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  • Assam floods : PM मोदी ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक, विधायकों ने एक महीने का वेतन देने का किया एलान

    Assam floods : PM मोदी ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक, विधायकों ने एक महीने का वेतन देने का किया एलान

    Assam floods : असम में लगातार बारिश और बाढ़ से बने गंभीर हालात के बीच राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा की गई। राज्य में जलप्रलय जैसी स्थिति ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे गांवों, खेतों और बस्तियों में पानी भर गया है। ऐसे हालात में प्रशासन, राहत एजेंसियां और जनप्रतिनिधि लगातार प्रभावित क्षेत्रों तक मदद पहुंचाने में जुटे हुए हैं।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के सांसदों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मौजूदा हालात, राहत सामग्री की उपलब्धता, विस्थापित लोगों की स्थिति और पुनर्वास की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचे और राहत कार्यों में किसी तरह की देरी न हो।

    PM मोदी ने सांसदों के साथ की स्थिति की समीक्षा

    समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ने बाढ़ से उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने राज्य में राहत और बचाव अभियान की प्रगति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, पेयजल की व्यवस्था और अस्थायी आश्रय स्थलों की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क टूटने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और आवश्यक सेवाओं पर पड़े असर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

    Assam floods : PM मोदी ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक
    Assam floods : PM मोदी ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक

    प्रधानमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से जमीनी हालात की जानकारी ली और यह जानने की कोशिश की कि किन क्षेत्रों में तत्काल अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। बैठक में राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने, स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

    विधायकों ने एक महीने का वेतन दान करने का किया एलान

    Assam floods संकट के बीच असम के विधायकों ने मानवीय पहल करते हुए एक महीने का वेतन दान करने का एलान किया है। यह निर्णय प्रभावित लोगों की मदद, राहत शिविरों की व्यवस्था और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। विधायकों की इस घोषणा को संकट की घड़ी में एक महत्वपूर्ण सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।

    राज्य में कई जनप्रतिनिधियों ने पहले भी राहत कार्यों में सहयोग की अपील की थी। अब वेतन दान की घोषणा से राहत कोष में अतिरिक्त सहायता मिलने की उम्मीद है। इससे उन परिवारों को मदद पहुंचाई जा सकेगी, जिनके घर, फसलें और आजीविका बाढ़ की चपेट में आकर प्रभावित हुई हैं।

    Assam floods : राहत और बचाव कार्यों पर बढ़ा फोकस

    Assam floods की वजह से हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं। राहत शिविरों में भोजन, दवाइयां, साफ पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। कई जगहों पर नावों और बचाव दलों की मदद से लोगों को निकाला गया है। प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को भूखा, प्यासा या बिना इलाज के न रहना पड़े।

    स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि जलजनित बीमारियों का फैलाव रोका जा सके। बाढ़ के बाद संक्रमण, डायरिया, बुखार और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए चिकित्सा टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है।

    Assam floods : Assam CM Himanta Biswa Sarma
    Assam floods : Assam CM Himanta Biswa Sarma

    प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की चुनौती

    Assam floods का असर केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके बाद पुनर्वास की लंबी प्रक्रिया शुरू होती है। असम में भी कई परिवारों को अपने घर छोड़कर अस्थायी शिविरों में रहना पड़ रहा है। फसलें नष्ट होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, जबकि छोटे व्यवसायों और दैनिक मजदूरी पर निर्भर लोगों की आय भी प्रभावित हुई है।

    ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने राहत के साथ-साथ पुनर्वास की बड़ी जिम्मेदारी है। क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को फिर से चालू करना तथा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देना आने वाले दिनों की प्राथमिक प्राथमिकताएं होंगी।

    असम बाढ़ संकट पर राजनीतिक और प्रशासनिक एकजुटता

    Assam floods इस संकट की घड़ी में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एकजुटता का संदेश सामने आया है। प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक और विधायकों की वेतन दान की घोषणा से यह संकेत मिला है कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

    असम जैसे बाढ़-प्रवण राज्य में हर साल मानसून के दौरान ऐसी चुनौतियां सामने आती हैं। लेकिन इस बार भी राहत एजेंसियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे त्वरित कार्रवाई कर नुकसान को कम करें और प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करें।

