Category: दुनिया

  • PM Modi Gold Appeal : एक साल तक सोना न खरीदें, क्यों दिया यह आह्वान?

    PM Modi Gold Appeal : एक साल तक सोना न खरीदें, क्यों दिया यह आह्वान?

    PM Modi Gold Appeal : हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक अहम अपील की है। 10 मई 2026 को हैदराबाद के सिकंदराबाद में आयोजित एक जनसभा में पीएम मोदी ने कहा कि देश की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए कम से कम एक साल तक सोना न खरीदें।
    पीएम मोदी का गोल्ड अपील क्या था?

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शादियाँ हों या कोई अन्य त्योहार-समारोह, इस साल सोने की खरीदारी टाल दें। उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित और आर्थिक संकट के समय देश के प्रति कर्तव्य बताया।

    “सोने की खरीदारी में विदेशी मुद्रा का बहुत अधिक उपयोग होता है। राष्ट्रीय हित में हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि एक साल तक घर में कितने भी फंक्शन हों, सोना न खरीदें।”

     

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    क्यों किया पीएम मोदी ने यह अपील?

    भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातकों में से एक है। हर साल शादियों, त्योहारों और आभूषणों की वजह से अरबों डॉलर विदेश जाते हैं। पीएम मोदी के गोल्ड

    अपील के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

    • विदेशी मुद्रा भंडार की बचत सोने का आयात भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ है। डॉलर का खर्च बढ़ने से रुपया कमजोर हो सकता है।
    • पश्चिम एशिया संकट और तेल की महंगाई मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। भारत पहले ही तेल आयात पर बहुत खर्च करता है। ऐसे में सोने का अतिरिक्त आयात देश की विदेशी मुद्रा स्थिति को और दबाव में डाल सकता है।
    • आर्थिक संकट का समय (संकट का काल) पीएम ने इसे “संकट का काल” बताया और कहा कि इस समय हर नागरिक को अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर देश की मदद करनी चाहिए।

    सिर्फ सोना ही नहीं, अन्य अपीलें भी

    पीएम मोदी की इस अपील के साथ-साथ उन्होंने अन्य सुझाव भी दिए: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें (कार풪लिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम) विदेश यात्राएं टालें, खासकर डेस्टिनेशन वेडिंग जहां तक हो सके, आयातित खाद्य तेल और रासायनिक खाद का उपयोग कम करें

    क्या यह बैन है?

    नहीं। PM Modi Gold Appeal कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। यह एक स्वैच्छिक अपील है जो देशवासियों से राष्ट्रहित में सहयोग मांगती है। सरकार उम्मीद करती है कि जनता अपनी समझदारी से इस अपील को आगे बढ़ाएगी।

    PM Modi Gold Appeal अभी ग्लोबल परिवर्तन के बीच एक बहुत बड़ा और दूरदर्शी कदम है। अगर हम सब मिलकर एक साल तक सोने की खरीदारी में संयम बरतें तो देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

  • India Russia Free Trade : भारत-रूस संबंधों का नया अध्याय, फ्री ट्रेड समझौते की दिशा में मजबूत कदम

    India Russia Free Trade : भारत-रूस संबंधों का नया अध्याय, फ्री ट्रेड समझौते की दिशा में मजबूत कदम

    India Russia Free Trade : ग्लोबल भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर से चमकती नजर आई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान आयोजित India-Russia बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा शुरू होने की घोषणा की। यह कदम न केवल आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि दोनों पक्षों के संबंधों को ‘उत्तर तारा’ की तरह अटल बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। 

    India Russia Free Trade : व्यापार का नया द्वार

    बिजनेस फोरम में PM Modi ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (IAIU) के साथ India Russia Free Trade पर बातचीत की शुरुआत हो चुकी है। IAIU में रूस के अलावा आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश शामिल हैं, जो मिलकर एक विशाल बाजार का निर्माण करते हैं। पुतिन ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि यह समझौता वर्तमान 64 अरब डॉलर के दोनों तरफ व्यापार को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    क्यों है यह समझौता महत्वपूर्ण? सोचिये आप की  – सीमाओं पर लगने वाले टैरिफ और बाधाओं के बिना भारतीय उत्पाद जैसे चाय, मसाले, IT सेवाएं और फार्मास्यूटिकल्स आसानी से रूसी बाजार में प्रवेश कर सकें। दूसरी ओर, रूस से आने वाले कच्चे तेल, गैस, उर्वरक और रक्षा उपकरण भारत के लिए सस्ते और विश्वसनीय स्रोत बन जाएंगे। यह न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर ग्लोबल अनिश्चितताओं से निपटने में मदद करेगा।

    India-Russia Free Trade
    India Russia Free Trade

    2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य : समय से पहले संभव?

    पिछले वर्ष India-Russia Business 12% की रफ्तार से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अब दोनों देशों ने 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी का मानना है कि मजबूत इरादे और रणनीतिक साझेदारी से यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल किया जा सकता है।

    एक दिलचस्प पहलू यह है कि व्यापार लेन-देन में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है, जो वैश्विक मुद्रा युद्धों के दौर में एक स्मार्ट कदम है। बिजनेस फोरम में उद्योगपतियों ने भी इस दिशा में सुझाव दिए, जैसे कि संयुक्त वेंचर और निवेश को बढ़ावा देना।

    रक्षा से लेकर हरित ऊर्जा तक

    India Russia Free Trade के अलावा, मोदी-पुतिन की चर्चा ने कई अन्य क्षेत्रों को छुआ। सुरक्षा और रक्षा में भारत ने निजी कंपनियों को अधिक खोलने का फैसला लिया है, जिससे रूस के साथ संयुक्त उत्पादन बढ़ेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी नई साझेदारियां बनेंगी, जहां भारतीय स्टार्टअप्स रूसी तकनीक से लाभान्वित होंगे।

