SpaDeX mission: दो उपग्रहों के बीच 3 मीटर की दूरी पर सफल परीक्षण ISRO ने X पर एक पोस्ट में बताया कि SpaDeX डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पेडेक्स) SpaDeX mission के लिए भेजे गए दो उपग्रह – SDX01(चेज़र) और SDX02 (टारगेट) – को ट्रायल प्रयास में केवल 3 मीटर की दूरी तक लाया गया। इसरो ने रविवार को जानकारी दी कि 15 मीटर से 3 मीटर की दूरी तक उपग्रहों को लाने का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और अब उन्हें सुरक्षित दूरी पर ले जाया जा रहा है।
डॉकिंग प्रक्रिया डेटा एनालिसिस के बाद की जाएगी
ISRO ने बताया कि ट्रायल प्रयास के दौरान उपग्रहों को 15 मीटर तक लाया गया और फिर 3 मीटर तक दूरी कम की गई। हालांकि, डॉकिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले प्राप्त डेटा का डिटेल्ड एनालिसिस किया जाएगा।
SpaDeX mission
उपग्रहों की “रोमांचक हैंडशेक” की तैयारी
शनिवार को इसरो ने एक पोस्ट में बताया कि SDX01और SDX02 उपग्रह “रोमांचक हैंडशेक” के लिए करीब आ रहे हैं और केवल 15 मीटर की दूरी पर हैं। इसरो ने कहा, “15 मीटर पर, हम एक-दूसरे को और स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, हम रोमांचक हैंडशेक से केवल 50 फीट दूर हैं।” रविवार सुबह करीब 6 बजे इसरो ने स्पेडेक्स उपग्रहों द्वारा 15 मीटर की दूरी पर एक-दूसरे की स्थिति को कैप्चर की गई एक शानदार फोटो और वीडियो साझा की।
SpaDeX mission
स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SpaDeX mission) को बुधवार, 8 जनवरी को दूसरी बार स्थगित कर दिया गया। इसका कारण उपग्रहों के बीच अत्यधिक बहाव (ड्रिफ्ट) का पाया जाना था। डॉकिंग मिशन का पहला प्रयास 7 जनवरी को निर्धारित था, जिसे बाद में 9 जनवरी के लिए पुनर्निर्धारित किया गया। इसरो ने 8 जनवरी को बताया, “उपग्रहों के बीच 225 मीटर की दूरी तक पहुंचने के लिए एक मैन्युवर करते समय, बहाव उम्मीद से अधिक पाया गया।”
SpaDeX mission
SpaDeX mission का उद्देश्य और महत्व
SpaDeX mission, जिसे 30 दिसंबर को लॉन्च किया गया था, का उद्देश्य छोटे उपग्रहों का उपयोग करके इन-स्पेस डॉकिंग का प्रदर्शन करना है। इस मिशन की सफलता भारत को दुनिया का चौथा ऐसा देश बना देगी जिसने इस जटिल तकनीक में महारत हासिल की हो। यह भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, जैसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा पर मानव मिशन, के लिए महत्वपूर्ण होगा।
220 किलोग्राम वजनी इन दो उपग्रहों को ले जाने वाले PSLV C60 रॉकेट को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया। उपग्रहों को 475 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में स्थापित किया गया।
Indian Space Research Organisation (ISRO) ने PSLV-C60 रॉकेट का सफलतापूर्वक लांच करके एक और महत्वपूर्ण अचीवमेंट हासिल की। यह रॉकेट स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SpaDeX) जैसे leading मिशन को लेकर 30 December 10:00:15 PM IST पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ। मिशन के तहत दो अंतरिक्ष यान – SDX01 (Chaser) और SDX02 (Target) – को तैनात किया गया, जो आने वाले दिनों में काम्प्लेक्स प्रॉसेस को पूरा करेंगे और अंततः डॉकिंग करेंगे। इस सफलता के साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे ग्लोबल अंतरिक्ष नेताओं की सूची में शामिल हो गया है। यह तकनीक भविष्य में मानव अंतरिक्ष उड़ानों, चंद्र मिशनों, और प्रोपोसड भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) के निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
SpaDeX: ISRO का PSLV-C60 लॉन्च
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दी बधाई
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “श्रीहरिकोटा से PSLV-C60 मिशन की सफलता पर @ISRO को बधाई। SpaDeX (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट) भारत की कक्षा में डॉकिंग क्षमता स्थापित करने का एक अग्रणी मिशन है, जो भविष्य की मानव अंतरिक्ष उड़ानों और सैटेलाइट सर्विसिंग के लिए महत्वपूर्ण कदम है।”
ISRO का 100वां लॉन्च जनवरी में होगा: ISRO प्रमुख
ISRO जनवरी में होने वाले एक बड़े मील के पत्थर की तैयारी कर रहा है। जियोसिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल (GSLV) मिशन जनवरी में लॉन्च किया जाएगा, जो श्रीहरिकोटा से 100वां लॉन्च होगा। ISRO के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा: “आपने PSLV-C60 के शानदार लॉन्च को देखा, जो SpaDeX मिशन लेकर गया। यह सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 99वां लॉन्च है। अगले साल की शुरुआत में 100वां लॉन्च होगा।”
SpaDeX
चंद्रयान-4 के लिए डॉकिंग अनिवार्य: ISRO प्रमुख
