उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)उपचुनाव की तैयारियों में तेजी
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)में आगामी उपचुनाव 2024 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 7 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। करहल सीट से अनुजेश यादव को पार्टी का टिकट मिला है, जो इस उपचुनाव का एक बड़ा आकर्षण है।
भाजपा(BJP) ने जारी की 7 उम्मीदवारों की सूची
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में 7 नाम शामिल हैं, जो विभिन्न विधानसभा सीटों से पार्टी के प्रत्याशी होंगे। इन उम्मीदवारों का चयन भाजपा की चुनावी रणनीति और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
करहल सीट से अनुजेश यादव को टिकट
करहल विधानसभा सीट, जो उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है, से भाजपा ने अनुजेश यादव को मैदान में उतारा है। यह सीट पहले समाजवादी पार्टी के पास थी, लेकिन भाजपा की इस नई रणनीति से यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अनुजेश यादव की उम्मीदवारी को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र यादव बहुल है और अनुजेश यादव की पकड़ इस इलाके में मजबूत मानी जाती है।
उपचुनाव की महत्वपूर्ण सीटें
इस बार के उपचुनाव में कई प्रमुख सीटों पर जोरदार मुकाबला देखने को मिलेगा। करहल के अलावा अन्य 6 सीटों पर भी भाजपा ने अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। हर सीट पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर रणनीतियां बनाई जा रही हैं।
भाजपा की चुनावी रणनीति
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) उपचुनाव के लिए भाजपा ने एक मजबूत चुनावी अभियान की योजना बनाई है। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के चयन में जातिगत समीकरणों और क्षेत्रीय मुद्दों का खास ध्यान रखा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि भाजपा की जीत सुनिश्चित हो सके।
समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती
करहल सीट से अनुजेश यादव को टिकट मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती बढ़ गई है। यह सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन भाजपा ने यहां से युवा और प्रभावी नेता को मैदान में उतारकर मुकाबले को कठिन बना दिया है।
उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) उपचुनाव में भाजपा की रणनीति और उम्मीदवार चयन से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी अपने किले को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। करहल से अनुजेश यादव का चयन और अन्य 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा से पार्टी की चुनावी तैयारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह उपचुनाव एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
– समृद्धि सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने यूपी की आर्थिक विकास यात्रा को बताया सफल
– Uttar Pradesh,मुख्यमंत्री ने माफिया के खिलाफ कार्रवाई और निवेश को दी प्राथमिकता
– बोले सीएम, यूपी में 64 हजार एकड़ भूमि माफियाओं से मुक्त कराई गई
– राज्य के एमएसएमई और स्किल्ड मैनपावर बड़े निवेश के आधार : सीएम योगी
– पुलिस को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया : मुख्यमंत्री
– देश के सबसे अच्छे हाईवे यूपी में : योगी आदित्यनाथ
Uttar Pradesh:लखनऊ, 23 अक्टूबर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) मार्च 2025 तक 32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सीएम योगी ने यह बात बुधवार को एक प्रमुख समाचार पत्र द्वारा ताज होटल में आयोजित ‘समृद्धि’ राउंड टेबल सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने इस कार्यक्रम में राज्य की आर्थिक उपलब्धियों, सुरक्षा व्यवस्था, औद्योगिक विकास और माफिया के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा की।
Uttar Pradesh:पहले होते थे वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारें वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया की नीति अपनाती थीं, जबकि हमने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के माध्यम से उत्तर प्रदेश की ब्रांडिंग की। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय राज्य की जीडीपी 12 लाख करोड़ रुपये थी, लेकिन उनकी सरकार के प्रयासों से 2023-24 में यह आंकड़ा 26 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है और अब 32 लाख करोड़ का लक्ष्य तय किया गया है।
Uttar Pradesh:माफिया और अपराधी कतई बर्दाश्त नहीं