    कृषि, EV (इलेक्ट्रिक वाहन) बनाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी। विशेष रूप से, हरित ऊर्जा पर फोकस करते हुए दोनों देश सौर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में साथ काम करेंगे। यह कदम भारत की ‘नेट जीरो’ महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा, जबकि रूस अपनी ऊर्जा विविधीकरण की योजना को आगे बढ़ाएगा।

    India-Russia Free Trade
    India Russia Free Trade

    ग्लोबल चुनौतियों के बीच अटल दोस्ती

    India Russia Free Trade : आज के दौर में जब विश्व दो ध्रुवों में बंटा नजर आता है, India-Russia Relation एक मिसाल हैं। यूक्रेन संकट हो या ग्लोबल महामारी, दोनों देशों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। पुतिन की यह यात्रा – जो वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा थी – ने साबित कर दिया कि सच्ची साझेदारी भू-राजनीति से ऊपर होती है।

    PM Modi ने फोरम में कहा, “हमारी दोस्ती उत्तर तारा की तरह है – जो रास्ता दिखाती है और कभी नहीं डगमगाती।” यह शब्द न केवल भावुक हैं, बल्कि व्यावहारिक भी। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

    उज्ज्वल भविष्य की ओर

    India Russia Free Trade चर्चा एक नई शुरुआत है। यह न केवल व्यापारिक अवसर पैदा करेगी, बल्कि लाखों नौकरियां, नवाचार और विकास के द्वार खोलेगी। जैसे ही समझौता अंतिम रूप लेगा, भारतीय उद्योगों को रूस के विशाल बाजार तक पहुंच मिलेगी, और रूस को भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का लाभ।

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    यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि मजबूत संबंधों का आधार विश्वास और पारस्परिक लाभ होता है। आशा है कि जल्द ही हम 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार करते हुए एक नई सफलता की कहानी लिखेंगे।

  • Independence Day Trip : 15 अगस्त के लॉन्ग वीकेंड पर घूमने की टॉप जगहें

    Independence Day Trip : 15 अगस्त के लॉन्ग वीकेंड पर घूमने की टॉप जगहें

    Independence Day Trip : 15 अगस्त 2025 को भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। यह दिन न केवल देशभक्ति और उत्साह का प्रतीक है, बल्कि लंबे डेस्टिनेशन वीकेंड के कारण भारतीयों के लिए एक छोटी छुट्टी का अवसर भी लेकर आता है। इस साल स्वतंत्रता दिवस शुक्रवार को पड़ रहा है, जिसके कारण कई लोग इस लंबे डेस्टिनेशन वीकेंड का उपयोग यात्रा करने के लिए कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारतीय इस खास अवसर पर कहां जा रहे हैं? हाल के डेटा और ट्रैवल ट्रेंड्स के आधार पर, हम आपको उन शीर्ष स्थानों के बारे में बता रहे हैं, जो इस स्वतंत्रता दिवस(Independence Day Trip) के लंबे डेस्टिनेशन वीकेंड पर भारतीय यात्रियों की पहली पसंद बन रहे हैं।

    Independence Day Trip : डेटा क्या कहता है?

    Independence Day Trip : हाल के ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स जैसे मेकमायट्रिप, यात्रा, और क्लियरट्रिप के डेटा के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के लंबे सप्ताहांत के दौरान भारतीयों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की यात्राओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। खास तौर पर, लोग प्रकृति, संस्कृति, और साहसिक गतिविधियों से भरपूर स्थानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भी वृद्धि हुई है, क्योंकि कई भारतीय पासपोर्ट-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल डेस्टिनेशन की तलाश में हैं।

    Independence Day Trip
    Independence Day Trip

    शीर्ष घरेलू डेस्टिनेशन 

    1. गोवा:
      गोवा हमेशा से भारतीयों की पहली पसंद रहा है, और इस स्वतंत्रता दिवस(Independence Day Trip) पर भी यह ट्रेंड बरकरार है। समुद्र तटों, जीवंत नाइटलाइफ, और स्वादिष्ट समुद्री भोजन के कारण गोवा परिवारों और युवाओं दोनों के लिए आकर्षक है। डेटा के अनुसार, बागा और कैलंग्यूट जैसे समुद्र तटों पर बुकिंग में 30% की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, गोवा में स्वतंत्रता दिवस के उत्सव जैसे परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
    2. हिमाचल प्रदेश (मनाली और शिमला):
      ठंडी हवाओं और प्राकृतिक सौंदर्य की तलाश में हिमाचल प्रदेश के हिल स्टेशन जैसे मनाली और शिमला शीर्ष स्थानों में शामिल हैं। डेटा से पता चलता है कि इस लंबे सप्ताहांत के लिए होटल और होमस्टे की बुकिंग में 25% की वृद्धि हुई है। साहसिक गतिविधियां जैसे पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग, और रिवर राफ्टिंग युवा यात्रियों को खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं।
    3. उत्तराखंड (ऋषिकेश और मसूरी):
      आध्यात्मिक और साहसिक अनुभवों की तलाश में ऋषिकेश और मसूरी भी लोकप्रिय डेस्टिनेशन में शुमार हैं। गंगा नदी के किनारे योग और ध्यान सत्रों के साथ-साथ व्हाइट वाटर राफ्टिंग जैसे रोमांचक अनुभव यात्रियों को आकर्षित कर रहे हैं। मसूरी में केम्प्टी फॉल्स और गन हिल जैसे पर्यटक स्थल परिवारों के बीच लोकप्रिय हैं।
    4. जयपुर, राजस्थान:
      राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहर और शाही आकर्षण के लिए जाना जाता है। आमेर किला, हवा महल, और सिटी पैलेस जैसे स्थानों पर पर्यटकों की भीड़ देखी जा रही है। डेटा के अनुसार, जयपुर में स्वतंत्रता दिवस के आसपास हेरिटेज होटलों की बुकिंग में 20% की वृद्धि हुई है।
    5. केरल (मुन्नार और कोवलम):
      प्रकृति प्रेमियों के लिए केरल के मुन्नार और कोवलम बेहतरीन डेस्टिनेशन हैं। चाय के बागानों और समुद्र तटों का अनूठा मिश्रण यात्रियों को शांति और सुकून प्रदान करता है। बैकवाटर क्रूज और आयुर्वेदिक स्पा भी इस लंबे सप्ताहांत के लिए लोकप्रिय हैं।
    Independence Day Trip
    Independence Day Trip

