Tag: BRICS Summit 2026

  • BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की अहम मुलाकातें, वैश्विक कूटनीति पर टिकी नजरें

    BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की अहम मुलाकातें, वैश्विक कूटनीति पर टिकी नजरें

    BRICS Summit 2026 में भारत की सक्रिय कूटनीति, BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का केंद्र बन गई है। समिट के बीच मोदी की लगातार हो रही द्विपक्षीय मुलाकातें यह संकेत दे रही हैं कि भारत बहुपक्षीय मंचों के साथ-साथ अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने मलेशिया, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम के नेताओं से भी बातचीत की।

    इन बैठकों को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इन्हें ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर भारत की रणनीतिक पकड़ के रूप में समझा जा रहा है।

    पुतिन और पेजेशकियान से मुलाकात का महत्व

    प्रधानमंत्री मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात को BRICS मंच पर सबसे अहम बैठकों में से एक माना जा रहा है। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह बातचीत दोनों देशों के बीच भरोसे और निरंतरता का संदेश देती है।

     

    View this post on Instagram

     

    A post shared by AVSPOST (@avspost)

    इसी तरह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हुई चर्चा भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के लिए ईरान के साथ संबंध चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक पहुंच और व्यापारिक मार्गों की दृष्टि से रणनीतिक महत्व रखते हैं।

    दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों के साथ संवाद

    आज प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया, इथियोपिया, UAE और वियतनाम के नेताओं से भी बातचीत की। यह साफ संकेत है कि भारत BRICS जैसे मंचों का उपयोग केवल बड़े वैश्विक खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ भी अपने रिश्ते गहरे कर रहा है।

    मलेशिया और वियतनाम के साथ भारत का संवाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक और सामरिक सहयोग को मजबूत कर सकता है। वहीं UAE के साथ बातचीत व्यापार, निवेश, ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है। इथियोपिया के साथ चर्चा अफ्रीका में भारत की बढ़ती भागीदारी और विकास सहयोग को रेखांकित करती है।

    शी जिनपिंग से बैठक पर दुनिया की नजर

    शाम को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। भारत-चीन संबंध पिछले कुछ वर्षों में सीमा तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में BRICS Summit 2026 के दौरान होने वाली यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की अहम मुलाकातें, वैश्विक कूटनीति पर टिकी नजरें
    BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की अहम मुलाकातें, वैश्विक कूटनीति पर टिकी नजरें

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने, सीमा पर शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने तथा व्यापारिक संबंधों में संतुलन बनाने की दिशा में अहम हो सकती है। हालांकि, किसी बड़े नतीजे की उम्मीद से ज्यादा इस बैठक को संवाद की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

    BRICS मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

    BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की लगातार बैठकों से यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से सामने रख रहा है। BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा मंच बनता जा रहा है जहां विकासशील देश वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, बहुध्रुवीय विश्व और समान अवसरों की बात कर रहे हैं।

    भारत की प्राथमिकता इस मंच के जरिए ऐसे सहयोग को आगे बढ़ाना है, जो आर्थिक विकास, तकनीकी साझेदारी, जलवायु समाधान और वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सके। मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का यही व्यापक संदर्भ है, जिसमें भारत अपने हितों को साधते हुए साझेदारी का दायरा भी बढ़ा रहा है।

    क्यों अहम है यह कूटनीतिक सक्रियता

    आज के वैश्विक परिदृश्य में जब भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन की चुनौतियां और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, तब BRICS जैसे मंचों पर सक्रिय कूटनीति बेहद जरूरी हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी की इन बैठकों को भारत की बहु-आयामी विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें संवाद, संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता तीनों का मेल दिखाई देता है।

    BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी ने इस मंच को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इन नेताओं के बीच होने वाली बातचीत आने वाले महीनों में वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकती है।

    Also read this : BRICS Summit 2026 : Important Modi-Putin Meeting Begins in Delhi, Bilateral Talks Also Scheduled with Pezeshkian

    BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय भागीदारी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। पुतिन, पेजेशकियान, जिनपिंग और अन्य नेताओं के साथ उनकी मुलाकातें यह बताती हैं कि भारत आज केवल एक सहभागी देश नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली कूटनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक से क्या नए संकेत सामने आते हैं।

  • BRICS 2026 में 90% व्यापार स्थानीय करेंसी में, रूस ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की

