Category: करियर

  • SBI PO 2025 : सफल होने की सम्पूर्ण गाइड – परीक्षा पैटर्न, तैयारी की रणनीति और सफलता की प्रेरक कहानी

    SBI PO 2025 : सफल होने की सम्पूर्ण गाइड – परीक्षा पैटर्न, तैयारी की रणनीति और सफलता की प्रेरक कहानी

    SBI PO 2025 notification : भारत का सबसे प्रतिष्ठित बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), हर साल प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी करता है। SBI PO 2025 की अधिसूचना 24 जून 2025 को जारी हो चुकी है, जिसमें 541 रिक्तियों की घोषणा की गई है। यह नौकरी न केवल आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है, बल्कि समाज में सम्मान और करियर में उन्नति का अवसर भी देती है।

    SBI PO 2025: एक अवलोकन

    SBI PO 2025 की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में होती है:

    • प्रारंभिक परीक्षा: 100 अंकों की ऑनलाइन परीक्षा, जिसमें रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टिट्यूड, और अंग्रेजी भाषा शामिल हैं।
    • मुख्य परीक्षा: 250 अंकों की परीक्षा, जिसमें ऑब्जेक्टिव और डिस्क्रिप्टिव दोनों टेस्ट होते हैं। इस साल मुख्य परीक्षा में सेक्शनल कट-ऑफ लागू है।
    • चरण III: साइकोमेट्रिक टेस्ट, समूह चर्चा, और साक्षात्कार।

    अंतिम मेरिट मुख्य परीक्षा (75%) और चरण III (25%) के आधार पर तैयार की जाती है।

    SBI PO 2025
    SBI PO 2025

    तैयारी की अनूठी रणनीति

    SBI PO 2025 की तैयारी के लिए समय प्रबंधन, विषय-विशेषज्ञता, और आत्मविश्वास का सही संतुलन जरूरी है। नीचे कुछ अनूठे सुझाव दिए गए हैं, जो आपको भीड़ से अलग करेंगे:

    1. अपनी नींव मजबूत करें

    • रीजनिंग: पजल्स और सीटिंग अरेंजमेंट पर ध्यान दें, क्योंकि ये प्रश्न अधिक वेटेज रखते हैं। रोजाना 10-15 पजल्स हल करें। शुरुआत में आसान प्रश्नों से शुरू करें और धीरे-धीरे जटिलता बढ़ाएं।
    • क्वांटिटेटिव एप्टिट्यूड: अंकगणित (प्रतिशत, लाभ-हानि, समय और कार्य) और डेटा इंटरप्रिटेशन पर विशेष ध्यान दें। वैदिक गणित की तकनीकों का उपयोग करें ताकि समय बचाया जा सके।
    • अंग्रेजी: रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन और क्लोज टेस्ट में निपुणता हासिल करें। रोजाना अंग्रेजी अखबार के संपादकीय पेज पढ़ें और नए शब्दों का अर्थ नोट करें।

    2. स्मार्ट स्टडी प्लान बनाएं

    • दैनिक लक्ष्य: हर दिन 6-8 घंटे पढ़ाई करें। सुबह 2 घंटे रीजनिंग, 2 घंटे क्वांट, 1 घंटा अंग्रेजी, और 1 घंटा जनरल अवेयरनेस के लिए रखें।
    • साप्ताहिक रिवीजन: हर रविवार को पिछले 6 दिनों के टॉपिक्स का रिवीजन करें। कमजोर टॉपिक्स पर अतिरिक्त समय दें।
    • मॉक टेस्ट: सप्ताह में कम से कम 2 मॉक टेस्ट दें। टेस्ट के बाद अपने गलत उत्तरों का विश्लेषण करें और उन गलतियों को दोहराने से बचें।
    SBI PO 2025
    SBI PO 2025

