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  • સતી કનકપ્રભા માટે જ્યારે મહાશ્રમણજી એક જ દિવસમાં 47 KM ચાલીને દિલ્હી પહોંચ્યા!

    સતી કનકપ્રભા માટે જ્યારે મહાશ્રમણજી એક જ દિવસમાં 47 KM ચાલીને દિલ્હી પહોંચ્યા!

    નીરવ જોશી, માણસા (M-7838880134 & 9106814640)

    આજ રોજ તેરાપંથ સંપ્રદાયના આચાર્ય મહાશ્રમણ આજોલ ખાતે એક દિવસીય નિવાસ કરીને વિચરણ કરતા કરતા ગાંધીનગર પાસે આવેલા માણસા ગામે પધાર્યા હતા. માણસા ગામમા આવેલી એમ જી ચૌધરી સંકુલ ખાતે તેમણે મુકામ કર્યું છે. તેમના ભક્તગણ અને સાધુ સાધ્વી સમુદાય સાથે એક દિવસ માટે અહીં સત્સંગ લાભ આપ્યો હતો…

    સાધ્વી પ્રમુખ કનકપ્રભાજીના જીવનની ન ભુલાય તેવી વાતો…

    ઉલ્લેખનીય છે કે આજે ફાગણ સુદ ચૌદસ એ તેરાપંથ સંપ્રદાયના સાધ્વી પ્રમુખ કનકપ્રભાજીનો મહાપ્રયાણ દિવસ હતો. ગઈ સાલ 2022માં 16 માર્ચના રોજ અને હિન્દુ તિથિ પ્રમાણે ફાગણ સુદ ચૌદસના દિવસે મહાસતી કનક પ્રભાજીએ તેમના શરીરનું ત્યાગ કર્યો હતો.

    દિલ્હી ખાતે આચાર્ય મહાશ્રમણજી 6 માર્ચ 2022 ના રોજ રાજસ્થાન થી દિલ્હી મુકામે અથવા તો દિલ્હીના રસ્તે એક જ દિવસમાં ૪૭ કિલોમીટર જેટલું અંતર કાપીને સાધ્વી પ્રમુખને દર્શન આપવા હોસ્પિટલ આવી પહોંચ્યા હતા!!!

    તેરાપંથ સંપ્રદાયના મહા સતીઓના પ્રમુખ અને સમુદાયના સાધ્વી પ્રમુખ કનક પ્રભાજીએ એ એમના દર્શન કર્યા હતા અને ત્યારબાદ થોડા દિવસ બાદ જ એમને શરીર 16 March ના રોજ છોડી દીધું હતું!

    આજરોજ માણસા ખાતે મહાશ્રમણજીએ પ્રસંગને યાદ કર્યો હતો અને કહ્યું હતું કે 50 વર્ષથી પણ વધારે સમય કનકપ્રભા મહાસતીએ સાધ્વીજીવન તેરાપંથ સંપ્રદાયને અર્પણ કર્યુ!!! આચાર્ય તુલસી, આચાર્ય મહાપ્રજ્ઞ અને હું એટલે કે આચાર્ય મહાસમણ આ ત્રણ આચાર્યના સમયગાળા દરમિયાન સાધવી પ્રમુખજી ખૂબ મોટી સેવા આપી હતી! સાધ્વીજી ને યાદ કરતા મહાસમણજીનું ગળું પણ લાગણીથી ભીનું થઈ ગયું હતું… જણાવ્યું હતું કે કોઈપણ સાધુ સાધ્વીને કે પરમાત્માના માર્ગ પર ચાલનાર  જૈન મુની કે સતીને વીતરાગના માર્ગે ચાલવાનું હોય છે આમ સાધવી પ્રમુખા સમગ્ર તેરાપંથ સમુદાય અને મહાસતીઓના સંઘને શોભે તેવું પ્રેરણાદાયી જીવન જીવીને આપણી વચ્ચેથી વિદાય થયા હતા.

    આજે તિથિ ના રોજ તે વાતને એક વર્ષ થયું! સમગ્ર તેરા પંચ સમાજની ઉપસ્થિત મહિલા સાધ્વીઓ કે સતિયો આ લાગણી અને આ વાતથી ભાવવિભોર થઈ ગઈ હતી અને તેમણે કનક પ્રભાજીના તપસ્વી જીવનને ખૂબ જ અંગત રીતે, ખૂબ જ ભાવથી યાદ કર્યું હતું!

    ઓમ અર્હમ!