    शीर्ष अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन 

    1. दुबई, संयुक्त अरब अमीरात:
      दुबई भारतीय यात्रियों के लिए सबसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन बना हुआ है। वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा, शॉपिंग मॉल, बुर्ज खलीफा, और डेजर्ट सफारी जैसे आकर्षण इसे परिवारों और युवाओं दोनों के लिए पसंदीदा बनाते हैं। ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, दुबई के लिए फ्लाइट बुकिंग में 40% की वृद्धि देखी गई है।
    2. थाईलैंड (बैंकॉक और पटाया):
      थाईलैंड अपने किफायती ट्रैवल पैकेज और जीवंत संस्कृति के लिए भारतीयों के बीच लोकप्रिय है। बैंकॉक के मंदिर, स्ट्रीट फूड, और शॉपिंग मार्केट्स के साथ-साथ पटाया के समुद्र तट और नाइटलाइफ इस लंबे सप्ताहांत के लिए शीर्ष पसंद हैं।
    3. मालदीव:
      हनीमून और लग्जरी ट्रैवल की तलाश में मालदीव भारतीयों की पहली पसंद बन रहा है। ओवरवाटर विला और क्रिस्टल-क्लियर समुद्र तट इस गंतव्य को विशेष बनाते हैं। डेटा के अनुसार, मालदीव के लिए रिजॉर्ट बुकिंग में 15% की वृद्धि हुई है।
    4. सिंगापुर:
      सिंगापुर अपने परिवार-अनुकूल आकर्षणों जैसे यूनिवर्सल स्टूडियोज, मरीना बे सैंड्स, और सेंटोसा आइलैंड के लिए जाना जाता है। भारतीय परिवारों के बीच यह गंतव्य बेहद लोकप्रिय है, खासकर बच्चों के साथ यात्रा करने वालों के लिए।
    5. श्रीलंका:
      पड़ोसी देश श्रीलंका अपनी सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भारतीय यात्रियों को आकर्षित कर रहा है। कोलंबो, कैंडी, और बेंटोटा जैसे स्थान किफायती और पासपोर्ट-मुक्त यात्रा के लिए आदर्श हैं।
    Independence Day Trip
    Independence Day Trip

    क्यों बढ़ रही है यात्रा की मांग?

    Independence Day Trip : स्वतंत्रता दिवस का लंबा डेस्टिनेशन वीकेंड कई भारतीयों के लिए एक छोटी छुट्टी का अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, कई कारण इस यात्रा की मांग को बढ़ा रहे हैं:

    • आर्थिक वृद्धि: भारत की अर्थव्यवस्था में हाल के वर्षों में हुई प्रगति के कारण मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ी है, जिससे लोग अधिक यात्रा कर रहे हैं।
    • काम से ब्रेक: लंबे समय तक काम के बाद लोग तनावमुक्त होने के लिए छोटी यात्राएं पसंद कर रहे हैं।
    • सोशल मीडिया का प्रभाव: इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रैवल ब्लॉगर्स और प्रभावशाली लोगों के कारण नए गंतव्यों की खोज में रुचि बढ़ी है।
    • बेहतर कनेक्टिविटी: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए बेहतर उड़ान और रेल कनेक्टिविटी ने यात्रा को और आसान बना दिया है।

    यात्रा टिप्स

    • जल्दी बुकिंग करें: स्वतंत्रता दिवस के लंबे सप्ताहांत के कारण होटल और फ्लाइट्स की मांग अधिक है। इसलिए, अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें।
    • स्थानीय उत्सवों का आनंद लें: कई गंतव्यों पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनका हिस्सा बनें।
    • बजट का ध्यान रखें: किफायती होमस्टे और ट्रैवल पैकेज चुनकर आप अपने बजट में शानदार यात्रा का आनंद ले सकते हैं।
    • सुरक्षा पहले: यात्रा के दौरान कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करें और स्थानीय नियमों का सम्मान करें।
    Independence Day Trip
    Independence Day Trip

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    Independence Day Trip : स्वतंत्रता दिवस का लंबा डेस्टिनेशन वीकेंड भारतीयों के लिए न केवल देशभक्ति का उत्सव है, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ यादगार पल बिताने का अवसर भी है। चाहे आप गोवा के समुद्र तटों पर आराम करना चाहें, हिमाचल की पहाड़ियों में रोमांच की तलाश करें, या दुबई में आधुनिकता का आनंद लें, इस बार के डेस्टिनेशन हर तरह के यात्री के लिए कुछ न कुछ खास लेकर आए हैं। तो, अपनी बैग्स पैक करें और इस स्वतंत्रता दिवस को एक यादगार यात्रा के साथ मनाएं!

