Author: Nirav Joshi

  • बर्गर सिंह ने मेहसाणा में नए वेयरहाउस के लॉन्च के साथ गुजरात में किया विस्तार

    बर्गर सिंह ने मेहसाणा में नए वेयरहाउस के लॉन्च के साथ गुजरात में किया विस्तार

    नीरव जोशी, हिम्मतनगर (M-7838880134)

    बर्गर सिंह ने मेहसाणा में नए वेयरहाउस के लॉन्च के साथ गुजरात में किया विस्तार

    -यह वेयरहाउस गुजरात एवं मध्य भारत में बर्गर सिंह के मौजूदा 7 एवं भावी 48 आउटलेट्स को अपनी सेवाएं प्रदान करेगा

    भारत की सबसे बड़ी घरेलू बर्गर चेन एवं देश की तीसरी सबसे बड़ी बर्गर चेन- बर्गर सिंह ने आज मेहसाणा, गुजरात में नया वेयरहाउस स्थापित करने की योजनाओं की घोषणा की है। इस नई युनिट के माध्यम से बर्गर सिंह अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त एवं संचालन को लागत-प्रभावी बनाकर राज्य एवं आस-पास के क्षेत्रों के उपभोकताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेगा।

    बर्गर सिंह ने भारत के पश्चिमी क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं के तहत यह घोषणा की है, जिसके तहत अकेले गुजरात राज्य में 48 आउटलेट्स खोलने का लक्ष्य रखा गया है। यह क्यूएसआर चेन पहले से गुजरात में 7 ऑपरेशनल आउटलेट्स और 5 अन्य फिट-आउट स्थापित कर चुकी है।

    बर्गर सिंह सबसे बड़ी मेड-इन-इंडिया बर्गर चेन है और तेज़ी से अपना विस्तार जारी रखे हुए है। दिसम्बर 2021 में ब्राण्ड के 50 आउटलेट्स थे यह संख्या अब 54 शहरों में 100 के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसमें 83 ऑपरेशनल आउटलेट्स और 20 फिट-आउट शामिल हैं।

    अपने युनिट-लैवल मुनाफे एवं सिगनेचर भारतीय फ्लेवर्स के चलते इस क्विक रेस्टोरेन्ट चेन ने बेहद प्रतिस्पर्धी भारतीय बाज़ार में तेज़ी से विकास दर्ज किया। पहले स्तर के शहरों में बर्गर सिंह न सिर्फ वॉल्युम की दृष्टि से बल्कि आउटलेट्स की संख्या की दृष्टि से भी अन्तर्राष्ट्रीय दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है; दिल्ली, लखनऊ एवं चण्डीगढ़ इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ’’

    ‘ये वे शहर हैं जहां इंटरनेशनल ब्राण्ड नहीं जाएंगे, ऐसे में यह बर्गर सिंह के लिए यह उल्लेखनीय बाज़ार है।’ राहुल सेठ, सह-संस्थापक, बर्गर सिंह ने कहा। ‘‘हमें देश के दूसरे एवं तीसरे स्तर के शहरों में अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए हमारी टीम निरंतर ऐसे स्थानों पर काम कर रही है, जहां अपार संभावनाएं हों और इन क्षेत्रों के उद्यमियों के साथ जुड़ने का प्रयास करती है।’

    फ्रैंचाइज़ ओनर भामरा हरमंदरसिंह ने कहा, ‘‘बर्गर सिंह फ्रैंचाइज़ नेटवर्क के साथ जुड़ना हमारा अब तक का सर्वश्रेष्ठ फैसला है। अपने सिगनेचर भारतीय फ्लेवर्स, बेहतरीन मैन्यु के साथ हमारा लागत प्रभावी बिज़नेस मॉडल सफल साबित हुआ है। मेरी फ्रैंचाइज़ ने बहुत कम समय अवधि में अपार सफलता हासिल की है, मुझे गर्व है कि मैं इतने सफल ब्राण्ड के साथ जुड़ा हूं। मैं हर उस उद्यमी को बर्गर सिंह के साथ जुड़ने की सलाह देता हूं, जो भारत के क्यूएसआर सेगमेन्ट में प्रवेश करना चाहता है।’ भावनगर फ्रैंचाइज़ आउटलेट की शुरूआत 6 नवम्बर 2022 को हुई, जो पहले से 53 लाख का रेवेन्यू दर्ज कर चुका है। यह भारत के दूसरे एवं तीसरे स्तर के शहरों में कई सफल बर्गर सिंह फ्रैंचाइज़ में से एक है।’