    Terapanth Media Release 

    🌸 *मानसा में महातपस्वी महाश्रमण : शासनमाता की प्रथम पुण्यतिथि का हुआ समायोजन* 🌸

    *-साहित्यकला में सिद्धहस्त थीं शासनमाता कनकप्रभाजी : आचार्यश्री महाश्रमण*

    *-सात किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री पहुंचे मानसा, एम.जी. चौधरी विद्या संकुल में पावन प्रवास*

    *-उत्साहित श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य का किया भावभीना अभिनंदन*

    *06.03.2023, सोमवार, मानसा, गांधीनगर (गुजरात) :*

    जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी का सोमवार को गांधीनगर जिले के मानसा नगर में मंगल प्रवेश हुआ। अपने आराध्य की अगवानी में जुटे श्रद्धालुओं ने महातपस्वी का भावभीना अभिनंदन किया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री मानसा में स्थित एम.जी. चौधरी विद्या संकुल में पधारे। यहां आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की अष्टम साध्वीप्रमुखा, शासनमाता, महाश्रमणजी साध्वी कनकप्रभाजी की प्रथम पुण्यतिथि समारोह का समायोजन किया गया।

    इसके पूर्व प्रातःकाल आजोल से आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल प्रस्थान किया। मानसा के श्रद्धालु आचार्यश्री के प्रस्थान के पूर्व ही मंगल सन्निधि में पहुंच गए थे। आज का विहार मार्ग भले ही छोटा था, किन्तु मार्ग में श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम जारी था। लगभग सात किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री मानसा में पधारे तो मानसावासियों का सौभाग्य चमक उठा। अपने आराध्य की अभिनंदन को उपस्थित मानवासियों के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। सभी पर आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री गतिमान थे। भव्य स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री मानसा में स्थित एम.जी. चौधरी विद्या संकुल में पधारे।

    विद्या संकुल के एक नवनिर्मित हॉल में आज का मुख्य प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। आज का मुख्य कार्यक्रम तेरापंथ धर्मसंघ की अष्टम साध्वीप्रमुखा शासनमाता कनकप्रभाजी की प्रथम पुण्यतिथि के रूप में भी समायोजित हुआ।

    आचार्यश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मानुशासन करने के लिए संयम और तप की साधना करने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आज फाल्गुन शुक्ला चतुर्दशी है। आज के दिन हाजरी का क्रम होता है, इसलिए भी गुरुकुलवासी चारित्रात्माओं की उपस्थिति अनिवार्य होती है। यदि कोई चारित्रात्मा तपस्या, उपवास आदि नहीं भी कर पाएं तो उनदोरी करना भी अपने आप में एक तपस्या होती है। इस दौरान आचार्यश्री ने चतुर्विध धर्मसंघ को महाप्राणध्वनि और भी अनेक ध्यान के प्रयोग भी कराए। आचार्यश्री ने हाजरी का वाचन किया तो समुपस्थित चारित्रात्माओं ने अपने स्थान खड़े होकर लेखपत्र उच्चरित किया।

    आचार्यश्री ने आगे कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की आठवीं साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी के महाप्रयाण को एक वर्ष हो गया। आज के ही दिन दिल्ली अध्यात्म साधना केन्द्र के अनुकंपा भवन में उनका महाप्रयाण हो गया। उनका पचास वर्षों से अधिक समय का संयम पर्याय रहा। वे परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञजी और मेरे साथ भी अपना योगदान दिया। आचार्यश्री ने उनके जीवन के अनेक घटना प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि बीदासर के मर्यादा महोत्सव उनका अंतिम मर्यादा महोत्सव था और उस दौरान उन्होंने अपने दायित्व का पालन करते हुए साध्वी समुदाय के व्यवस्थाओं से संबंधित कार्य किया। उन्हें तीन-तीन आचार्यों की सेवा का अवसर मिला। परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी उनके आयु में 21 साल बड़े और मैं उनसे आयु में 21 साल छोटा था। वे साहित्यकला में सिद्धहस्त थीं। कविता का निर्माण शीघ्र कर लेती थी। उनका अपना वैदुष्य था। उनसे कितनों पथदर्शन मिला, कितने साध्वियों के केशलोच और मार्गदर्शन प्रदान किया। मैं उनका श्रद्धा के स्मरण करता हूं, उनके प्रति सम्मान की भावना व्यक्त करता हूं।

    तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी, साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने शासनमाता के प्रति अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी।

    मुनि धर्मरुचिजी, साध्वी सुमतिप्रभाजी, समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। साध्वी उदितयशाजी ने कविता पाठ किया।

    साध्वीवृंद ने गीत का संगान किया। छोटी साध्वियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तेरापंथी सभा-मानसा के अध्यक्ष श्री अशोक मेहता व विद्या संकुल के श्री पितु भाई चौधरी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। स्थानीय तेरापंथ कन्या मण्डल व महिला मण्डल ने गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

    *पालनपुर और सिद्धपुर को भी आचार्यश्री करेंगे पावन*

    आचार्यश्री कार्यक्रम में घोषणा करते हुए कहा कि सन् 2024 के बाद और सन् 2026 के चतुर्मास के पहले-पहले पालनपुर और सिद्धपुर का यथासंभवतया स्पर्श करने का भाव है। इस प्रकार की घोषणा सुनकर प्रवचन हॉल जयघोष से गूंज उठा।

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  • માણસા ખાતે મહાસમણજીનો આજનો સત્સંગનો કાર્યક્રમ, જૈન સમાજમાં ભારે ઉત્સવનો માહોલ

    માણસા ખાતે મહાસમણજીનો આજનો સત્સંગનો કાર્યક્રમ, જૈન સમાજમાં ભારે ઉત્સવનો માહોલ

    નિરવ જોશી, માણસા (M-7838880134)

    વિજાપુરમાં શનિવારે જૈન ધર્મના તેરાપંથ સંપ્રદાયના આચાર્ય મહાસમણએ સત્સંગ સુધા તેમજ જ્ઞાનવાણી થી ભક્તોને પવિત્ર કર્યા બાદ રવિવારના વહેલી સવારે તેઓ આજોલ ગામ મુકામે પધાર્યા હતા. ત્યાં પણ તેમણે એક દિવસ મુકામ કર્યો હતો.