  • थाईलैंड में किराए पर पत्नी(Rental Wife) की प्रथा: प्यार या व्यापार या  विवादास्पद मुद्दा?

    थाईलैंड में किराए पर पत्नी(Rental Wife) की प्रथा: प्यार या व्यापार या विवादास्पद मुद्दा?

    “किराए पर पत्नी” (Rental Wife) का विचार हाल ही में थाईलैंड(Thailand) में विवाद का विषय बन गया है, खासकर पटाया में, जहां यह प्रथा व्यापक हो चुकी है। इस प्रथा को कभी-कभी “काली मोती” (Black Pearls) कहा जाता है। यह एक अस्थायी व्यवस्था है, जिसे “अस्थायी विवाह” (Temporary Marriage) के रूप में जाना जाता है, जिसमें गरीब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं विदेशी पर्यटकों के साथ समय बिताने के लिए सहमति देती हैं। पटाया के रेड-लाइट जिले में स्थित बार और नाइट क्लबों में यह प्रथा काफी प्रचलित हो चुकी है।

    किताब “Thai Taboo: The Rise of Wife Rental in Modern Society”

    हाल ही में प्रकाशित एक किताब “Thai Taboo: The Rise of Wife Rental in Modern Society: Exploring Love, Commerce, and Controversy in Thailand’s Wife Rental Phenomenon”, जो लेखक Lavert A Emmanuel द्वारा लिखी गई है, इस विवादास्पद प्रथा का विस्तार से वर्णन करती है। यह किताब बताती है कि कैसे यह प्रथा, जो पहले गुप्त रूप से मौजूद थी, अब थाई समाज में पुनः प्रचलित हो रही है।

    महिला किराए(Rental Wife)  पर देने का बढ़ता व्यवसाय

    इस नए और विवादास्पद उद्योग ने एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन लिया है, विशेष रूप से उन युवाओं के लिए जो पारंपरिक रोजगार के माध्यम से जीविका अर्जित करने में संघर्ष कर रहे हैं। इस उद्योग में अस्थायी साथी और स्नेह के लिए शुल्क लिया जाता है। ये समझौते आम तौर पर कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक होते हैं। ये महिलाएं मुख्य रूप से पर्यटकों से बार और नाइट क्लबों में मिलती हैं। उनकी भूमिकाएं विभिन्न होती हैं, जिनमें साथी के रूप में समय बिताना या अनौपचारिक रूप से यात्रा गाइड का काम करना शामिल है।

    किराए पर पत्नी(Rental Wife) की कीमत

    किराए पर पत्नी (Rental Wife) रखने का समय और शुल्क समझौते पर निर्भर करते हैं। शुल्क महिला की सुंदरता, शिक्षा और आयु के आधार पर तय किया जाता है। यह राशि $1,600 से लेकर $116,000 तक हो सकती है। कुछ मामलों में, जब संबंध समय के साथ विकसित होते हैं, तो महिलाएं अपने ग्राहकों से शादी कर लेती हैं या उनके साथी के रूप में लंबे समय तक पैसे कमाती रहती हैं।

    Thailand : Wife Rental
    Thailand : Rental Wife

    संपर्क कैसे किया जाता है?

    यह “किराए पर पत्नी”  (Rental Wife)  का व्यवसाय थाईलैंड में एक व्यवस्थित रूप धारण कर चुका है। विदेशी पर्यटक जो पटाया और अन्य थाई शहरों में आते हैं, अक्सर इन महिलाओं से सीधे संपर्क करते हैं। ये महिलाएं आमतौर पर बार, रेस्तरां, और नाइट क्लबों में ग्राहकों से मिलती हैं। यदि आपसी रुचि होती है, तो फिर एक बातचीत होती है जिसमें साथ बिताने के शर्तों का निर्धारण किया जाता है।

    क्या इस प्रथा का कोई कानूनी नियंत्रण है?

    हालांकि, इस प्रथा के लिए कोई स्पष्ट कानूनी नियम या सुरक्षा नहीं है, थाई सरकार इस बात को स्वीकार करती है कि यह प्रथा देश में हो रही है, और इसके लिए कोई विशिष्ट कानून नहीं है।

    “किराए पर पत्नी” (Rental Wife)  की बढ़ती लोकप्रियता के कारण

    “किराए पर पत्नी”  (Rental Wife)  या “किराए पर गर्लफ्रेंड”  (Wife Girlfriend) का विचार मुख्य रूप से जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रेरित है, जहां इस प्रकार की सेवाएं पहले से ही लोकप्रिय हैं। थाईलैंड में इस व्यवसाय के विकास के कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं।

    1. अकेलापन और शहरीकरण: थाईलैंड में अकेलापन बढ़ रहा है, खासकर शहरीकरण और व्यस्त जीवनशैली के कारण। लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या के चलते स्थायी संबंध बनाने का समय नहीं निकाल पाते, जिससे कुछ लोग अस्थायी साथी की तलाश करते हैं।
    2. पर्यटन उद्योग: थाईलैंड एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है, जो स्थानीय साथियों के साथ यात्रा और साझा अनुभवों की तलाश में रहते हैं। “किराए पर पत्नी” जैसी सेवाएं इस मांग को पूरा करती हैं।
    3. संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता: थाईलैंड की सांस्कृतिक धारा रिश्तों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति एक लचीला दृष्टिकोण अपनाती है, जिसके कारण ऐसी सेवाओं को अन्य देशों की तुलना में कम सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

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    इस प्रकार, “किराए पर पत्नी” (Rental Wife) का व्यवसाय थाईलैंड में तेजी से बढ़ता हुआ और विवादास्पद उद्योग बन चुका है। इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर कई बहसें हो रही हैं, जबकि यह प्रथा कुछ युवाओं के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है।

