भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका! आज सुबह इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में Indian rupee record low पर पहुंच गया है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। पिछले शुक्रवार के बंद भाव से यह 41 पैसे की भारी गिरावट दर्शाता है।
मुख्य कारण : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव
Indian rupee record low की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष है, जो अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान की आशंका बनी हुई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें देश के आयात बिल को बढ़ा रही हैं और डॉलर की मांग में उछाल आ रहा है।
रुपया इंटरबैंक में 93.84 पर खुला और जल्द ही 93.94 तक लुढ़क गया।
एशियाई मुद्राओं में भी 0.1% से 0.8% तक की कमजोरी देखी गई।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $114 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारत के लिए महंगा साबित हो रहा है।
Indian rupee record low of 93.94 against the US Dollar amid Middle East tensions.
विशेषज्ञों की राय और भविष्यवाणी
BofA ग्लोबल रिसर्च के अनुसार, अगर यह संकट जारी रहा तो Indian rupee record low से आगे बढ़कर जून 2026 तक 94 के स्तर पर पहुंच सकता है। पहले यह अनुमान 89 का था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। विदेशी निवेशकों की निकासी (FII outflows) और मजबूत अमेरिकी डॉलर भी रुपए पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बाजार में इंटरफेस कर रहा है ताकि गिरावट को नियंत्रित किया जा सके, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
अर्थव्यवस्था पर असर
महंगाई बढ़ने का खतरा : तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
शेयर बाजार पर दबाव : आज सुबह सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखी गई।
आयात महंगा : भारत के चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ सकता है।
यह Indian rupee record low न केवल मुद्रा बाजार बल्कि आम आदमी की जेब पर भी असर डाल सकता है। अगर मिडिल ईस्ट तनाव कम होता है तो रुपया स्थिर हो सकता है, लेकिन फिलहाल जोखिम बरकरार है। इन्वेस्टर्स को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
Harish Rana Euthanasia : 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें 32 वर्षीय हरिश राणा (गाजियाबाद/कानपुर क्षेत्र) को Passive Euthanasia (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दी गई। यह भारत में पहली बार किसी व्यक्ति के लिए कोर्ट द्वारा मंजूर पैसिव यूथेनेशिया का मामला है।
निष्क्रिय इच्छामृत्यु क्या होता है? (What is passive euthanasia?)
इच्छामृत्यु (Euthanasia) का मतलब है – किसी गंभीर बीमारी या पीड़ा से जूझ रहे व्यक्ति की जान को जानबूझकर समाप्त करना, ताकि उसकी पीड़ा खत्म हो सके। लेकिन भारत में यह दो तरह से बाँटा जाता है:
Active Euthanasia (सक्रिय इच्छामृत्यु) : इसमें डॉक्टर कोई दवा या इंजेक्शन देकर सीधे मौत का कारण बनते हैं। यह भारत में गैरकानूनी है और हत्या माना जाता है।
Passive Euthanasia (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) : इसमें डॉक्टर कुछ नहीं करते – यानी जीवन को अस्वाभाविक रूप से लंबा खींचने वाले उपचार (जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब, ट्रेकियोस्टॉमी या न्यूट्रिशन ट्यूब) को हटा दिया जाता है या रोक दिया जाता है। फिर व्यक्ति को प्रकृति के भरोसे छोड़ दिया जाता है, ताकि वह प्राकृतिक मौत मर सके। यह किसी को मारना नहीं, बल्कि अनावश्यक अस्वाभाविक जीवन को रोकना है।
Harish Rana Euthanasia
यह तभी अनुमति मिलती है जब:-
मरीज की हालत पूरी तरह कठिन हो (कोई रिकवरी की उम्मीद न हो)।
वह पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट (PVS) या कोमा जैसी स्थिति में हो।
मेडिकल बोर्ड (प्राइमरी और सेकेंडरी) एकमत से कहें कि रिकवरी असंभव है।
परिवार की सहमति हो और अदालत मंजूरी दे।
यह गरिमा के साथ मरने का अधिकार (Article 21 के तहत) मान्य है।
Harish Rana Euthanasia
Harish Rana Euthanasia : हरिश राणा का मामला क्या है?