SpaDeXमिशन लॉन्च के बाद एस सोमनाथ ने चंद्रयान-4 मिशन में डॉकिंग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया, “चंद्रयान-4 में पांच मॉड्यूल हैं, जिन्हें अलग-अलग समय पर लॉन्च किया जाएगा और दो अलग-अलग मॉड्यूल में इंटीग्रेट किया जाएगा। ये मॉड्यूल पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षा में डॉकिंग करेंगे। डॉकिंग चंद्रयान-4 के लिए आवश्यक है। यह मिशन चंद्रमा पर जाने, वहां उतरने, और पृथ्वी पर लौटने का लक्ष्य रखता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि “डॉकिंग कल शुरू होगी, और कई प्रक्रियाएं होंगी। अंतिम डॉकिंग 7 जनवरी तक होने की संभावना है।”
ISRO का अगला मिशन: NVS-02 सैटेलाइट का लॉन्च
ISRO जनवरी 2025 में NVS-02 सैटेलाइट को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह मिशन जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) के माध्यम से किया जाएगा। ISRO प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि यह मिशन आने वाले वर्ष के कई प्लांनद मिशनों में से एक है।
डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन: प्रोजेक्ट डायरेक्टर का बयान
प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेंद्रन एन ने कहा: “यह उन प्रयोगों में से एक है, जिसे हम कक्षा में साबित करेंगे और जो भविष्य की प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी होगा।” उन्होंने कहा: “डॉकिंग एक अनिवार्य तकनीक है। मानव अंतरिक्ष मिशनों में, जब आपको अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ना होता है, तो यह तकनीक आवश्यक होती है। इस तरह यह एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर है।”
अब सभी X यूजर्स Grok AI का फ्री में उपयोग कर सकते हैं। अगर आप माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X के यूजर हैं, तो आपके लिए एक खुशखबरी है। एलन मस्क(Elon Musk) ने X के करोड़ों यूजर्स को एक फ्री चैटबॉट का तोहफा दिया है। यह अपडेट X के यूजर्स के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है, जिससे यह प्लेटफॉर्म पहले से कहीं ज्यादा यूज़र-फ्रेंडली और तकनीकी रूप से सक्षम हो गया है।
Elon Musk : X यूजर्स अब फ्री में AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर सकते हैं (X Users Can Now Use AI Chatbot for Free)
एलन मस्क(Elon Musk) ने जब से X सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खरीदा है, तब से उन्होंने इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, और अब वे नए-नए अपडेट्स ला रहे हैं। अगर आप X का उपयोग करते हैं, तो यह आपके लिए शानदार खबर है। हाल ही में X ने Grok AI चैटबॉट का सपोर्ट शुरू किया था, और अब मस्क(Elon Musk) ने इसे सभी यूजर्स के लिए फ्री कर दिया है। इससे X यूजर्स को एक नई एआई तकनीक का अनुभव करने का अवसर मिलेगा, जो पहले केवल कुछ चुनिंदा प्रीमियम सब्सक्राइबर्स तक ही सीमित था।
Grok AI : Elon Musk
Grok AI को 2023 में लॉन्च किया गया था और बाद में इसे X प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया गया।
पहले, इस चैटबॉट का उपयोग करने के लिए यूजर्स को एक सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता था, लेकिन अब आप इसे पूरी तरह से मुफ्त में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कदम X के यूजर्स को विभिन्न तकनीकी सेवाओं और सुविधाओं के एक नए अनुभव से जोड़ने में मदद करेगा। Grok AI के फ्री होने से, यह OpenAI के ChatGPT, Google के Gemini AI, और Claude AI जैसे अन्य AI Chatbots के लिए कड़ी चुनौती बन सकता है।
हालांकि, X की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई यूजर्स ने बताया है कि वे X के प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के साथ Grok AI का फ्री में उपयोग कर रहे हैं। यह AI Chatbot यूजर्स को स्मार्ट और सहज बातचीत का अनुभव प्रदान करेगा, जो उन्हें उनके प्रश्नों का सही और त्वरित उत्तर देगा।
Elon Musk : Grok AI के फ्री वर्शन की विशेषताएँ (Features of the Free Version of Grok AI)
अगर आप Grok AI के free version का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको कुछ limits देखने को मिल सकती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूजर्स हर दो घंटे में केवल 10 संदेश भेज सकते हैं और हर दिन केवल 3 फोटो का विश्लेषण कर सकते हैं। ये limits एक तरह से एआई के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित की गई हैं, ताकि प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक लोड न पड़े। फिलहाल, Grok AI X प्लेटफॉर्म में inbuild है, लेकिन भविष्य में इसे ChatGPT और Gemini AI की तरह एक स्टैंडअलोन ऐप के रूप में लॉन्च किया जा सकता है, जिससे यूजर्स को और भी बेहतर अनुभव मिल सके।
Elon Musk : AI tools
एलन मस्क(Elon Musk) ने हाल ही में यह जानकारी दी थी कि Grok जल्द ही PDF और Word जैसे दस्तावेज़ों को प्रोसेस करने में सक्षम होगा। यह फीचर यूजर्स के लिए कई कामों को बेहद आसान बना देगा, क्योंकि अब यूजर्स दस्तावेज़ों को एआई के माध्यम से संक्षेप में समझ सकते हैं और उनका विश्लेषण कर सकते हैं। इससे वर्कफ़्लो को आसान बनाने में मदद मिलेगी, खासकर उन लोगों के लिए जो कामकाजी जीवन में दस्तावेज़ों के साथ काम करते हैं।
X में नए फीचर्स (New Features on X)