  • सर्वपितृ अमावस्या (25 सितम्बर) के दिन श्राद्ध क्यों करना चाहिए और इससे क्या-क्या लाभ होंगे ?

    सर्वपितृ अमावस्या (25 सितम्बर) के दिन श्राद्ध क्यों करना चाहिए और इससे क्या-क्या लाभ होंगे ?

    निरहू जोशी , अहमदाबाद(M-7838880134)

    🛕 श्राद्ध विशेष ज्ञानामृत 🛕

    सर्वपितृ अमावस्या (25 सितम्बर) के दिन श्राद्ध क्यों करना चाहिए और इससे क्या-क्या लाभ होंगे ?जानिए….

    *हिन्दू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है एवं उनके अधूरे शुभ कार्यों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है। ‘श्राद्ध-विधि’ इसी भावना पर आधारित है। इस साल सर्वपितृ अमावस्या 25 सितंबर को है।*

    *पुराणों में आता है कि आश्विन (गुजरात-महाराष्ट्र के मुताबिक भाद्रपद) कृष्ण पक्ष की अमावस्या (पितृमोक्ष अमावस्या) के दिन सूर्य एवं चन्द्र की युति होती है। सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है। इस दिन हमारे पितर यमलोक से अपना निवास छोड़कर सूक्ष्म रूप से मृत्युलोक (पृथ्वीलोक) में अपने वंशजों के निवास स्थान में रहते हैं। अतः उस दिन उनके लिए विभिन्न श्राद्ध करने से वे तृप्त होते हैं।*

    *गरुड़ पुराण में लिखा है, “अमावस्या के दिन पितृगण वायुरूप में घर के दरवाजे पर उपस्थित रहते हैं और अपने स्वजनों से श्राद्ध की अभिलाषा करते हैं। जब तक सूर्यास्त नहीं हो जाता, तब तक वे भूख-प्यास से व्याकुल होकर वहीं खड़े रहते हैं। सूर्यास्त हो जाने के पश्चात वे निराश होकर दुःखित मन से अपने-अपने लोकों को चले जाते हैं। अतः अमावस्या के दिन प्रयत्नपूर्वक श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। यदि पितृजनों के पुत्र तथा बन्धु-बान्धव उनका श्राद्ध करते हैं और गया-तीर्थ में जाकर इस कार्य में प्रवृत्त होते हैं तो वे उन्हीं पितरों के साथ ब्रह्मलोक में निवास करने का अधिकार प्राप्त करते हैं। उन्हें भूख-प्यास कभी नहीं लगती। इसीलिए विद्वान को प्रयत्नपूर्वक यथाविधि शाकपात से भी अपने पितरों के लिए श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।*

    *राजा रोहिताश्व ने मार्कण्डेयजी से प्रार्थना की: ‘‘भगवन् ! मैं श्राद्धकल्प का यथार्थरूप से श्रवण करना चाहता हूँ।*

    *मार्कण्डेयजी ने कहा: ‘‘राजन् ! इसी विषय में आनर्त-नरेश ने भर्तृयज्ञ से पूछा था। तब भर्तृयज्ञ ने कहा था: ‘राजन्! विद्वान पुरुष को अमावस्या के दिन श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। क्षुधा से क्षीण हुए पितर श्राद्धान्न की आशा से अमावस्या तिथि आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। जो अमावस्या को जल या शाक से भी श्राद्ध करता है, उसके पितर तृप्त होते हैं और उसके समस्त पातकों का नाश हो जाता है।*