Harish Rana Euthanasia 32 वर्ष, गाजियाबाद/कानपुर क्षेत्र से 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में बी.टेक छात्र थे। रक्षाबंधन के दिन वे चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे गंभीर ब्रेन इंजरी हुई। वे 100% क्वाड्रिप्लेजिक (चारों अंग लकवाग्रस्त) और पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में चले गए।
13 साल से वे बिस्तर पर हैं – बोल नहीं सकते, हिल नहीं सकते, कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। उन्हें ट्रेकियोस्टॉमी (सांस के लिए) और PEG फीडिंग ट्यूब (पोषण के लिए) से रखा जा रहा था।
उनके परिवार खासकर पिता अशोक राणा ने अदालत में याचिका दायर की कि बिना किसी उम्मीद के यह अस्वाभाविक जीवन सिर्फ पीड़ा बढ़ा रहा है। वे चाहते थे कि उपचार हटाकर उन्हें गरिमा के साथ प्राकृतिक मौत मिले।
Harish Rana Euthanasia
पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने मना किया था क्योंकि फीडिंग ट्यूब को कुछ गाइडलाइंस में शामिल नहीं माना गया।
सुप्रीम कोर्ट ने केस लिया, मेडिकल बोर्ड बनाए (AIIMS आदि से)।
11 मार्च 2026 को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला दिया – पहली बार भारत में किसी व्यक्ति को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी गई (2018 के Common Cause केस के बाद)।
कोर्ट ने कहा: फीडिंग ट्यूब भी मेडिकल ट्रीटमेंट है, इसे हटाया जा सकता है।
हरीश को AIIMS दिल्ली के पैलिएटिव केयर में भर्ती कराकर सुपरवाइज्ड तरीके से उपचार हटाया जाएगा।
जज पारदीवाला फैसला सुनाते हुए भावुक हो गए, परिवार की भक्ति की सराहना की और शेक्सपियर का “To be or not to be” उद्धृत किया।
कोर्ट ने सरकार से कहा कि एंड-ऑफ-लाइफ केयर के लिए कानून बनाएँ।
यह फैसला अरुणा शानबाग (2011) और Common Cause (2018) के बाद एक बड़ा कदम है। अब भारत में पैसिव यूथेनेशिया सख्त शर्तों के साथ संभव है, लेकिन एक्टिव अभी भी गैरकानूनी है।
Mumbai – Ahmedabad bullet train प्रोजेक्ट अब तेजी से आगे बढ़ रहा हैं! इस प्रोजेक्ट का ख़ास उदेश्य देश में हाई स्पीड रेल नेटवक की शुरुआत करना हैं, सरकार के मुतािबक कई हिस्सो में ट्रेक और स्टेशन का निर्माण तेजी से चल रहा और आने वाले समय में यह भारत के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव
ला सकता हैं!
जापान की आधुिनक तकनीक का इस्तेमाल
इस बुलेट ट्रैन परयोजना को जापान के सहयोग से तैयार किया जा रहा हैं, इसमें जापान की प्रसद्ध “Shinkansen” तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा! जो कि दुनिया की सबसे सुरक्षित और तेज ट्रेनों में गिनी जाएगी! ट्रेन की अधिकतम रफ़्तार 320 km/h हो सकती है |
Mumbai – Ahmedabad bullet train
Mumbai – Ahmedabad bullet train : आसान होगा मुं बई से अहमदाबाद का सफर
मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा | जहाँ अभी दूरी तय करने में 7 से 8 घं टे लगते थे, वहीं अब बुलेट ट्रेन के जरए सफर करीब 2 से 3 घं टे में पूरा किया जा सके गा! इससे यात्रियों के समय की बचत होगी, और लं बी दूरी की यात्रा आरामदायक और तेज हो जाएगी! माना जा रहा हैं की बुलेट ट्रेन शुरू होने व्यापार,पयटन और रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी, यही कारण है कि इस परयोजना को भारत के परवहन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है!
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार में बढ़ोतरी
इस परयोजना के निर्माण के दौरान हजारों इं जीिनयर तकनीशयन और मजदूरों को रोजगार मिलेगा एक्सपर्ट्स का मानना है की जब बुलेट ट्रेन पूरी तरह शुरू होगी, तो इसके आसपास के शहरों और क्षेत्र में व्यापार, पयटन और नई इंड्रस्टी के अवसर भी बढ़ेंगे! इसके अलावा हाई स्पीड रेल तकनीक के आने से भारत को नई तकनीक जानकारी और अनुभव भी मिलेगा ! इसके अलावा इस परयोजना से जुड़ी कई निर्माण कंपनियों मटेरियल सप्लायर और स्थानीय व्यवसाययों को भी काम मिल रहा है, जससे आर्थिक गतिविधिया भी तेज हो रही है!
Mumbai – Ahmedabad bullet train
भारत के हाई स्पीड भिवष्य की शुरुआत
Mumbai – Ahmedabad bullet train यह प्रोजेक्ट भारत और जापान दोनों देशों के सहयोग से पूरा किया जाएगा, इसमें जापान की आधुिनक तकनीक शकानसेन का इस्तेमाल किया जाएगा! साथ ही इस कॉरडोर की कुल लम्बाई 508 km है , जब यह योजना पूरी हो जाएगी, भारत भी उन चुनदा देशों में शािमल हो जाएगा जहां बुलेट ट्रेन चलती है| आने वाले समय में भारत की रेल यात्रा पहले से कहीं ज्यादा आधुिनक और सुिवधाजनक होने वाली है | बुलेट ट्रेन के लए कल स्टेशनों का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है, इसमें आधुिनक सुिवधाएं हाईटेक सस्टम शािमल होंगे|
Mumbai – Ahmedabad bullet train यह प्रोजेक्ट भारत के ट्रांसपोट सस्टम में एक बड़ी क्रांत माना जा रहा है| इस परयोजना को National high Speed Rail Cooperation Limited के द्वारा विकसित किया जा रहा है | यह भारत के भिवष्य के लिए एक महत्वपूण कदम माना जा रहा है |
Maharashtra Budget 2026 : हाल ही, में देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र का बजट 2026-27को पेश किया हैं यह बजट काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योकि इसमें राज्य के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरो पर खास ध्यान दिया गया हैं सरकार का लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और भविष्य में विकास की गति को तेज करना हैं
Maharashtra Budget 2026 : इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर ख़ास ध्यान