  • Syria News: असद मॉस्को भागे इज़राइल ने दमिश्क पर हवाई हमले किए, गोलान हाइट्स में अधिक क्षेत्र कब्जाया

    Syria News: असद मॉस्को भागे इज़राइल ने दमिश्क पर हवाई हमले किए, गोलान हाइट्स में अधिक क्षेत्र कब्जाया

    Syria War-

    एक चौंकाने वाली घटना के तहत, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कथित रूप से सीरिया(Syria) से भागकर मॉस्को में शरण ली है, जबकि इज़राइल दमिश्क पर हवाई हमले तेज़ कर रहा है और गोलान हाइट्स में अपना नियंत्रण बढ़ा रहा है। यहां सीरिया(Syria) में हाल की घटनाओं, चल रहे संघर्ष और अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थों का संक्षिप्त विवरण है।

    Syria : बशर अल-असद की बढ़ती संकट के बीच मॉस्को भागने की खबर

    एक चौंकाने वाली घटनाक्रम में, सीरिया(Syria) के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने सीरिया छोड़कर मॉस्को में शरण ली है। यह अप्रत्याशित कदम सीरियाई गृहयुद्ध के जारी रहने के बीच उठाया गया है, जिसमें बढ़ती विदेशी हस्तक्षेप और घरेलू अस्थिरता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    Syrian President : Bashar al-Assad
    Syrian President : Bashar al-Assad

    सूत्रों के अनुसार, असद का सीरिया (Syria) से भागने का कारण बढ़ते तनाव और सैन्य दबाव से जुड़ा है, खासकर इज़राइल द्वारा दमिश्क में रणनीतिक स्थानों पर किए गए हवाई हमलों से। सीरियाई सरकार की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, जबकि विपक्षी बल देश के विभिन्न हिस्सों में प्रभाव बढ़ाते जा रहे हैं। असद के अचानक इस्लामिक राज्य से बाहर जाने के कारण सीरिया और असद शासन के भविष्य के बारे में कई अटकलें लगाई जा रही हैं।

    दमिश्क पर इज़राइली हमले: एक बढ़ती हुई स्थिति

    इज़राइल ने सीरिया(Syria) में अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर दिया है, विशेष रूप से सीरियाई राजधानी दमिश्क को लक्ष्य बनाकर। हालिया हवाई हमलों ने महत्वपूर्ण सैन्य और सरकारी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र और अधिक अस्थिर हो गया है। इज़राइल के ये हमले ईरान समर्थित बलों और हिज़्बुल्ला को कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं, जिनका सीरिया(Syria) में महत्वपूर्ण प्रभाव है।

    Syria War

    यह हवाई हमले नई बात नहीं हैं; इज़राइल पहले भी ऐसे हमले कर चुका है, जिनका उद्देश्य उन समूहों की गतिविधियों को बाधित करना था जिन्हें वह अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। हालांकि, हालिया हमलों ने संघर्ष के बढ़ने की आशंका को बढ़ा दिया है, खासकर जब असद सरकार पहले से ही कमजोर हो चुकी है।

    गोलान हाइट्स में इज़राइल का नियंत्रण बढ़ाना

    दमिश्क पर लगातार हमलों के अलावा, इज़राइल गोलान हाइट्स में भी अपने क्षेत्रीय नियंत्रण को बढ़ा रहा है, जो 1967 के छह दिन युद्ध से इज़राइल के कब्जे में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल ने इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में और अधिक भूमि कब्जा कर ली है, जिसे सीरिया(Syria) और इज़राइल दोनों द्वारा दावा किया जाता है।

    गोलान हाइट्स में इज़राइल का नियंत्रण बढ़ने पर सीरिया(Syria) और क्षेत्र के अन्य देशों से निंदा की जा रही है। यह क्षेत्र अभी भी विवाद का विषय है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इसके दर्जे को लेकर विभाजित है। इज़राइल की गोलान हाइट्स में बढ़ती गतिविधियाँ इसे अपने क्षेत्रीय प्रभुत्व को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानती हैं।

    सीरिया संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थ (International implications of the Syria conflict)

    सीरिया(Syria) में चल रहे संघर्ष, जो अब हालिया इज़राइली सैन्य कार्रवाइयों से और अधिक जटिल हो गया है, के बड़े अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थ हैं। असद के मॉस्को भागने के साथ, रूस की भूमिका इस क्षेत्र में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। मॉस्को सीरियाई शासन का एक प्रमुख सहयोगी रहा है, जो सैन्य समर्थन और राजनीतिक समर्थन प्रदान करता रहा है।

    Syria War
    Syria War

    यह स्थिति मध्य पूर्व में व्यापक भू-राजनीतिक गतिशीलताओं को लेकर चिंता बढ़ाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान, तुर्की और अन्य क्षेत्रीय शक्तियाँ सीरिया(Syria) संघर्ष में गहरे रूप से शामिल हैं, प्रत्येक अपनी-अपनी हितों को बढ़ावा दे रहा है। जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ता है, विदेशी हस्तक्षेप की संभावना भी बढ़ती जा रही है, जो एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है।

     एक संघर्षरत क्षेत्र

    सीरिया(Syria) का संघर्ष एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जिसमें बशर अल-असद के मॉस्को भागने की खबर, दमिश्क पर इज़राइली हवाई हमले, और गोलान हाइट्स में बढ़ते क्षेत्रीय कब्जे की घटनाएँ शामिल हैं। स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है, और सीरिया((Syria)) का भविष्य अनिश्चित है, जबकि क्षेत्रीय तनाव बढ़ते जा रहे हैं।