एलन मस्क(Elon Musk) X को एक परफेक्ट ऐप बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि यूजर्स एक ही जगह पर कई काम कर सकें। हाल ही में X ने यूजर्स के लिए नया Radar Tool फीचर पेश किया है। इस टूल के जरिए यूजर्स आसानी से ट्रेंडिंग टॉपिक्स, ब्रेकिंग न्यूज और अन्य इवेंट्स को सर्च कर सकते हैं। यह नया फीचर यूजर्स को लेटेस्ट ट्रेंडिंग कंटेंट से अपडेट रखने में मदद करेगा और उन्हें समय के साथ जुड़े रहने का अवसर देगा।
हालांकि, यह फीचर फिलहाल केवल X के प्रीमियम मेंबर्स के लिए उपलब्ध है, लेकिन उम्मीद है कि भविष्य में इसे सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। एलन मस्क (Elon Musk) ने X को एक ऐसा मंच बनाने की योजना बनाई है, जो न केवल माइक्रोब्लॉगिंग की दुनिया में, बल्कि हर तरह के सोशल मीडिया इंटरएक्शन में भी सबसे आगे हो। इस तरह के अपडेट्स से यह साफ़ होता है कि X केवल एक सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक पूर्ण डिजिटल सेवा प्रदान करने वाला ऐप बन रहा है।
Grok AI के free version की पेशकश के साथ, X यूजर्स को एक नई और बेहतर AI चैटबॉट सेवा का अनुभव प्राप्त हुआ है, जो उन्हें हर तरह की जानकारी और सहायक सुझाव देने में सक्षम है। यह कदम न केवल X के यूजर्स के लिए, बल्कि पूरी सोशल मीडिया और एआई टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।
हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और उन्नत हाइपरसोनिक(Hypersonic) और बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण देश की सैन्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ती ताकत को उजागर करता है। ये विकास सिर्फ राष्ट्रीय गर्व का विषय नहीं हैं, बल्कि यह एक जटिल और अस्थिर वैश्विक सुरक्षा माहौल में एक रणनीतिक आवश्यकता भी बन गई है। जैसे-जैसे भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, इन अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों के सफल परीक्षण इसकी एयरोस्पेस रक्षा, निरोधक क्षमता, और प्रौद्योगिकी नवाचार में बढ़ती ताकत को सिद्ध करते हैं।
भारत की मिसाइल कार्यक्रम: एक झलक
भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी, जब रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की स्थापना की गई थी। समय के साथ यह कार्यक्रम काफी विकसित हुआ है, और अब भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में पहचाना जाता है। भारत की मिसाइल क्षमताओं को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, और हाइपरसोनिक वाहन शामिल हैं।
भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइलों के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति की है जो न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हैं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। अग्नि और पृथ्वी श्रृंखलाओं जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ ब्रह्मोस जैसी क्रूज मिसाइलों ने भारत को वैश्विक रक्षा मानचित्र पर स्थान दिलाया है। हालांकि, हाल ही में ध्यान हाइपरसोनिक(Hypersonic) हथियारों के विकास पर केंद्रित हुआ है — वे मिसाइलें जो माच 5 से अधिक गति (ध्वनि की पांच गुना से अधिक) पर यात्रा करती हैं।
Hypersonic
Hypersonic Technology: युद्ध में एक गेम-चेंजर
Hypersonic weapon शायद आधुनिक युद्ध में सबसे उन्नत और सबसे अधिक विघटनकारी मिसाइल प्रौद्योगिकी माने जा सकते हैं। पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में, जो एक अनुमानित बैलिस्टिक मार्ग का अनुसरण करती हैं, हाइपरसोनिक(Hypersonic) मिसाइलें माच 5 (6,174 किमी/घंटा या 3,836 मील/घंटा) की गति से अधिक यात्रा करने में सक्षम होती हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये उड़ान के दौरान मार्ग में परिवर्तन करने में सक्षम होती हैं। इसका मतलब है कि ये अधिकांश पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को पार कर सकती हैं, जो धीमी और पूर्वानुमानित बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
भारत ने हाइपरसोनिक(Hypersonic) प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle (HSTDV) के सफल परीक्षण शामिल हैं। 2020 में, भारत ने इस वाहन का सफल परीक्षण किया, जो हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास के लिए आवश्यक कई कार्यों को अंजाम देने में सक्षम है। HSTDV एक स्क्रामजेट इंजन द्वारा संचालित है, जो एक उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकी है जो मिसाइल को हाइपरसोनिक गति से यात्रा करने की अनुमति देती है।
Hypersonic Weapon
2023 में, भारत ने Hypersonic Air-breathing Scramjet Technology (HAST) का परीक्षण किया, जिससे यह सिद्ध हो गया कि भारत एक पूर्ण हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की दिशा में है। इन हथियारों की गति और maneuverability उन्हें एक शक्तिशाली संपत्ति बनाती है, जो सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों, जैसे THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) या Aegis को भी भेदने में सक्षम है।