नए एक्सप्रेसवे और बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स के लिए हजारों करोड़ रूपों का बजट रखा गया है जिससे कि राज्य में कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिल सके! साथ ही नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेशवे और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया गया हैं! जिससे बड़े शहरो के साथ साथ छोटे शहरो और गावों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके!बेहतर सड़क और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से व्यापार, उद्योग और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद हैं, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं|
Maharashtra Budget 2026
2 लाख रूपये तक के कर्ज की माफ़ घोषणा
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों का 2 लाख तक का कर्जा माफ़ करने का ऐलान किया हैं,जिससे लाखों किसानों को आर्थिक राहत मिल सके और खेती को फ़िर से मजबूत करने में मदद मिले!कर्ज माफ़ की इस योजना से किसानों को सीधा लाभ मिलने की आशा जताई जा रही हैं,सरकार का कहना हैं की इस कदम से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती हैं
“माझी लाडकी बहिन योजना” को जारी रखने का फैसला
महिलाओ को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार नें “माझी लाडकी बहिन योजना को जारी करने के घोषणा की हैं इस योजना के द्वारा महिलाओ को प्रत्येक माह आर्थिक सहायता दी जाएगी ख़ासतौर पर मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओ के लिए यह योजना काफ़ी लाभदायक मानी जा रही हैं ! सरकार का मानना हैं की इस तरह की योजनाओं से महिलाओ को आर्थिक सुरक्षा मिलती हैं और समाज में उनकी भगादारी भी बढ़ती है |
Maharashtra Budget 2026
विकसित महाराष्ट्र की दिशा में कदम
सरकार का उदेश्य राज्य को आर्थिक,सामाजिक औद्योगिक रूप से और अधिक मजबूत बनाना हैं! इस बजट के तहत कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग शिक्षा और महिलाओ के सशक्तिकरण जैसे जरुरी क्षेत्रो पर विशेष ध्यान दिया गया हैं!साथ ही सरकार का कहना हैं की इन योजनाओं के जरिये न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे!
साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाने और शहरी विकास को गति देने के लिए भी कई योजनाएं बनाई गई हैं! साथ है सरकार का लक्ष्य हैं कि महाराष्ट्र को आने वाले समय में एक ऐसा राज्य बनाया जाए जहाँ आर्थिक विकास के साथ – साथ सामाजिक प्रगति भी सामान्य रूप से आगे बढे! यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाता हैं, तो इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और लोगो के जीवन स्तर में भी सुधार देखने को मिल सकता हैं!
India petrol diesel stock : पिछले कुछ दिनों से वेस्ट एशिया में ईरान-इज़राइल संघर्ष और अमेरिका की बढ़ती भागीदारी के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तनाव अपने चरम सीमा पर है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जहाँ से भारत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। सोशल मीडिया और न्यूज़ पर अफवाहें फैल रही हैं — क्या पेट्रोल-डीजल की भारी कमी हो जाएगी? क्या कीमतें 100-120 रुपये/लीटर तक पहुँच जाएँगी? क्या पेट्रोल पंप बंद हो जाएंगे?
सरकार के आधिकारिक सूत्रों (The Hindu, India Today, News18, Moneycontrol आदि से 3-4 मार्च 2026 की रिपोर्ट्स) के अनुसार, भारत के पास अभी कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का स्टॉक 25 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसी तरह रिफाइंड प्रोडक्ट्स जैसे पेट्रोल, डीजल, ATF आदि का स्टॉक भी 25 दिनों के लिए उपलब्ध है। कुल मिलाकर यह 50 दिनों (लगभग 7-8 हफ्ते) की मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है।
सरकार ने स्पष्ट कहा है: फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है। ग्लोबल क्रूड कीमतें बढ़ रही हैं (80-85 डॉलर/बैरल के आसपास), लेकिन भारत की तैयारी मजबूत है।
India petrol diesel stock 25 days
यह 25 + 25 दिन का स्टॉक क्या शामिल करता है?
यह मुख्य रूप से कमर्शियल स्टॉक है:
रिफाइनरियों (IOCL, BPCL, HPCL आदि) में रखा क्रूड और तैयार फ्यूल।
पोर्ट्स, पाइपलाइनों, ट्रांसपोर्टेशन में मौजूद टैंकर और गोदाम।
ट्रांजिट में आने वाले जहाजों का स्टॉक।
यह शॉर्ट-टर्म बफर है, जो अचानक सप्लाई रुकने पर तुरंत काम आता है।
असली ताकत : स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और कुल कवरेज
25 + 25 दिन सिर्फ कमर्शियल इन्वेंटरी का आंकड़ा है। इसमें शामिल नहीं है रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR), जो आपातकाल के लिए अलग से सुरक्षित कैवर्न्स में रखा जाता है।
SPR कैवर्न्स: विशाखापत्तनम, मंगलौर, पदुर में कुल क्षमता ~5.33 मिलियन मीट्रिक टन।
कमर्शियल + SPR + अन्य स्टोरेज मिलाकर कुल कवरेज 40-45 दिनों तक या इससे ज्यादा हो सकता है (Kpler डेटा के अनुसार ~100 मिलियन बैरल)।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी 2026 में संसद में बताया था कि पूरे सिस्टम (कैवर्न्स, रिफाइनरियां, पोर्ट्स, प्रोडक्ट्स) से 74 दिनों तक की जरूरत पूरी की जा सकती है।
LPG का स्टॉक भी 25-30 दिनों का है।
India petrol diesel stock 25 days
India petrol diesel stock : भारत क्यों सुरक्षित स्थिति में है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड आयातक है, लेकिन आयात सोर्स को डाइवर्सिफाई किया गया है।
रूस अब प्रमुख सप्लायर बन चुका है (सस्ता और स्थिर सप्लाई)।
अन्य स्रोत: अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका।
होर्मुज पर निर्भरता पहले से कम (~40-50%)।
सरकार 24×7 मॉनिटरिंग कर रही है और वैकल्पिक रूट्स/सप्लायर्स पर फोकस है।
क्या कोई रिस्क है?