    *आनर्त-नरेश बोले: ‘ब्रह्मन्! मरे हुए जीव तो अपने कर्मानुसार शुभाशुभ गति को प्राप्त होते हैं, फिर श्राद्धकाल में वे अपने पुत्र के घर कैसे पहुँच पाते हैं?*

    *भर्तृयज्ञ: ‘राजन् ! जो लोग यहाँ मरते हैं उनमें से कितने ही इस लोक में जन्म लेते हैं, कितने ही पुण्यात्मा स्वर्गलोक में स्थित होते हैं और कितने ही पापात्मा जीव यमलोक के निवासी हो जाते हैं। कुछ जीव भोगानुकूल शरीर धारण करके अपने किये हुए शुभ या अशुभ कर्म का उपभोग करते हैं।*

    *राजन् ! यमलोक या स्वर्गलोक में रहनेवाले पितरों को भी तब तक भूख-प्यास अधिक होती है, जब तक कि वे माता या पिता से तीन पीढ़ी के अंतर्गत रहते हैं। जब तक वे मातामह, प्रमातामह या वृद्धप्रमातामह और पिता, पितामह या प्रपितामह पद पर रहते हैं, तब तक श्राद्धभाग लेने के लिए उनमें भूख-प्यास की अधिकता होती है।*

    *पितृलोक या देवलोक के पितर श्राद्धकाल में सूक्ष्म शरीर से श्राद्धीय ब्राह्मणों के शरीर में स्थित होकर श्राद्धभाग से तृप्त होते हैं, परंतु जो पितर कहीं शुभाशुभ भोग हेतु स्थित हैं या जन्म ले चुके हैं, उनका भाग दिव्य पितर लेते हैं और जीव जहाँ जिस शरीर में होता है, वहाँ तदनुकूल भोगों की प्राप्ति कराकर उसे तृप्ति पहुँचाते हैं।*

    *ये दिव्य पितर नित्य और सर्वज्ञ होते हैं। पितरों के उद्देश्य से शक्ति के अनुसार सदा ही अन्न और जल का दान करते रहना चाहिए। जो नीच मानव पितरों के लिए अन्न और जल न देकर आप ही भोजन करता है या जल पीता है, वह पितरों का द्रोही है। उसके पितर स्वर्ग में अन्न और जल नहीं पाते हैं। श्राद्ध द्वारा तृप्त किये हुए पितर मनुष्य को मनोवांछित भोग प्रदान करते हैं।*

    *आनर्त-नरेश : ‘ब्रह्मन्! श्राद्ध के लिए और भी तो नाना प्रकार के पवित्रतम काल हैं, फिर अमावस्या को ही विशेषरूप से श्राद्ध करने की बात क्यों कही गयी है ?*

    *भर्तृयज्ञ : ‘राजन् ! यह सत्य है कि श्राद्ध के योग्य और भी बहुत-से समय हैं। मन्वादि तिथि, युगादि तिथि, संक्रांतिकाल, व्यतीपात, चंद्रग्रहण तथा सूर्यग्रहण- इन सभी समयों में पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध करना चाहिए। पुण्य-तीर्थ, पुण्य-मंदिर, श्राद्धयोग्य ब्राह्मण तथा श्राद्धयोग्य उत्तम पदार्थ प्राप्त होने पर बुद्धिमान पुरुषों को बिना पर्व के भी श्राद्ध करना चाहिए। अमावस्या को विशेषरूप से श्राद्ध करने का आदेश दिया गया है, इसका कारण है कि सूर्य की सहस्रों किरणों में जो सबसे प्रमुख है उसका नाम ”अमा” है। उस “अमा” नामक प्रधान किरण के तेज से ही सूर्यदेव तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं। उसी “अमा” में तिथि विशेष को चंद्रदेव निवास करते हैं, इसलिए उसका नाम अमावस्या है। यही कारण है कि अमावस्या प्रत्येक धर्मकार्य के लिए अक्षय फल देनेवाली बतायी गयी है। श्राद्धकर्म में तो इसका विशेष महत्त्व है ही।*