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    जैसे-जैसे इज़राइल गोलान हाइट्स(Golan Heights) में अपना कब्जा मजबूत करता जा रहा है और सीरिया(Syria) में अपनी सैन्य कार्रवाइयाँ जारी रखता है, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के पास इस बढ़ते संकट को हल करने के लिए कठिन निर्णय होंगे। रूस और ईरान जैसी प्रमुख शक्तियों की भूमिका को देखते हुए स्थिति अब और भी जटिल और खतरनाक हो गई है, और शांति की संभावना अब भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • चीनी शहरों को निशाना बनाने में सक्षम रूसी बमवर्षक के साथ भारत (India) ने रक्षा को मजबूत किया

    चीनी शहरों को निशाना बनाने में सक्षम रूसी बमवर्षक के साथ भारत (India) ने रक्षा को मजबूत किया

    भारत (India) की रक्षा क्षमता में हाल ही में बड़ी वृद्धि हुई है क्योंकि उसने रूस-निर्मित लंबी दूरी के बमवर्षक विमान का अधिग्रहण किया है, जो लगभग सभी प्रमुख चीनी शहरों तक पहुंच सकता है। यह विमान, जो सामरिक परमाणु संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, भारत (India) की क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ प्रतिक्रिया देने की क्षमता को काफी बढ़ा देता है, खासकर चीन से जुड़े खतरे में। वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए, यह विकास भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    भारत (India) के लिए रूसी बमवर्षक क्यों है महत्वपूर्ण

    रूसी बमवर्षक, जिसकी विस्तृत रेंज और उच्च पेलोड क्षमता के लिए जाना जाता है, परमाणु हथियार ले जा सकता है। यह भारत( India) की परमाणु प्रतिरोध रणनीति को मजबूत करता है। चीन की तेजी से हो रही सैन्य वृद्धि और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आक्रामक स्थिति के चलते, यह बमवर्षक एक प्रभावी संतुलन प्रदान कर सकता है। भारत (India) का रक्षा मंत्रालय अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि चीन से संभावित खतरों को, विशेष रूप से नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा विवाद की स्थिति में, रोका जा सके।

    Russian bomber
    Russian bomber

    रूसी बमवर्षक की क्षमता

    यह बमवर्षक लगभग 5,500 किलोमीटर की शक्तिशाली रेंज के साथ आता है, जिसका मतलब है कि यह बिना रीफ्यूलिंग के चीन के प्रमुख शहरों तक पहुंच सकता है। यह पारंपरिक और परमाणु हथियार दोनों ले जाने में सक्षम है, जिससे भारत (India) की रक्षा प्रणाली में यह एक बहुमुखी विकल्प बनता है। इसके स्टील्थ फीचर्स इसे दुश्मन के रडार सिस्टम से बचने में भी सक्षम बनाते हैं, जिससे मिशन के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

    एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रभाव

    यह अधिग्रहण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत (India) की स्थिति को और भी मजबूत बनाता है, जो उन देशों के साथ संरेखित है जो चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह भारत (India) की रक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण और एक मजबूत परमाणु प्रतिरोध बनाए रखने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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    भारत (India) का नया रूसी बमवर्षक केवल एक रक्षा उपकरण ही नहीं है, बल्कि इसकी रणनीतिक स्वायत्तता का एक शक्तिशाली प्रतीक भी है। इसके साथ, भारत (India) ने अपनी रक्षा रणनीति को मजबूत करने और एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को साबित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

  • अरुणाचल प्रदेश(Arunachal Pradesh) भारत- चीन सीमा विवाद की जड़ और इसके पीछे की वजह

    अरुणाचल प्रदेश(Arunachal Pradesh) भारत- चीन सीमा विवाद की जड़ और इसके पीछे की वजह

    भारत और चीन( India- China) के बीच सीमा विवाद की कहानी बहुत पुरानी है, खासकर लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) तक । हाल ही में देपसांग और देमचोक में तनाव तो खत्म हुआ है, लेकिन पूरी सीमा पर शांति स्थापित नहीं हो सकी है । इस के आगे जानते हैं कि अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) और अन्य क्षेत्रों को लेकर यह विवाद क्यों बना हुआ है और इसके प्रमुख कारण क्या हैं ।

    भारत- चीन( India- China) सीमा विवाद इतिहास

    भारत और चीन( India- China) के बीच का सीमा विवाद 1950 के दशक से चला आ रहा है । जो तिब्बत पर चीन का कब्जा करने के बाद, उसने भारत की सीमा पर अपना प्रभाव जमाने की पूरी कोशिशें शुरू कीं । 1962 का भारत- चीन युद्ध इस विवाद का एक अहम मोड़ था, जिसमें चीन ने अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर दावा किया और युद्ध के दौरान कई हिस्सों पर कब्जा भी कर लिया । इस युद्ध के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम हुआ, लेकिन विवादित इलाकों का कोई हल नहीं निकल सका ।

    अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) विवाद का कारण

    अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) को चीन तिब्बत का हिस्सा मानता है, जबकि भारत इसे अपने पूर्ण अधिकार क्षेत्र में मानता है । चीन( China) अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) के तवांग क्षेत्र को खास तौर पर तिब्बत से जोड़ता है, जो बौद्ध संस्कृति का गहरा प्रभाव है । चीन का दावा है कि वे तवांग और अन्य इलाकों पर उसका ऐतिहासिक अधिकार है, जबकि भारत इसे sovereignty का मामला मानते हुए चीन की दावेदारी को पूरी तरह से खारिज करता है ।