अगर संकट लंबा खिंचता है (महीनों तक), तो:
ग्लोबल क्रूड कीमतें और बढ़ सकती हैं।
इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है (कुछ अनुमान: पेट्रोल 100+ रुपये/लीटर तक)। लेकिन तत्काल या शॉर्ट-टर्म संकट की कोई संभावना नहीं दिख रही। सरकार ने कहा है — घबराने की जरूरत नहीं, सप्लाई बाधित नहीं होगी।
India petrol diesel stock 25 days : भारत के पास 25 दिन क्रूड + 25 दिन पेट्रोल-डीजल का मजबूत कमर्शियल बफर है, SPR मिलाकर कुल 74 दिन तक की सुरक्षा। ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत किया जा रहा है। स्थिति पर नजर रखें, लेकिन पैनिक बायिंग या अफवाहों में न आएँ।
Karmayogi Course : आज का समय डिजिटल और तेजी से बदलते भारत का है। जहां विकसित भारत@2047 का सपना देखा जा रहा है, वहां सरकारी मशीनरी को भी पुराने ढर्रे से निकलकर अधिक कुशल, नागरिक-केंद्रित और तकनीक-सक्षम बनाना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने मिशन कर्मयोगी शुरू किया, और इसका मुख्य हिस्सा है Karmayogi Course , खासकर उत्तर प्रदेश में यह कोर्स अब अधिकारियों के लिए अनिवार्य हो चुका है। लेकिन आखिर कर्मयोगी कोर्स क्या है और यूपी के अफसरों के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए विस्तार से समझते हैं।
कर्मयोगी कोर्स क्या है? (What is Karmayogi Course)
मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे सितंबर 2020 में लॉन्च किया गया। इसका पूरा नाम नेशनल प्रोग्राम फॉर सिविल सर्विसेज कैपेसिटी बिल्डिंग (NPCSCB) है।
इस मिशन का मूल मंत्र है – “कर्मचारी से कर्मयोगी” बनना। यानी सरकारी कर्मचारी सिर्फ नियमों का पालन करने वाला न रहे, बल्कि वह भविष्योन्मुखी, नागरिक-केंद्रित, कुशल और परिणाम-उन्मुख बने।
इसके लिए बनाया गया है iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म – दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी ई-लर्निंग पोर्टल। यहां हजारों फ्री ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं, जैसे:
डिजिटल गवर्नेंस और AI
साइबर सिक्योरिटी
आपदा प्रबंधन
नेतृत्व विकास
नीति निर्माण
भूमिका-आधारित स्किल्स (Role-based training)
ये कोर्स हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। फोकस सिर्फ किताबी ज्ञान पर नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल्स, केस स्टडीज और वास्तविक चुनौतियों से निपटने पर है।
Karmayogi Course : उत्तर प्रदेश मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन में देश में सबसे आगे है। 2025 में यूपी ने सबसे ज्यादा यूजर्स ऑनबोर्ड किए और सबसे ज्यादा कोर्स कम्पलीट किए। लेकिन 2026 में यह और सख्त हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनवरी 2026 में स्पष्ट निर्देश दिए
सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 7-दिन का कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम अनिवार्य।
इसे प्रमोशन और ACR (Annual Confidential Report) से सीधे लिंक किया गया। बिना पूरा किए प्रमोशन रुक सकता है या ACR प्रभावित हो सकती है।
31 मार्च 2026 तक लेटेस्ट 3 कोर्स (जिसमें AI, साइबर सिक्योरिटी आदि शामिल) पूरा करना जरूरी। रिपोर्ट iGOT पर अपलोड करनी होगी।
विभागों को निर्देश – जरूरत-आधारित कोर्स बनाकर प्लेटफॉर्म पर अपलोड करें।
खासकर आपदा प्रबंधन कोर्स को बहुत महत्व दिया गया है। फरवरी 2026 में रिलीफ कमिश्नर के आदेश से डीएम, एसपी, एडीएम, सीडीओ, एसडीएम, एएसपी, तहसीलदार आदि जिलास्तरीय अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य हो गया। नए पोस्टिंग पर 1 महीने के अंदर पूरा करना जरूरी।
क्यों? क्योंकि यूपी में बाढ़, हीटवेव, वज्रपात जैसी आपदाएं आम हैं। बेहतर तैयारी से जन-धन का नुकसान कम हो सकता है।
प्रमोशन और सेवा शर्तें: अब ट्रेनिंग सिर्फ वैकल्पिक नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस का हिस्सा है। खराब परफॉर्मेंस पर प्रमोशन रुक सकता है।
डिजिटल और तकनीकी बदलाव: AI, साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्स अनिवार्य होने से अधिकारी आधुनिक चुनौतियों से निपट सकेंगे।
नागरिक-केंद्रित शासन: मिशन का फोकस है – सेवाएं तेज, पारदर्शी और संवेदनशील हों।
जमीनी स्तर पर प्रभाव: ANM, ASHA, पुलिस कांस्टेबल, पंचायती राज स्टाफ तक के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर। यूपी में लाखों कर्मचारी पहले से जुड़े हैं, और करोड़ों कोर्स पूरे हो चुके हैं।
राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान: केंद्र में 30 लाख+ और राज्यों में 2.2 करोड़+ कर्मचारियों को कवर करना है। यूपी इसका मॉडल राज्य बन रहा है।
कर्मयोगी बनना अब मजबूरी नहीं, जरूरत है