    BRICS 2026 में 90% व्यापार स्थानीय करेंसी में, रूस ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की

    BRICS 2026 में डॉलर पर निर्भरता घटी, 90% भुगतान स्थानीय करेंसी में, BRICS समूह के भीतर आर्थिक सहयोग लगातार नए स्तर पर पहुंच रहा है। रूस ने दावा किया है कि संगठन के सदस्य देशों के साथ उसके लगभग 90 फीसदी भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं। यह संकेत देता है कि BRICS देशों के बीच व्यापार और वित्तीय लेनदेन में डॉलर पर निर्भरता तेजी से कम हो रही है।

    रूस के राष्ट्रपति प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि BRICS के साथ रूस का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता की भी सराहना की और कहा कि नई दिल्ली की अगुवाई में संगठन के भीतर संवाद और समन्वय को नई दिशा मिली है।

    भारत की नेतृत्व भूमिका पर रूस का भरोसा

    रूस ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि BRICS 2026 में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। पेस्कोव के अनुसार, भारत की अध्यक्षता के दौरान संगठन के सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए। इससे न केवल राजनीतिक समन्वय मजबूत हुआ, बल्कि आर्थिक साझेदारी को भी नई गति मिली।

    BRICS 2026 में 90% व्यापार स्थानीय करेंसी में, रूस ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की
    BRICS 2026 में 90% व्यापार स्थानीय करेंसी में, रूस ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की

    BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत की सक्रियता को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर विचार कर रहे हैं।

    स्थानीय करेंसी में व्यापार क्यों बढ़ रहा है?

    BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना और भुगतान प्रणाली को अधिक लचीला बनाना। जब देश अपनी-अपनी करेंसी में लेनदेन करते हैं, तो विदेशी मुद्रा जोखिम घटता है और भुगतान प्रक्रिया भी कई मामलों में आसान हो जाती है।

    इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, प्रतिबंधों का दबाव और अंतरराष्ट्रीय भुगतान तंत्र में बदलाव की जरूरत ने भी BRICS देशों को नई वित्तीय रणनीतियों की ओर प्रेरित किया है। ऐसे में राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    BRICS 2026 का बढ़ता आर्थिक प्रभाव

    BRICS 2026 अब केवल एक राजनीतिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभर रहा है। भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्य देशों की संयुक्त आर्थिक क्षमता इस संगठन को और मजबूत बनाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि BRICS देशों के बीच स्थानीय करेंसी में व्यापार का दायरा और बढ़ता है, तो यह वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। इससे क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और सदस्य देशों की आर्थिक स्वायत्तता भी मजबूत होगी।

    BRICS 2026 में 90% व्यापार स्थानीय करेंसी में, रूस ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की
    BRICS 2026 में 90% व्यापार स्थानीय करेंसी में, रूस ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की

    डॉलर के विकल्प की दिशा में बड़ा कदम

    रूस का यह बयान BRICS 2026 के भीतर चल रही उस व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें सदस्य देश अपने आर्थिक हितों को अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं। 90 फीसदी भुगतान का राष्ट्रीय मुद्राओं में होना इस बात का प्रमाण है कि संगठन डॉलर के विकल्प की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

    हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से एक समान नहीं है और हर देश की आर्थिक नीतियां अलग हैं, फिर भी स्थानीय करेंसी में व्यापार का बढ़ना BRICS के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    भारत के लिए क्या है महत्व?

    भारत के लिए यह विकास रणनीतिक रूप से अहम है। BRICS में उसकी अध्यक्षता के दौरान यदि आर्थिक सहयोग और भुगतान तंत्र को मजबूती मिली है, तो यह भारत की ग्लोबल नेतृत्व क्षमता को भी रेखांकित करता है। साथ ही, स्थानीय करेंसी में व्यापार बढ़ने से भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।

    Also Read This : 7.8% GDP Growth के बीच PM मोदी का स्वदेशी मंत्र : सोना खरीदने और विदेशों में शादी से बचने की अपील

    आने वाले समय में BRICS 2026 देशों के बीच वित्तीय सहयोग, डिजिटल भुगतान और वैकल्पिक व्यापार व्यवस्था पर और अधिक काम होने की संभावना है। ऐसे में भारत की भूमिका इस समूह के भविष्य को आकार देने में निर्णायक साबित हो सकती है।

     

    View this post on Instagram

     

    A post shared by AVSPOST (@avspost)