    આમ રવિવારનો દિવસ આજોલમાં  જૈન સમુદાયના ભક્તો અને મુનિ મહારાજ તેમજ સાધ્વી મહાસતીઓને સમર્પિત હતો.આજે સોમવારના રોજ વહેલી સવારના મહાસમણજી માણસા માટે પ્રસ્થાન કર્યું હતું અને માણસમાં પધાર્યા હતા. આજે સોમવાર સત્સંગ માણસામાં રહેશે. હોળી જેવા  પવિત્ર દિવસે માણસામાં જૈન સમુદાયમાં તેમજ અન્ય  સમાજમાં મહાસમણજીના જ્ઞાનનો લાભ લેવાનો પણ ભારે ઉત્સાહનો માહોલ છે…

    🌸 *विनय के भाव से चित्त रह सकता है प्रसन्न : महातपस्वी महाश्रमण* 🌸

    *-12 किलोमीटर का विहार कर शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी पहुंचे आजोल*

    *-सी.एम.डी. शाह हाइस्कूल में पड़े पूज्यचरण, पुनः गांधीनगर जिले में प्रवेश*

    *-विनयशीलता के विकास को आचार्यश्री ने किया उत्प्रेरित*

    *05.03.2023, रविवार, आजोल, गांधीनगर (गुजरात) :*

    भारत के पश्चिमी भाग में अवस्थित गुजरात प्रदेश में अपनी अणुव्रत यात्रा के साथ गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्तमान में उत्तर गुजरात की धरा को अपनी चरणरज से पावन और अपनी अमृतवाणी से लोगों के मानस को अभिसिंचन प्रदान कर रहे हैं। रविवार को प्रातः की मंगल बेला में आचार्यश्री विजापुर से गतिमान हुए। विजापुर गांव राजस्थान के महसाणा जिले में अवस्थित है। सुबह से ही आसमान में छाए बादल और तीव्र हवा के कारण मौसम कुछ बदला-बदला सा प्रतीत हो रहा था। हालांकि कुछ समय बाद ही बादलों को चीरता हुआ सूर्य प्रकट हुआ तो कुछ समय बाद बादलों से उसे पुनः ढंक दिया। इस आपाधापी में हल्की बूंदे भी आईं, किन्तु हवाओं ने बादलों को कहीं और धकेल दिया। तेज हवा कुछ समय बाद तक चलती रही। इस दौरान विहार के दौरान प्रायः मौसम खुशनुमा बना रहा। आचार्यश्री ने एक किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लेते हुए विजापुर में स्थित स्थानक और तेरापंथ भवन में भी पधारे और श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। विहार के दौरान आचार्यश्री मेहसाणा जिले से पुनः गांधीनगर जिले की सीमा में पावन प्रवेश किया और लगभग बारह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री आजोल गांव में स्थित सी.एम.डी. शाह हाइस्कूल में पधारे।

    प्रार्थना हॉल में आयोजित मंगल प्रवचन में समुपस्थित जनता को आचार्यश्री ने पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि शास्त्रों में वर्णित चार प्रकार की समाधियों में पहली समाधि है विनय समाधि। व्यक्ति का चित्त प्रसन्न होता है तो बीमारी भी मानों कम परेशान करती है और यदि व्यक्ति का चित्त अशांत हो तो छोटी-मोटी कठिनाई भी परेशान कर देती है। चित्त की प्रसन्नता के लिए आदमी को अपने भीतर विनयशीलता का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। अपने से बड़ों के प्रति विनय, गुरु के प्रति, अपने से छोटों के प्रति विनय का अच्छा भाव हो तो चित्त प्रसन्न रह सकता है। आचार्यश्री ने समय के महत्त्व को भी व्याख्यायित करते हुए लोगों को उचित समय पर उचित कार्य करने की प्रेरणा प्रदान की।

    मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में शासनश्री साध्वी ज्ञानप्रभाजी की स्मृतिसभा का आयोजन हुआ। आचार्यश्री ने दिवंगत साध्वीजी का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनकी आत्मा के प्रति मध्यस्थ भाव व्यक्त करते हुए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। उनकी स्मृति में साध्वीप्रमुखाश्रीजी, मुख्यमुनिश्रीजी व साध्वी उदितयशाजी ने अपनी भावांजलि अर्पित की। इस संदर्भ में साध्वीवृंद ने गीत का संगान किया। विद्यालय के पूर्वाचार्य श्री नरेन्द्रभाई बी. सुथार व जैन संघ की ओर से श्री शितल भाई लोहरा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। वर्तमान आचार्य श्री भूपेन्द्र भाई गोंसाई ने भी आचार्यश्री के दर्शन मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