भारत के लिए, हाइपरसोनिक(Hypersonic) हथियारों का विकास न केवल इसकी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन है, बल्कि यह एक आवश्यक रणनीतिक उपकरण भी है। हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ, भारत परमाणु संघर्ष की स्थिति में एक विश्वसनीय सेकंड-स्ट्राइक क्षमता बनाए रख सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई प्रतिद्वंद्वी भारत के परमाणु निरोधक को नष्ट करने में सफल नहीं हो पाएगा।
बैलिस्टिक मिसाइलें: भारत की सामरिक रक्षा का एक स्तंभ
जहां हाइपरसोनिक(Hypersonic) प्रौद्योगिकी आकर्षण का केंद्र रही है, वहीं भारत की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियाँ उसकी रक्षा रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई हैं। भारत के पास बैलिस्टिक मिसाइलों की एक व्यापक श्रृंखला है, जिसमें शॉर्ट-रेंज, मध्यम-रेंज, इंटरमीडिएट-रेंज, और इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज हथियार शामिल हैं। भारत के शस्त्रागार में कुछ महत्वपूर्ण मिसाइल प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं:
अग्नि श्रृंखला: अग्नि मिसाइलों की श्रृंखला मध्य-से अंतरमहाद्वीपीय रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs और ICBMs) की है। भारत की अग्नि-V मिसाइल, जिसकी रेंज 5,000 किलोमीटर से अधिक है, एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। यह मिसाइल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह परमाणु संघर्ष की स्थिति में भारत की सेकंड-स्ट्राइक क्षमता सुनिश्चित करती है, और एक मजबूत प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखती है।
पृथ्वी श्रृंखला: पृथ्वी मिसाइलें युद्ध क्षेत्र में उपयोग के लिए डिज़ाइन की गई शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें (SRBMs) हैं। पृथ्वी-II की रेंज लगभग 350 किलोमीटर है और यह दोनों प्रकार के शस्त्र – पारंपरिक और परमाणु – ले जाने में सक्षम है, जो इसे भारत की क्षेत्रीय निरोधक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
K-15 और K-4 सबमरीन-लांच बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBMs): INS Arihant की उपस्थिति के साथ, भारत के पास अब एक विश्वसनीय समुद्री परमाणु निरोधक है। K-15 एक शॉर्ट-रेंज SLBM है, जबकि K-4 की रेंज 3,500 किलोमीटर तक है, जो भारत को एक सहज रूप से लुकी हुई पनडुब्बी से हमला करने की अनुमति देता है, जिससे शत्रु के लिए भारत के परमाणु बलों को निशाना बनाना और अधिक कठिन हो जाता है।
K-15 और K-4 सबमरीन-लांच बैलिस्टिक मिसाइलें
इन बैलिस्टिक मिसाइलों के सफल विकास और परीक्षण ने भारत की स्थिति को एक परमाणु-शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में मजबूत किया है और यह सुनिश्चित किया है कि भारत के पास एक मल्टी-लेयर्ड और जीवित रह सकने वाली निरोधक क्षमता है। एक ऐसे क्षेत्र में, जहां चीन और पाकिस्तान जैसी देशों के पास प्रभावशाली मिसाइल शस्त्रागार हैं, भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान करती हैं।
Hypersonic: भारत की मिसाइल प्रगति के भूराजनीतिक निहितार्थ
भारत की मिसाइल क्षमताएँ केवल निरोधक शक्ति या तकनीकी उपलब्धियों से संबंधित नहीं हैं; ये भूराजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। भारत की सीमाएँ दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों, चीन(China) और पाकिस्तान(Pakistan) से लगी हैं, जिनके पास प्रभावशाली मिसाइल कार्यक्रम हैं। विशेष रूप से चीन(China) ने मिसाइल और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में भारी निवेश किया है, जिससे भारत के लिए यह चुनौती और भी बढ़ गई है।
भारत(India) की मिसाइल क्षमताएँ इन खतरों का मुकाबला करने के लिए एक संतुलन प्रदान करती हैं। भारत के मिसाइलों की बढ़ती रेंज और जटिलता के साथ, देश ने न केवल अपनी निरोधक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि अपनी कूटनीतिक स्थिति भी मजबूत की है। हाल के मिसाइल परीक्षणों ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है।
अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की मिसाइल प्रगति उसके अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ साझेदारी को भी प्रभावित करती है। क्वाड (Quad) का सदस्य होने के नाते, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका(USA), जापान(Japan) और ऑस्ट्रेलिया(Australia) शामिल हैं, भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमताएँ क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और चीन(China) की आक्रामकता का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हाइपरसोनिक(Hypersonic) मिसाइलों