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    Assam floods : असम बाढ़ संकट ने एक बार फिर राज्य की संवेदनशीलता और राहत व्यवस्था की परीक्षा ली है। प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक, राहत कार्यों की निगरानी और विधायकों का वेतन दान जैसे कदम पीड़ितों के लिए राहत की उम्मीद जगाते हैं। अब सबसे जरूरी है कि मदद तेजी से जरूरतमंदों तक पहुंचे और पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़े।

     

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  • West Bengal Assembly Election 2026 results : 207 सीटों के साथ BJP की जीत, 9 मई को शपथ ग्रहण

    West Bengal Assembly Election 2026 results : 207 सीटों के साथ BJP की जीत, 9 मई को शपथ ग्रहण

    Assembly Election 2026 results आ गए हैं और इन नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP ने ऐतिहासिक लैंडस्लाइड जीत दर्ज की है। TMC के 15 वर्षों के शासन का अंत हो चुका है।

    Assembly Election 2026 results – पूरी डिटेल

    चुनाव आयोग के ऑफिसियल आंकड़ों के मुताबिक:

    • भाजपा: 207 सीटें (293 सीटों के नतीजे घोषित)
    • तृणमूल कांग्रेस (TMC): 80 सीटें
    • अन्य छोटे दल और निर्दलीय: बाकी सीटें

    भाजपा को पूर्ण बहुमत (148 सीटों) से कहीं ज्यादा मिला है। पार्टी का वोट शेयर लगभग 45-46% रहा, जबकि TMC का वोट प्रतिशत काफी गिर गया। यह असेंबली इलेक्शन 2026 रिजल्ट्स भाजपा के लिए न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे पूर्वी भारत में सबसे बड़ी जीत है।

    नई सरकार कब शपथ लेगी?

    असेंबली इलेक्शन 2026 रिजल्ट्स के बाद भाजपा ने शपथ ग्रहण की तारीख भी घोषित कर दी है। नई BJP सरकार 9 मई 2026 (शनिवार) को सुबह 10 बजे कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर शपथ लेगी। यह तारीख रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती से जुड़ी होने के कारण खास मानी जा रही है।

    पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इसकी पुष्टि की। मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार सुवेंदु अधिकारी माने जा रहे हैं, हालांकि आधिकारिक घोषणा शपथ ग्रहण से पहले हो सकती है।

    West Bengal Assembly Election 2026 results
    West Bengal Assembly Election 2026 results

    Assembly Election 2026 की मुख्य बातें

    • मतदान: दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को हुआ
    • मतगणना: मुख्य रूप से 4 मई 2026 को हुई
    • मतदान प्रतिशत: राज्य भर में अच्छा रहा
    • TMC ने परिणामों में अनियमितताओं का आरोप लगाया है, लेकिन चुनाव आयोग ने सभी आरोपों की जांच के बाद नतीजे घोषित किए हैं।

    यह जीत क्यों ऐतिहासिक है?

    असेंबली इलेक्शन 2026 रिजल्ट्स ने बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। पहली बार भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाने जा रही है। इससे पहले राज्य में वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस का लंबा शासन रहा है।

    इस जीत के साथ भाजपा अब बंगाल में विकास, रोजगार, कानून व्यवस्था और औद्योगिक प्रगति पर फोकस करने वाली है। वहीं TMC अब विपक्ष की भूमिका में रहेगी और अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर है।

    आगे की चुनौतियां

    9 मई को शपथ लेने के बाद नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी:

    • बेरोजगारी घटाना
    • राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारना
    • कानून-व्यवस्था पर काबू पाना
    • बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास करना

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    Assembly Election 2026 results ने साबित कर दिया कि जनता परिवर्तन चाहती है। 9 मई को शपथ ग्रहण के साथ बंगाल में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो रहा है।

     

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  • सुप्रीम कोर्ट ने Ranveer Allahabadia की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, लेकिन शो करने पर प्रतिबंध लगाया

    सुप्रीम कोर्ट ने Ranveer Allahabadia की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, लेकिन शो करने पर प्रतिबंध लगाया

    Ranveer Allahabadia  की  गिरफ्तारी पर रोक और FIR  पर रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को Youtuber Ranveer Allahabadia उर्फ़ बीयर बाइसेप्स की महाराष्ट्र, असम और राजस्थान में दर्ज FIR  में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अदालत ने आदेश दिया कि Ranveer Allahabadia के खिलाफ इस विवादित एपिसोड और उसके बयान को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