    *श्राद्ध की महिमा बताते हुए ब्रह्माजी ने कहा है: ‘यदि मनुष्य पिता, पितामह और प्रपितामह के उद्देश्य से तथा मातामह, प्रमातामह और वृद्धप्रमातामह के उद्देश्य से श्राद्ध-तर्पण करेंगे तो उतने से ही उनके पिता और माता से लेकर मुझ तक सभी पितर तृप्त हो जायेंगे।*

    *जिस अन्न से मनुष्य अपने पितरों की तुष्टि के लिए श्रेष्ठ ब्राह्मणों को तृप्त करेगा और उसीसे भक्तिपूर्वक पितरों के निमित्त पिंडदान भी देगा, उससे पितरों को सनातन तृप्ति प्राप्त होगी।*

    *पितृपक्ष में शाक के द्वारा भी जो पितरों का श्राद्ध नहीं करेगा, वह धनहीन चाण्डाल होगा। ऐसे व्यक्ति से जो बैठना, सोना, खाना, पीना, छूना-छुआना अथवा वार्तालाप आदि व्यवहार करेंगे, वे भी महापापी माने जाएंगे। उनके यहाँ संतान की वृद्धि नहीं होगी। किसी प्रकार भी उन्हें सुख और धन-धान्य की प्राप्ति नहीं होगी।*

    *यदि श्राद्ध करने की क्षमता, शक्ति, रुपया-पैसा नहीं है, तो श्राद्ध के दिन 1 पानी का लोटा भरकर रखें फिर भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें और 1 माला द्वादश मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” तथा एक माला “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा” की करें और लोटे में भरे हुए पानी से सूर्य भगवान को अर्घ्य दें, फिर 11.36 से 12.24 के बीच के समय (कुतप वेला) में गाय को चारा खिला दें। चारा खरीदने का भी पैसा नहीं है, ऐसी कोई समस्या है तो उस समय दोनों भुजाएँ ऊँची कर लें, आँखें बंद करके सूर्यनारायण का ध्यान करें: ‘हमारे पिता को, दादा को, फलाने को आप तृप्त करें, उन्हें आप सुख दें, आप समर्थ हैं। मेरे पास धन नहीं है, सामग्री नहीं है, विधि का ज्ञान नहीं है, घर में कोई करने-करानेवाला नहीं है, मैं असमर्थ हूँ,लेकिन आपके लिए मेरा सद्भाव है, श्रद्धा है। इससे भी आप तृप्त हो सकते हैं। इससे आपको मंगलमय लाभ होगा।*

  • जानिए, अहमदाबाद का बिश्नोई समाज पीएम मोदी से नाराज क्यों हैं?

    जानिए, अहमदाबाद का बिश्नोई समाज पीएम मोदी से नाराज क्यों हैं?

    नीरव जोशी ,अहमदाबाद (M-783888034)