Elon Musk द्वारा डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी राष्ट्रपति पद की दौड़ का समर्थन करने से दोनों के बीच के रिश्ते और गहरे हो गए हैं, जिससे मस्क का अमेरिकी नीतियों पर प्रभाव बढ़ सकता है, खासकर वो जो उनके व्यवसायों पर असर डालते हैं, ऐसा Reuters ने रिपोर्ट किया। मस्क ने ट्रंप के पक्ष में एक राजनीतिक समिति को कम से कम $119 मिलियन का दान दिया और अभियान के आखिरी चरण में पूर्व राष्ट्रपति का खुलकर समर्थन किया। विश्लेषकों का मानना है कि मस्क का समर्थन एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिससे वे अपने व्यवसायों को सरकारी नियमों के प्रभाव से बचा सकें और अपने हित में नीतियाँ हासिल कर सकें।
एक पूर्व SpaceX कार्यकारी, जिन्होंने नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया, ने कहा, “Elon Musk सभी नियमों को अपने व्यवसायों और नवाचार के रास्ते में रुकावट मानते हैं। वे ट्रंप प्रशासन को ज्यादा से ज्यादा नियमों को हटाने के साधन के रूप में देखते हैं, ताकि वे जो चाहें कर सकें, जितनी तेजी से चाहें।”
Elon Musk के व्यापक व्यापार हित:-
जैसे Tesla की इलेक्ट्रिक कारें, SpaceX के रॉकेट और न्यूरालिंक ब्रेन इम्प्लांट – सभी महत्वपूर्ण सरकारी निरीक्षण के अधीन हैं। Elon Musk ने जुलाई में ट्रंप का समर्थन किया, जो पेंसिल्वेनिया में उम्मीदवार पर हुए एक असफल हमले के समय हुआ। चुनाव की रात मस्क, ट्रंप के साथ मार-ए-लागो में थे, जहां ट्रंप ने उन्हें अपने नए प्रशासन में “एफिशिएंसी जार” बनाने का इशारा दिया।
Elon Musk की प्रमुख कंपनियाँ, Tesla और SpaceX, सरकार से भारी सब्सिडी, अनुदान और अनुकूल नीतियों पर निर्भर करती हैं। कुछ स्रोतों का मानना है कि मस्क Tesla की ऑटोनॉमस-ड्राइविंग तकनीक पर संघीय निरीक्षण को कम करना चाहते हैं, जो यूएस नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) द्वारा जांच के अधीन है।
Elon Musk’s business
मस्क के एक करीबी व्यक्ति ने बताया कि अगले चार वर्षों में मस्क का “प्रमुख फोकस” Tesla और SpaceX पर असर डालने वाले नियमों के लागू होने की दिशा में होगा। मस्क कथित रूप से ऑटोनॉमस-ड्राइविंग के लिए एक संघीय दृष्टिकोण की वकालत कर रहे हैं ताकि Tesla को मौजूदा राज्य-वार नियमों के पैचवर्क से छुटकारा मिल सके।
Elon Musk का राजनीतिक प्रभाव :-
उनके समर्थकों को प्रेरित कर रहा है, जो सरकारी निगरानी को तकनीकी विकास में रुकावट मानते हैं। SpaceX निवेशक वेंचर कैपिटलिस्ट शेर्विन पिशेवर ने कहा, “वह अमेरिका को एक स्टार्टअप की तरह कार्य करवाने वाले हैं।”
हालांकि, मस्क की इस स्थिति ने कर्मचारियों और नियामकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। SpaceX पहले से ही सरकारी वित्त पोषित रॉकेट लॉन्च में विश्व नेता है और Tesla हर साल लगभग दो मिलियन भारी सब्सिडी वाली इलेक्ट्रिक कारें बेचता है।
Elon Musk’s politics
मस्क की ब्रेन-इम्प्लांट कंपनी, न्यूरालिंक, मानव परीक्षणों के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की स्वीकृति प्राप्त करने में देरी का सामना कर रही है। कुछ आंतरिक लोगों का मानना है कि मस्क ट्रंप के साथ अपने संबंधों का उपयोग कर इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
SpaceX की सरकारी साझेदारियाँ, जैसे नासा और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग, मस्क की एक निजी नवप्रवर्तक और सार्वजनिक ठेकेदार की दोहरी भूमिका को उजागर करती हैं। एक सरकारी अधिकारी, जो SpaceX के कार्य से परिचित हैं, ने कहा, “NASA को SpaceX की जरूरत SpaceX को NASA से ज्यादा है।”
मस्क के बढ़ते प्रभाव के साथ, आलोचक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष अन्वेषण में नियमों को कमजोर करने का क्या असर हो सकता है।
Noida: शांति इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा में “इंडिया 2050: साइंस ओडिसी” नामक विज्ञान प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन में छात्रों ने अपनी रचनात्मकता और भारत के भविष्य की अपनी कल्पना को प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित के माध्यम से भारत की 2050 तक की संभावनाओं को उजागर करना था।
नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और प्रोजेक्ट्स पेश किए। इन प्रोजेक्ट्स में एडवांस रोबोटिक्स से लेकर सस्टेनेबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) तक के समाधान शामिल थे, जो छात्रों की गहरी वैज्ञानिक समझ और नवाचार के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाते थे।
The Science Odyssey
मुख्य विशेषताएं:
रचनात्मक परियोजनाएं: छात्रों ने स्मार्ट सिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में भारत के भविष्य की कल्पना करते हुए शानदार मॉडल प्रस्तुत किए।
इंटरएक्टिव लर्निंग: आगंतुकों को छात्रों के प्रोजेक्ट्स के पीछे की वैज्ञानिक सोच को समझने का अवसर मिला, जिससे उन्हें जटिल अवधारणाओं को सरल तरीके से समझने में मदद मिली।
विशेषज्ञ वक्ता: प्रमुख अतिथि, सुश्री अर्शिमा अरोड़ा (केमिस्ट्री SME) और सुश्री श्वेता दीक्षित (विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर), ने उभरती हुई प्रौद्योगिकियों और उनके भविष्य में भारत के विकास में योगदान पर अपने विचार साझा किए।