    Arunachal Pradesh: भारत और चीन
    Arunachal Pradesh: भारत और चीन

    लद्दाख से Arunachal Pradesh तक विवादित क्षेत्र

    भारत और चीन( India- China) के बीच लगभग 3,488 km की लंबी सीमा है, जिसे Line of Actual Control( LAC) कहा जाता है । इस LAC के पश्चिमी हिस्से में लद्दाख और पूर्वी हिस्से में अरुणाचल प्रदेश है । दोनों देशों के बीच सीमांकन पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है, जिससे कई क्षेत्रों में घुसपैठ और तनाव की स्थिति बनती रहती है । लद्दाख के देपसांग और देमचोक क्षेत्र में सेना की गतिविधियाँ बढ़ीं, लेकिन फिलहाल यहाँ तनाव में कमी आई है ।

    चीन की रणनीति और Arunachal Pradesh पर असर

    चीन अपने आर्थिक और सामरिक हितों को साधने के लिए बॉर्डर पर गतिविधियाँ बढ़ाता रहा है । जो अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करने के दौरान चीन ने बार- बार अपनी आपत्ति जताता रहा है की, जिससे यहाँ के स्थानीय लोगों में भी अस्थिरता का माहौल बनता रहता है । इसके अलावा, चीन द्वारा LAC पर सड़कें, रेल लाइन और हवाई पट्टियाँ बनाने से भारत को भी अपनी सुरक्षा बढ़ानी पड़ी है ।

    भारतीय सेना और सरकार का जवाब

    भारत ने भी अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) में सड़कों, पुलों और अन्य infrastructure का विकास किया है । जिससे भारतीय सेना ने भी यहाँ अपनी स्थिति मजबूत की है, ताकि चीन के किसी भी प्रकार के आक्रमण का सामना किया जा सके । और भारतीय सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश( Arunachal Pradesh) भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहाँ की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाएगा ।

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    Arunachal Pradesh सीमा विवाद का भविष्य

    हाल ही में कई कूटनीतिक बैठकों और बातचीत के बाद भी सीमा विवाद का कोई ठोस समाधान नहीं निकला । चीन अपने आर्थिक और राजनीतिक हितों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं भारत अपनी संप्रभुता और सीमा की सुरक्षा को लेकर अडिग रहा है ।

  • बांग्लादेश में बिगड़े हालात, Noida को मिल सकता हैं बड़ा ऑर्डर, इनको होगा बड़ा फायदा!

    बांग्लादेश में बिगड़े हालात, Noida को मिल सकता हैं बड़ा ऑर्डर, इनको होगा बड़ा फायदा!

    Noida: बांग्लादेश के बिगड़े राजनीतिक हालात और हिंसा पर नोएडा के रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यातक कड़ी नजर बनाए हुए हैं। इन निर्यातकों का मानना है कि बांग्लादेश की अस्थिरता उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। वर्तमान में, बांग्लादेश राजनीतिक संकट और हिंसा के दौर से गुजर रहा है, जिसमें देश की प्रधानमंत्री ने देश छोड़ दिया है। व्यापार लगभग ठप पड़ा है और नोएडा के निर्यातकों को उम्मीद है कि इस संकट के चलते उन्हें बांग्लादेश के विदेशी ऑर्डर्स मिल सकते हैं।

    उद्यमियों की उम्मीदें और संभावनाएं

    नोएडा के उद्यमियों का मानना है कि अगले तीन महीनों में उन्हें 8 से 10 अरब डॉलर (लगभग 839 अरब रुपये) के रेडीमेड गारमेंट्स के ऑर्डर मिल सकते हैं। बांग्लादेश दुनिया के प्रमुख टैक्सटाइल निर्यातक देशों में से एक है, जहां हर माह करीब 3.5 से 3.8 बिलियन डॉलर के कपड़े एक्सपोर्ट किए जाते हैं। वहां की अस्थिरता के कारण भारत की टैक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा हो सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की नजर भारत पर

    बांग्लादेश के संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय खरीदार नए विकल्प तलाश रहे हैं और उनकी नजर भारत पर है। अगर बांग्लादेश के एक्सपोर्ट का 10 से 11% भारत के तिरुपुर जैसे केंद्रों में आता है तो भारत को हर महीने 8 से 10 बिलियन डॉलर के ऑर्डर मिल सकते हैं। नोएडा परिधान निर्यात क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल का मानना है कि जारा और मैंगो जैसे बड़े ब्रांड्स भी इन हालातों में भारत की ओर लौट सकते हैं।

    भारत में उत्पादन महंगा

    हालांकि, भारत में उत्पाद तैयार करना महंगा है क्योंकि यहाँ पर ड्यूटी 9% है और जीएसटी और अन्य टैक्स भी लागू होते हैं। इसके बावजूद, अगर सरकार टैक्स में छूट देती है, तो भारत को अधिक ऑर्डर मिल सकते हैं।

    प्रतिद्वंद्वी देशों की चुनौती

    भारत के लिए चुनौती यह है कि चीन और इंडोनेशिया भी इन ऑर्डर्स पर नजर रखे हुए हैं। सरकारी सुविधाओं के चलते वहां के उत्पाद सस्ते होते हैं। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैन्यूफैक्चरर्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुलमणि गुप्ता का कहना है कि बांग्लादेश के हालात का सीधा लाभ नोएडा के निर्यातकों को हो सकता है।

    भारतीय कारोबारियों को नुकसान भी

    रेडीमेड गारमेंट्स की प्रमुख निर्यातक शशि नागिया का मानना है कि बांग्लादेश की अस्थिरता का नुकसान भी भारतीय कारोबारियों को हो सकता है। बांग्लादेश में कॉटन और अन्य कपड़े भारत से ही भेजे जाते हैं, जिससे भारत को नुकसान होगा। इसके अलावा, वियतनाम भी इन ऑर्डर्स का बड़ा दावेदार है, क्योंकि वहां गारमेंट्स सस्ते और उच्च गुणवत्ता के होते हैं।