    3. डिस्क्रिप्टिव टेस्ट की तैयारी

    • मुख्य परीक्षा में लेटर राइटिंग और निबंध लेखन का डिस्क्रिप्टिव टेस्ट होता है। इसके लिए रोजाना 1 औपचारिक पत्र और 1 निबंध (200-250 शब्द) लिखने का अभ्यास करें।
    • सामयिक विषयों जैसे डिजिटल बैंकिंग, जलवायु परिवर्तन, या वित्तीय समावेशन पर निबंध लिखें। अपने लेखन में तथ्य और उदाहरण शामिल करें।
    • पत्र लेखन में औपचारिक शैली का पालन करें। शिकायती पत्र, अनुरोध पत्र, और बधाई पत्र के प्रारूप याद रखें।

    4. जनरल अवेयरनेस और बैंकिंग जागरूकता

    • रोजाना समाचार पढ़ें, विशेष रूप से बैंकिंग, अर्थव्यवस्था, और सरकारी योजनाओं से संबंधित। RBI की नई नीतियां, बजट 2025, और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों (IMF, World Bank) की खबरों पर नजर रखें।
    • पिछले 6 महीनों की करेंट अफेयर्स को नोट्स बनाकर रिवाइज करें।
    • बैंकिंग टर्म्स जैसे CRR, SLR, Repo Rate, और NEFT को अच्छे से समझें।

    5. साइकोमेट्रिक टेस्ट और साक्षात्कार

    • साइकोमेट्रिक टेस्ट में आपकी व्यक्तित्व विशेषताओं का आकलन होता है। ईमानदारी से उत्तर दें और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें।
    • साक्षात्कार के लिए अपने बायोडाटा, बैंकिंग क्षेत्र, और SBI की हालिया उपलब्धियों (जैसे डिजिटल बैंकिंग पहल) के बारे में अच्छे से पढ़ें।
    • सामान्य सवाल जैसे “आप SBI PO क्यों बनना चाहते हैं?” और “आपकी ताकत और कमजोरियां क्या हैं?” के जवाब पहले से तैयार करें।
    SBI PO 2025 exam
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    प्रेरक कहानी: सपनों की उड़ान

    आइए, रवि की कहानी से प्रेरणा लें। रवि एक छोटे से गांव से था, जहां संसाधनों की कमी थी। उसने SBI PO 2023 की परीक्षा में असफलता का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। उसने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, एक सख्त स्टडी प्लान बनाया, और रोजाना 10 घंटे पढ़ाई की। 2024 में, वह न केवल परीक्षा पास करने में सफल हुआ, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 45 हासिल की। रवि का कहना है, “सपने वही पूरे होते हैं, जिनके लिए आप रात-दिन मेहनत करते हैं।”

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    अनुशासन और आत्मविश्वास: सफलता की कुंजी

    • अनुशासन: रोजाना एक ही समय पर पढ़ाई शुरू करें। सोशल मीडिया और अनावश्यक गतिविधियों से दूरी बनाएं।
    • आत्मविश्वास: असफलता से डरें नहीं। हर मॉक टेस्ट के बाद अपनी प्रगति को देखें और खुद को प्रोत्साहित करें।
    • स्वास्थ्य: रोजाना 30 मिनट व्यायाम करें और संतुलित आहार लें। तनाव कम करने के लिए ध्यान या योग करें।
  • Atal Award: अभिनेत्री-प्रोड्यूसर पूनम झावर को मिला “अटल अवार्ड 2022”

    Atal Award: अभिनेत्री-प्रोड्यूसर पूनम झावर को मिला “अटल अवार्ड 2022”

    मुंबई: एक्ट्रेस पूनम झावर को हाल ही में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों मुंबई राजभवन में “अटल अवार्ड 2022” प्रदान किया गया है। यह सम्मान कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिस झावर को मिला। राज्यपाल महोदय ने कहा, कला अभिनय क्षेत्र में पूनम जी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। राष्ट्रीय स्तर का यह अवार्ड पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में 2002 में आरम्भ किया गया था। पूनम सहित तीस लोगों को इस वर्ष यह Atal Award किया गया। कला, संस्कृति, समाजसेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। इस क्रम में अटल गौरव नेशनल अवार्ड पूनम झावर को दिया गया। अपने उद्बोधन में पूनम झावर ने कहा, मैं अर्से से अटल जी की पंक्तियों (कविताओं), उनके उद्धरण (कोट्स) से प्रेरित रही हूँ।