सीएम योगी ने राज्य में माफिया के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अपराधियों और माफिया को कतई बर्दाश्त नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जिस क्रूरता से अपराधी और माफिया नागरिकों के साथ व्यवहार करते थे, उसी क्रूरता से हमारी सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती है। उन्होंने बताया कि राज्य में एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसके तहत 64 हजार एकड़ भूमि माफियाओं से मुक्त कराई गई है। पहले की सरकारें माफिया की मदद करती थीं, लेकिन अब उनकी सुरक्षा हटाकर राज्य को माफिया मुक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Uttar Pradesh:यूपी में निवेश के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में निवेश और औद्योगिक विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2017 में जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब निवेश की स्थिति बेहद खराब थी। लेकिन अब यूपी में निवेश के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पहले हमारे अधिकारियों को 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश लाना भी बड़ी बात लगती थी, लेकिन आज हम 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त कर चुके हैं, जिससे डेढ़ करोड़ युवाओं को रोजगार मिलेगा।
Uttar Pradesh:पुलिस को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया
सुरक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पुलिस बल में बड़े सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि 1.54 लाख पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है और पुलिस को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में अपराधी पुलिस की मदद से ही अपराध करते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। यूपी पुलिस अब पूरी तरह से सक्षम है और अपराधियों में खौफ पैदा कर रही है। सीएम योगी ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने पुलिस ट्रेनिंग की अवधि को बढ़ाया और 6 हजार पुलिस कर्मियों को एक साथ ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा, पुलिस बल में पैरा मिलिट्री और मिलिट्री सेंटर से भी सहयोग लिया गया, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है।
Uttar Pradesh CM Yogi
Uttar Pradesh:देश के सबसे अच्छे हाईवे यूपी में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की चर्चा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश का सबसे अधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी की सड़कों को गड्ढों से भरा हुआ माना जाता था, लेकिन आज राज्य की सड़कें देश के सबसे अच्छे हाइवे में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बन चुका है। गंगा एक्सप्रेसवे पर कार्य चल रहा है, जिसके मेन कैरेजवे को इस साल के अंत तक कार्यान्वित कर दिया जाएगा। आज गोरखपुर-लिंक एक्सप्रेसवे बनकर तैयार है। इसके अलावा, देश का पहला 12-लेन एक्सप्रेसवे दिल्ली-मेरठ में शुरू हो चुका है और छह शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाएं भी चालू हैं। देश का पहला वाटरवे वाराणसी-हल्दिया के बीच प्रारंभ हो चुका है।
Uttar Pradesh:वाराणसी में हैं सर्वााधिक जीआई टैग
लॉजिस्टिक्स हब बनने के लिए यूपी में किए जा रहे कार्यों पर चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वाराणसी में लॉजिस्टिक मल्टीमॉडल टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है और गौतम बुद्ध नगर में लॉजिस्टिक हब की भी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यूपी ने 75 जिलों में 75 जीआई टैग प्राप्त किए हैं, जिसमें वाराणसी सबसे आगे है। सीएम योगी ने व्यापार और निर्यात के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद अब 16 हजार करोड़ रुपये के उत्पादों का एक्सपोर्ट कर रहा है, जबकि भदोही का कॉर्पेट उद्योग 8 हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट करता है। उन्होंने फिरोजाबाद के ग्लास उद्योग और मेरठ के खेल उत्पाद उद्योग का भी उल्लेख किया, जो अब देश-विदेश में ब्रांड बन चुके हैं।
Uttar Pradesh:आर्थिक समृद्धि के लिए बिजनेस महत्वपूर्ण
सीएम योगी ने कहा कि बिजनेस राज्य की आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य सभी एक साथ चलते हैं और इन्हें अलग नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि राज्य के एमएसएमई और स्किल्ड मैनपावर बड़े निवेश के आधार बनते हैं। पीएम मोदी की विश्वकर्मा योजना और ओडीओपी योजना बड़े निवेश के साथ रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण के अंत में कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है और आने वाले समय में यह देश की नंबर एक अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की आर्थिक और औद्योगिक विकास यात्रा जारी रहेगी और उत्तर प्रदेश भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए महाकुंभ के आयोजन को यादगार बनाने का किया जा रहा हर संभव प्रयास