    नोएडा के निर्यातकों को बांग्लादेश के राजनीतिक संकट से बड़े लाभ की उम्मीद है, लेकिन उन्हें चीन, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों से भी सतर्क रहना होगा। अगर भारतीय सरकार उचित कदम उठाती है, तो भारतीय टैक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिल सकता है।

  • यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजे जाएंगे सिंधिया-रिजिजू समेत चार केंद्रीय मंत्री

    नई दिल्ली: यूक्रेन संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में वहां पर फंसे भारतीयों की चिंता भी बढ़ रही है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को फिर से उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई है। सूत्रों के मुताबिक, यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की निकासी के लिए चार केंद्रीय मंत्रियों को यूक्रेन के सीमावर्ती देशों में भेजा जा सकता है।

    न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरण रिजिजू व जनरल वीके सिंह को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजा जा सकता है। ये मंत्री निकासी मिशन के लिए अन्य देशों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और वहां फंसे भारतीय छात्रों की मदद करने के का काम करेंगे। 

    अब तक 1100 से ज्यादा भारतीय छात्रों की हुई वापसी

    भारतीय छात्रों की निकासी के लिए सरकार की ओर से ऑपरेशन गंगा की शुरुआत की गई थी। इस मिशन के तहत अभी तक पांच फ्लाइट यूक्रेन में फंसे छात्रों को लेकर दिल्ली लौट चुकी हैं। सोमवार सुबह ही एक फ्लाइट 249 छात्रों को लेकर दिल्ली पहुंची। इससे पहले 26 फरवरी को एक और 27 फरवरी को तीन फ्लाइट दिल्ली लौटी थीं। इन्हें रोमानिया के रास्ते दिल्ली लाया गया है। अब तक करीब 1100 छात्रों को यूक्रेन से निकाला जा चुका है। 

     

  • सुरक्षा परिषद में भारत ने इजरायल-फिलिस्तीन से शांति के लिए ‘immediate de-escalation’ का आह्वान किया

    सुरक्षा परिषद में भारत ने इजरायल-फिलिस्तीन से शांति के लिए ‘immediate de-escalation’ का आह्वान किया

    एक जनसभा पर अमेरिकी आपत्तियों के बाद राजनयिकों द्वारा समझौता किए जाने के बाद रविवार को वर्चुअल पब्लिक मीटिंग आयोजित की गई

    भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली सार्वजनिक बैठक में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच की स्थिति को तत्काल कम करने का आह्वान किया क्योंकि दोनों पक्षों के बीच शत्रुता में मौजूदा उछाल सातवें दिन में प्रवेश कर गया, गाजा में कम से कम 149 लोग और  कई बच्चों सहित इज़राइल में 10 लोग मारे गए।

    एक सार्वजनिक बैठक में अमेरिकी आपत्तियों के बाद राजनयिकों के एक समझौते पर पहुंचने के बाद रविवार को वर्चुअल सार्वजनिक बैठक आयोजित की गई थी।

    “तत्काल डी-एस्केलेशन समय की आवश्यकता है, ताकि  किसी और ख़राब स्थिति रोका जा सके। हम दोनों पक्षों से अत्यधिक संयम दिखाने, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से दूर रहने और पूर्वी यरुशलम और उसके पड़ोस सहित मौजूदा यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने के प्रयासों से परहेज करने का आग्रह करते हैं। रविवार को सुरक्षा परिषद को बताया।

    श्री तिरुमूर्ति ने कहा, “इज़राइल में नागरिक आबादी को लक्षित गाजा से अंधाधुंध रॉकेट फायरिंग, जिसकी हम निंदा करते हैं, और गाजा में जवाबी हमले से भारी पीड़ा हुई है और मृत्यु हुई है,” श्री तिरुमूर्ति ने कहा, भारत ने अपने एक नागरिक को खो दिया है। अशकलोन में देखभाल करने वाला ( केरल से 30 वर्षीय सौम्या संतोष )।

    राजदूत ने कहा कि इजरायल और फिलिस्तीनी अधिकारियों के बीच विश्वास की कमी बढ़ रही थी, क्योंकि दोनों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई थी।

    श्री तिरुमूर्ति ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि इस्राइल और फ़िलिस्तीन के बीच वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।”

    संयुक्त राष्ट्र, कतर और मिस्र युद्धविराम कराने की कोशिश कर रहे हैं। श्री तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत ने पहले ही इस सप्ताह की शुरुआत में हुई 15 सदस्यीय परिषद की बंद दरवाजे की बैठकों में यरुशलम में हुई हिंसा पर अपनी चिंता व्यक्त की थी (जिनमें से कोई भी संयुक्त बयान नहीं था)।

    “इन दोनों बैठकों में, हमने यरुशलम में हिंसा पर, विशेष रूप से रमजान [रमजान] के पवित्र महीने के दौरान हरम अल शरीफ / टेम्पल माउंट पर, और पूर्व में शेख जर्राह और सिलवान पड़ोस में संभावित निष्कासन प्रक्रिया के बारे में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। जेरूसलम, एक ऐसा क्षेत्र जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुगम व्यवस्था का हिस्सा है। हमने वेस्ट बैंक और गाजा के अन्य हिस्सों में हिंसा फैलने पर भी अपनी आशंका व्यक्त की थी, ”उन्होंने कहा।

    श्री तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चौकड़ी (संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ और रूस) और अन्य के प्रयासों का समर्थन किया, और “न्यायसंगत” के लिए भारत के “मजबूत” समर्थन और दोनों के लिए “अटूट” समर्थन व्यक्त किया। राज्य समाधान।