    “मोहरा” से हिन्दी फिल्म का आकर्षण बनी पूनम झावर को “ओएमजी – ओ माय गॉड” और “आर. राजकुमार” में भी खूब पसंद किया गया। दक्षिण की फिल्में भी आईं। पूनम के नौ दस म्यूजिक वीडियो भी आये और चर्चा में रहे। शीघ्र ही ओटीटी प्लेटफार्म पर उनका दो शो आने वाला है।

    पूनम अभी कुछ और प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी भूमिका के चयन में व्यस्त हैं। आगे उनका नया रूप पिछली भूमिकाओं से बिल्कुल अलग होगा।

  • Noida का एक ऐसा स्कूल जहां अपने बच्चों को प्रवेश दिला संवार सकते हैं भविष्य

    Noida का एक ऐसा स्कूल जहां अपने बच्चों को प्रवेश दिला संवार सकते हैं भविष्य

    Noida: हर पैरेंट्स यही चाहते हैं, कि उनका बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ाई करें, ताकि उसका भविष्य बेहतर रहे. इसके लिए पैरेंट्स बड़ी फीस भी चुकाते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि जानकारी के अभाव के चलते वो अपने बच्चों को ऐसे स्कूल में दाखिला दिला देते हैं, जहां पर पढ़ाई नहीं होती है. वहीं, कई पैरेंट्स को यह भी पता नहीं चलता है कि शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों में फॉर्म कब आता है और शहर के बड़े स्कूल कौन से हैं? वहीं कोरोना ने ज्यादातर मिडिल क्लास के लोगों की आर्थिक स्थिति को भी डिस्टर्ब किया है। ऐसे में हम आपको एक ऐसे स्कूल के नोएडा के एक ऐसे स्कूल के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई होती है और यह स्कूल बेहतर शिक्षा देने के साथ साथ जरुरतमंदो की मदद भी कर रहा है. वैसे अभिभावक जिनको अपने बच्चो के लिए अच्छी शिक्षा चाहिए और  फिलहाल फीस चुकाने में असमर्थ है उनको यह स्कूल काफी सहूलियत दे रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं  Shanti International PJH School Noida की जहां आप अगर अपने बच्चों को कम फीस में बेहतर शिक्षा दे सकते हैं।

    Shanti International PJH School 

    यह स्कूल सेक्टर -168, ताज एक्सप्रेसवे छपरौली गौतमबुद्धनगर, ग्रेटर नोएडा पर स्थित है. शांति इंटरनेशनल पीजेएच स्कूल 2003 में शुरू हुआ था यहां पर 12वीं तक की पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड से कराई जाती है. इस स्कूल में छात्रों के लिए स्मार्ट क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी और खेलने का मैदान है. जो अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश इस स्कूल में दिलाना चाहते हैं, वो https://www.sispjhs.com/ पर डिटेल्स चेक कर सकते हैं।

    स्कूल के बारे में जानिए

    शांति इंटरनेशनल पीजेएच स्कूल के कर्मचारी सीखने का एक सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो बौद्धिक और भावनात्मक विकास पर जोर देता है जिसमें प्रत्येक छात्र अपनी पूरी क्षमता का पता लगाता है और महसूस करता है और इसलिए, उच्चतम शैक्षणिक मानकों को प्राप्त किया जाता है। वे मूल्यों को विकसित करने पर जोर देते हैं। बच्चे को जीवन के लिए तैयार करने के शौक पर शांति इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की गई थी।

     

  • Greater Noida: जिला स्तरीय दो दिवसीय विज्ञान नवप्रवर्तन कार्यक्रम का समापन, इनाम पाकर छात्र हुए खुश

    Greater Noida: जिला स्तरीय दो दिवसीय विज्ञान नवप्रवर्तन कार्यक्रम का समापन, इनाम पाकर छात्र हुए खुश