    गत एक वर्ष पूर्व तेरापंथ धर्मसंघ की अष्टम साध्वीप्रमुखा शासनमाता कनकप्रभाजी का दिल्ली में महाप्रयाण हो गया था। उनका साध्वीप्रमुखा काल तेरापंथ धर्मसंघ की साध्वीप्रमुखा में सर्वाधिक पचास वर्षों से अधिक वर्षों का रहा। उन्हें तीन-तीन आचार्यों के सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। उनकी प्रथम वार्षिक पुण्यतिथि 6 मार्च को है।

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  • આચાર્ય મહાસમણજીએ વિજાપુર ખાતે ભવ્ય સત્સંગ કરાવ્યો

    આચાર્ય મહાસમણજીએ વિજાપુર ખાતે ભવ્ય સત્સંગ કરાવ્યો

    નીરવ જોશી, હિંમતનગર (M-7838880134 & 9106814540)

    તેરાપંથ સમુદાયના પ્રમુખ અને આચાર્ય શ્રી મહાશ્રમણજી આજે મહુડીના સુપ્રસિદ્ધ તીર્થધામ ઘંટાકર્ણ મહાવીરથી પ્રસ્થાન કરીને 10 કિલોમીટર જેટલું અંતર કાપી વિજાપુર નગરના મધ્યમાં આવેલા ઘંટાકર્ણ મહાવીર સંસ્થા સાથે જોડાયેલા પાર્શ્વનાથ તીર્થક્ષેત્ર ખાતે મુકામ કર્યો હતો.

    વિજાપુરમાં વિજાપુર ચોકડી થી વિજાપુર તેરાપંથ સમુદાયના કનુભાઈ ચાવત (કનૈયાલાલ ચાવત)ને તેમના પરિવારજનો તેમ જ 15 થી 20 જેટલા તેરાપંથ સંપ્રદાયના પરિવારજનોએ આચાર્યશ્રીનું ભાવ ભર્યું વંદના કરીને સ્વાગત કર્યું હતું . વિજાપુરના તેરાપંથ સમુદાયના યુવાનો અને અન્ય જૈન સમાજના વડીલોએ પણ પાર્શ્વનાથ જૈન તીર્થ ખાતે મહાસમણજી આગમન માટે ખૂબ સુંદર વ્યવસ્થા ઊભી કરી હતી.

    આચાર્ય મહાસમણ અને તેમની સાથે પધારેલા આશરે 109 જેટલા જૈન મુનિ અને સાધ્વી મહારાજો તેમજ વિશાળ ભક્તવંદે ખૂબ જ શ્રદ્ધા ભક્તિથી એમનું પ્રવચનથી ક્ષેત્રના હોલમાં સાંભળ્યું હતું …ત્યારબાદ મંગલ પાઠ અને પ્રસાદ તેમજ અન્ય કાર્યક્રમો યોજાયા હતા.

    ઉલ્લેખનીય છે કે 2002માં જ્યારે આ સંપ્રદાયના આચાર્ય મહાપ્રજ્ઞએ અહિંસા યાત્રા ગુજરાતમાં આયોજિત કરી હતી ત્યારે વિજાપુર ખાતે પાર્શ્વનાથ જૈન તીર્થ  ખાતે જ રોકાણ કર્યું હતું!!!

    આમ આશરે ૨૧ વર્ષ પછી જૂની યાદો તાજી થઈ હતી !જૈન શતાંબર મૂર્તિપૂજક સંઘના ટ્રસ્ટીઓ અને કાર્યકર્તાઓએ પણ ખૂબ જ શ્રદ્ધા ભક્તિથી  સમુદાયના આચાર્ય મહાશ્રમણજીનું ભાવભીની વંદના કરી હતી અને સ્વાગત કર્યું હતું.

    સકલ જૈન સંઘના ભક્તો અને મુમુક્ષુ તેમજ શ્રાવકોમાં શ્રમણજીને જોવાની સાંભળવા માટે ઉમટી પડ્યા હતા ! સમગ્ર વાતાવરણ ખૂબ જ આનંદ, ભક્તિ અને શ્રદ્ધાથી મહેકી ઉઠ્યું હતું અને સમગ્ર પાર્શ્વનાથ જૈન તીર્થ ભક્તિના સ્પંદનોથી જાગૃત થયું હતું!

    રવિવારે તેઓ અહીંયા થી આજોલ તરફ વિચરણ કરશે.. આજોલ બાદ માણસા જશે ત્યાંથી વાસણ ગામ એક દિવસ મુકામ કરશે અને ત્યારબાદ ગાંધીનગર તરફ અને ત્યારબાદ અમદાવાદ તરફ તેઓ 20 દિવસ માટે પ્રયાણ કરશે..