स्कूल के अध्यक्ष श्री हरीश चौहान, निदेशक सुश्री अंजना चौहान और प्रधानाचार्य सुश्री साध्वी वर्मा ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। रिबन काटने की रस्म के साथ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, और स्कूल प्रबंधन ने छात्रों और शिक्षकों की मेहनत की सराहना की।
शांति इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। “इंडिया 2050: साइंस ओडिसी” प्रदर्शनी ने छात्रों की रचनात्मकता और भविष्य के प्रति उनकी सोच को उजागर किया, जो एक बेहतर कल की ओर कदम बढ़ाने की प्रेरणा है।
MIUT Noida: महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफार्मेशन टेक्नॉलोजी, नोएडा और आई क्यू ए सी (IQAC) के समन्वय से मीडिया विभाग द्वारा ‘मेकिंग ए रेडियो जिंगल’ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यशाला में पत्रकारिता एवं जनसंचार के स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं ने रेडियो जिंगल बनाने के गुर सीखें। कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. उमेश चंद्र पाठक, विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली (संबद्ध- गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली) थे। डॉ. पाठक ने छात्रों को कार्यशाला के दौरान जिंगल मेकिंग से जुड़े अपने अनुभव और विचार साझा किए। रेडियो जिंगल्स और टैगलाइन का महत्व समझाते हुए दो दशकों के कुछ प्रासंगिक विज्ञापन दिखाए। उन्होंने कहा कि जिंगल एक उत्पाद पर एक गीतात्मक संगीतमय विज्ञापन-स्पॉट था और अक्सर एक व्यावसायिक प्रयास था और उन्होंने कहा कि इसे रचनात्मकता से भरा होना चाहिए और आकर्षक होना चाहिए। अपनी बात को अमिताभ बच्चन और रेडियो प्रस्तोता अमीन सयानी सहित कई सेल्युलाइड सितारों की मिमिक्री के साथ जोड़ते हुए डॉ. पाठक ने कहा कि जिंगल बनाना कड़ी मेहनत रचनात्मकता की एक प्रक्रिया है और इसे एक समय सीमा के भीतर किया जाता है।
कार्यशाला में छात्रों के साथ अपना व्याख्यान जारी रखते हुए डॉ. पाठक ने कहा कि जिंगल्स विपणन अभियानों की धड़कन हैं, जो आकर्षक धुनों और यादगार गीतों के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। एक प्रभावी जिंगल तैयार करने के लिए रचनात्मकता, रणनीतिक सोच और संगीत कौशल के मिश्रण की आवश्यकता होती है। जिंगल निर्माण की यात्रा शुरू करते समय विचार करने योग्य कुछ प्रमुख बिंदु यहां दिए गए हैं।
महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफार्मेशन टेक्नालॉजी की डीन अकादमिक डॉ. ट्रैप्टी अग्रवाल और डॉ. उमेश चंद्र पाठक के बीच बात-चीत के दौरान डॉ. पाठक ने कि वेदों और अन्य पवित्र ग्रंथों की सामग्री भगवत गीता का आधार बनी, जिसमें मानव के संपूर्ण जीवन के प्रबंधन का इतना शक्तिशाली संदेश था जो आज तक प्रासंगिक है।
डॉ. पाठक ने कहा कि सिर्फ गीत लिखने से पहले ब्रांड या उत्पाद को समझना बहुत जरूरी है। यह समझना आवश्यक था कि उत्पाद को क्या संदेश देना चाहिए और जिंगल को किस प्रकार का भावनात्मक संदेश उत्पन्न करना चाहिए। यदि यह युवा पीढ़ी के लिए होता, तो ‘हर दोस्त जरूरी होता है’ उपयुक्त हो सकता था, जबकि घर का काम करने वाली गृहिणी के लिए जिंगल ‘निरमा… निरमा वॉशिंग पाउडर निरमा…’ एकदम सही हो सकता था। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि जिंगल बनाया जाए और लक्षित दर्शकों तक पहुंचाया जाए।
कार्यशाला का समापन छात्रों के साथ एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ। महर्षि यूनिवर्सिटी के डॉ. मुदिता अग्रवाल (डीन) और श्री गौरव ठाकुर, फैकल्टी (एसओसी) और मीडिया विभाग के डॉ. शंभू शरण गुप्ता (एचओडी), एसोसिएट प्रोफेसर, नितिन सक्सेना, प्रोफेसर, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. सुरमीत सिंह, असिटेंट प्रोफ़ेसर, श्री शिवम यादव, श्री सुनील कुमार यादव, अरविन्द सिंह और श्री मोहन सिंह रावत उपस्थित थे।
लखनऊ: Ground Breaking Ceremony 4.0 के शुभारंभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उत्तर प्रदेश में औद्योगिक समेत विभिन्न सेक्टर्स में जारी विकास की बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आदि भी मौजूद रहे। पीएम ने ऑल्ट स्वानटेक्स के टेक्सटाइल्स पवेलियन में जाकर ऐपरल व लेदर टेक्निक्स से संबंधित स्लाइड्स देखी और चमड़ा व वस्रोद्योग क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के बढ़ते कदम की जानकारी ली। ईटीएच एआई सेंटर में देश व उत्तर प्रदेश में एआई के बढ़ते परिदृश्य के बारे में जानकारी ली। एआई के बड़े हब के रूप में उत्तर प्रदेश विकसित हो रहा है। ऐसे में लखनऊ में भी एआई सिटी की स्थापना प्रस्तावित है। प्रदर्शनी में रोबोटिक्स सेक्शन के स्टॉल भी लगे थे, जिसमें अडवांस इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स आर्म तथा ड्राइड रोबोट की जानकारी लेने आमजन भी पहुंचे।
डिफेंस उपकरणों की रिप्लिका का हुआ प्रदर्शन