    नोएडा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश से प्राप्त दिशा निर्देशों के क्रम में जनपद गौतमबुद्धनगर में सावित्रीबाई फुले इंटर कॉलेज  Greater Noida के परिसर में दो दिवसीय विज्ञान नवप्रवर्तन कार्यक्रम का आज समापन हुआ। नवप्रवर्तन जन जागरूकता कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लीड कैब जैमिनी इंडिया रिम्मी तनेजा, ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर सुनील मुद्गल, समन्वयक जिला विज्ञान क्लब अर्चना शिरोमणि, एस0आर0जी0 अशोक एवं रश्मि की उपस्थिति में कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वंदना से किया गया। कार्यक्रम के दूसरे दिन छात्रों ने बड़ी संख्या में मॉडल्स चार्ट और प्रोजेक्ट के माध्यम से वैज्ञानिक सोच को प्रदर्शित किया।

    इस कार्यक्रम में उप शिक्षा निदेशक/डायट प्राचार्य प्रवीण कुमार उपाध्याय ने उपस्थित होकर छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी और लगातार खोज करते रहने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में खंड शिक्षा अधिकारी दादरी सुनील दत्त मुद्गल ने दोनों दिवस में उपस्थित रहकर खंड शिक्षा अधिकारी दनकौर नरेंद्र श्रीवास्तव के साथ सभी प्रोजेक्ट्स, मॉडल्स एवं चार्ट्स का गहनता पूर्वक निरीक्षण कर प्रतिभागी छात्रों और शिक्षकों को निरंतर ऐसे कार्यक्रमों में उत्साह पूर्वक प्रतिभाग करने के लिए प्रेरित किया। आज के कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए खाद्य श्रृंखला, जल संचयन, ओजोन परत का संरक्षण, उत्सर्जन तंत्र, ठोस द्रव गैस व खगोल विज्ञान आदि से संबंधित पोस्टर, मॉडल्स एवं प्रोजेक्ट्स के माध्यम से वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन किया।

    इस कार्यक्रम में जनपद के बिसरख ब्लॉक से 15, दनकौर से 25, दादरी से 26 और जेवर से 02 विद्यालय, माध्यमिक शिक्षा परिषद से 04 विद्यालय और 02 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के 185 छात्रों ने लगभग 105 शिक्षकों ने और चारों ब्लॉक से सभी ए.आर.पी./एस.आर.जी. ने प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम में छात्रों के प्रस्तुतीकरण व प्रोजेक्ट की उपयोगिता के आधार पर सराहनीय प्रदर्शन के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय सादोंपुर दादरी, उ.प्रा.वि.रसूलपुर डासना दादरी, उ.प्रा.वि.सालारपुर दादरी, उ.प्रा.वि. हैबतपुर बिसरख, उ.प्रा.वि. खानपुर दनकौर तथा केजीबीवी जेवर के छात्रों को सम्मानित किया गया। सांत्वना पुरस्कार के लिए उ.प्रा.वि.अमरपुर जागीर दनकौर के छात्र शिवनंदन, उ.प्रा.वि. मुरादगढ़ी जेवर से हिमांशु और उ.प्रा.वि.घोड़ी बछेड़ा दादरी से अंश को 1000/-रुपये देकर सम्मानित किया गया। सावित्रीबाई फुले इंटर कॉलेज की छात्रा कुमारी अनु मिश्रा को उनके प्रोजेक्ट और बेहतरीन प्रस्तुतीकरण के लिए तृतीय, उ.प्रा.वि.डेरी मच्छा दादरी से कु.मानवी को द्वितीय स्थान और उ.प्रा.वि. गिझौड़ बिसरख के छात्र अनुज को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इसके लिए इन छात्रों को क्रमशः 2000/-रुपये, 3000/-रुपये और 5000/- रुपये का पुरस्कार दिया गया।

  • मनी और हेल्थ प्लानिंग में क्यों कमजोर हैं हिन्दी पत्रकार?