    Ranveer Allahabadia : जांच में सहयोग की शर्त

    न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश पारित किया और कहा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अल्लाहबादिया को सभी मामलों की जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

    कोर्ट का आदेश:

    • मुंबई और गुवाहाटी में दर्ज FIR में गिरफ्तारी पर रोक, लेकिन जांच में सहयोग करना होगा।
    • भारत के “India’s got Latent” शो को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी।
    • यदि अल्लाहबादिया को महाराष्ट्र और असम में अपनी सुरक्षा को लेकर कोई खतरा महसूस होता है, तो वे स्थानीय पुलिस से सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।
    • यदि जयपुर में कोई नई FIR  दर्ज होती है, तो उसमें भी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
    • Ranveer Allahabadia को अपना पासपोर्ट ठाणे पुलिस के पास जमा करना होगा।
    • बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के वे देश छोड़कर नहीं जा सकते।
    • अल्लाहबादिया और उनके सहयोगी तब तक कोई अन्य शो नहीं कर सकते।
    Ranveer Allahabadia
    Ranveer Allahabadia

    सुप्रीम कोर्ट की कड़ी रिमार्क 

    कोर्ट ने Ranveer Allahabadia की भाषा और शो में उनके व्यवहार को लेकर कड़ी टिप्पणी की।

    “आपकी भाषा से माता-पिता को शर्म महसूस होगी। बेटियां और बहनें शर्मिंदा होंगी। पूरी समाज शर्मिंदा होगी। यह आपकी और आपके साथियों की गिरावट की हद है। कानून और व्यवस्था का पालन करना होगा। उसे खुद पर शर्म आनी चाहिए कि उसने अपने माता-पिता के लिए यह सब किया।”

    विवादित एपिसोड और FIR

    यह विवादित एपिसोड 14 नवंबर 2024 को खार हैबिटेट में शूट किया गया था लेकिन हाल ही में प्रसारित हुआ। इस शो में रणवीर अल्लाहबादिया, कॉमेडियन समय रैना, यूट्यूबर आशीष चंचलानी और अन्य लोग शामिल थे, जिन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके चलते महाराष्ट्र, असम और राजस्थान में अल्लाहबादिया के खिलाफ FIR दर्ज की गईं।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट की सख्ती

    Ranveer Allahabadia की ओर से पेश हुए वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने दलील दी कि Youtuber  को 10 सेकंड की क्लिप के लिए मौत की धमकियां मिल रही हैं।

    “याचिकाकर्ता को जान से मारने की धमकी मिल रही है… उसकी जीभ काटने वाले को 5 लाख का इनाम दिया गया है। पूर्व पहलवान ने कहा कि जहां भी वह मिले, उसे नहीं छोड़ा जाएगा,” चंद्रचूड़ ने कोर्ट को बताया।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहानुभूति दिखाने से इनकार कर दिया और अल्लाहबादिया की भाषा और उनके व्यवहार पर सवाल उठाए।

    “क्या आप इस भाषा का बचाव कर रहे हैं?”

    “एक वकील के तौर पर मैं इस भाषा से घिन महसूस कर रहा हूं,” चंद्रचूड़ ने जवाब दिया।

    Ranveer Allahabadia
    Ranveer Allahabadia

    अश्लीलता और समाज के मूल्यों पर सवाल

    कोर्ट ने कहा कि यह भाषा अश्लीलता की श्रेणी में आती है।

    “अगर यह अश्लील नहीं है, तो फिर अश्लीलता क्या है? कोई भी व्यक्ति इस भाषा को पसंद नहीं करेगा। यह समाज को हल्के में लेने जैसा है,” कोर्ट ने कहा।

    लोकप्रियता का फायदा नहीं उठाया जा सकता

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति केवल अपनी लोकप्रियता के कारण समाज को हल्के में नहीं ले सकता।

    “सिर्फ इसलिए कि आप लोकप्रिय हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप समाज को हल्के में लें। यह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।”

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    धमकियों पर कोर्ट का रुख

    Ranveer Allahabadia के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें और उनके साथियों को एसिड अटैक की धमकियां मिली हैं।