    Press release: Jain Terapanth Media

    🌸 *सद्गुणों के विकास से सुरभित बनता है जीवन : आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸

    *-10 कि.मी. का विहार कर युगप्रधान आचार्यश्री पहुंचे विजापुर*

    *-शांतिदूत की अगवानी में पहुंचे स्थानकवासी श्रमण संघ के उपप्रवर्तक व अन्य संत*

    *-श्रीमद् बुद्धिसागरसूरी जैन समाधि मंदिर में आचार्यश्री का हुआ प्रवास*

    *04.03.2023, शनिवार, विजापुर, मेहसाणा (गुजरात) :*

    मानव-मानव के कल्याण के लिए गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को प्रातः की मंगल बेला में महुदी स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर से गतिमान हुए तो आचार्यश्री के चरणों में अपने कृतज्ञ भावों को व्यक्त करने के लिए महुडीवासी भी उपस्थित थे। सभी को आशीष प्रदान करते आचार्यश्री अगले गंतव्य की ओर गतिमान हुए। मार्ग के आने वाले गांवों के ग्रामीणों को आचार्यश्री के दर्शन और आशीर्वाद का लाभ प्राप्त हुआ। जनमानस दिन-दिन प्रतिदिन बढ़ती गर्मी जहां आमलोगों को परेशान करने में सक्षम थी, वहीं गर्मी आचार्यश्री के बढ़ते चरणों को रोकने में नाकाम थी। विहार के दौरान आचार्यश्री गांधीनगर जिले की सीमा से मेहसाणा जिले में प्रवेश किया। प्राकृतिक प्रतिकूलताओं में भी अनवरत गतिमान आचार्यश्री दस किलोमीटर का विहार कर विजापुर नगर में पधारे तो श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा। आचार्यश्री के स्वागत में तेरापंथ ही नहीं, अपितु अन्य जैन एवं जैनेतर जनता भी सोल्लास उपस्थित थी। आचार्यश्री की अगवानी में वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ के उपप्रवर्तक श्री गौतममुनि गुणागारजी आदि संत भी पहुंचे। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर हार्दिक स्वागत किया तो जैन समाज की एकता मानों मुखरित होने लगी। भव्य जुलूस के साथ आचार्यश्री विजापुर नगर से होते हुए मूर्तिपूजक समाज के श्रीमद् बुद्धिसागरसूरी जैन समाधि मंदिर स्थित पार्श्वनाथ मंदिर में पधारे। तेरापंथ के आचार्य का शुभागमन, वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ के संतों द्वारा अगवानी और मूर्तिपूजक के स्थान में पड़ाव आचार्यश्री की सद्भावना की भावना को प्रतिष्ठापूर्ण तरीके से धरातल पर स्थापित कर रहे थे।

    मंदिर परिसर के एक सभागार में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के साथ वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ के उपप्रवर्तक गौतममुनिजी, विनयमुनिजी आदि संत भी विराजमान थे। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।

    विजापुर-ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उपप्रवर्तक गौतममुनिजी ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के शुभागमन से विजापुर की धरा आज धन्य हो गई। आज के परम पावन माहौल में आचार्यश्री का हार्दिक अभिनंदन-वंदन करता हूं। आपके दर्शन से मन गदगद हो गया। उन्होंने आचार्यश्री के स्वागत में एक गीत का संगान भी किया।

    युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि जीवन में सद्गुणों का विकास हो तो जीवन सुरभित हो सकता है। जीवन में विकास करना आवश्यक होता है, किन्तु विकास की दिशा का सही होना भी अति आवश्यक होता है। सही दिशा होने वाला विकास भी जीवन के लिए कल्याणकारी हो सकता है। मानव-मानव के विकास के साथ बालपीढ़ी को भी सुसंस्कारी बनाने के लिए परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी ने ज्ञानशाला का विकास किया। परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने जीवन-विज्ञान, प्रेक्षाध्यान प्रदान किया। ज्ञानशाला के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कारों से भावित किया जाता है। आदमी की बुद्धि शुद्ध होती है तो चित्त भी शुद्ध होता है।

    आचार्यश्री के आगमन से हर्षित विजापुर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल चावत, स्थानकवासी समाज के अध्यक्ष श्री शांतिलाल दक, मूर्तिपूजक समाज के श्री हितेन्द्र भाई शाह व श्री मोहनलाल सुकलेचा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। स्थानीय तेरापंथ महिला मण्डल व तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ कन्या मण्डल, वर्धमान स्थानकवासी महिला ने अपने-अपने स्वागत गीत का संगान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में उपस्थित कुछ श्रद्धालुओं ने वर्षीतप का प्रत्याख्यान भी श्रीमुख से स्वीकार किया।

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  • મહુડી: ઘંટાકર્ણ મહાવીર ઉપાસના ક્ષેત્રમાં મહાસમણ એક દિવસ, વિજાપુરમાં પાર્શ્વનાથ જૈન તીર્થમાં પધાર્યા

    મહુડી: ઘંટાકર્ણ મહાવીર ઉપાસના ક્ષેત્રમાં મહાસમણ એક દિવસ, વિજાપુરમાં પાર્શ્વનાથ જૈન તીર્થમાં પધાર્યા

    નીરવ જોશી,વિજાપુર(joshinirav1607@gmail.com)

    (M-7838880134 & 9106814540)

    હાલમાં જૈન ધર્મના તેરાપંથ સંપ્રદાયના પ્રમુખ ગુરુ મહારાજ અને સંપ્રદાય પ્રમુખ મહાશ્રમણજી ની ગુજરાત યાત્રા ચાલી રહી છે ત્યારે તેઓ પ્રાંતિજ થી મહુડી યાત્રા કરીને ગઈ કાલે પધાર્યા હતા. ત્યારબાદ એક દિવસ મહુડીના  ઘંટાકર્ણ મહાવીર જિનાલય અને ઉપાસના ક્ષેત્રમાં દિવસ પસાર કરીને આજે એટલે કે શનિવાર રોજ તેઓ વિજાપુર ખાતે પધાર્યા છે.