देर रात तक काम में जुटे अधिकारी, निर्माण कार्यों के निरीक्षण के साथ ही दुरुस्त करवा रहे व्यवस्था
Uttar Pradesh:निर्माण और विकास कार्यों में कमी पर तुरंत सुधार के लिए किया जा रहा निर्देशित
Uttar Pradesh: प्रयागराज, 23 अक्टूबर। दुनिया के सबसे बड़े सामूहिक आयोजन महाकुंभ 2025 की तैयारियों को लेकर प्रयागराज में पूरा सरकारी अमला दिन रात काम में जुटा हुआ है। अधिकारी दिन भर जहां कार्यालयों में महाकुंभ की तैयारियों से संबंधित अपने जरूरी काम निपटा रहे हैं तो वहीं देर रात तक विकास और निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर प्रगति का जायजा भी ले रहे हैं। यही नहीं, कहीं पर भी कोई अव्यवस्था होने पर तुरंत अधीनस्थ कर्मचारियों को व्यवस्था सही करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। गतिविधियों में आई इस तेजी से स्पष्ट है कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप मेला प्रशासन और जिला प्रशासन समस्त कार्यों को डेडलाइन से पहले ही पूर्ण कर महाकुंभ को श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार और शानदार अनुभव बनाने के प्रति तत्परता से कार्य कर रहा है।
Uttar Pradesh:विकास कार्यों में दिखाई दे रही तेजी
Uttar Pradesh: प्रयागराज, महाकुंभ 2025 की शुरुआत को अभी दो महीने से भी ज्यादा का समय बचा हुआ है। पूरे प्रयागराज(Uttar Pradesh) में महाकुंभ की तैयारियां पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए तमाम तरह की व्यवस्थाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है। रेलवे ओवरब्रिज से लेकर सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य जारी है। थीमेटिक गेट्स से लेकर वॉल पेंटिंग की जा रही है। पार्कों का सौंदर्यीकरण चल रहा है। मंदिरों के जीर्णोद्धार से लेकर घाटों पर भी निर्माण कार्य समेत महाकुंभ क्षेत्र में तमाम विकास कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। मेला प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी, नगर निगम, पर्यटन विभाग, सिंचाई विभाग, सेतु निगम समेत तमाम विभाग आपसी समन्वय के साथ इन परियोजनाओं को पूर्ण करने में लगे हुए हैं। विकास कार्यों की भौतिक प्रगति को देखने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारी देर रात निरीक्षण में जुट गए हैं। आधी रात को अधिकारियों के औचक निरीक्षण से काम की रफ्तार में भी तेजी आई है।
Uttar Pradesh: प्रयागराज
Uttar Pradesh:स्थायी कार्यों पर है जोर
Uttar Pradesh: प्रयागराज, बीते कुछ दिनों में पीडीए के वीसी और सचिव ने हाई कोर्ट रोड, छोटा बघाड़ा रोड, अरैल, कीडगंज, हटिया, नूरुल्लाह, झूंसी बस स्टैंड और लेटे हनुमान मंदिर में चल रहे विकास कार्यों का देर रात निरीक्षण किया और कार्यदायी संस्थाओं को आवश्यक सुधार निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारी भी विभिन्न स्थानों पर चल रहे विकास और निर्माण कार्यों का आधी रात निरीक्षण करने पहुंच गए और पानी से लेकर बिजली सप्लाई को लेकर विभागीय कर्मचारियों को निर्देशित किया। देर रात अधिकारियों की सक्रियता से विभागीय कार्यों में तेजी देखने को मिल रही है। फोकस उन कार्यों पर है, जो विगत काफी दिनों से पेंडिंग चल रहे हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि लंबे समय तक प्रयागवासी महाकुंभ के दौरान हुए विकास कार्यों का लाभ उठा सकें। ज्यादातर कार्य टेंपरेरी की बजाए पर्मानेंट बेसिस पर किए जा रहे हैं।
Greater Noida:-
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उद्योग सहायक समिति की बैठक में उद्यमियों ने ओटीएस की उठाई मांग
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— बड़ी संख्या में उद्योगों को फंक्शनल सर्टिफिकेट जारी करने पर उद्यमियों ने सराहा
–नो-ड्यूज, ट्रैफिक की समस्या, हैवी वाहनों की नो-एंट्री से जुड़े मुद्दे भी उठाए
–उद्योगों से जुड़े मुद्दे हल करने के लिए जल्द ही समिति बनाने का आश्वासन
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ग्रेटर नोएडा (Greater Noida): उद्योग सहायक समिति की बैठक में एकमुश्त समाधान योजना की मांग