डिफेंस सेक्टर से संबंधित लगे पवेलियन में भी पीएम ने जानकारी ली। यहां पर डिफेंस उपकरणों की रिप्लिका आदि को भी प्रदर्शित किया गया था। डिफेंस सेक्टर का मुख्य आकर्षण एडवांस बुलेट प्रूफ मिलिट्री व्हीकल रहा। जिसके वर्किंग प्रोटोटाइप को प्रदर्शनी में शोकेस किया गया था। पर्यटन, स्वच्छ ऊर्जा आदि के बारे में उत्तर प्रदेश के बढ़ते कदम की जानकारी ली। श्रीराम मंदिर के थ्री डी रिप्लिका मॉडल और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के प्रवेश द्वार की प्रतिकृति आदि की आमजन ने भी तारीफ की। यूपी में हुए मोटो जीपी रेस में लगी पांच सुपर बाइक्स को भी प्रदर्शित किया गया था। जिसमें डुकाटी, ड्यूक, यामाहा, केटीएम आदि की सुपर बाइकें शामिल थीं।
एआई डेवलपमेंटर सेंटर स्थापित करेगा एचसीएल
एचसीएल सॉफ्टवेयर नोएडा के बिजनेस स्ट्रेटजी लीड मोहित शर्मा ने बताया कि यूपी सरकार लखनऊ व नोएडा में एआई डवलपमेंट सेंटर बनाएगी। यूपी के ग्रेनो के गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में इसे बनाया जाएगा। कंपनी एआई सॉल्यूशन देगी। साथ ही एआई के जरिए कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के प्रयोग के बारे में जागरूकता विकसित करेगी। शर्मा ने बताया कि यहां टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन बनाएंगे। एआई स्किलिंग प्रोग्राम ड्राइव करेंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी एआई ट्रेनिंग देंगे।
26 फरवरी को होगा सीएम योगी के हाथों बड़ी एम्यूनिशन फैसिलिटी का उद्घाटन
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के अंतर्गत क्रियान्वित हुई परियोजनाओं में में खासतौर पर साउथ एशिया के सबसे बड़े एम्यूनिशन फैसिलिटी के बारे में जानकारी देते हुए अडाणी डिफेंस व एरोस्पेस के सीनियर मैनेजर, बिजनेस डपलपमेंट वरुण दुग्गल ने कहा कि 26 फरवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा इसका उद्घाटन होगा। इस फैसिलिटी में 400 राउंड प्रति मिनट (छोटा कैलिबर) की एम्यूनिशन का उत्पादन हो सकेगा। यह अपने आप में एक ऐसा विशिष्ट प्लांट होगा, जिसका 100 एकड़ में प्रसार है। यहां बड़े स्तर पर एम्यूनिशन प्रोडक्शन फैसिलिटी का संचालन सुनिश्चित होगा तथा मीडियम व लार्ज कैलिबर राउंड्स का भी यहां बड़े स्तर पर प्रोडक्शन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह संयंत्र पूरी तरह ग्रीन एनर्जी बेस्ड होगा। यहां सोलर पैनल व प्लांट्स के जरिए ऊर्जा उत्पादन होगा, जिससे यह संयंत्र कार्य करेगा।
एनटीपीसी लिमिटेड ने भारत की पहली हरित हाइड्रोजन मिश्रण परियोजना प्रारंभ की। एनटीपीसी कवास टाउनशिप, सूरत के पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क में ग्रीन हाइड्रोजन मिश्रण प्रारंभ कर दी गई है। यह परियोजना एनटीपीसी तथा गुजरात गैस लिमिटेड (जीजीएल) का संयुक्त प्रयास है।
परियोजना से ग्रीन हाइड्रोजन के पहले मॉलिक्यूल को परियोजना प्रमुख श्री पी.रामप्रसाद ने एनटीपीसी कवास तथा जीजीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में गतिमान बनाया।
मिश्रण अभियान प्रारंभ होने के बाद एनटीपीसी कवास ने जीजीएल अधिकारियों के सहयोग से टाउनशिप निवासियों के लिए जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया।
एनटीपीसी और जीजीएल ने 30 जुलाई 2022 को भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आधारशिला रखे जाने के बाद रिकॉर्ड समय में इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को प्राप्त करने की दिशा में लगातार काम किया है। यह आदित्यनगर, सूरत में कवास टाउनशिप के घरों को एच2-एनजी (प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। कवास में ग्रीन हाइड्रोजन पहले से स्थापित एक मेगावाट फ्लोटिंग सौर परियोजना से बिजली का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बनाया गया है।
नियामक निकाय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने पीएनजी के साथ ग्रीन हाइड्रोजन के 5 प्रतिशत वॉल्यूम मिश्रण के लिए मंजूरी दे दी है और मिश्रण स्तर को चरण के अनुसार 20 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। प्राकृतिक गैस के साथ मिलाए जाने पर ग्रीन हाइड्रोजन शुद्ध हीटिंग सामग्री को समान रखते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम करता है।
यह उपलब्धि केवल ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ गिने-चुने देशों द्वारा प्राप्त की गई है। यह भारत को वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के केंद्र में लाएगा। भारत न केवल अपने हाइड्रोकार्बन आयात बिल को कम करेगा बल्कि विश्व में हरित हाइड्रोजन और हरित रसायन निर्यातक बनकर विदेशी मुद्रा अर्जित करेगा।
5G Internet : क्या आप मोबाइल की एक और तकनीकी क्रांति के लिए तैयार हैं। कल्पना करिए आपने मोबाइल पर मूवी डाउनलोड करना शुरू किया और तीन सेकेंड बाद ही मूवी देखना शुरू कर दें। जिस तरह आप वर्क फ्रॉम होम करते हैं, वैसे ही वर्क फ्रॉम एनीवेयर करना शुरू करें, यानी ,घर, जंगल, पहाड़ हर जगह नेटवर्क मिल रहा हो । दिल्ली से शिमला के सफर के दौरान आप लैपटॉप पर ऑफिस का काम करते हुए जा रहे हैं और फिर शाम की कॉफी मॉल रोड पर पी रहे हैं। बिना किसी रुकावट के दुनिया के किसी भी कोने में वीडियो कॉल, बिना चीरफाड़ के सर्जरी हो जाए, आपको डॉक्टर से सलाह लेने के लिए क्लीनिक जाने की ज़रूरत ही खत्म हो जाए,