Karmayogi Course सिर्फ एक ऑनलाइन ट्रेनिंग नहीं है। यह सरकारी व्यवस्था को नए भारत के अनुरूप ढालने का माध्यम है। यूपी में जहां पहले से ही लाखों अधिकारी सक्रिय हैं, वहां अब प्रमोशन और ACR से जुड़ने के कारण हर अधिकारी को गंभीरता से इसे पूरा करना होगा।
अगर आप सरकारी सेवा में हैं या किसी अधिकारी को जानते हैं, तो तुरंत iGOT Karmayogi पर रजिस्टर करें। यह न सिर्फ करियर के लिए फायदेमंद है, बल्कि देश की सेवा को और बेहतर बनाने का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
विकसित भारत की नींव मजबूत तभी बनेगी, जब हर कर्मचारी कर्मयोगी बनेगा।
UGC के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 अब पूरे देश में तीखी बहस और विरोध का केंद्र बने हुए हैं। 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित और 15 जनवरी से प्रभावी इन नियमों का मुख्य लक्ष्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव (खासकर SC, ST, OBC के खिलाफ) को खत्म करना और समानता को बढ़ावा देना है। लेकिन जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों के विरोध के कारण ये नियम विवादास्पद हो गए हैं।
आज (28 जनवरी 2026) तक की ताजा स्थिति क्या है? आइए जानते हैं।
UGC Act नियमों की मुख्य बातें
Equal Opportunity Centre (EOC) : हर संस्थान में अनिवार्य, भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए।
Equity Committee : SC/ST/OBC, महिलाएं, दिव्यांग और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व; संस्थान प्रमुख की अध्यक्षता में।
अन्य तंत्र : 24×7 हेल्पलाइन, इक्विटी स्क्वाड, इक्विटी एम्बेसडर, शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई।
दंड : गैर-अनुपालन पर फंडिंग रोक, डिग्री प्रोग्राम बंद या मान्यता रद्द।
फोकस : 2012 के पुराने नियमों से ज्यादा सख्त, ओबीसी को स्पष्ट शामिल, फैकल्टी/स्टाफ भी कवर।
UGC नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और बढ़ते भेदभाव मामलों (2019-2024 में तेज उछाल) के बाद आए हैं।
ताजा अपडेट्स (27-28 जनवरी 2026)
प्रदर्शन जारी : दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर, लखनऊ, पटना, राजस्थान, बिहार और यूपी के कई शहरों में छात्र सड़कों पर। #Rollback_UGC और #BoycottBJP जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ जगहों पर भूख हड़ताल और इस्तीफे (जैसे बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट)।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं : वकील विनीत जिंदल समेत कई PIL दाखिल। याचिकाकर्ता दावा कर रहे हैं कि नियम “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा देते हैं, जनरल कैटेगरी को सुरक्षा नहीं देते और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हैं। CJI ने कुछ याचिकाओं में खामियां दूर करने को कहा है, जल्द सुनवाई संभावित।
सरकारी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
केंद्र सरकार : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, संवैधानिक ढांचे में लागू होंगे और जनरल कैटेगरी के लिए भी प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।
मायावती (BSP) : नियमों का समर्थन, विरोध को “जातिवादी मानसिकता” बताया, लेकिन व्यापक विचार-विमर्श की सलाह।
AISA और अन्य : समर्थन, लेकिन कुछ कमियों (जैसे अस्पष्ट परिभाषाएं) पर चिंता।
सोशल मीडिया : X पर दोनों पक्ष सक्रिय। समर्थक इसे सामाजिक न्याय की जीत बता रहे हैं, विरोधी “डर का माहौल” और “झूठी शिकायतों” का डर जता रहे हैं।
UGC Equity Rules 2026 : सरकार संशोधन पर विचार कर रही है, जैसे जनरल कैटेगरी के लिए शिकायत तंत्र मजबूत करना। नियम अभी लागू हैं, संस्थानों को अनुपालन शुरू करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है।
शिक्षा का असली मकसद सभी छात्रों को बिना भेदभाव और डर के आगे बढ़ने का मौका देना है। ये नियम वंचितों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन सभी पक्षों के साथ संतुलन बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण। क्या ये समानता लाएंगे या नए तनाव पैदा करेंगे? समय बताएगा।
UPI New Rules 2026: UPI इस्तेमाल करने वाले हो जाये सावधान, जनवरी 2026 से डिजिटल पेमेंट यूजर्स के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो चुके हैं। ये बदलाव मुख्य रूप से ऑनलाइन फ्रॉड रोकने, सुरक्षा बढ़ाने और कुछ कैटेगरी में हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन को आसान बनाने पर फोकस करते हैं। NPCI और RBI के दिए गए निर्देशों के अनुसार, यहां पूरी जानकारी आसान भाषा में :-
UPI New Rules 2026 : नए नियमों में क्या-क्या बदला है
1. सुरक्षा पर सख्ती (Fraud Prevention)
