल-कॉलेज बन रहे है, कहीं उद्योग धंधे लग रहे है, कहीं कस्तूरबा गांधी विद्यालय, कहीं अटल आवासीय विद्यालय का निर्माण, कहीं पर ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े हुए विद्यालयों के नव निर्माण की कार्यवाही को आगे बढ़ाने का कार्य हो रहा है। कहीं बाढ़ बचाव से सम्बंधित कार्य हो रहे है, कहीं हॉस्पिटल का निर्माण, कहीं मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। प्रत्येक क्षेत्र में कोई न कोई कार्य निरन्तर हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार विकास कार्यों के लिए धनराशि देती है और हमारे सांसदगण, विधायकगण अपने क्षेत्र के विकास के लिए प्रयास करते हैं। सरकार उनकी योजनाओं को स्वीकृत कर धनराशि अवमुक्त करती है। जनता का भी दायित्व है कि विकास की इन परियोजनाओं में सकारात्मक सोच के साथ उन्हें समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में अपना सहयोग करे। विकास कार्य में किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं आनी चाहिए, क्यांेकि अगर कोई बाधा आती है और कार्य में विलम्ब हुआ तो उसका संशोधित एस्टिमेट प्रस्तुत किया जाता है। इससे प्रदेश के राजस्व पर विपरीत असर पड़ता है। साथ ही, विकास परियोजना में देरी होने के कारण आम जनमानस को भी इसका समय से लाभ नहीं मिल पाता।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अनेक बड़ी परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। जनता द्वारा सकारात्मक भाव से विकास परियोजनाओं के साथ जुड़ने से कार्य को मानक की गुणवत्ता बनाए रखते हुए समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। सकारात्मक सहयोग से विकास को आगे बढ़ाया जाये। आज गोरखपुर नये रूप में स्थापित हो रहा है। वाराणसी से गोरखपुर और गोरखपुर से सोनौली मार्ग फोरलेन बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। पहले महानगर से बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज का मार्ग बहुत संकरा और व्यस्त था, लेकिन आज फोरलेन का उच्च स्तर का मार्ग बनकर तैयार है। आप को एक नये गोरखपुर का दर्शन होता हुआ दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मोहद्दीपुर से गोरखनाथ मंदिर होते हुए सोनौली मार्ग पर जंगल कौड़िया का मार्ग फोरलेन बनने के साथ ही लाइट की जगमगाहट से विकास की एक नई कहानी कहता है। गोरखपुर से नेपाल राष्ट्र जाने वालेे वाहनों को शहर के अन्दर न आना पड़े, इसके लिए जंगल कौड़िया से कालेसर तक एक नया बाईपास भी बनकर तैयार है। उस पर तेजी के साथ आवागमन हो रहा है। बरसात के दौरान गोरखपुर महानगर में कहीं भी जल-जमाव की समस्या न हो, इसके लिये अभी से प्रयास किये जा रहे हैं। प्रशासन जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शहर के अन्दर बरसात के दौरान जल जमाव की स्थिति न आये इसके लिये अनेक कार्य चल रहे है। गोड़धोइया नाले की सफाई के साथ ही रामगढ़ताल से तरकुलानी के बीच नाला बनाने का कार्य चल रहा है। शहर का सारा पानी रामगढ़ताल होते हुए तरकुलानी में पहंुचेगा, वहां से यह गुर्रा नदी व राप्ती नदी में जायेगा। गोरखपुर का एम्स प्रारम्भ हो गया है। प्राणी उद्यान मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन के केन्द्र के रूप में विकसित हुआ है। रामगढ़ताल पर्यटन की दृष्टि से निरन्तर विकसित हो रहा है। रात्रि में फर्टिलाइजर कारखाने की लाइट गोरखपुर की एक नई तस्वीर को आपके सामने प्रस्तुत कर रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विकास की इस प्रक्रिया के साथ जुड़ने के लिये हमें अभियान चलाना होगा। गोरखपुर की पहचान तेजी से विकास प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ते हुए महानगर के रूप में स्थापित हो रही है। विकास की इस प्रक्रिया के साथ हम सब एक साथ जुड़कर अगर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का कार्य करते है तो स्वाभाविक रूप से हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ी के सामने उनके उज्ज्वल भविष्य के लिये एक नई तस्वीर प्रस्तुत होगी। विकास ही एक उज्ज्वल और मंगलमय भविष्य की गारंटी हो सकता है। इस विकास के साथ हम सब को जुड़कर गोरखपुर को आगे बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से जनता की समस्या के निस्तारण के लिए काम करंे, तो तमाम विवादों का समाधान जनसुनवाई के माध्यम से कर सकते हैं। सभी को न्याय मिले, प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित महसूस करे, यही सरकार की मंशा है। विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ व्यक्ति को न्याय मिलना व दिखना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि माह में दो बार तहसील दिवस एवं थाना दिवस आयोजित किये जाये। यह सुनिश्चित हो कि ग्राम पंचायत की समस्याओं का समाधान उसी स्तर पर हो जाए।इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।