    मनी और हेल्थ प्लानिंग में क्यों कमजोर हैं हिन्दी पत्रकार?

    अधिकतर पत्रकार अपनी सेहत के प्रति भी चौकस नहीं रहते

    पत्रकारिता में बीते दो-ढ़ाई दशकों से मनी प्लानिंग और निवेश मेरा प्रिय लेखन-विषय रहा है। मैं हमेशा हैरान रहा कि पूरे देश को राह दिखाने वाले पत्रकारों में से बहुतरे को मैंने मनी प्लानिंग में बेहद कमजोर पाया। अंग्रेजी पत्रकारों की तुलना में हिन्दी पत्रकार बचत, जीवन-मेडिकल बीमा, पीपीएफ खातों और पीएफ अंशदान के बारे में लापरवाह हैं। इस पर सरकार या पत्रकार संगठन एक सर्वें करा ले तो पता लगेगा कि देश के बहुत सारे पत्रकार जिंदगी में अर्थ के महत्व को एकदम नहीं समझते। हाल ही ऑनलाइन जॉब पोर्टल मॉन्स्टर ने देश का ताजा सैलरी इन्डेक्स जारी किया है। इस इन्डेक्स के मुताबिक देश में पत्रकारों की औसत तनख़्वाह 43,849 रुपये प्रतिमाह है। (वैसे औसत का खेल गड़बड़ है। इसमें करोड़ों का पैकज पाने वाले संपादकों और कम वेतन पाने वाले स्ट्रिंगर का वेतन साथ जोड़ दिया जाता है।) इस औसत वेतन से आप खुद अंदाजा लगाइए कि पत्रकारों की माली हालत कैसे सुधरेगी? आखिर वे निवेश के लिए कहां से रकम लाएं? बीमा के लिए पैसे का बंदोबस्त कैसे करें?

    जिस देश में पत्रकारों की नियमित नौकरी की चिंता सरकार को नहीं है वहां उनकी पेंशन की चिंता कौन करे? रिटायरमेंट के बाद मेरे पिताजी को सरकार से जितनी पेंशन मिलती थी उतना वेतन दस-बीस साल का अनुभव होने पर भी पत्रकार को नहीं मिलता…पर असम सरकार ने पत्रकारों के लिए सराहनीय रिटायरमेंट पेंशन योजना लागू की है। श्रमजीवी और मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए 8,000 रुपये प्रति माह पेंशन देने का प्रावधान है। इसी तरह तमिलनाडु में इसी महीने पत्रकारों के लिए पेंशन बढ़ाने की घोषणा की गई। मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए पत्रकाराें की पेंशन आठ हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह की जा रही है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने श्रमजीवी पत्रकारों की सुध ली तो मैं भी लखनऊ पोस्टिंग के दौरान इस पेंशन योजना का लाभकारी बन गया। तब मैं राष्ट्रीय सहारा में था। पर बहुत सारे पत्रकारों को ऐसी पेंशन भी नसीब नहीं है।

    यह सच है कि महानगरों में काम करने वाले बहुतेरे पत्रकार जैसे-तैसे आर्थिक रूप से संपन्न हैं, मगर छोटे शहरों व कस्बों में काम करने वाले पत्रकारों की दशा आज इतनी दयनीय है कि उनकी कमाई से परिवार के लोगों को दो वक्त का खाना मिल जाए, वही बहुत है। हां, यह बात अलग है कि कुछ पत्रकार गलत तरीके से पैसे कमाकर आर्थिक रूप से संपन्न हो रहे है, लेकिन ज्यादातर पत्रकारों को प्रेस की स्वतंत्रता के बावजूद न केवल कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है, बल्कि उनकी जान पर भी खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