4 जी मतलब चौथी जनरेशन
ड्रोन की मदद से ऑनलाइन सामान मिनटों में घर पहुंच जाए, किसान मोबाइल के दो बटन दबाकर अपना कोई भी उपकरण चलाने लग जाएं, रेस्टोरेंट में वेटर की जगह रोबोट आपको सर्व करने आएं और गाना भी सुना जाए। जी हां, ये सब 2023 में आपको देखने को मिल सकता है। हम सभी मोबाइल और इंटरनेट की ताकत को जानते और समझते हैं। आज हम अपने स्मार्टफोन के ज़रिए वे सभी काम कर पाते हैं, जिसके लिए कंप्यूटर की जरूरत होती है। ये संभव हो पाया है 4 जी तकनीक आने के बाद से। यहां जी का मतलब- जेनरेशन से है यानी 4 जी मतलब चौथी जनरेशन। इससे पहले 3 जी जमाने में केवल फोन से केवल कॉल और एसएमएस का ही इस्तेमाल हो पाता था। उससे पहले 2 जी और सबसे पहले 1 जी तकनीक का इस्तेमाल हो चुका है। और अब हम 5 जी तकनीक इस्तेमाल करने के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं।
2023 की शुरुआत में 5 जी की सर्विस आम लोगों के मोबाइल में पहुंच जाएगी
टेलीकॉम मिनिस्टर अश्वनी वैष्णव ने आईआईटी मद्रास में आज देश की पहले 5G ऑडियो और वीडियो कॉल की सफलतापूर्वक टेस्टिंग करके दिखा दी। इससे पहले 17 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले 5G टेस्टबेड का उद्घाटन करके कारोबारियों को बड़ा तोहफा दिया था। इन डेवलपमेंट्स के बाद माना जा रहा है कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस अगले हफ्ते 5G स्पेक्ट्रम ऑक्शन प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास ले जाने की उम्मीद है। साल के अंत तक साल के अंत तक इंटरनेट प्रवाइडर्स कंपनियों जैसे रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन 5 जी सॉर्विस लेकर मार्केट में उतर जाएंगी। अगले साल यानी 2023 की शुरुआत में 5 जी की सर्विस आम लोगों के मोबाइल में पहुंच जाएगी। कंपनियों ने अपने ट्रायल्स भी कर लिए हैं। हाल ही में एयरटेल ने कपिल देव के होलोग्राम को शो करके साबित कर दिया था, वो 5 जी के लिए तैयर है। 5जी टेक्नोलॉजी टेस्टिंग के दौरान हैदराबाद में 1जीबी फाइल केवल 30 सेंकेंड में डाउनलोड हो गई. हाल ही में एयरटेल ने नोकिया के साथ मिलकर कोलकाता शहर के बाहर 700 मेगा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड में पहली 5जी ट्रायल को सफल अंजाम दिया. भारत में ग्रामीण इलाके में किया जाने वाला ये पहला 5जी ट्रायल था.
कोई मूवी केवल 30 सेकेंड में डाउनलोड हो जाएगी
अब सवाल उठता है कि 5 जी आने के बाद क्या बदलाव आएंगे। तो इसका सीधा उत्तर है कि तकनीक के स्तर पर बहुत बड़े बदलाव आएंगे। आपने 4 जी में जो तकनीकी क्रांति महसूस की, उससे 10 गुणा ज़्यादा तकनीकी क्रांति देश में हो सकेगी। जैसे- 5 जी तकनीक से बहुत सारी मेडिकल सर्जरी आसानी से हो सकेंगी। अमेजन या फ्लिपकार्ट आपके सामान को ड्रोन के ज़रिए मिनटों में पहुंचा सकेंगी, ऑनलाइन शिक्षा संस्थानों का विस्तार होगा, ई-मेडिसिन और ई-खेती से किसानों को खेती में बड़ा लाभ मिलेगा, कोई मूवी केवल 30 सेकेंड में डाउनलोड हो जाएगी, बहुत सारे काम रोबोट करने लग जाएंगे। कुल मिलाकर डिजिटल क्रांति की असली शुरुआत होगी। और इस दशक के अंत तक यानी 2030 तक 6 जी के आ जाने की उम्मीद है। उसके बाद तो और भी क्रांतिकारी बदलाव होंगे। एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 5जी से 2035 तक भारत में एक लाख करोड़ डॉलर का कारोबार बढ़ जाएगा। एरिक्शन की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 2026 तक दुनिया भर में 3.5 अरब 5जी कनेक्शन होंगे, जबकि भारत में इनकी संख्या 35 करोड़ तक पहुंच जाएगी.
बहुत सारे लोगों को अपना फोन बदलकर 5 जी फोन भी लेना पड़ेगा
अब सवाल उठता है कि ये सब बदलाव तो होंगे, लेकिन इतने ही सस्ती होंगे,जैसे आज की 4 जी सर्विस है। यानी बिल कितने का बढ़ेगा, तो इसका जवाब है कि बहुत ज़्यादा। ऐसा भी हो सकता है कि आम आदमी शुरुआत में इसे अफोर्ट ही न कर पाए। इसका कारण ये है कि 5 जी के लिए कंपनियों को नई मशीनों और तकनीक पर बड़ा निवेश करना पड़ेगा, जिसकी भरपाई वो आम ग्राहकों से ही करना चाहेंगी और ऐसे में आम आदमी इससे दूर ही रहेगा। टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद कई डिवाइस इसके बैंडविथ को सपोर्ट नहीं करते ऐसे में बहुत सारे डिवाइस को बदलना होगा जिससे उनको भी बहुत सारा नुकसान होने की आशंका है। वैसे तो कुछ रिपोर्ट बता रहे हैं कि हाई क्वालिटी वाले 4G फोन में ही 5जी इंटरनेट चला सकेंगे लेकिन बहुत सारे लोगों को अपना फोन बदलकर 5 जी फोन भी लेना पड़ेगा, जिससे काफी बेवजह का खर्च बढ़ेगा। 5G में इस्तेमाल होने वाली मिलीमीटर-वेव उसके रास्ते में आने वाले रुकावटों जैसे पेड़ों के द्वारा या बारिश की वजह से अवशोषित भी हो सकता है। जो एक बड़ी चुनौती है। तो कुल मिलाकर चुनौतियां हैं, लेकिन उम्मीद है धीरे धीरे उनसे पार भी पा लिया जाएगा। बाकी आप 5 जी से मिलने वाले फायदों के बारे में सोचिए और अगर कारोबार के किसी नए आइडियाज पर काम करना जारी रखें, हो सकता आप ही कोई नया स्टार्टअप कर पाने में कामयाब हो जाएं। तो हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।