ग्रेटर नोएडा (Greater Noida)। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने मंगलवार को उद्योग सहायक समिति की बैठक की, जिसमें नोएडा एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन, इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन, इंडस्ट्रियल एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन, ईकोटेक-12 एसोसिएशन सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि व उद्यमी शामिल हुए। उद्यमियों ने इस बैठक में उद्योगों के लिए एकमुश्त समाधान योजना लागू करने की मांग की। इस पर एसीईओ ने सीईओ से वार्ता कर जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया। बैठक में उद्यमियों ने बताया कि पानी की सप्लाई न होने के बावजूद बिल भेजकर भुगतान मांगा जा रहा है। नो-ड्यूज जारी करने में अधिक समय लग रहा है। एसीईओ ने वित्त विभाग से इस मसले का शीघ्र हल निकालने के निर्देश दिए। एसीईओ ने उद्यमियों को बताया कि नो-ड्यूज, फंक्शनल सर्टिफिकेट, सीआईसी जैसी सेवाओं को और सरलीकृत करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने उद्योगों की समस्याओं को हल करने के लिए एसीईओ की अध्यक्षता में जल्द ही एक समिति बनाने का आश्वासन दिया। उद्यमियों ने बैठक में ट्रैफिक की समस्या, हैवी वाहनों की नो एंट्री की समयावधि घटाने आदि मांग भी रखी। वहीं, उद्यमियों ने उद्योगों की समस्याओं को शीघ्र हल किए जाने और कम समय में फंक्शनल सर्टिफिकेट जारी करने पर सराहना भी की।
Greater Noida
ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) में उद्यमियों की समस्याओं पर एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव की बैठक
इंडस्ट्रियल एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने कहा कि विगत 6 माह में प्राधिकरण के उद्योग विभाग के कार्यों में काफी सुधार हुआ है। बड़ी संख्या में उद्योगों को फंक्शनल सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। उद्यमी मित्र की तरफ से आयोजित इस बैठक में एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव के साथ प्राधिकरण से महाप्रबंधक वित्त विनोद कुमार, ओएसडी नवीन कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन सुधीर कुमार, वरिष्ठ प्रबंधक चेतराम सिंह आदि शामिल रहे, जबकि उद्यमियों की तरफ से नोएडा (Greater Noida) एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन, इंडस्ट्रियल एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित उपाध्याय, आईआईए से चंचल कुमार, ईकोटेक 12 एसोसिएशन से नरेश कुमार गुप्ता, सुनील दत्त, एसके शर्मा ,
राकेश अग्रवाल, अमित अग्रवाल
आदि मौजूद रहे। Also Read This: Noida में कॉलेज एडमिशन फर्जीवाड़ा: Noida में फर्जी फॉर्म और एग्जाम के जरिए ठगी का खुलासा हुए 2 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) की राजनीति में उपचुनाव का समय आते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है, इस बार चर्चा का मुख्य केंद्र सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर हो रही है दोनों दल दो और पांच सीटों के बीच फंसी हुई है जिससे उनके बीच की दोस्ती पर सवाल खड़े हो रहे हैं, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस ग्रैंड ओल्ड पार्टी के रूप में इस लड़ाई से पीछे हट जाएगी या फिर अपनी राजनीतिक जमीन बनाए रखने के लिए मजबूती से डटेगी।
सीट बंटवारे को लेकर सपा कांग्रेस में टकराव
उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) की सियासत में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नए समीकरण बनता दिख रहा है लेकिन दो और पांच सीटों को लेकर मतभेदों ने इस गठबंधन पर असर डाला है सपा ने 5 सीटों पर दावत ठोका है, जबकि कांग्रेस दो सीटों पर जोर दे रही है सीट बंटवारे को यह मुद्दा उनके गठबंधन में एक बड़ा रोड बन गया है।
कांग्रेस की रणनीति पीछे हटे या डटे रहे?
कांग्रेस, जो कभी उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) की राजनीति में मजबूत पकड़ रखती थी, अब इस उप चुनाव में खुद को एक नई भूमिका में देख रही है सवाल यह है कि क्या कांग्रेस समाजवादी पार्टी के दबाव में जाकर पीछे हटेगी या फिर अपनी राजनीतिक ताकत को फिर से पानी के लिए रेडी रहेगी कांग्रेस की रणनीति इस चुनाव में उनके भविष्य की दिशा को तय करेगी।
सपा की योजना
सपा के लिए उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) उपचुनाव का एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि 2024 के आम चुनाव से पहले पार्टी के लोकप्रियता को मापने का एक जरिया हो सकता है पार्टी का मानना है की पांच सीटों पर लड़ने से उनकी स्थिति मजबूत होगी, और यह उसके लिए एक बड़ा राजनीतिक फायदा साबित हो सकता है।
उपचुनाव का महत्व
उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh)में उपचुनाव हमेशा से ही खास रहे हैं क्योंकि यह राज्य के सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं चाहे सपा हो कांग्रेस हो या फिर कोई अन्य दल, सभी के लिए उपचुनाव 2020 के आम चुनाव से पहले अपनी शक्ति और समर्थन आधार को मजबूत करने का एक सुनहरा मौका है।
गठबंधन पर सवाल
सपा और कांग्रेस के बीच चल रहे इस सीट बंटवारे को लेकर उपजी दरार ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इन दोनों दलों का गठबंधन लंबा चलेगा? क्या यह सिर्फ उपचुनाव तक सीमित रहेगा या फिर आगे भी इसके सियासी दोस्ती बनी रहेगी?
उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) के उपचुनाव में दो और पांच सीटों की लड़ाई में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को एक बड़ी चुनौती दी है। जो दोनों दलों के बीच बढ़ती खींचतान से यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपनी स्थिति से पीछे हटेगी या फिर अपने राजनीतिक हितों की रक्षा करेगी आने वाले समय में यह तय करेगा कि उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) की राजनीति में यह दोनों दल किस तरह से आगे बढ़ेंगे।
Uttar Pradesh बहराइच जिले में एक इलाके में 23 मकान को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया जो स्थानीय निवासियों के बीच दहशत फैला दी है यह मामला तब और गंभीर हो गया जब नोटिस के बाद भेदभाव के आरोप लगाए जाने लगे प्रभावित परिवारों का कहना है कि यह कार्रवाई अनुचित और भेदभाव पूर्ण है खासकर जब इलाके में पहले से ही कोई वैध कारण नजर नहीं आता।
Uttar Pradesh: नोटिस का असर
इन नोटिस ओके जारी होने के बाद से प्रभावित परिवारों में भारी तनाव है ज्यादातर परिवार नम्र आए वर्ग से आते हैं और उनके पास इस वक्त कोई अन्य ठिकाना नहीं है इन परिवारों में कई ऐसी बेटियां हैं जो शादी की उम्र की है जिससे परिवारों की चिंता और बढ़ गई है, कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि मकान खाली कराए जाते हैं तो वह कहां जाएंगे और अपने परिवार का क्या करेंगे।
भेदभाव का आरोप
स्थानी निवासियों का मानना है कि यह नोटिस केवल चुनिंदा समुदाय और परिवारों को निशाना बनाकर भेजा गया है जो उनका दावा है कि यह पूरी तरह भेदभावपूर्ण है और उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि इस तरह की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक और सांप्रदायिक कारण हो सकता है हालांकि स्थानीय प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि यह कदम अवैध निर्माण और नियमों का उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
Uttar Pradesh: प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि इन मकानों के निर्माण में कई कानूनी प्रक्रियाओ का पालन नहीं किया गया है जिसके कारण उन्हें खाली करने का आदेश दिया गया है अधिकारियों के मुताबिक यह निर्माण किसी भी समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाकर नहीं लिया गया है बल्कि सभी नियमों के अनुरूप किया गया है, प्रशासन ने यह भी कहा है कि जिन लोगों को नोटिस मिले हैं उनके पास कानूनी तौर पर अपील करने का अधिकार है।
आगे का रास्ता
हालांकि प्रशासन ने अपनी तरफ से स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमों के उल्लंघन के आधार पर की जा रही है लेकिन प्रभावित परिवारों को डर और सुरक्षा अभी भी कायम है कि वह अपने बात को लेकर उच्च स्तर पर न्याय की मांग कर रहे हैं और इस उम्मीद में है कि उनके लिए कोई समाधान निकलेगा।
बहराइच में 23 मकान को खाली करने के नोटिस ने स्थानीय स्तर पर बड़ी चिंता पैदा कर दी है जो भेदभाव के आरोप के बीच प्रशासन और निवासियों के बीच एक संवाद की आवश्यकता है ताकि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण और निष्पक्ष समाधान निकाला जा सके।
महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव 2024 करीब है और इस चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा रहा है इंडिया ब्लॉक जिसमें कांग्रेस NCP (शरद पवार गुट ) और (शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट) शामिल है, वहीं समाजवादी पार्टी को नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। अखिलेश यादव की पार्टी को सीट बंटवारे पर आपत्ति है क्योंकि यह नाराजगी महाराष्ट्र में गठबंधन के लिए चुनौती बन सकती हैं।
महाराष्ट्र (Maharashtra) में सीट शेयरिंग का विवाद