    अहमदाबाद जिला कलेक्टर को बिश्नोई समाज के लोगों ने सौंपा ज्ञापन

    मोदी जी के जन्मदिवस पर नामीबिया से 8 सीते भारत लाकर मध्य प्रदेश के गुना अभ्यारण मैं छोड़ने के पश्चात उनके भोजन हेतु करीब 180 हीरन लाकर उनके भोजन के लिए छोड़े जा रहे हैं जो निंदनीय हैं इसी संदर्भ में बिश्नोई समाज के लोगों ने आज जिला कलेक्टर अहमदाबाद मैं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन शॉप कर हिरण प्राणियों को जीवन दान देने की गुहार लगाई बिश्नोई समाज में हिरणों को बच्चों का दर्जा है हम समाज के बच्चों को इस तरह मरते नहीं देख सकते इस जीव हत्या के विरोध में बिश्नोई समाज और पूरे सतीश को में भारी रोष है समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो पूरे भारतवर्ष में आंदोलन होगा ।बिश्नोई समाज प्रकृति प्रेमी है आज के ही दिन 21 सतेंबर 1730 को खेजडली गांव के खेजड़ी के पेड़ के लिए 363 नर नारी शहीद हुवे थे वो विश्व में एक मात्र उदाहरण है बिश्नोई समाज पेड़ ,जीव जंतु ,से अद्भुत प्रेम करते है। इस चिता प्रोजेक्ट का हिरण हत्या के कारण घोर विरुद्ध करते है इस विरुद्ध में आज श्री बिश्नोई समाज ट्रस्ट अहमदाबाद व अखिल भारतीय बिश्नोई जीव रक्षा सभा के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया ।

     

     

    इस मौके पर भेराराम गोदारा अध्यक्ष बिश्नोई सेवा ट्रस्ट अहमदाबाद जय किशन गोदारा अध्यक्ष जीव रक्षा गुजरात मांगीलाल खिलेरी जिला परिषद सदस्य देवेंद्र लोमरोड बाबूलाल खिलेरी गोपीलाल खिलेरी मनोहर गोदारा सेवाड़ा भगवाना राम कुराडा अरनाय,ओमप्रकाश साऊ रनोदर भैराराम गिला जगदीश साहू भेराराम कावा बंसीलाल लोमरोड ,विजय राज सारण भागीरथ सारण बीरबल मांजू मांगीलाल एचरा भागीरथ सेवर सरवण पुरोहित रमेश साहू लादूराम विडारा भागीरथ सारण हरीश गोदारा मानाराम जानी मांगीलाल बांगरवा नरेश खिलेरी कैलाश भादू भागीरथ गोदारा ,सरवन बेनीवाल , गोपाल गोदारा राजू गोदारा प्रकाश बांगडवा पूनमाराम गोदारा समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे

  • सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल

    सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल

    लेखक : बालकृष्ण उपाध्याय

    सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश में विदेशी दखल
    आज के समय में प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तुलना में भारत में सोशल मीडिया का प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है। आज छोटी-छोटी खबरों को बड़े रूप में और बड़ी खबरों को छोटे रूप में दिखाने का काम सोशल मीडिया के जरिए ही किया जा रहा है। अगर हम किसी सोशल ऐप का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसकी गोपनीय शर्तों (जैसे कैमरा, लोकेशन, फोटो गैलरी आदि) पर हमसे पूर्व-सहमति लेता है, तभी हम उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आपने देखा होगा कि एक बार जब आप किसी टॉपिक को सर्च कर लेते हैं तो उससे जुड़ी अन्य जानकारियां आपको अपने आप मिलने लगती हैं, यानी यह आपकी रुचियों, पसंद-नापसंद को अच्छी तरह जानती है। उसने आपकी सारी जानकारी पहले ही एकत्र कर ली है और आपकी रुचि के अनुसार उसे आपके लिए उपलब्ध रखता है। इसी तरह यदि हम राजनीति को देखें कि किस व्यक्ति का रुझान किस पार्टी की ओर जा रहा है, तो इसका अंदाजा लोगों की रुचि, पसंद से लगाया जा सकता है, नापसंद देखकर सोशल मीडिया पहले से ही लग जाता है और एक ही पार्टी के पक्ष में बार-बार पोस्ट दिखाकर देश की राजनीति में भी दखल दे रहा है. देश में किसकी सरकार बनी, विदेश में बैठे लोग सोशल मीडिया के जरिए तय कर रहे हैं कि किस नेता को उठाना है और कब छोड़ना है. विकसित और विकासशील देश कैसे कमजोर देशों पर अपना प्रभाव डालते हैं, यह श्रीलंका और पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखकर देखा जा सकता है।