UPI New Rules 2026 : 1 जनवरी 2026 से UPI ट्रांजैक्शन (Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM आदि) पर KYC और वेरिफिकेशन प्रोसेस को और सख्त किया गया है।
फर्जी अकाउंट्स रोकने के लिए अतिरिक्त लेयर जैसे SIM-बाइंडिंग, दोबारा बैंक अकाउंट ऑथेंटिकेशन और संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर तुरंत अलर्ट शामिल हैं।
गलत UPI PIN बार-बार डालने पर अस्थायी ब्लॉक जैसी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।
ये बदलाव ऑनलाइन धोखाधड़ी को काफी हद तक कम करने के लिए हैं।
2. UPI ट्रांजैक्शन लिमिट (Transaction Limits)
नॉर्मल P2P (Person-to-Person) : रोजाना ₹1 लाख तक (बैंक के अनुसार थोड़ा बदलाव हो सकता है)।
नए यूजर्स के लिए : UPI ID या बैंक अकाउंट पहली बार लिंक करने पर पहले 24 घंटे में सिर्फ ₹5,000 तक ट्रांजैक्शन कर सकते हैं (सुरक्षा के लिए)।
कुछ स्पेशल कैटेगरी (जैसे टैक्स पेमेंट, इंश्योरेंस, इन्वेस्टमेंट, एजुकेशन, ट्रैवल, गवर्नमेंट पेमेंट्स): प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 लाख तक और कुछ मामलों में डेली ₹10 लाख तक (सितंबर 2025 से लागू, 2026 में जारी)।
बैलेंस चेक लिमिट : एक UPI ऐप से दिन में 50 बार तक बैंक बैलेंस चेक कर सकते हैं, इससे ज्यादा होने पर 24 घंटे के लिए ब्लॉक।
P2M (Person-to-Merchant) : कुछ वेरिफाइड मर्चेंट्स के लिए डेली ₹10 लाख तक (हाई-वैल्यू पेमेंट्स के लिए)।
UPI New Rules 2026
3. अन्य महत्वपूर्ण अपडेट
मार्च 2026 से : EPF (प्रोविडेंट फंड) विड्रॉल सीधे UPI के जरिए संभव होगा।
चार्जेस : पर्सनल UPI ट्रांजैक्शन (P2P) पर कोई चार्ज नहीं। मर्चेंट पेमेंट्स पर कुछ कैटेगरी में इंटरचेंज फी (0.5-1.1%) मर्चेंट देते हैं, यूजर पर नहीं।
GST पर अफवाह : UPI ट्रांजैक्शन पर कोई GST नहीं लग रहा है (₹2,000 से ऊपर वाली खबर फेक है)।
बड़ा मिथक : Google Pay/PhonePe पर कोई 30% मार्केट शेयर लिमिट 1 जनवरी 2026 से नहीं लगी। ये डेडलाइन अब दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
2026 में UPI यूजर्स के लिए टिप्स
हमेशा जानकर लोगों/दुकानों से ही कलेक्ट रिक्वेस्ट या पेमेंट लें।
लोन या गिफ्ट के लिए UPI यूज करें तो एक ही बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन करें, ताकि टैक्स नोटिस से बचें।
हाई-वैल्यू पेमेंट्स के लिए स्पेशल कैटेगरी चेक करें।
UPI New Rules 2026 : ये बदलाव UPI को और सुरक्षित व यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए हैं। अगर आपके ऐप में कोई नया अपडेट दिखे तो NPCI की ऑफिसियल वेबसाइट या अपने बैंक से कन्फर्म करें।
Trump Tariffs : इंटरनेशनल व्यापार के बदलते लैंडस्केप में, डोनाल्ड ट्रंप का नाम सबसे लंबी छाया डालता है। 9 दिसंबर 2025 को, अमेरिकी राष्ट्रपति की लेटेस्ट चेतावनी—अमेरिकी किसानों की रक्षा के रूप में प्रेजेंट किया, भारतीय चावल एक्सपोर्ट्स को निशाने पर ले लिया है। व्हाइट हाउस में एक राउंडटेबल चर्चा के दौरान, ट्रंप ने भारत पर अमेरिकी बाजार में सस्ता चावल “डंपिंग” करने का आरोप लगाया, घरेलू उत्पादकों के लिए 12 अरब डॉलर की सहायता पैकेज की घोषणा की और आयात पर 25% तक के टैरिफ की चेतावनी दी। लेकिन क्या यह ज्यादा धमकी है या वास्तविक खतरा? आइए विवरणों में उतरें और दुनिया के चावल महाशक्ति के लिए इसका क्या मतलब है, यह समझें।
चावल क्रांति : ग्लोबल बाजारों में भारत की प्रभुता
भारत चावल के खेल में सिर्फ खेल नहीं रहा—यह नियमों को फिर से लिख रहा है। दुनिया का शीर्ष चावल उत्पादक होने के नाते, देश इस मौसम में 150 मिलियन टन की रिकॉर्ड फसल की उम्मीद कर रहा है, जो ग्लोबल निर्यात बाजार का 28% हिस्सा संभालता है। सुगंधित बासमती से लेकर रोजमर्रा के नॉन-बासमती किस्मों तक, भारतीय चावल मध्य पूर्व, अफ्रीका, यूरोप और हां, अमेरिका की मेजों पर चमकता है।
फिर भी, अमेरिकी बाजार? यह एक छोटा सा फुटनोट है। वित्तीय वर्ष 2025 (अप्रैल 2024–मार्च 2025) में, भारत ने अमेरिका को मात्र 392 मिलियन डॉलर मूल्य का चावल निर्यात किया—कुल निर्यात का मुश्किल से 3%। बासमती, शो का सितारा, ने इसका 86% ($337 मिलियन) हिस्सा लिया, जिसमें अमेरिका भारत का चौथा सबसे बड़ा बासमती खरीदार है। नॉन-बासमती पीछे रह गया $55 मिलियन पर, जो अमेरिका को 24वें स्थान पर रखता है।
यह निचे आकर्षण—दक्षिण एशियाई समुदायों में फूली हुई बिरयानी या खाड़ी-प्रेरित भोज के बारे में सोचें—मांग को स्थिर रखता है। कोई अमेरिकी उगाया चावल बासमती की हस्ताक्षर सुगंध और लंबाई से मेल नहीं खा सकता। मौजूदा 50% टैरिफ (पिछले साल 10% से उछाल) के बावजूद, निर्यात ज्यादा नहीं हिले। क्यों? आयातक लागत को उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं, जो प्रामाणिकता के लिए भुगतान करते हैं।
Trump Tariffs
Trump Tariffs : व्यापार तनावों की रेसिपी?