    અહીં વિજાપુર ખાતે આવેલા શ્રી પાર્શ્વનાથ જૈન તીર્થ તેમજ શ્રીમદ બુદ્ધિ સાગરજી સૂરી જૈન સમાધિ મંદિરના પ્રાંગણમાં આવેલા સત્સંગ ભવન ખાતે બિરાજ્યા છે.

    આવતીકાલે રવિવારે તેઓ અહીંયા થી આજોલ તરફ વિચરણ કરશે.. આજોલ બાદ માણસા જશે… ત્યાંથી વાસણ ગામ એક દિવસ મુકામ કરશે અને ત્યારબાદ ગાંધીનગર તરફ અને ત્યારબાદ અમદાવાદ તરફ તેઓ 20 દિવસ માટે પ્રયાણ કરશે…

    ખાસ કરીને આજે વિજાપુર પધારેલા આચાર્ય મહાશ્રમણજીનું વિજાપુરના તેરાપંથ સમાજે ખૂબ ભાવભીનું સ્વાગત કર્યું હતું… ઉલ્લેખનીય છે કે જૈન ધર્મના  સંપ્રદાયના આશરે 13 થી 15 પરિવારોના સભ્યો વિજાપુરમાં રહે છે. પરંતુ અહીં આવેલા જૈન તીર્થ પાર્શ્વનાથ જૈન મંદિરના પ્રાગણમાં ખૂબ મોટી સુવિધા હોવાથી સમગ્ર ભારતમાંથી અનેક સંઘ પધાર્યા હતા અને મહાસમણજીના પ્રવચન તેમજ એમની મંગલ વંદના નો લાભ લીધો હતો.

    ઉલ્લેખનીએ છે કે મહુડી ખાતેનું  ક્ષેત્ર શ્રીમદ બુદ્ધિ સાગર સૂરી નામના તપસ્વી જયનાચાર્યથી પવિત્ર અને પાવન થયેલું  ક્ષેત્ર છે. પહેલી વાર કોઈ તેરાપંથ સંપ્રદાયના જયનાચાર્ય ત્યાં પહોંચ્યા હતા. ગઈકાલે તેઓ પ્રાંતિજ થી વિચરણ કરીને મહુડી પહોંચ્યા હતા.

    (From : Terapanth News Media)

    🌸 *महुडी स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर परिसर में पधारे राष्ट्रसंत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸

    *-आचार्यश्री के आगमन से हर्षित समस्त जैन समाज के किया भव्य अभिनंदन*

    *-सुखी जीवन के लिए करें इच्छाओं का परिसिमन : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण*

    *03.03.2023, शुक्रवार, महुडी, गांधीनगर (गुजरात) :*

    गुजरात की समृद्ध धरा को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने, जन-जन में मानवीय मूल्यों को जागृत करने के लिए अणुव्रत यात्रा कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य, भगवान महावीर के प्रतिनिधि शुक्रवार को अपनी धवल सेना संग गुजरात के प्रसिद्ध महुडी जैन मंदिर में पधारे तो हर्षित सकल जैन समाज ने मानवता के मसीहा का भव्य रूप में स्वागत किया। गांधीनगर जिले के महुडी में सन् 1917 में बुद्धिसागरसूरी द्वारा स्थापित यह मंदिर जैन धर्मावलम्बियों के लिए विख्यात है। इसे ऐतिहासिक रूप में मधुपुरी के नाम से जाना जाता था। ऐसे ऐतिहासिक स्थल में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी का मंगल शुभागमन जैन समाज की एकता को प्रदर्शित करने वाला था। मूर्तिपूजक संप्रदाय की साध्वी पुण्यप्रभाजी आदि साध्वियों ने आचार्यश्री का अभिनंदन किया तो आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।

    शुक्रवार को प्रातः की मंगल बेला आचार्यश्री प्रांतिज से गतिमान हुए। जन-जन को अपने आशीर्वाद से लाभान्वित करते हुए आचार्यश्री अगले गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। विहार के दौरान आचार्यश्री ने साबरकांठा जिले की सीमा को अतिक्रान्त कर गांधीनगर जिले की सीमा में मंगल प्रवेश किया।

    गुजरात की सुप्रसिद्ध नदी साबरमती को पार कर आचार्यश्री महुडी में पधारे तो एक अलग ही आध्यात्मिक माहौल छा गया। जैन धर्म के अनेक आम्नायों के लोग तेरापंथ के महानायक का अभिनंदन कर रहे थे। सभी पर आशीषवृष्टि करते हुए लगभग बारह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री महुडी भगवान पद्मप्रभु एवं घण्टाकर्ण महावीर जैन मंदिर में पधारे। वहां से आचार्यश्री प्रवास हेतुएक धर्मशाला में पधारे।