महाराष्ट्र (Maharashtra) में कांग्रेस एनसीपी और शिवसेना का गठबंधन मजबूत है लेकिन समाजवादी पार्टी भी अपने लिए समान जनक सिट चाहती है अखिलेश यादव की मांग है कि सपा को उसकी ताकत और प्रभाव के अनुसार सिट मिलनी चाहिए लेकिन गठबंधन ने अन्य दलों से इस पर सहमति नहीं मिल रहा मध्य प्रदेश में पहले ही सीट बंटवारे पर सपा और कांग्रेस के बीच तनाव देखें देखने को मिला था और वही स्थिति यहां भी महाराष्ट्र(Maharashtra)में नजर आ रही है।
अखिलेश यादव की नाराजगी का असर
अखिलेश यादव की नाराजगी का सीधा असर India ब्लॉक की एकता पर पड सकता है। अगर सीट शेयरिंग पर जल्द ही सहमति नहीं मिली तो समाजवादी पार्टी अलग चुनाव लड़ने का फैसला ले सकती है इससे न केवल महाराष्ट्र बल्कि अन्य राज्यों में गठबंधन कमजोर हो सकता है।
महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव 2024 में सीट शेयरिंग का मामला इंडिया ब्लॉक के लिए एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जो अखिलेश यादव की नाराजगी को नजर अंदाज करना गठबंधन के लिए भारी पड़ सकता है, अब देखना यह होगा कि क्या गठबंधन इस विवाद को सुलझा पाता है या फिर India ब्लॉक में दरारें गहरी होगी।
हरियाणा(Haryana) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए सीएम योगीमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर दीं शुभकामनाएंआरती सिंह राव, कृष्ण कुमार बेदी, श्याम सिंह राणा भी बने मंत्री, योगी ने तीनों के लिए किया था प्रचार।
लखनऊ, 17 अक्टूबर:* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को पंचकूला में हुए हरियाणा (Haryana) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा (Haryana)के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत मंत्रिमंडल में शामिल सभी सदस्यों को भी बधाई दी।
प्रधानमंत्री, गृह मंत्री व रक्षा मंत्री का किया अभिवादन
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर अभिवादन किया। योगी आदित्यनाथ ने अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री समेत गणमान्य लोगों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आमजन का भी हाथ हिलाकर अभिवादन किया।
साकार होगी ‘विकसित हरियाणा (Haryana) , विकसित भारत’ की संकल्पना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर शुभकामनाएं दीं। सीएम योगी ने लिखा – नायब सिंह सैनी जी को हरियाणा (Haryana) राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन तथा आपके (नायब सिंह सैनी) यशस्वी नेतृत्व में ‘विकसित हरियाणा-विकसित भारत’ की संकल्पना साकार होगी।
योगी ने आरती, केके बेदी, श्याम सिंह राणा को भी दी बधाई
नायब सिंह सैनी मंत्रिमंडल में अटेली से जीत दर्ज करने वालीं आरती सिंह राव, नरवाना से कृष्ण कुमार बेदी, रादौर से श्याम सिंह राणा भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 सितंबर को कृष्ण कुमार बेदी तथा 28 सितंबर को आरती सिंह राव व श्याम सिंह राणा के लिए चुनाव प्रचार किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता नायब सिंह सैनी ने दूसरी बार हरियाणा(Haryana) के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
हरियाणा(Haryana) में आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना का गवाह बना, जहां श्रुति चौधरी समेत और कई नेताओं ने मंत्री पद के लिए शपथ ली यह शपथ ग्रहण समारोह राज्य के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत कर रहा है हरियाणा के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित इस समारोह ने राज्य की राजनीति को एक नई दिशा की शुरुआत हुई है।
हरियाणा (Haryana) की राजनीति में नए-नए चेहरो का आगमन
हरियाणा(Haryana) शपथ समारोह में हरियाणा की राजनीति के लिए प्रमुख चेहरे और नए चेहरे शामिल हुए हैं जो श्रुति चौधरी एक युवा और भर्ती हुई नेता है इस अवसर पर मंत्री पद की शपथ ली उनके शपथ लेने का यह स्पष्ट हो गया है कि हरियाणा(Haryana) की राजनीति में युवा नेताओं को अधिक जगह मिल रही है।
Haryana
श्रुति चौधरी:- राजनीतिक सफर