मुख्य मुद्दे पर आते है : Trump Tariffs। ये नई नहीं हैं—ट्रंप का प्लेबुक हमेशा संरक्षणवाद का पक्ष लेता रहा है ताकि अमेरिकी व्यवसाय की रक्षा हो। उनकी 9 दिसंबर की टिप्पणियों ने भारत को वियतनाम और थाईलैंड के साथ जोड़ दिया, उन्हें “डंपिंग” संकट के दोषी के रूप में चित्रित किया। लेकिन डेटा एक अलग कहानी बताता है: भारतीय चावल अमेरिकी आयात का 5% से कम हिस्सा है, बिल्कुल बाढ़ नहीं।
यदि ये Trump Tariffs लागू होते हैं—कुल दरों को 75% तक धकेलते हुए—तो यह अल्पकालिक रूप से चुभ सकता है। भारतीय चावल दिग्गजों के शेयरों में घोषणा के दिन LT Foods में 3.66% और GRM Overseas में 1.77% की गिरावट आई, जो निवेशकों की घबराहट को दर्शाती है। नॉन-बासमती वॉल्यूम में कमी आ सकती है, क्योंकि यह ज्यादा मूल्य-संवेदनशील है। और अमेरिका-भारत संबंधों के व्यापक शतरंज खेल में, यह स्टील, फार्मा या तकनीक वार्ताओं में लहरें डाल सकता है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के एक्सपर्ट इसे “राजनीति, न कि नीति” कहते हैं—मिडवेस्टर्न किसानों के लिए शुद्ध चुनाव-मौसम का मांस। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) सहमत है, जो क्षेत्र की “लचीली और ग्लोबल रूप से प्रतिस्पर्धी” धार को सराहता है। विविध बाजारों के साथ कोई भी पुनर्निर्देशित आपूर्ति को अवशोषित करने के साथ, प्रभाव सतही होगा।
Trump Tariffs : यहां दांव का एक क्विक स्नैपशॉट है:-
चावल श्रेणी
अमेरिका को निर्यात मूल्य (वित्तीय वर्ष 2025)
वॉल्यूम (मेट्रिक टन)
प्रभावित भारत का ग्लोबल हिस्सा
बासमती
$337 मिलियन
274,213
~2.6% (न्यूनतम)
नॉन-बासमती
$55 मिलियन
61,342
~0.4% (कम)
कुल
$392 मिलियन
335,555
3% (नगण्य)
धमकी से आगे: भारतीय निर्यातकों के लिए रणनीतियां
तो, क्या भारतीय किसानों को Trump Tariffs से नींद हराम होनी चाहिए? शायद नहीं। इतिहास दिखाता है कि टैरिफ लागत का 80-90% अमेरिकी खरीदारों पर पड़ता है, न कि विक्रेताओं पर—संभावित रूप से घरेलू बैकलैश को बढ़ावा देते हुए क्योंकि किराने की बिलें चढ़ेंगी। साथ ही, “डंपिंग” आरोप का कोई ठोस सबूत नहीं; भारतीय कीमतें दक्षता को प्रतिबिंबित करती हैं, न कि शिकार करने वाली।
Trump Tariffs
निर्यातकों के लिए स्मार्ट कदम? विविधीकरण पर दोगुना दांव लगाएं—उभरते अफ्रीकी और यूरोपीय हबों पर नजर रखें। भारतीय सरकार पहले से ही अतिशयोक्ति में है, नई व्यापार संधियां गढ़ रही है। और भूल न जाएं: बासमती की प्रीमियम स्थिति इसे वफादार बाजारों में टैरिफ-प्रूफ बनाती है।
Trump Tariffs शीर्षक बना सकते हैं, लेकिन वे रातों रात सप्लाई चेन को फिर से नहीं लिखते। भारत के लिए, यह एक उभार है, न कि ब्रेकडाउन। जैसे-जैसे वार्ताएं आगे बढ़ेंगी, रियायतों पर नजर रखें—शायद भारतीय डेयरी या IT सेवाओं तक अमेरिकी पहुंच के बदले में। अंत में, ग्लोबल व्यापार परस्पर निर्भरता पर फलता-फूलता है, न कि अलगाव पर। अगला ट्वीट गिरने तक, भारतीय चावल बहता रहेगा, एक दाने से।
नोएडा।समाज में शिक्षा का उजाला फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Feel The Change Foundationने 6 दिसंबर 2025 को नोएडा सेक्टर-110 स्थित रवि प्रधान मार्केट परिसर में अपना नि:शुल्क विद्यालय शुरू किया। संस्था ने शुरुआत में 20 बच्चों को कॉपी, जूते, बैग, पेंसिल और गर्म कपड़े वितरित किए। लक्ष्य है कि जल्द ही इस संख्या को बढ़ाकर सौ से अधिक बच्चों को पढ़ाई के दायरे में लाया जाए। उद्घाटन समारोह में फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. विकास राज तिवारी ने पूजा-अर्चना कर स्कूल का शुभारंभ किया। सचिव जेपी मंडल ने आयोजन की तैयारियों में अहम भूमिका निभाई। नोएडा के भाजपा नेता और समाजसेवी रवि प्रधान ने विद्यालय शुरू करने में सहयोग देते हुए अपने मार्केट परिसर में स्थान मुहैया कराया। स्थानीय समाजसेवी अजित सिंह, दीपू जैन, महिला समाजसेवी किरण झा, महिला समाजसेवी गौरी, और कई अन्य लोग भी समारोह में शामिल रहे। गौतमबुद्ध नगर के डीआईओएस राजेश सिंह उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने फ़ाउंडेशन की इस पहल की प्रशंसा की।