    लेकिन कोर्ट ने इसे कोई राहत देने का आधार मानने से इनकार कर दिया।

    “धमकियां तो हर दिन मिलती हैं। राज्य इस पर कोई भी कार्रवाई कर सकता है,” कोर्ट ने कहा।

    चंद्रचूड़ ने कोर्ट को यह भी बताया कि एक व्यक्ति ने घोषणा की है कि जो भी रणवीर अल्लाहबादिया की जीभ काटेगा, उसे 5 लाख रुपये दिए जाएंगे।

    इस पर कोर्ट ने कोई सहानुभूति नहीं दिखाई और कहा:

    “आपने यह सब लोकप्रियता के लिए किया और अब आपको धमकियां भी उसी वजह से मिल रही हैं।”

  • Supreme court: असम में धारा 6 ए लागू करने पर सवाल

    Supreme court: असम में धारा 6 ए लागू करने पर सवाल

    Supreme court भारत के मुख्य न्यायाधीश D.Y. की अध्यक्षता वाली एक संविधान पीठ चंद्रचूड़ गुरुवार 17 अक्टूबर 2024 को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6 ए की संवैधानिकता पर फैसला सुनाने वाले हैं, धारा 6 ए तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा 15 अगस्त 1985 को हस्ताक्षर्रित ‘असम समझौते’ नामक समझौता ज्ञापन को आगे बढ़ाने के लिए 1955 के अधिनियम में डाला गया एक विशेष प्रावधान था।

    धारा 6 ए के तहत, जो विदेशी 1 जनवरी 1966 से पहले असम में आए थे और राज्य में “सामान्य तौर पर निवासी” थे, उनके पास भारतीय नागरिकों के सभी अधिकार और दायित्व होंगे जो लोग 1 जनवरी 1966 और 25 मार्च 1971 के बीच राज्य में आए थे, उनके पास समान अधिकार और दायित्व होंगे शिवाय इसके कि वे 10 साल तक मतदान नहीं कर पाएंगे।

    याचिकाकर्ताओं ने अदालत में सवाल उठाया था की धारा 61 को लागू करने के लिए सीमावर्ती राज्यों में से अकेले असम को क्यों चुना गया है उन्होंने “घुसपैठ में वृद्धि को धारा 6 ए का परिणाम या प्रभाव” बताया था।

    Supreme court: जनसंख्किकीय  बदलाव 

    बदले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं से ऐसी सामग्री दिखाने के लिए कहा था की बांग्लादेश मुक्ति युद्ध से ठीक पहले 1966 और 1971 के बीच भारत आए सीमा पर प्रवासियों को दिए गए लाभों और अमूल-चूल जनसंख्या परिवर्तन हुआ, जिसने असमिया सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित किया संविधान पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इसका दायरा धारा 6A की वैधता की जांच करने तक ही सीमित है, ना कि असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) तक।

    “हमें जो संदर्भ दिया गया वह धारा 6 ए पर था। इसलिए हमारे सामने मुद्दे का दायरा धारा ए है ना कि NRC,” मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया था संविधान पीठ बांग्लादेश में अवैध घुसपैठ और अवैध रूप से प्रवेश करने वालों का पता लगाने और उन्हें निर्वासित करने के लिए केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विवरण चाहती थी।

    Supreme court

    अदालत में दायर एक सरकारी हलफनामे में कहा गया था कि भारत में गुप्त रूप से प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों  का पता लगाना,हिरासत में लेना और निर्वासित करना एक “जटिल सतत प्रक्रिया” थी केंद्र ने घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के समय पर काम पूरा करने में बाधा पैदा करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराया था।

    केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया था कि पश्चिम बंगाल में “बहुत धीमी और अधिक जटिल” भूमि अधिग्रहण नीतियां सीमा बाड़ लगाने जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजना के लिए भी एक कांटा बन गई है।

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    केंद्र ने कहा कि सीमा की कुल लंबाई 4096.7km है। यह झरझारा था, इसमें आड़ी तिरछी नदियां थी और इलाका पहाड़ी था। सीमा पश्चिम बंगाल, मेंंघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और असम राज्यों से लगती है। सरकार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अकेले पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ 2216.7 km लंबी सीमा साझा करता है, जबकि असम पड़ोसी देश के साथ 263km लंबी सीमा साझा करता है मामला दिसंबर 2030 में फैसले के लिए सुरक्षित रखा गया था।