    यहां आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित जनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगल प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के भीतर इच्छाएं होती हैं। प्राणी इच्छाशील होता है। आचार्यश्री ने इच्छाओं के प्रकारों का वर्णन करते हुए कहा कि इच्छाएं आकाश के समान अनंत होती हैं। यदि किसी आदमी को सोने का पहाड़ भी प्राप्त हो जाए तो उसकी इच्छा एक और सोने के पहाड़ को प्राप्त करने की हो जाएगी। इस प्रकार इच्छाओं को कोई अंत नहीं है। इच्छाएं अच्छी और बुरी भी हो सकती हैं। किसी का अनिष्ट करने की इच्छा, किसी के साथ बुरा करने की इच्छा, किसी का धन हड़पने की इच्छा बुरी इच्छाएं होती हैं। आदमी को इनसे बचने का प्रयास करना चाहिए। सामान्य इच्छा तो फिर भी उचित हो सकती है, किन्तु अध्यात्म जगत में आगे बढ़ने की इच्छा, अपनी आत्मा का कल्याण करने की इच्छा, साधुत्व को अपनाने और अपने जीवन में त्याग की चेतना को बढ़ाने की इच्छा सदीक्षा होती है। व्यक्ति को अपनी इच्छाओं का परिसिमन करने का प्रयास करना चाहिए।

    आचार्यश्री ने प्रवचन के मध्य गुजरात के बाव क्षेत्र से पहुंचे वर्षीतपरत श्रावक-श्राविकाओं व साधु-साध्वियों को वर्षीतप का प्रत्याख्यान करवाया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पुनः प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि प्राणी भौतिक इच्छाओं पर नियंत्रण रखने का प्रयास करे और एक-दूसरे के प्रति तथा स्वयं के प्रति शुभेच्छा रखने का प्रयास करे। आचार्यश्री ने कहा कि आज हम जैन धर्म से जुड़े इस स्थान में आए हैं। भगवान महावीर हमारे जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर थे। ऐसे धर्मस्थान में आदमी ध्यान, स्वाध्याय, जप, तप आदि के द्वारा भौतिक इच्छाओं का दमन करने और वीतरागता के पथ पर आगे बढ़ने का प्रयास करे।

    आचार्यश्री के मंगल उद्बोधन से पूर्व साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने भी उपस्थित जनता को उद्बोधित किया। गत चतुर्मास बाव में करने वाले मुनि निकुंजकुमारजी व मुनि मार्दवकुमारजी ने अपने आराध्य के दर्शन तो गुरुवार को ही कर लिए थे, किन्तु आज के प्रवचन में आचार्यश्री से प्राप्त हुए आशीर्वाद के साथ मुनि निकुंजकुमारजी ने अपनी हर्षाभिव्यक्ति दी। इस मंदिर परिसर से जुड़े हुए श्री भूपेन्द्र भाई मेहता ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी।

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  • પ્રાચીન પ્રાંતિજને વિદાય આપી મહાશ્રમણજી મહુડી પધારશે

    પ્રાચીન પ્રાંતિજને વિદાય આપી મહાશ્રમણજી મહુડી પધારશે

    નીરવ જોશી, હિંમતનગર (M-7838880134)

    *02.03.2023, गुरुवार, प्रान्तीज, साबरकांठा (गुजरात) :*

    તેરાપંથ સંપ્રદાયના પ્રમુખ અને મહાન આચાર્ય મહાશ્રમણજી હાલ ગુજરાતના પ્રવાસે છે અને ગુજરાતના સાબરકાંઠા ખાતે અલગ અલગ વિસ્તારોમાં વિચરણ કરી રહ્યા છે.

    ત્યારે ગઈકાલે એટલે કે ગુરુવારના રોજ તેઓ પ્રાચીન શહેર પ્રાંતિજ ખાતે પહોંચ્યા હતા. પ્રાંતિજમાં તેમને એક દિવસનો રોકાણ કરી અને ખૂબ જ સરસ રીતે પ્રાંતિજના તેરાપંથી અને અધ્યાત્મ પ્રેમીઓને પ્રવચન કર્યું હતું અને એક યાદગાર અધ્યાત્મનો કાર્યક્રમ કર્યો હતો…આ કાર્યક્રમમાં પ્રાંતિજના સ્થાનિક રાજકારણીઓ તેમજ અગ્રણીઓ અને અન્ય ધર્મના લોકો પણ જોડાયા હતા. આમ કાર્યક્રમમાં અધ્યાત્મની અને યોગ તેમજ ધર્મના સાચા હાર્દની ચર્ચા થઈ હતી અને અધ્યાત્મિક મૂલ્યો પર જીવન જીવવાની શીખ મહાસમણએ પ્રાંતિજ વાસીઓને આપી હતી.