फ़ाउंडेशन की यात्रा और सामाजिक प्रभाव
फ़ील द चेंज फ़ाउंडेशन की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। स्थापना के बाद से यह संस्था देश के कई राज्यों में सक्रिय रूप से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और कल्याण के काम कर रही है। दिल्ली में वंचित बच्चों की शिक्षा को लेकर संस्था ने कई सफल मॉडल लागू किए, जिनकी सराहना सरकारी और निजी स्तर पर हुई। फ़ाउंडेशन का “फ़ील हैप्पी कैंपेन” देशभर में चल रहा है, जिसमें कई राजनेता, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और सेवानिवृत्त नौकरशाह शामिल होकर जागरूकता अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
Feel The Change Foundation
डॉ. विकास राज तिवारी—पत्रकारिता से समाज सेवा तक
फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. विकास राज तिवारी देश के नामचीन पत्रकारों में गिने जाते हैं। डिजिटल मीडिया इनोवेशन के क्षेत्र में उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम रहा है और उन्होंने दुनिया के पाँच देशों में भारत की ओर से मीडिया मंचों पर प्रतिनिधित्व किया है। कई प्रतिष्ठित पत्रकार संगठनों से जुड़े रहने के साथ-साथ वे सामाजिक मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में संस्था तेजी से बढ़ी और हजारों लोगों तक मदद पहुँची।
शाम की कक्षाएँ—मजदूर बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था
संस्था ने उन बच्चों के लिए विशेष शाम की कक्षाएँ शुरू की हैं जो दिनभर मजदूरी या कामकाज में व्यस्त रहते हैं और नियमित स्कूल नहीं जा पाते। इन कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाई के लिए ज़रूरी सारी सामग्री—किताबें, कॉपियाँ, पेन-पेंसिल, बैग और अन्य अध्ययन सामग्री—पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही बच्चों को छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाएँ, स्किल ट्रेनिंग, करियर मार्गदर्शन और बुनियादी डिजिटल शिक्षा जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा जाएगा ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और मजबूत बन सके।
मज़दूरों के अधिकारों के लिए बड़ा अभियान
फ़ाउंडेशन ने शिक्षा के अलावा मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक संस्था की मदद से करीब 5000 मजदूरों के मजदूर कार्ड बन चुके हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता का सीधा लाभ मिला है। संस्था नियमित रूप से जागरूकता शिविर लगाकर मजदूर परिवारों को उनके अधिकारों की जानकारी भी देती है।
स्थानीय समर्थन और आगे की दिशा
स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों ने इस विद्यालय को क्षेत्र में सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम बताया है। आने वाले समय में फ़ाउंडेशन— स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल लर्निंग, महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण कार्यक्रम, करियर काउंसलिंग, और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान जैसी गतिविधियाँ शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
डॉ. विकास राज तिवारी का संदेश
डॉ. तिवारी ने कहा, “हमारा संकल्प है कि कोई भी बच्चा गरीबी, अभाव या परिस्थितियों की वजह से शिक्षा से वंचित न रहे। यही असली बदलाव है और यही हमारे अभियान का उद्देश्य है।” फ़ील द चेंज फ़ाउंडेशन का यह प्रयास उन परिवारों के लिए नई रोशनी लेकर आया है जो अपने बच्चों की पढ़ाई का सपना देखते तो हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उन्हें रोक देती है। यह विद्यालय उन बच्चों के भविष्य में एक मजबूत उम्मीद की तरह उभर रहा है।