    मुझे लगता है कि मीडिया मालिक जान-बूझकर चाहते हैं कि पत्रकारों को मनी मैनेजमेंट की समझ कभी नहीं आए नहीं तो वे बेहतर पैकेज की मांग पर जोर डालेंगे। दैनिक जागरण देश का सबसे बड़ा अखबार होने का दावा करता है। जब मैंने वहां नौकरी शुरू की तो पता चला कि वहां तो बहुतेरे पत्रकार आईटी रिटर्न ही नहीं भरते हैं। कंपनी को भी इसकी फिक्र नहीं थी। यही हाल राष्ट्रीय सहारा समेत तमाम अखबारों में था। (पर लोकमत में आईटी रिटर्न के प्रति पत्रकारों में चेतना थी।) मैंने कुछ पत्रकार साथियों को समझाया कि आईटी रिटर्न भरने के आधार पर बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लिया, कार खरीदी। होम लोन भी लिया जिसकी किस्त अब भी भर रहा हूं। पर अधिकतर पत्रकार न आईटी रिटर्न भरना चाहते थे और न ही लोन लेना चाहते थे। पर मैंने उन्हें इसका महत्व बताने का अभियान जारी रखा। जब भी काम से फुर्सत मिलती तो मैं अपने जूनियर साथियों को अकेले या ग्रुप में इसका महत्व समझाता। आधे से अधिक साथियों पर इसका असर पड़ा और वे आईटी रिटर्न भरने लगे। इससे बहुतेरे पत्रकारों की आर्थिक जिंदगी में बदलाव आने लगा।

    इसका लाभ उन्हें यह मिला कि बैंक ने इनमें से कई को आईटी रिटर्न और मौजूदा वेतन के आधार पर फ्लैट खरीदने पर आसानी से होम लोन दे दिया। तब गाजियाबाद के इंदिरापुरम, वैशाली और वसुंधरा में बहुत सारे पत्रकारों ने तीन से पांच लाख रुपये में फ्लैट खरीद लिए जिसकी कीमत 14-15 साल में छह-सात गुना तक बढ़ गई।

    पर इधर दो-तीन साल से एनसीआर में हमारे कुछ पत्रकार साथी होम लेने के बाद भी बिल्डरों से फ्लैट न मिलने के कारण बहुत ही चिंतित हैं। उनकी गाढ़ी कमाई और होम लोन की किश्त बिल्डर डुबाने पर तुले हुए हैं। खेद है कि सरकार उनकी मदद भी नहीं करना चाहती। इन ईमानदार पत्रकारों का भरोसा टूट रहा है कि आम्रपाली, गार्डेनिया या सुपरटेक सरीखी रियल एस्टेट कंपनियां उन्हें इस जन्म में फ्लैट का पजेशन देंगी। ये पत्रकार बैंक की किस्त छह-सात साल से भर रहे हैं पर उन्हें फ्लैट नहीं मिल रहा। इस कारण मैं अब पत्रकारों को “रेडी टू मूव” फ्लैट लेने की सलाह देता हूं। मैं अब इस बात पर भी जोर देता हूं कि अभी चार-पांच साल तक फ्लैट खरीदने की योजना रोक दें तो इससे उनका भला होगा। एनसीआर में अधिक फ्लैट बन जाने के कारण आजकल यूं ही फ्लैट का किराया सस्ता हो गया है।

    मैं पहले भी कह चुका हूं कि हिन्दी के अधिकतर पत्रकार अपनी सेहत के प्रति भी चौकस नहीं रहते। अखबार मालिकों और टीवी कंपनियों को भी उनके हेल्थ की चिंता नहीं। निरंतर रात्रि ड्यूटी कर तमाम संस्करण निकालने से उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पर भला इसकी चिंता किसे? दस साल पहले दैनिक जागरण के नोएडा स्थित मुख्यालय में सीजीएम निशीकांत ठाकुर की पहल पर योगा सिखाने के लिए सप्ताह में शनिवार को एक गुरु आते थे। पर मैंने पाया कि कुछ पत्रकार योग-कक्षाओं में रुचि नहीं लेते थे जबकि उनके लिए यह फायदेमंद है। इससे न केवल उनकी सेहत और स्मरण शक्ति बढ़ती बल्कि रक्त की धमनियां भी स्वच्छ होतीं। धीरे-धीरे योग गुरु ने दैनिक जागरण में आना बंद कर दिया और पत्रकार भी योग करना भूल गए। पर मेरी निजी जानकारी है कि इधर 10-15 फीसदी पत्रकारों में चेतना आई है और वे और उनकी पत्नी योग कर अपनी सेहत ठीक रखने का प्रयास करते हैं। मीडिया संसंथानों में मैंने हेल्थ कैम्प का आयोजन बहुत कम देखा।