     

    આજે પ્રાંતિજ થી મહાશ્રમણજી વિચરણ કરીને મહુડી ખાતે પહોંચશે અને મહુડી ખાતે એક દિવસનો વિરામ કરશે. મહુડી એ જૈન ધર્મના તેમજ અન્ય ધર્મના લોકોમાં ખૂબ જ લોકપ્રિય તીર્થંકર ને સમર્પિત અને લોકરક્ષક દેવતા એવા ઘંટાકર્ણ મહાવીર નું જૈન તીર્થ આવેલું છે…આ સુપ્રસિદ્ધ – વિશ્વમાં જાણીતું તીર્થની મુલાકાત લઈને મહાસમણજી મહુડી તીર્થને પણ પવિત્ર કરશે. ત્યાં પણ આ જ પ્રમાણે કાર્યક્રમ થશે.

    🌸 *क्षमा रूपी खड्ग के सामने नहीं टिकते दुर्जन : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण* 🌸

    *-गतिमान ज्योतिचरण पहुंचे प्रान्तीज, श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम*

    *-महातपस्वी की अभिवंदना में पहुंचे विधायक, सांसद और पूर्व मंत्री*

    *-क्षमाशील बनने को आचार्यश्री ने दी प्रेरणा, भक्तों ने अपनी भावनाओं को किया अभिव्यक्त*

    उत्तर गुजरात में अणुव्रत यात्रा कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अणुव्रत अनुशास्ता, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग गुरुवार को प्रान्तीज में पधारे। पहली बार अपने आराध्य को अपने नगर में पाकर प्रान्तीज के श्रद्धालु भावविभोर नजर आ रहे थे। प्रान्तीज का कण-कण ज्योतिचरण का स्पर्श कर स्वयं को मानों धन्य कर रहा था। भव्य स्वागत जुलूस में उमड़े श्रद्धालुओं द्वारा किया जा रहा जयघोष उनके उल्लास, उत्साह और आनंद को दर्शा रहा था। मार्ग में उपस्थित श्रद्धालुओं पर आशीषवृष्टि करते हुए शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी प्रान्तीज में स्थित सेठ पी एण्ड आर हाईस्कूल के प्रांगण में पधारे।

    गुरुवार को प्रातः की मंगल बेला में सलाल से जैन श्वेताम्बर तेरापंथ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की गतिमान हुए। सलालवासियों को मंगल आशीष प्रदान कर आचार्यश्री आगे की ओर गतिमान हुए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर गतिमान आचार्यश्री की धवल सेना को देखकर ऐसा लग रहा मानों कोई अध्यात्म की नदी की धवल धारा आज राजमार्ग पर प्रवाहित हो रही हो। राजमार्ग के दोनों ओर कहीं मकान तो कहीं खेत नजर आ रहे थे। उन खेतों दलहन, तेलहन, गेहूं आदि के फसलों के साथ कहीं-कहीं अरण्डी की खेती और अनेक प्रकार के साग-सब्जियों की खेती भी दिखाई दे रही थी। उन खेतों में श्रम कर रहे किसानों को भी महाश्रमशील आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन करने और आशीष प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा था। लगभग आठ किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री प्रान्तीज में निर्धारित प्रवास हेतु सेठ पी एण्ड आर हाईस्कूल के प्रांगण में पधारे।

    आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने जनता को उद्बोधित किया। उपस्थित को जनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी अपनी चेतना की निर्मलता और आत्मा की शांति के लिए क्षमा रूपी धर्म को धारण करने का प्रयास करे। क्षमा का भाव हो तो चित्त प्रसन्न और जीवन में शांति रह सकती है। किसी भी प्रकार की विपरित परिस्थति में भी क्षमा को धारण कर लिया जाए तो जीवन अच्छा हो सकता है। कहा गया है कि कम खाओ, स्वस्थ रहो, गम खाओ, मस्त रहो और नम जाओ, प्रशस्त रहो।

    जो आदमी अपने जीवन में क्षमा रूपी खड्ग को धारण कर लेता है, दुर्जन भी उसका व्यक्ति का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। प्रतिकूल परिस्थितियों और कठिनाइयों को सहन करने की क्षमता का विकास हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। क्षमा और सहिष्णुता तो साधु के जीवन में तो होता ही है, गृहस्थ के जीवन में भी सहिष्णुता और क्षमाशीलता का विकास हो जाए, तो समस्त प्रकार के फसादों से बचाव हो सकता है। आचार्यश्री प्रान्तीजवासियों को अपने जीवन में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की चेतना को पुष्ट बनाए रखने का मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया।

    आचार्यश्री के अभिनंदन में पहुंचे साबरकांठा के सांसद श्री दीप सिंह राठौड़, पूर्व सांसद व गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री श्री जयसिंह चाह्वाण व स्थानीय पूर्व विधायक श्री महेन्द्रसिंह बाड़ेया ने आचार्यश्री के स्वागत में अपने भावनाओं को अभिव्यक्ति दी और आचार्यश्री से मंगल मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। स्थानीय तेरापंथ समाज प्रान्तीज के अध्यक्ष श्री भैरू भाई बाबेल, श्री जयदीप बाबेल, श्री प्रकाश चोरड़िया, मोंटू, श्वेताम्बर संघ के श्री भरत भाई ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। स्थानीय ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तेरापंथ युवक परिषद व तेरापंथ महिला मण्डल तथा कन्या मण्डल ने पृथक्-पृथक् स्वागत गीत का संगान किया।

     

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