    आज हमारा देश ब्रिटिश गुलामी से मुक्त हो गया है लेकिन हम सभी सोशल मीडिया की गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया के बिना हम 1 दिन भी नहीं जी सकते। हम एक-दूसरे से व्यक्तिगत रूप से मिलते थे। शोक की घड़ी में मांगलिक सीधे कर्मों की बधाई देने और शोक व्यक्त करने के लिए जाते थे। आज के समय में बधाई हो या शोक, बधाई और संवेदना दोनों ही सोशल मीडिया पर व्यक्त की जाती हैं। पूर्व में किसी को विरोध करना पड़ता था तो वह घर से बाहर जाकर विरोध करता था। ज्ञापन आदि दिए गए लेकिन आज विरोध के नाम पर वे केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विरोध प्रदर्शन करते हैं।विरोध पोस्ट सोशल मीडिया पर हैं लेकिन इसे कितना प्रसारित किया जाएगा इसका नियंत्रण दुरार के हाथ में है। आज हम सोशल मीडिया के इतने गुलाम हो गए हैं कि घर से निकलने लायक भी नहीं हैं। हमें विरोध करने या अपनी प्रशंसा व्यक्त करने की वास्तविक शक्ति सोशल मीडिया द्वारा बहुत कमजोर कर दी गई है। सोशल मीडिया हमें गुलामी की जंजीरों में बांध रहा है। आज भारत के अधिकांश लोगों के हाथ में सोशल मीडिया का कोई न कोई माध्यम है। सोशल मीडिया के जरिए जो दिखाया जा रहा है उसे पूरी तरह सच मानकर वे बिना सोचे-समझे उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं. किस रास्ते जाना है, क्या करना है, किसके साथ जाना है, यह सब विदेश में बैठे लोग तय कर रहे हैं। हमारे देश के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है? यह देखते हुए कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कितनी पोर्नोग्राफी फैल रही है और कंपनी उन अश्लील पोस्ट पर विज्ञापन चला रही है, हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में है। आप सभी इन घटनाओं से भली-भांति परिचित हैं। लेकिन न तो कंपनियां और न ही सरकार इसकी निगरानी कर रही है। इसके विपरीत अगर कोई सोशल मीडिया पर देश की सच्चाई, देश की भलाई के बारे में बोलने की कोशिश करता है, अगर यह उन कंपनियों और सरकार के हित के खिलाफ है तो ऐसे लोगों के खाते बिना कोई कारण बताए बंद कर दिए जाते हैं। जिसका जवाब कोई नहीं देता। सोशल मीडिया पर आज आप वही पोस्ट डाल सकते हैं जिसकी चाह विदेश में बैठे व्यक्ति को होती है। अगर आप किसी पोस्ट को डिलीट करने की कोशिश करते हैं तो आपका फेसबुक पेज डिलीट हो जाता है। जिसकी शिकायत करना कोई जवाब नहीं है। किसके फॉलोअर्स बढ़ने चाहिए, किसका फेसबुक अकाउंट बंद होना चाहिए, यह सारा काम विदेश में बैठा एक शख्स कर रहा है।

     

    आज सभी विकसित और विकासशील देशों के अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं, फिर हमारे देश में हमारे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्यों नहीं हैं? हम दूसरे देशों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्यों भरोसा करते हैं? इसलिए भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर आत्मनिर्भर होना होगा तभी हम अपने देश को आत्मनिर्भर बना पाएंगे। हमें इस सोशल मीडिया की गुलामी से मुक्त होना है। क्या हम अपने देश के सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकते, क्या सरकार को हमारे देश का अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कदम नहीं उठाने चाहिए? आज हमारे देश के पैसे से विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चल रहे हैं और हमारे अपने देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल रहे हैं। अपने देश का पैसा, अपने देश की आर्थिकी, सोशल मीडिया के जरिए विदेशी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में दखल दे रहे हैं। इसलिए सतर्क रहने और इन पर नजर रखने की जरूरत है।