    नौकरी के दौरान कुछ पत्रकारों की असमय मौत भी मैंने देखी। लोकमत, सहारा, जागरण और अमर उजाला में नौकरी में सेवारत पत्रकारों की मौत पर एक दिन का वेतन अंशदान में देने का रिवाज है। इससे पत्रकारों के परिवार का कुछ भला हो जाता है। पर बहुतेरे पत्रकार जीवन बीमा नहीं कराते इससे उनके परिवार को बीमा की एकमुश्त रकम नहीं मिल पाती। मेरे वक्त में पाटलिपुत्र टाइम्स में पीएफ का अंशदान कभी जमा ही नहीं हुआ।हां, जागरण, लोकमत, टाइम्स, हिन्दुस्तान में पीएफ की कटौती वाले पत्रकारों को अब रिटायर होने या मौत होने पर दावेदार को पीएफ की एक मुश्त रकम और लगभग तीन हजार मासिक पेंशन मिल जाती है। कुछ मीडियां कंपनियां अपने पत्रकारों और उनके जीवनसाथी का पिछले 15-20 साल से मेडिकल बीमा भी कर रही हैं। पर यह मेडिकल बीमा 1 से 5 लाख से अधिक नहीं है। अग्रणी मीडिया कंपनियां कम से कम पांच साल नौकरी करने पर ग्रेच्युटी का भी भुगतान कर देती। पर 90 फीसदी मीडिया संस्थान ऐसा नहीं करते। अगर कोई सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं तो सरकार उन्हें आधे रेट पर रेल टिकट देने के साथ ही सीजीएचएस की मेडिकल सुविधा भी देती है। पर यह सुविधा रिपोर्टर और संपादक को ही नसीब है।

    पत्रकारों को नौकरी कब मिले और कब चली जाए, कोई नहीं जानता। मीडिया को सही मायने में स्वतंत्र कैसे बनाया जाए, देश की कार्यपालिका इस पर गंभीरता से सोचे ही नहीं उसको अमल में भी लाए। भोपाल के पत्रकार शिवराज सिंह की प्रतिभावान बेटी ने परिवार की आर्थिक तंगी से परेशान होकर खुदकुशी कर ली। वह आठवीं की छात्रा थी। उसके पत्रकार पिता को कुछ दिन पहले एक प्रमुख दैनिक अखबार की नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद से वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। स्कूल की टॉपर उनकी बेटी पिता पर बोझ नहीं बनना चाहती थी, इसलिए उसने जान दे दी। पत्रकारों के कमजोर मनी मैनेजमेंट का खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ता है। सवाल है कि इस पिता ने शुरू से ही मनी मैनेजमेंट प्लान क्यों नहीं बनाया ताकि नौकरी छूटने पर बच्चों की परवरिश मुश्किल न हो। अगर वह इस मामले में कमजोर थे तो उन्हें शादी नहीं करनी चाहिए थी। पर मेरे इस लेख का यह आशय नहीं है कि सभी पत्रकार मनी मैनेजमेंट में कमजोर होने के कारण परिवार को गहरे मुसीबत में ढकेल देते होंगे। कुछ पत्रकार अकेले घर नहीं चलाते। उनके जीवनसाथी भी नौकरी या बिजनेस कर घर को आर्थिक मजबूती देते, इससे कभी नौकरी छूट जाए या रिटायर्ड हो जाएं तो उन्हें आर्थिक तंगी से नहीं गुजरना पड़ता। पर ऐसे पत्रकारों की संख्या दस फीसदी भी नहीं है।

    लेखक: Roy Tapan Bharati