श्रुति चौधरी का राजनीतिक सफर बहुत ही प्रेरणादायक रहा है जो उन्होंने अपने दादा बंसीलाल और माता किरण चौधरी से राजनीतिक की प्रेरणा ली है श्रुति चौधरी हरियाणा(Haryana) के भिवानी से आती है जो हमेशा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है, जो उनके शपथ ग्रहण से यह उम्मीद की जा रही है कि वह हरियाणा(Haryana) में विकास की नई लहर लाएंगी और जनता की समस्याओं का हल करने में ठोस कदम उठाएंगी।
Haryana
हरियाणा(Haryana) के लिए क्या होगा अब अगला कदम
इस शपथ सम रो के बाद हरियाणा (Haryana) में कई नई-नई नीतियों और योजनाओं की घोषणा हो सकती है जो नई मंत्रिमंडल की टीम को कई चुनौतियों का सामना करना होगा। खासकर ग्रामीण विकास कृषि रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में श्रुति चौधरी जैसे युवा नेताओं से यही उम्मीद है की जा रही है, कि वह राज्य को नहीं ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
यह शपथ ग्रहण समारोह हरियाणा(Haryana) के राजनीतिक भू-दृश्य में बदलाव की ओर संकेत कर रहा है, जो नई सरकार और मंत्रिमंडल से हरियाणा(Haryana) की जनता को बहुत सी उम्मीदे है। श्रुति चौधरी के साथ-साथ अन्य मंत्रियों की नियुक्ति के राज्य में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। और यह देखना दिलचस्प होगा कि अपने कार्यकाल के दौरान,श्रुति चौधरी कैसे काम करेगी।
Supreme court: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) D.Y. की अध्यक्षता वाली एक संविधान पीठ चंद्रचूड़ ने गुरुवार 17 अक्टूबर 2024 को बहुमत के फैसले में नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6A की संवैधानिकता को बरकरार रखा हालांकि न्यायमूर्ती जेबी पारदीवाला ने मना किया कि यह धारा संभावित प्रभाव से असंवैधानिक है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए Citizenship Act Section 6A की संवैधानिकता को बरकरार रखा: प्रमुख बिंदु
धारा 6 ए भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद असम आंदोलन के प्रतिनिधियों के साथ तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा 15 अगस्त 1985 को यह समझौता ज्ञापन जिसे “असम समझौता” कहा जाता है उसको आगे बढ़ाने के लिए 1955 के अधिनियम में डाला गया यह एक विशेष प्रावधान है, 1971 में।
सुप्रीम कोर्ट(Supreme court)का निर्णय: डी.वाई. चंद्रचूड़ ( D.Y. Chandrachud’s) की पीठ ने नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए को स्वीकार किया:
धारा 6A के तहत जो विदेशी 1 जनवरी 1966 से पहले असम आए थे वह लोग और राज्य में सामान्य तौर पर निवासी थे उनके पास भारतीय नागरिकों के सभी अधिकार और दायित्व होंगे जो लोग 1 जनवरी 1966 और 25 मार्च 1971 के बीच राज्य में आए थे और उनके पास समान अधिकार और दायित्व होंगे, शिव इसके की वेद 10 वर्षों तक मतदान नहीं कर पाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट(Supreme court) का बहुमत निर्णय: नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए का असम के लिए महत्व:
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में सवाल उठाया था की धारा 6A को लागू करने के लिए सीमावर्ती राज्यों में से अकेले असम को ही क्यों चुना गया। उन्होंने “घुसपैठ में वृद्धि को धारा 6A की परिणाम या प्रभाव” बताया था। इसके विपरीत उत्तरदाताओं ने बताया कि क्षेत्र की संस्कृति विशेषताओं की सुरक्षा को नागरिकता से इनकार करने की हद तक बढ़ाया जा सकता है क्योंकि इससे नागरिक राष्ट्रवाद में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में बदलाव आएगा, जो संवैधानिक लोक के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए (Section 6A) की वैधता की पुष्टि की: विवाद के बीच
इस फैसले को असम की NRC प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा जो इसके अलावा यदि 24 मार्च 1971 को राज्य में प्रवेश के लिए वेद कट ऑफ तारीख के रूप में बरकरार रखा गया है तो विवाद स्पष्ट नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत 2019 को भी असम समझौता का उल्लंघन माना जा सकता है क्योंकि यह एक अलग समय रेखा स्थापित करता है।